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Sanatan Hindu Dharma ke Mool Tatva (PB)

Sanatan Hindu Dharma ke Mool Tatva (PB)
सनातन हिंदू धर्म के मूल तत्व (1916 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज, काशी द्वारा आखिरी बार प्रकाशित और अब लुप्त हो चुके दुर्लभ ग्रंथ SANATANA DHARMA: AN ELEMENTARY TEXT- BOOK of Hindu Religion and Ethics का हिंदी अनुवाद)
बनारस के सेन्ट्रल हिन्दू कॉलेज द्वारा सनातन धर्म पर तीन पुस्तकों की श्रृंखला प्रकाशित की गई थी। इनमें ‘एन एलिमेंटरी टैक्स्ट बुक ऑफ सनातन धर्म’ का प्रथम प्रकाशन सन् 1902 में तथा कॉलेज द्वारा अंतिम प्रकाशन 1916 में हुआ था। इंटरनेट पर यह पुस्तक अंग्रेजी में मिल जाती है किन्तु हिन्दी का विशाल पाठक-वर्ग आज तक इस महत्वपूर्ण पुस्तक से वंचित था और इसके हिन्दी अनुवाद की मांग कर रहा था। इस मांग को पूरा किया हिन्दी के चर्चित पत्रकार, चिंतक और सुप्रसिद्ध लेखक संदीप देव की कंपनी Kapot Media Network ने। कपोत ने इस पुस्तक का सरल-सुबोध हिन्दी अनुवाद प्रकाशित कर बेहद सराहनीय कार्य किया है। इस तरह से एक सदी से भी अधिक समय बाद इस पुस्तक का हिन्दी संस्करण प्रकाशित हो रहा है।
Makhana (Phool Makhana) Hand Picked Foxnuts (100 gm)
Lal Mirch ka Bharua Achar : Red Chilli Pickle (250g)
Indulge in the rich, tangy taste of our homemade authentic mango pickle, crafted with handpicked, ripe mangoes and a blend of traditional spices. Each jar is a labor of love, ensuring that you experience the vibrant flavors of Indian cuisine right at your table. Perfect as a side dish or a flavorful accompaniment to any meal, our mango pickle captures the essence of summer all year round. Enjoy it with rice, parathas, or even as a zesty topping on your favorite snacks! Delight your taste buds with our Authentic Homemade Mango Pickle, crafted from the finest, handpicked mangoes and traditional spices.…
Haridarshan Chanda Tika
Narendra Modi ka Dhokha aur Sach – Bachpan se Rajnitik Jeevan ka Safar (PB)

Narendra Modi ka Dhokha aur Sach – Bachpan se Rajnitik Jeevan ka Safar (PB)
The veracity of the claims related to Narendra Modi’s life and the way his name came out as anti-Muslim after the Godhra riots made him known as the Hindu Hriday Samrat. After becoming the Prime Minister, has he become secular or is he secretly carrying forward the agenda of Hindutva by taking Muslims into confidence? After becoming the PM,what changes did he make in the appeasement politics that was already going on? To what extent could he wash away the stain of Godhra riots that was on his forehead? Is winning the trust of the Muslim community just a show off or has anything been done for it? Could it bring any change for Hindus or are Hindus still politically neglected like before? Is Sanatan culture being revived under Modi government? What is the situation of anti-Modi and development of the country?
Kamsutram (HB) : कामसूत्रम्

Kamsutram (HB) : कामसूत्रम्
कामसूत्र का संछिप्त विवरण : वात्सायन के कामसूत्र में कुल सात भाग हैं | प्रत्येक भाग कई अध्यायों में बंटे हैं| प्रत्येक अध्याय में कई श्लोक हैं | साहित्य प्रेमियों की सुविधा के लिए पहले संस्कृत और उसके नीचे उसका हिंदी अनुवाद दिया गया | महर्षि वात्सायन का जन्म बिहार राज्य में हुआ था और प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण साहित्यकारों में से एक हैं | महर्षि वात्सायन ने कामसूत्र में न केवल दांपत्य जीवन का श्रंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी सम्पादित किया है………
Bhaarateey Chintan Me Karm Evan Punarjanm

Bhaarateey Chintan Me Karm Evan Punarjanm
यह पुस्तक भारतीय चिन्तनधारा का प्रायः सर्वसम्मत सिद्धान्त है। कर्म और पुनर्जन्म भारतीय दर्शन-परम्परा में वस्तुतः परस्पराश्रित माने गये हैं। कर्म नहीं तो पुनर्जन्म नहीं, पुनर्जन्म नहीं तो दृश्य कर्म नहीं। कारण-कार्य सिद्धान्त सृष्टि का सार्वभौम सिद्धान्त है तथा कर्म एवं पुनर्जन्म का सिद्धान्त इस कारणता नियम पर ही आधृत होने से सर्वथा तर्कसङ्ग एवं समीचीन है। प्रस्तुत ग्रन्थ इस सर्वमान्य एवं रहस्यात्मक ‘कर्म और पुनर्जन्म सिद्धान्त’ के विविध आयामों पर आधारित विद्वतापूर्ण 46 शोधपत्रों का सङ्कलन है। यह ग्रन्थ संस्कृत एवं भारतीय विद्या के मूर्धन्य विचारकों ने विविध दृष्टिकोणें से कर्म एवं पुनर्जन्म के सिद्धान्त पर विपुल विचार-सामग्री प्रस्तुत की है, जो जिज्ञासू अध्येताओं के लिए अवश्य ही लाभप्रद होगी।
Hindus in Hindu Rashtra (Eighth-Class Citizens and Victims of State-Sanctioned Apartheid)

Hindus in Hindu Rashtra (Eighth-Class Citizens and Victims of State-Sanctioned Apartheid)
To those who claim we are now living in a totalitarian, fascist, Hindu Rashtra, one
must ask: What kind of a Hindu Rashtra is this where a billion-strong Hindus have
been, through our parliament, through our courts, our education system, and our
constitution, reduced to not just second-class but, rather, eighth-class citizens?
What kind of Hindu Rashtra is this where Ram Navami, Hanuman Jayanti, Durga
pooja processions, and even Garba celebrations, are attacked and stoned with
impunity? What kind of Hindu Rashtra is this where a sitting Prime minister says
minorities have the first right to resources? What kind of Hindu Rashtra is this
where Hindus are forced to be refugees in their own land, where one can settle
40,000 Rohingya Muslims but not 700,000 Kashmiri Hindus, the land’s original
inhabitants; where the judiciary says it is too late to prosecute those who raped,
murdered, and ethnically cleansed lacs of Hindus? What kind of Hindu Rashtra is
this where Hindu temples are exclusively controlled by the State, where Hindus
must beg for Waqf land to celebrate their festival while the government usurps
hundreds of thousands of acres of temple land and is responsible for more than
100,000 temples losing lacs of crores in rental income? What kind of Hindu Rashtra
is this where Right to Education Act discriminates only against Hindus and their
schools, forcing tens of thousands of them to shut down? What kind of Hindu
Rashtra is this where monsters like Aurangzeb and Tipu who perpetrated large-scale
Hindu genocides are eulogised through State sponsored publications, naming of
roads and cities, and organising of festivals? What kind of Hindu Rashtra is this
where a law was about to be enacted through with only the Hindus would have been
held guilty in a communal riot even if they were in a minority for example in
Kashmir? What kind of Hindu Rashtra is this where court judgments like the
Sabarimala and legislative enactments like the Hindu Code Bill purport to reform
only Hindu religious practices but dare not touch practices of other religions, and if
they do, the decisions are promptly reversed like in the Shah Bano case? What kind
of Hindu Rashtra is this where The Places of Worship Act continues to deny the
Hindus their legitimate right to correct historical injustices and reclaim thousands
of demolished temples? What kind of Hindu Rashtra is this where the Waqf Act
gives overarching powers to Muslims to declare a 1500-year-old Hindu temple to be
on Islamic land when Islam is only 1300 years old? If this is how a Hindu is rewarded
in a Hindu Rashtra, he’d much rather be in a Muslim Rashtra because then at least
there’d be no pretence of equality – a Kafir will get what he deserves. In this searing
commentary penned with clinical precision, the author shreds to smithereens once
and for all the guilt-tripping, self-loathing fake narrative that Hindus have been
duped with since Independence. There is no pretence, no political correctness, only
unvarnished truth – that the Hindus are living under State-sanctioned Apartheid.
Hindu Rashtr Kya? kyon ? kaise ?

Hindu Rashtr Kya? kyon ? kaise ?
ऋषितुल्य श्रद्धेय Rameshwar Mishra Pankaj जी, महान विदुषी Kusumlata Kedia जी और स्वामी निगमानंद जी द्वारा लिखित इस पुस्तक की बहुत दिनों से प्रतीक्षा थी. पुस्तक प्रकाशित हो गयी है, ये एक अद्भुत रचना है. पढ़िये और जानिये हिन्दू राष्ट्र क्या? क्यों? कैसे?
Do Seengon Wala Rishi
“क्या आपने उस राजा के बारे में सुना है, जिसने कबूतर की रक्षा के लिए अपना मांस बलिदान कर दिया था?या उस सिंहासन के बारे में, जो जिस किसी को भी दिया जाता है, उसमें न्याय प्रदान करने की अद्वितीय क्षमता आ जाती है?और उस मूर्तिकार के बारे में क्या खयाल है, जो बिना हाथों के भी शानदार मूर्तियाँ बनाने में कामयाब रहा?देवताओं के बीच झगड़ों और विवादों से राजाओं की भलाई के लिए महान् ऋषियों और सामान्य मनुष्यों के गुण।सुप्रसिद्ध लेखिका सुधा मूर्ति ने भारतीय पौराणिक कथाओं की अल्पज्ञात-ज्ञात कहानियों को नई भावभूमि के साथ प्रस्तुत किया है। मनभावन चित्रों के साथ और सादगी भरे अंदाज में सुनाई गई, ‘दो सींगों वाला साधु’ निश्चित रूप से प्रिय कहानीकार के प्रशंसकों को प्रसन्न करेगा।”
NETAJI GUMNAMI BABA AUR SARKARI JHOOTH

NETAJI GUMNAMI BABA AUR SARKARI JHOOTH
क्या उत्तर प्रदेश में दशकों तक अज्ञातवास करने वाले गुमनामी बाबा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस थे? गहन शोध के पश्चात्, चन्द्रचूड़ घोष और अनुज धर इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि सत्य हमारी कल्पनाओं से कहीं अधिक विचित्र है। वे नेताजी ही थे। और यदि यह सत्य है, तो क्यों सरकार के आधिकारिक कथनों एवं जस्टिस विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट का निष्कर्ष इससे भिन्न हैं? नेताजी कब और कैसे भारत लौटे? क्यों इतने वर्षों तक वे अपने ही देश में छिपकर रहे? क्यों सरकार इस सत्य को हम देशवासियों से छिपा रही है?—इन सभी प्रश्नों के समाधान आपको विचलित कर देंगे। जानिए: कैसे कई दशकों से इस देश की जनता की आँखों में धूल झोंकी जा रही है। कैसे फ़ॉरेन्सिक विज्ञान ने नाम पर बनाईं गईं DNA एवं हस्तलेख की झूठी रिपोर्टें और संसद में दिए गए झूठे वक्तव्य। …सरकार नहीं चाहती कि आप ये सब कुछ जानें।
Indra Vijay

Indra Vijay
An Old and Rare Book
पण्डित मधुसूदन ओझा ग्रन्थमाला 6 – इन्द्रविजयः – पण्डित मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ | Pandit Madhusudan Ojha Granthamala 6 – Indravijay – Pt. Madhusudan Ojha Research Cell
Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)

Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
THE AUTHOR
संदीप देव
संदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
Mahatma Gandhi Aur Unki Mahila Mitr | महात्मा गांधी और उनकी महिला मित्र

Mahatma Gandhi Aur Unki Mahila Mitr | महात्मा गांधी और उनकी महिला मित्र
एल्यानोर मॉर्टोन ने सन् 1954 में एक पुस्तक लिखी थी वीमेन बिहाइंड महात्मा गाधी और उसके बाद से इस विषय में कोई पुस्तक नहीं लिखी गयी । तमाम महिलाओं की निकटता गांधीजी के जीवन में एक आकर्षक अध्याय की तरह है खासकर तब जब हम उनके जीवन का अध्ययन ब्रह्मचर्य के दर्शन के साथ करते हैं । यह कृति एक व्यक्ति के पीछे के व्यक्ति और आत्मकथा के भीतर की आत्मकथा की तरह है ।
एक दर्जन से अधिक महिलाए ऐसी थीं, जो एक या अलगअलग समय मे महात्मा गाधी से निकटता के साथ जुडी हुई थीं । कस्तुरबा से संबंधित आख्यान गांधीजी के जीवन के एक अलग अध्याय की तरह है । लेकिन इन महिलाओं मे गांधीजी ने अपनी माता पुतलीबाई और सर्वज्ञ अर्द्धांगिनी कस्तूरबा का प्रतिरूप देखा । उनमें से छह महिलाएं विदेशी मूल की थीं और एक्? अनिवासी भारतीय । मिली ग्राहम पोलक, निला क्रैम कूक और मीरा बहन जैसी कुछ महिलाएँ उस समय की महिलाओं में बुद्धिजीवी कही जा सकती थीं । वे महिलाए महात्मा गाधी के लिए बेटी बहनें और माताएं थीं । हालाकि सरलादेवी चौधरानी अपवाद की तरह थी । गांधीजी उन्हें अपनी आध्यात्मिक पत्नी कहा करते थे ।
ब्रह्मचर्य, गांधी और उनकी सहयोगी महिलाएं बहुत ही आकर्षक विषय है । लेखक ने इस विषय पर आठ वर्ष रवे अधिक तक शोध किया है और उसके बाद इसे पुस्तक के रूप मे कलमबद्ध किया है । नवजीवन ट्रस्ट के सहयोग एरे भारत सरकार के सूचना एव प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक कॉलेक्टेड वर्क्स इस सम्पूर्ण काल के लिए उनकी बाइबिल की तरह है, जिसे व्यापक तौर पर इसमें उद्धृत किया गया है ।
गांधीजी के बारे में पढना कभी भी उबाऊ नहीं रहा । वह हमेशा से ही अपूर्वानुमेय अपरम्परागत नवप्रवर्तनशील, दयालु और निष्कपट रहे । चेहरे पर भ्रान्तिकारी मुस्कान मौजूद होने के बावजूद वह शरारती थे । अपने सम्पूर्ण जीवन काल मे उन्हे अपने विचारों का कडू। प्रतिरोध सहना पड़ा था । उनका प्रतिरोध करने वालो मे से ज्यादा उनके करीबी दरबारी ही थे । गांधीजी ने एक्? बार श्रीमती पोलक को कहा था कि उनका (श्रीमती पोलक का) जन्म उनके एवं उनरने जुडी महिला सहयोगिनो के अनुप्रयोग के लिए ही हुआ है । गांधीजी अपनी ही पीड़ा से आंतरिक शांति हासिल करते रहे थे ।
रोमा रौलां ने उन्हें दूसरे ईसा मसीह की संज्ञा दी थी । ठीक ईसा मसीह की तरह ही गाँधीजी की सहनशीलता भी पीडा. मौत और मृतोत्थान का प्रतीक बन गयी । यह पुस्तक गाँधीजी के नजरिये से स्त्रीत्व के तमाम पहलुओ को प्रदर्शित करती है । गांधीजी वैसे इक्कादुक्का लोगों में शुमार है, जिन्होंने खुद को स्वनिर्मित हिजड़ा कहकर सेक्स की विभाजन रेखा समाप्त करने का दुस्साहस किया था ।
गाँधीजी महिलाओं की संगत में हमेशा राहत महसूस करते थे । सभी महिला सहयोगिनी ने उन्हें समान महत्त्व दिया । ब्रह्मचर्य महात्मा गाँधीजी और उनकी महिला मित्र पांच दशक तक गांधीजी और उन महिलाओं के बीच संवाद का विश्वसनीय दस्तावेज है, जो भारतीय सौंदर्य परम्परा में वर्णित सम्पूर्ण रसों से सराबोर थीं ।
बाल्मीकि रामायण- Valmiki Ramayana
स्वामी जगदीष्वरानन्द सरस्वती आर्य जगत् के सुप्रसिद्ध विद्वान्, निरन्तर साहित्य साधना में संलग्न, रामायण के समालोचक एवं मर्मज्ञ लेखक थे।
इस पुस्तक द्वारा आप अपने प्राचीन गौरवमय इतिहास की झांकी, मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन का अध्ययन, प्राचीन राज्यव्यवस्था का स्वरुप देख सकते हैं।
यदि आप भ्रातृ-प्रेम नारी-गौरव आदर्ष सेवक, आदर्ष मित्र, आदर्ष राज्य, आदर्ष पुत्र के स्वरुपों का अवलोकन या आप रामायण का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहते हैं तो यह रामायण अवष्य पढ़ें।
यह ग्रन्थ सैकड़ों टिप्पणियों से समलंकृत सम्पूर्ण रामायण 7000 श्लोकों में पूर्ण हुआ है।
Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)

Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)
THE AUTHOR
संदीप देव
संदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
Hindutva (PB)
‘हिंदुत्व’ एक ऐसा शब्द है, जो संपूर्ण मानवजाति के लिए आज भी अपूर्व स्फूर्ति तथा चैतन्य का स्रोत बना हुआ है। इस शब्द से संबद्ध विचार, महान् ध्येय, रीति-रिवाज तथा भावनाएँ कितनी विविध तथा श्रेष्ठ हैं। ‘हिंदुत्व’ कोई सामान्य शब्द नहीं है। यह एक परंपरा है। एक इतिहास है। यह इतिहास केवल धार्मिक अथवा आध्यात्मिक इतिहास नहीं है। अनेक बार ‘हिंदुत्व’ शब्द को उसी के समान किसी अन्य शब्द के समतुल्य मानकर बड़ी भूल की जाती है। वैसे यह इतिहास मात्र नहीं है, वरन् एक सर्वसंग्रही इतिहास है। ‘हिंदू धर्म’, यह शब्द ‘हिंदुत्व’ से ही उपजा उसी का एक रूप है, उसी का एक अंश है।
‘हिंदुत्व’ शब्द में एक राष्ट्र, हिंदूजाति के अस्तित्व तथा पराक्रम के सम्मिलित होने का बोध होता है। इसीलिए ‘हिंदुत्व’ शब्द का निश्चित आशय ज्ञात करने के लिए पहले हम लोगों को यह समझना आवश्यक है कि ‘हिंदू’ किसे कहते हैं। इस शब्द ने लाखों लोगों के मानस को किस प्रकार प्रभावित किया है तथा समाज के उत्तमोत्तम पुरुषों ने, शूर तथा साहसी वीरों ने इसी नाम के लिए अपनी भक्तिपूर्ण निष्ठा क्यों अर्पित की, इसका रहस्य ज्ञात करना भी आवश्यक है।
प्रखर राष्ट्रचिंतक एवं ध्येयनिष्ठ क्रांतिधर्मा वीर सावरकर की लेखनी से निःसृत ‘हिंदुत्व’ को संपूर्णता में परिभाषित करती अत्यंत चिंतनपरक एवं पठनीय पुस्तक।
Kala Pani (PB)
काला पानी की भयंकरता का अनुमान इसी एक बात से लगाया जा सकता है कि इसका नाम सुनते ही आदमी सिहर उठता है। काला पानी की विभीषिका, यातना एवं त्रासदी किसी नरक से कम नहीं थी। विनायक दामोदर सावरकर चूँकि वहाँ आजीवन कारावास भोग रहे थे, अत: उनके द्वारा लिखित यह उपन्यास आँखों-देखे वर्णन का-सा पठन-सुख देता है। इस उपन्यास में मुख्य रूप से उन राजबंदियों के जीवन का वर्णन है, जो ब्रिटिश राज में अंडमान अथवा ‘काला पानी’ में सश्रम कारावास का भयानक दंड भुगत रहे थे। काला पानी के कैदियों पर कैसे-कैसे नृशंस अत्याचार एवं क्रूरतापूर्ण व्यवहार किए जाते थे, उनका तथ वहाँ की नारकीय स्थितियों का इसमें त्रासद वर्णन है। इसमें हत्यारों, लुटेरों, डाकुओं तथा क्रूर, स्वार्थी, व्यसनाधीन अपराधियों का जीवन-चित्र भी उकेरा गया है। उपन्यास में काला पानी के ऐसे-ऐसे सत्यों एवं तथ्यों का उद्घाटन हुआ है, जिन्हें पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
Mopla (Hindi) – Veer Savarkar
मोपला अर्थात मुझे इससे क्या यह पुस्तक केरल में हुए हिन्दू नरसंहार के ऊपर आधारित है एवं इस पुस्तक में हिंदुओं की कमज़ोरी पर ध्यान दिया गया है । हर हिन्दू को यह पुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए और वीर सावरकर ने हिंदुओ की जिस कमज़ोरी को इस पुस्तक में बताया है उस से छुटकारा पाना चाहिए । मालाबार का भीषण रक्त पात व हिंदू वीनाओं का मार्मिक उपन्यास आधुनिक युग के महान क्रांतिकारी Vinayak Damodar Savarkar की लेखनी से लिखा मुसलमानों की मनोवृति का यथार्थ जीवन चित्रण।
Main Aryaputra Hoon (PB)

Main Aryaputra Hoon (PB)
‘‘हे आर्य! कोई बाहरी आक्रमणकारी जब किसी अन्य देश में प्रवेश करता है तो बाहर से भीतर आता है या भीतर से बाहर जाता है?’’
‘‘यह कैसा प्रश्न हुआ, आर्या! स्वाभाविक रूप से बाहर से भीतर
आता है।’’
‘‘और इसी स्वाभाविक तर्क के आधार पर ही मैं भी एक प्रश्न पूछना चाहूँगी। अगर यह मान लिया जाए कि हम आर्य बाहर से आए थे तो पश्चिम दिशा से प्रवेश करने पर सर्वप्रथम सिंधु के तट पर बसना चाहिए था और फिर पूरब दिशा की ओर बढ़ना चाहिए था। लेकिन वेद और पुरातत्त्व के प्रमाण कहते हैं कि हम आर्य पहले सरस्वती के तट पर बसे थे, फिर सिंधु की ओर बढ़े। यही नहीं, सरस्वती काल से भी पहले हम आर्यों का इतिहास विश्व की प्राचीनतम नगरी शिव की काशी और मनु की अयोध्या से संबंधित रहा है। और ये दोनों नगर भारत भूखंड के भीतर सरस्वती नदी की पूरब दिशा में हैं अर्थात् हम आर्य पूरब से पश्चिम दिशा की ओर बढ़े थे।…तो फिर ये कैसे बाहरी (?) आर्य थे जो भीतर से बाहर (!!) की ओर बढ़े थे।…झूठ के पाँव नहीं होते हैं आर्य, ये झूठे इतिहासकार आपके प्रामाणिक प्रश्नों के उत्तर क्या ही देंगे, जब ये मेरे इस सरल तर्क और सामान्य तथ्य पर बात नहीं कर सकते।’’
‘‘असाधारण तर्क आर्या!’’
Main Aryaputra Hoon (HB)

Main Aryaputra Hoon (HB)
‘‘हे आर्य! कोई बाहरी आक्रमणकारी जब किसी अन्य देश में प्रवेश करता है तो बाहर से भीतर आता है या भीतर से बाहर जाता है?’’
‘‘यह कैसा प्रश्न हुआ, आर्या! स्वाभाविक रूप से बाहर से भीतर
आता है।’’
‘‘और इसी स्वाभाविक तर्क के आधार पर ही मैं भी एक प्रश्न पूछना चाहूँगी। अगर यह मान लिया जाए कि हम आर्य बाहर से आए थे तो पश्चिम दिशा से प्रवेश करने पर सर्वप्रथम सिंधु के तट पर बसना चाहिए था और फिर पूरब दिशा की ओर बढ़ना चाहिए था। लेकिन वेद और पुरातत्त्व के प्रमाण कहते हैं कि हम आर्य पहले सरस्वती के तट पर बसे थे, फिर सिंधु की ओर बढ़े। यही नहीं, सरस्वती काल से भी पहले हम आर्यों का इतिहास विश्व की प्राचीनतम नगरी शिव की काशी और मनु की अयोध्या से संबंधित रहा है। और ये दोनों नगर भारत भूखंड के भीतर सरस्वती नदी की पूरब दिशा में हैं अर्थात् हम आर्य पूरब से पश्चिम दिशा की ओर बढ़े थे।…तो फिर ये कैसे बाहरी (?) आर्य थे जो भीतर से बाहर (!!) की ओर बढ़े थे।…झूठ के पाँव नहीं होते हैं आर्य, ये झूठे इतिहासकार आपके प्रामाणिक प्रश्नों के उत्तर क्या ही देंगे, जब ये मेरे इस सरल तर्क और सामान्य तथ्य पर बात नहीं कर सकते।’’
‘‘असाधारण तर्क आर्या!’’
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Prabhat Prakashan, Suggested Books
Hamare Shri Guruji – Hindi (PB)
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मेरी पुस्तक ‘हमारे गुरुजी’ को ‘अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर पुरस्कार’ प्रदान किया गया है। इसके लिए साहित्य अकादमी और मध्यप्रदेश सरकार का हृदय से धन्यवाद।
धन्यवाद उन पाठकों और दर्शकों का भी जिनके स्नेह के कारण यह पुस्तक एक लंबी यात्रा तय कर सकी। मैं अपना यह पुरस्कार मेरे सभी सुधी पाठकों को समर्पित करता हूं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन् 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी, लेकिन इसे वैचारिक आधार द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’ ने प्रदान किया था।
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
THE AUTHOR
संदीप देवसंदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
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Prabhat Prakashan, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Shri Guruji : Prerak Vichar (Hindi)
विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्रीगुरुजी’ आध्यात्मिक विभूति थे। सन् 1940 से 1973 तक करीब 33 वर्ष संघ प्रमुख होने के नाते उन्होंने न केवल संघ को वैचारिक आधार प्रदान किया, उसके संविधान का निर्माण कराया, उसका देश भर में विस्तार किया, पूरे देश में संघ की शाखाओं को फैलाया।
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)
THE AUTHOR
संदीप देवसंदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
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Kejriwal Truth or Conspiracy eBook
1- अन्ना – अरविंद आंदोनलन के पीछे खड़ी थी ‘टीम सोनिया’!
2- अन्ना के गिरफ़्तारी से लेकर ‘आआपा’ (AAP) के निर्माण तक सब कुछ था फ़िक्स!
3- भारत में राजनैतिक अस्थिरता के लिए विदेशी फ़ंडिंग का खेलअभी डाउनलोड करें और जाने ऐसे और भे सनसनी ख़ुलासे इस ebook में।
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Prabhat Prakashan, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Kala Pani (PB)
काला पानी की भयंकरता का अनुमान इसी एक बात से लगाया जा सकता है कि इसका नाम सुनते ही आदमी सिहर उठता है। काला पानी की विभीषिका, यातना एवं त्रासदी किसी नरक से कम नहीं थी। विनायक दामोदर सावरकर चूँकि वहाँ आजीवन कारावास भोग रहे थे, अत: उनके द्वारा लिखित यह उपन्यास आँखों-देखे वर्णन का-सा पठन-सुख देता है। इस उपन्यास में मुख्य रूप से उन राजबंदियों के जीवन का वर्णन है, जो ब्रिटिश राज में अंडमान अथवा ‘काला पानी’ में सश्रम कारावास का भयानक दंड भुगत रहे थे। काला पानी के कैदियों पर कैसे-कैसे नृशंस अत्याचार एवं क्रूरतापूर्ण व्यवहार किए जाते थे, उनका तथ वहाँ की नारकीय स्थितियों का इसमें त्रासद वर्णन है। इसमें हत्यारों, लुटेरों, डाकुओं तथा क्रूर, स्वार्थी, व्यसनाधीन अपराधियों का जीवन-चित्र भी उकेरा गया है। उपन्यास में काला पानी के ऐसे-ऐसे सत्यों एवं तथ्यों का उद्घाटन हुआ है, जिन्हें पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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Fiction & Non-Fiction Books
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, रामायण/रामकथा
Ramayana Ki Kahaniyan- Harish Sharma
‘रामायण’ भारतीय पौराणिक ग्रंथों में सबसे पूज्य एवं जन-जन तक पहुँच रखनेवाला ग्रंथ है। रामकथा की पावन गंगा सदियों से हिंदू जन-मानस में प्रवाहित होती रही है। भारत ही नहीं, संसार भर में बसनेवाले हिंदू रामायण के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं।
रामकथा का प्रसार और प्रभाव इतना व्यापक है कि इससे संबंधित कथाओं-उपकथाओं की चर्चा बड़ी श्रद्धा के साथ की जाती है। रामकथा इतनी रसात्मक है कि बार-बार सुनने-जानने को मन सदैव उत्सुक रहता है।
विद्वान् लेखक ने पुस्तक को इस उद्देश्य के साथ लिखा है कि हमारी नई पीढ़ी भारतीय संस्कार, आदर्श एवं जीवन-मूल्यों को आत्मसात् कर सके। इन कहानियों में पर्वतों, नदियों, नगरों, योद्धाओं के पराक्रम, शस्त्रास्त्रों एवं दिव्यास्त्रों, मायावी युद्धों के साथ-साथ ऋषियों, महर्षियों एवं राजर्षियों के पावन चरित्रों का वर्णन अत्यंत सरल भाषा में किया गया है।
विश्वास है, प्रस्तुत पुस्तक को पढ़कर इसके आदर्शों, सदाचारों एवं सद्गुणों का अपने जीवन में अनुकरण-अनुसरण करेंगे।SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, Yoga and Pranayam
Sampoorna Sawasthya ke Liye Yoga
‘योग’ इस युग में सबसे अधिक प्रयोग में लाया जानेवाला शब्द बन गया है। बीते पच्चीस वर्षों में इसका उपयोग विभिन्न विचारों और अर्थों को व्यक्त करने के लिए किया गया। उनमें से इसका सबसे अधिक प्रयोग शारीरिक व्यायाम के लिए किया गया है।
यौगिक अभ्यासों पर फिलहाल जितनी भी पुस्तकें हैं, वे योग को महज धीमे जिमनास्टिक के रूप में प्रस्तुत करती हैं। योग पर कुछ और पुस्तकें भी हैं, जो इस विधा को पूरी तरह से हिंदू परंपरा में ढालती हैं, जिसे स्वीकार करना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। उन्हें एक ओर यौगिक मुद्राओं को करने में शारीरिक कठिनाई आती है तो दूसरी ओर वे योग के दार्शनिक पहलू को नहीं समझ पाते।
इस पुस्तक में दिए गए यौगिक अभ्यास का कोर्स पूरी तरह मौलिक है। यही नहीं, इसे अच्छा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य देने के मूल उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इस पुस्तक में, दैनिक जीवन के सभी पहलुओं, शरीर की दशाओं तथा हम सब के अस्तित्व से जुड़ी मानसिक स्थितियों का खयाल रखा गया है। यह पुस्तक किसी एक निश्चित आयु वर्ग को ध्यान में रखकर नहीं लिखी गई है, वरन् यह सबके लिए उपयोगी है।
स्वस्थ शरीर और मन के लिए योग का व्यावहारिक उपयोग बताती एक संपूर्ण पुस्तक।SKU: n/a
Popular Books
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Bloomsbury, Religious & Spiritual Literature, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Ashutosh Maharaj – Mahayogi Ka Maharahasya
Bloomsbury, Religious & Spiritual Literature, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरणAshutosh Maharaj – Mahayogi Ka Maharahasya
This book is about Shri Ashutosh Maharaj Ji, whose disciples have a firm conviction that he is established in the highest state of Samadhi but the medical world considers him to be clinically dead.
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Bloomsbury, English Books, Religious & Spiritual Literature, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Mahayogi Ashutosh Maharaj – The Master and the Mystic
Bloomsbury, English Books, Religious & Spiritual Literature, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरणMahayogi Ashutosh Maharaj – The Master and the Mystic
This book is about Shri Ashutosh Maharaj Ji, whose disciples have a firm conviction that he is established in the highest state of Samadhi since 28th January, 2014.
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Prabhat Prakashan, Suggested Books
Hamare Shri Guruji – Hindi (PB)
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मेरी पुस्तक ‘हमारे गुरुजी’ को ‘अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर पुरस्कार’ प्रदान किया गया है। इसके लिए साहित्य अकादमी और मध्यप्रदेश सरकार का हृदय से धन्यवाद।
धन्यवाद उन पाठकों और दर्शकों का भी जिनके स्नेह के कारण यह पुस्तक एक लंबी यात्रा तय कर सकी। मैं अपना यह पुरस्कार मेरे सभी सुधी पाठकों को समर्पित करता हूं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन् 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी, लेकिन इसे वैचारिक आधार द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’ ने प्रदान किया था।
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
-25%
Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
THE AUTHOR
संदीप देवसंदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Upanishadon Ki Kathayen (HB)
-10%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिUpanishadon Ki Kathayen (HB)
हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने शिष्यों को अपने समीप बैठाकर ज्ञान प्रदान किया, वही ज्ञान उपनिषद् बनकर प्रसिद्ध हुआ। उपनिषद् को वेदों का अंतिम भाग भी कहा जाता है—यानी वेदांत, अर्थात् ‘उपनिषद्’ वेदों में प्रतिपादित ज्ञान का सार है। उपनिषद् का सारा अनुसंधान इस प्रश्न में निहित है—‘वह कौन सी वस्तु है, जिसे जान लेने पर सबकुछ जान लिया जाता है?’ और विभिन्न उपनिषदों में इस प्रश्न का एक ही उत्तर दिया गया है और वह है ‘ब्रह्म’।
उपनिषद् ज्ञान का अजस्र स्रोत हैं। इनमें ज्ञान और कर्म का महत्त्व प्रतिपादित किया गया है। चरित्र-निर्माण की शिक्षा दी गई है। पितृ-महिमा, अतिथि-महिमा, आत्मा, प्राण, ब्रह्म, ईश्वर आदि का सूक्ष्म विश्लेषण है। मुगल-कुमार दाराशिकोह तो इनसे इतना प्रभावित हुआ कि कुछ उपनिषदों का उसने फारसी भाषा में अनुवाद कराया।
कहा जा सकता है कि उपनिषदों को समझे बिना भारतीय इतिहास और संस्कृति को नहीं समझा जा सकता। भारतीय संस्कृति में आदर प्राप्त सभी आदर्श उपनिषदों में देखे जा सकते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में इन्हीं उपनिषदों की शिक्षा को कथात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है, ताकि सामान्य पाठक भी इनका चिंतन-मनन कर ज्ञान अर्जित कर सकें।SKU: n/a -
Hindi Books, Luminous Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)
Bharatiya Kala : Lok Parampra evm Sangeet me Ganga ka Pravah
Hindi Books, Luminous Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)Bharatiya Kala : Lok Parampra evm Sangeet me Ganga ka Pravah
भारतीय जन मानस के लिए गंगा भारत की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता की प्रतीक है। अपने स्वरूप एवं प्रवाह में निरंतर बदलाव लाने पर भी अपने मूल रुप में तो वही गंगा ने युगों-युगों तक एक समूची सभ्यता को न केवल सिंचित किया है, बल्कि उसका भरण-पोषण भी किया है। गंगा शाश्वता का प्रतीक है तथा कला, पौराणिक कथाएँ एवं साहित्य सभी उसका गुणगान करते हैं। आज भी हिंदुओं के सभी धार्मिक कार्य और संस्कारों में अनिवार्य तत्व के रूप में गंगाजल की प्रधानता है। भारतीय कला में गंगा नदी को देवी के रूप में अनेक प्रतीकों के साथ अपने संरक्षक की भूमिका में प्रेषित की गई है। मकर कुंभ तथा अनेक अलंकारों से सुसज्जित किया गया है। यह सभी विशेषताएं गंगा के अर्थ को विस्तार देती है । धर्म के अनेक पक्षों, मिथकों तथा कलाओं में शताब्दियों से स्वरूपों तथा कथ्यो के द्वारा उन्हें प्रदर्शित किया जाता रहा है। प्रस्तुत पुस्तक धर्माचार्यों, जिज्ञासुओं, शोधकर्ताओं, आचार्यों, राजनेताओं इतिहासकारों एवं आमजन के लिए नितांत उपयोगी साबित होगा।
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Chaukhamba Prakashan, Gita Press, Hindi Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Complete Puran Set of 18
Chaukhamba Prakashan, Gita Press, Hindi Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिComplete Puran Set of 18
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- Sankshipt Bramha Puran
- Sankshipt Padma Puran
- Shrivishnu Puran
- Sri Vayu Maha Purana (Mul Puran)
- Shrimad Bhagwat Mahapuran (set of 2 Volumes)
- Sankshipt Narad Puran
- Sankshipt Markandeya Puran
- Abridged Agni Puran(Code1362)
- Sri Bhavishya Mahapuranam (Set Of 3 Vols)
- Brahmavaivart Puran, Kewal Hindi
- Abridged Ling Mahapuran (Code1985)
- Abridged Varah Puran (Code1361
- Sankshipt Skand Puran
- Sri Vaman Puran
- Koorm Puran
- Matsya Puran
- Sankshipt Garud Puran
- Brahmanda Puranam (Set Of 2 Volumes)
+ 1 more Puran - ShriShiv Mahapuran (Set Of 2 Volume)
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Shri Shiv Mahapuranam (Code2020)
इस पुराण में परात्पर ब्रह्म शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। इसमें इन्हें पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है।
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Akshaya Prakashan, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Veda Mimamsa, Vol.1
Veda Mimaiinsa, as the name denotes is an investigation into the mystery of the Veda. Delving deep into the nature of Vedic literature, the moorings and reflections contained in it and the various modes of its interpretations down the ages, Sri Anirvan in this epoch making book of his through his deep insight, profound understanding, threadbare and lucid analysis has unveiled the real meaning of the mystic language of Veda tearing apart the misconceptions surrounding it. These misconceptions grew, Anirvan reflected, out of the misinterpretations of modern Indologists who unfortunately projected and popularized the notion that Veda was a senseless ritualistic doctrine created by premature primitive minds. Anirvan has made it clear that Veda is primarily the storehouse of spiritual knowledge and that the diverse spiritual and religious thoughts and practices flowing through india over the centuries are in fact drawn from the same source-stream of perennial spiritual praxis and wisdom contained in the Veda. Anirvan has looked into the poetical philosophy of Vedic seers and has also shed a new light in the modes of interpretation by explaining that the direct luminous perception (cinmaya pratyaksvada) should be the right approach to proper understanding of the Veda and also of the ethos that created such luminous and voluminous body of literature.
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English Books, Parimal Publications, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Vamana Purana English
First edition. According to Manu- ??Vedas are primary source of religion??, the Puranas, however, are the essence of the religion of Hindu society. Puranas are also regarded as the chief source for the detailed explanation of the Vedas. They, therefore, occupy a significant place in the ancient literature of India. The Puranas have obtained the name of Panchalakshana because their contents generally embrace five topics namely (1) Primary creation or cosmogony, (2) secondary creation, (3) genealogy of gods and patriarchs, (4) reigns of the Manus, (5) history of the solar and lunar dynasties. Vamana Purana is placed at serial number fourteen in the list of eighteen Puranas mentioned in various scriptures. But it does not mean that it is of lesser importance than the other Puranas. Although, it is smaller in size, yet it has all the constituents of the other Puranas. Also its style of treatment of the subject matter is clearer and more analytical than the style of other Puranas and Up-puranas. One of its special features is the amazing variations in the famous ancient stories as related in other Puranas.
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English Books, Parimal Publications, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Linga Purana English Set of 2
-10%
English Books, Parimal Publications, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिLinga Purana English Set of 2
The Puranas in the Indian Religious context are considered to be the important set of the religious literature, after the Vedic literature totally became beyond the reach of the common man. The void thus created in the Indian religious thought was filled by the epics of the Ramayai3a of Valmiki as well as the Mahabharata. But besides these, the Puranas which were composed by the sage Vyasa and other sages gained the importance of their own. Some of them were devoted to Visnu, while others were devoted to Siva, Sakti as well as the other deities. Of these, Siva Purana and the Linga Purana are mainly the Saiva Puranas. In these Puranas, lord Siva is eulogised in different ways and both of them have their own importance.
The distinctive aspect of the Linga Purana is that thousand and eight names of Siva have been repeated twice in this Purana. In Chapter-65, the thousand and eight names have been spoken out by the sage Tandin, while in chapter-98 of the same Purana, the thousand and eight names of Siva were recited by lord Visnu himself in order to get cakra from lord Siva, at the behest of the gods. Besides these, there are many other topics in this Purai3a, which will be of great interest to the readers. This Purana is divided into two parts. The first part has a hundred and eight chapters, while the second part has fifty five chapters.
This is for the first time that an English translation of Linga Purana is being published along with complete Sanskrit text. The importance of the book is enhanced with an exhaustive introduction on the subject and an index of verses is provided at the end of the second volume for the benefit of the readers.
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Sankshipt Bramha Puran
इस पुराण में सृष्टि की उत्पत्ति, पृथु का पावन चरित्र, सूर्य एवं चन्द्रवंश का वर्णन, श्री कृष्ण-चरित्र, कल्पान्तजीवी मार्कण्डेय मुनि का चरित्र, तीर्थों का माहात्म्य एवं अनेक भक्तिपरक आख्यानों की सुन्दर चर्चा की गयी है। भगवान् श्रीकृष्ण की ब्रह्मरूप में विस्तृत व्याख्या होने के कारण यह ब्रह्मपुराण के नाम से प्रसिद्ध है।
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Govindram Hasanand Prakashan, Hindi Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Yajurveda
यजुर्वेद का मुख्य विषय मानवोचित कर्म को बताना है तथापि यह नहीं कहा जा सकता कि इस वेद में कर्म के अत्यरिक्त कोई अन्य विषय व्याख्यात नहीं हुआ है। यजुर्वेद में इनसे पृथक् ईश्वर, जीव, प्रकृति, सृष्टि-रचना, जीवन-मृत्यु आदि दार्शनिक विषयों पर गहन चिंतन प्राप्त होता है। दार्शनिक तत्व के साथ-साथ समाज शास्त्र जिसमें मनुष्यों के सर्वहितकारी नियम, वर्ण और आश्रम व्यवस्था, नारी सम्मान आदि का मूल, बीज रुप में उल्लेखित है। राष्ट्र भावना का और राष्ट्र में मनुष्यों के योगदान पर यजुर्वेद प्रकाश डालता है और राष्ट्र को सबल बनाने का उपाय बताता है। यजुर्वेद पर्यावरण के महत्व और उसकी सुरक्षा पर भी उपदेश करता है। यजुर्वेद का मन्त्र “द्यौः शान्तिः.-यजु.36-17” अनेक स्थानों पर दृष्टिगोचर होता है जिसमें समस्त ब्रह्माण्ड सभी के लिए शान्तिदायक हो ऐसी प्रार्थना की गयी है। यहां शान्तिदायक ब्रह्माण्ड तभी होगा जब इनका संतुलन बना रहे और ये प्रदूषणादि दोषों से पृथक रहें। इस प्रकार यजुर्वेद पर्यावरण के महत्व पर उपदेश करता है। इस वेद में अनेक विषयों का उपदेश है, जैसे औषधिशास्त्र का “सुमित्रिया न आप ओषधयः सन्तु”- ऋ.6.22 आदि। गुरुत्वाकर्षण सिद्धान्त पर, जैसे – आकृष्णेन रजसा वर्तमानो..-ऋ.33.43 आदि।
कृषि विद्या पर भी कृषन्तु भूमिं शुनं – यजु.12.69 आदि अनेक मन्त्र हैं। पशुपालन और गौरक्षा का “यजमानस्य पशुन् पाहि”-यजु.1.1 आदि मन्त्रों द्वारा उपदेश हैं। गणित विद्या पर “एका च मे तिस्त्रश्च मे तिस्त्रश्च.”- यजु.18.24 आदि मन्त्रों द्वारा उपदेश है। यजुर्वेद के 18वें अध्याय में अनेक खनिजों के नामों को बताया गया है।
प्रस्तुत भाष्य महर्षि दयानन्द सरस्वती रचित है। इस भाष्य में ऊपर वर्णित सभी विषयों के अतिरिक्त अन्य विषयों का भी समावेश है। यह भाष्य नैरुक्त प्रक्रिया से सम्पन्न विज्ञान और दर्शनों की कसौटियों पर खरा उतरता है। जहां अन्य भाष्य केवलमात्र कर्मकांड युक्त है, वहीं ये भाष्य लौकिक, अलौकिक आदि ज्ञान-विज्ञान से युक्त है। इस भाष्य में व्यवहारिक ज्ञान की प्रचुरता है। भाष्यकार ने भाष्य में अर्थ प्रमाण की दृष्टि से निरूक्त, अष्टाध्यायी, तैत्तरीय संहिता, शतपथ ब्राह्मण का प्रमाण दिया है, जिससे भाष्य की शैली की प्रमाणिकता सिद्ध होती है। सभी मन्त्रों का उत्तम और जीवन में उपयोगी विषयों के अनुरूप यह भाष्य है। इस भाष्य के अध्ययन करने पर आप स्वयं कह उठेंगे कि “सर्वज्ञानमयो हि सः।
भाष्यकार : महर्षि दयानन्द सरस्वती
सम्पूर्ण यजुर्वेद भाष्य प्रथम बार कंप्यूटर द्वारा मुद्रित, शुद्धतम् सामग्री, नयनाभिराम डिजिटल छपाई, आकर्षक आवरण, उत्तम कागज, सुंदर टाइप, शब्दार्थ व मन्त्रानुक्रमणिका सहित एक खण्ड में प्रस्तुत |
यजुर्वेद का विषय केवल कर्मकाण्ड ही नहीं है, बल्कि इसमें वर्णित है अध्यात्म एवं दर्शन ,सृष्टि-रचना तथा मोक्ष, नैतिक तथा आचारमूलक शिक्षाएं , मनोविज्ञान बुद्धिवाद, समाज दर्शन , राष्ट्र भावना, पर्यावरण का संरक्षण। काव्य तत्व के अतिरिक्त यजुर्वेद में विद्यमान है, विश्व मानव की एकता जैसे उपयोगी विषय ।
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Govindram Hasanand Prakashan, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Upanishad Ek Saral Parichaya
भारतीय चिन्तन में ही नहीं, मानव-चिन्तन में उपनिषदों का चिन्तन उल्लेखनीय स्थान रखता है। उपनिषदें भारतीयों और आर्यों के आध्यात्मिक चिन्तन की विश्वसनीय स्रोत हैं। आधुनिक विचारक भी उपनिषदों को भारत का सर्वश्रेष्ठ दार्शनिक साहित्य स्वीकार करते हैं। मुक्तक उपनिषद् में 108 उपनिषदों का उल्लेख है।
मुख्य प्रामाणिक सर्वसम्मत 11 उपनिषदें कही जाती हैं। इन प्रसिद्ध उपनिषदों में सर्वाधिक विख्यात ‘ईशोपनिषद्‘ यजुर्वेद का अन्तिम 40वाँ अध्याय है। इसी प्रकार शतपथ ब्राह्मण का अन्तिम भाग ही बृहदारण्यक उपनिषद् है, इसमें अद्भुत वन-संस्कृति का नमूना देखने को मिलता है। ये प्रधान उपनिषदें हैं-(1) ईश, (2) केन, (3) कठ, (4) प्रश्न, (5) मुण्डक, (6) माण्डूक्य, (7) तैत्तिरीय, (8) ऐतरेय, (9) छान्दोग्य, (10) बृहदारण्यक (11) श्वेताश्वतर। आइए, ग्यारह उपनिषदों का सरल परिचय प्राप्त करें।SKU: n/a -
English Books, Parimal Publications, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Vayu Purana Set of 2
The Vayu Purana gets its name from the Wind-god who is said to be its promulgator.
M. Winternitz under Vayaviya or Vayu Purana says- This appears in same lists, under the name of Saiva or Purana, a title which is given to the work because it is dedicated to the worship of god Siva. As proclaimed by the Wind-god, Vayu Purana is quoted in the Mahabharata as well as by the Harivamsa Purana. It has already been mentioned that the poet Bana (about 625 A.D.) had read the Vayu Purana and that in this Purana, the rule of the Guptas is described as it was in the 4th century A.D. making the work not later than 5th century A.D.Legend occurring in Vayu Purana is Siva and not Visnu, as held by Winternitz. But in chapter 109-112, depicting Gaya Mahatmya, we find a great tribute paid to Visnu.
According to Vacaspati Gairola- “The expert knowledge of the Puranas was initiated by Brahma himself”. Vayu Purana is a true representation of this fact in chapter 103, verse 58.
Vayu has been description as expert in grammar (Sabda-sastra). Brahma passed on this Purana to Vayu (Matarisvan) from whom it was received by Usanas who passed it on to Brhaspati who subsequently narrated it to Savitr (Sun). Savitr spoke it to Mrtyu who passed it on to Indra from whom Vasistha learnt it. Vasistha even passed it on to Sarasvata. From Sarasvata, it passed on to Tridhaman (the name of the tenth Vyasa of Dvapara Yuga, an incarnation of adorable Bhgru) ; who passed it on to Saradvata; who passed it on to Trivista ; who gave it to Antariksa; who passed it on to Varsin. He even passed it on to Trayyarena. Trayyarena passed it on to Dhananjaya; who passed it on to Krtanjaya, from whom it went over to Trnanjaya; who passed it on to Bharadvaja. Bharadvaja passed it on to Gautama and he too, passed it on to Niryantara. Niryantara spoke it to Vajasrava who gave it to Somasusma. Somasusma passed it on to Trnabindu who passed it on to Sakti. From Sakti it passed on to Parasara staying in the womb. From Parasara it passed on to Jatukarna from Dvaipayana and from Dvaipayana, the sage, assimilated. According to Vacaspati Gairola, Vayu Purana consists of 12,000 verses in 112 chapters. He considers Siva Purana as who Distinct treatises even when Visva-Kosa-kara of Bangla takes two as identical, on the basis of his review of Venkatesvara Steam Press, Bombay and Anandasrama Granthavali Publication of Siva Purana.
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Poojan Samagri
Shree Shyam Rakhsutr Buy 10 get 2 Free
Shree Shyam Rakhsutr
भारतीय संस्कृति में कई ऐसी परंपराएं हैं जिनका पालन प्राचीन काल से किया जा रहा है। इन्हीं में से एक है कलाई पर रक्षासूत्र बांधने की परंपरा। बता दें की पूजा के समय कलाई पर रक्षासूत्र बांधने के पीछे न केवल आध्यात्मिक बल्कि वैज्ञानिक कारण भी छिपा हुआ है। वहीं शास्त्रों में इससे जुड़े कुछ नियम भी बताए गए हैं।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Ishadi Nau Upanishad
इस पुस्तक में ईश, केन, कठ, मुण्डक, माण्डूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय तथा श्वेताश्वतर उपनिषद्के मन्त्र, मन्त्रानुवाद, शाङ्करभाष्य और हिन्दी में भाष्यार्थ एक ही जिल्द में प्रकाशित किया गया है। यह पुस्तक संस्कृत के विद्यार्थियों तथा ब्रह्मज्ञान के जिज्ञासुओं के लिये विशेष उपयोगी है।
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Govindram Hasanand Prakashan, Hindi Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Vedic Vangmay ka Itihas Set of 3
-10%
Govindram Hasanand Prakashan, Hindi Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिVedic Vangmay ka Itihas Set of 3
वैदिक वाड्मय का इतिहास 3 खण्ड में प्रकाषित किया गया है।
इसके प्रथम खण्ड में मुख्यतः वैदिक शाखाओं पर विचार किया गया है। विद्वान लेखक ने भाषा शास्त्र तथा भारत के प्राचीन इतिहास विषयक अपने मौलिक चिन्तन का सार भी प्रस्तुत किया है। पं. भगवद्दत्त जी की धारणाऐं और उपपत्तियां विद्वत् संसार में हड़कम्प मचा देने वाली थीं।
इसके द्वितीय खण्ड में लेखक ने ब्राहाण और आरण्यक साहित्य का विचार किया। उपलब्ध और अनुपलब्ध ब्राहाणों के विवरण के पष्चात् इन ग्रन्थों पर लिखे गये भाष्यों और भाष्यकारों की पूरी जानकारी दी गई है।
इस ग्रन्थ के तीसरे खण्ड में अनेक ऐसे भाष्यकारों की चर्चा हुई है जिनके अस्तित्व की जानकारी भी लोगों को नहीं थी।
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English Books, Parimal Publications, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Complete Bhavisya Mahapurana Set of 3
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English Books, Parimal Publications, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिComplete Bhavisya Mahapurana Set of 3
Purāņas are the treasure house of knowledge. The Paurāņika literature is encyclopedic and it includes diverse topics such as cosmogony, cosmology, genealogies of gods & goddesses, kings sages, demigods, folk tales, pilgrimages, temples, medicine, astronomy, grammar, mineralogy, theology and philosophy.
The number of Purāṇas are eighteen. The Bhavisya Purāņa is the embodiment of knowledge of Present, Past and Future. It seems it has been written by sage Vyāsa at the end of all seventeen Purāņas.
Bhavisya Purāna is adorned with fourteen vidyās (knowledge) of the four Vedas, the six Angas of the Vedas, Dharmaśāstra, Mīmāṁsā, Tarka or Nyāya and other Purāņas. In addition to these fourteen vidyās, this Purāņa contains four other vidyās such asĀyurveda, Dhanurveda, Gandharvaveda and Arthaśāstra.
Bhavisya Purāņa has been divided into four parvas, 1. Brāhma Parva, 2. Madhyama Parva, 3. Pratisarga Parva, 4. Uttara Parva. Brāhma Parva deals with the stories of gods and goddesses, but on the whole the emphasis on this parva is praising and worshipping Sungod with merits of listening to his glory, performing his holy vratas (vows) and observing his fast. Madhyama Parva of the Bhavisya Purāņa is primarily a Tantra-related work. It has been divided into three parts. Third Pratisarga Parva of the Bhavișya Purāņa is a treasure of Indian history of Medieval period in which future incidents have been presented in past tense. The last parva of the Bhavisya Purāņa is Uttara Parva. This parva is the treasure of Karmakāņda and charities observing festivity.
The present edition of Bhavişya Purāņa is the first ever complete English translation of the original Sanskrit text in devanāgarī that also includes an exhaustive introduction, notes and an index of Sanskrit verses at the end of third volume of this book.
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Hindi Books, Jiyalal Kamboj, Shivalik Prakashan, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Atharva Veda (Set of 4 Volumes)
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पुस्तक परिचय
अथर्ववेद की व्याख्या लेखक द्वारा ऋग्वेदसंहिता की व्याख्या में अपनाई गई पद्धति के अनुसार ही की गई है। सर्वप्रथम मन्त्र और उसका पदपाठ दिया गया है। पदपाठ के पश्चात् मन्त्र में पदों के क्रम के अनुसार हिन्दीरूपान्तर और फिर संक्षिप्त व्याख्या दी गई है। जिस क्रम में मन्त्रों के पद हैं, उसी क्रम में उनका अनुवाद देने से पाठकों को शब्दों के अर्थों को समझने में सुविधा होगी। पदक्रम से किये गए अनुवाद ने छन्दोमुक्त कविता का सा रूप ग्रहण कर लिया है, जिससे पाठकों को ऋग्वेद के हिन्दी काव्यपाठ का आनन्द भी प्राप्त होगा। संक्षिप्त व्याख्या के पश्चात् टिप्पणियों में प्राचीन एवं अर्वाचीन भाष्यकारों, व्याख्याकारों और अनुवादकों के मत दिये गए हैं।
नामों और शब्दों की यौगिक व्याख्या पर विशेष ध्यान दिया गया है। भाषा और आलङ्कारिक प्रयोगों के रहस्य को भी स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है। देवतानामों और शब्दों की प्रतीकात्मक व्याख्या की ओर विशेष ध्यान दिया गया है। प्राचीन और अर्वाचीन भाषाविदों के सिद्धान्तों से व्याख्या में सहायता ली गई है। लुप्तकल (elliptical) मन्त्रों में लुप्त पदों और वाक्यांशों को खोजकर मन्त्रार्थ की प्राप्ति का प्रयास किया गया है। असङ्गत अर्थ वाले वाक्यों में काकु से अर्थ की सङ्गति लगाई गई है। मन्त्रों में सन्धि को अक्षुण्ण रखते हुए पदों को अलग-अलग करके रखा गया है। इससे अथर्ववेद के अध्येताओं और जिज्ञासुओं को जहाँ मन्त्रों के उच्चारण में सुविधा होगी, वहीं अर्थ को समझने में भी सहायता मिलेगी।
यह ग्रन्थ चार खण्डों में पूर्ण हो रहा है। पहले खण्ड में काण्ड १-५, दूसरे खण्ड में काण्ड ६-१०, तीसरे खण्ड में काण्ड ११-१८,१९ (सूक्त १-३३), और चौथे खण्ड में काण्ड १९ (सूक्त ३४-७२), और काण्ड २० होंगे।
लेखक परिचय
डा. जियालाल कम्बोज का जन्म १५ फरवरी १९३२ को ग्राम सान्तड़ी, ज़िला करनाल, हरियाणा, में हुआ।
शिक्षा: बी.ए. (आनर्स) १९५४ में डी.ए.वी. कॉलेज अम्बाला शहर (पंजाब विश्वविद्यालय) से, एम.ए (संस्कृत) दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली से १९६० में। दिल्ली विश्वविद्यालय से ही पोस्ट एम.ए. डिप्लोमा (भाषाविज्ञान) १९६३ में, एम.लिट्. (भाज्ञविज्ञान) १९६६ में, और पीएच.डी की उपाधि ‘Semantic Change in Sanskrit’ विषय पर शोधप्रबन्ध लिखकर १९७३ में।
अध्यापन कार्य दिल्ली शिक्षा निदेशालय में भाषा-अध्यापक और स्नातकोत्तर अध्यापक के रूप में १९६० से १९७४ तक। हिन्दुकालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, में प्रवक्ता और प्रवाचक के पदों पर १९७४ से १९९७ तक कार्य किया।
लेखन-कार्य : एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें ‘प्राचीन कम्बोज जन और जनपद’ (इतिहासग्रन्थ) और ‘Semantic Change in San-skrit’ (शोधप्रबन्ध) विशेष उल्लेखनीय हैं। सेवानिवृत्त होने के पश्चात् ऋग्वेदसंहिता का आठ बड़े खण्डों में हिन्दीभाषान्तर, संक्षिप्त व्याख्या और प्राचीन एवं आधुनिक विद्वानों की टिप्पणियों के साथ प्रकाशन एक बृहत् कार्य है। हिन्दी, अंग्रेज़ी और संस्कृत में डेढ़ दर्जन से अधिक शोधनिबन्ध उच्च स्तर की शोधपत्रिकाओं और जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं।
सम्मान : दिल्ली संस्कृत अकादमी के द्वारा फर्वरी २००२ में ‘संस्कृत साहित्य सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। महामहिम राष्ट्रपति द्वारा Certificate of Honour 2016 (संस्कृत), से सम्मानित किया गया।SKU: n/a -
Arsh Sahitya Prachar Trust, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
A Complete Set of All Four Vedas in Sanskrit-English and Transliteration (8 Vols)
Arsh Sahitya Prachar Trust, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिA Complete Set of All Four Vedas in Sanskrit-English and Transliteration (8 Vols)
The Word “Veda” mean knowledge par-excellence, Sacred wisdom first revealed to the four great Rashes—Agni, Vayu Aditya and Angira at the beginning of creation. The Vedas are called Sruti, means the sounds heard by sages in yogic unity with supreme parbrahmn.
Vedas are the purest expression of spiritual idealism of our philosophy, sanatan – immortal and timeless. The ancient sages those were blessed stupendous memory; they preserved this sacred knowledge in their memory with proper accentuation and passed on to the successive generations through oral teachings with utmost care and accuracy. Later when the Sanskrit script writing was developed the great sages compiled the Vedic Wisdom into four Holy Scriptures; the Rig-Veda, the Yajur-veda, Sam-Veda and Atharva-veda. The Vedas are considered to be divine revelation which has been handed down to humanity as a necessary guidance in order to live in peace and harmony on earth. Vedic literature is the proud possession of mankind since the beginning of human history.SKU: n/a

















































