Products Trending Now
Sanatan Hindu Dharma ke Mool Tatva (PB)

Sanatan Hindu Dharma ke Mool Tatva (PB)
सनातन हिंदू धर्म के मूल तत्व (1916 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज, काशी द्वारा आखिरी बार प्रकाशित और अब लुप्त हो चुके दुर्लभ ग्रंथ SANATANA DHARMA: AN ELEMENTARY TEXT- BOOK of Hindu Religion and Ethics का हिंदी अनुवाद)
बनारस के सेन्ट्रल हिन्दू कॉलेज द्वारा सनातन धर्म पर तीन पुस्तकों की श्रृंखला प्रकाशित की गई थी। इनमें ‘एन एलिमेंटरी टैक्स्ट बुक ऑफ सनातन धर्म’ का प्रथम प्रकाशन सन् 1902 में तथा कॉलेज द्वारा अंतिम प्रकाशन 1916 में हुआ था। इंटरनेट पर यह पुस्तक अंग्रेजी में मिल जाती है किन्तु हिन्दी का विशाल पाठक-वर्ग आज तक इस महत्वपूर्ण पुस्तक से वंचित था और इसके हिन्दी अनुवाद की मांग कर रहा था। इस मांग को पूरा किया हिन्दी के चर्चित पत्रकार, चिंतक और सुप्रसिद्ध लेखक संदीप देव की कंपनी Kapot Media Network ने। कपोत ने इस पुस्तक का सरल-सुबोध हिन्दी अनुवाद प्रकाशित कर बेहद सराहनीय कार्य किया है। इस तरह से एक सदी से भी अधिक समय बाद इस पुस्तक का हिन्दी संस्करण प्रकाशित हो रहा है।
LAVIGOLD Premium Cordyceps
कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस (Cordyceps militaris)
प्राकृतिक ऊर्जा, इम्यूनिटी और समग्र स्वास्थ्य का सहयोगी
कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस एक उच्च गुणवत्ता वाला औषधीय मशरूम है, जिसका उपयोग सदियों से एशियाई पारंपरिक चिकित्सा में ऊर्जा, सहनशक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है।
मुख्य विशेषताएँ
✅ लैब-ग्रोन एवं शुद्ध गुणवत्ता
✅ Cordycepin – 10.22 mg/g
✅ Adenosine – 1.82 mg/g
✅ उच्च प्रोटीन, फाइबर एवं आवश्यक विटामिन
संभावित लाभ
ऊर्जा, स्टैमिना और सहनशक्ति बढ़ाने में सहायक
शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को सहयोग
मानसिक एकाग्रता एवं तनाव प्रबंधन में मददगार
हृदय एवं रक्त संचार के लिए लाभकारी
स्वस्थ मेटाबॉलिज्म और समग्र स्वास्थ्य को समर्थन
पुरुष एवं महिला स्वास्थ्य के लिए उपयोगी पोषण सहयोग
सेवन विधि
प्रतिदिन 1–2 ग्राम पाउडर पानी, दूध, चाय या स्मूदी में मिलाकर लें।
सावधानियाँ
गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएँ डॉक्टर की सलाह लें।
मशरूम से एलर्जी होने पर सेवन न करें।
किसी गंभीर बीमारी या दवा के साथ उपयोग से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।
महत्वपूर्ण सूचना
यह उत्पाद Food Supplement (खाद्य पूरक) है, औषधि नहीं। यह किसी बीमारी के निदान, उपचार, रोकथाम या इलाज का दावा नहीं करता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसका उपयोग अधिक लाभकारी हो सकता है।
Makhana (Phool Makhana) Hand Picked Foxnuts (100 gm)
Hindi Patrakarita : 200 Saal Ki Mahagatha

Hindi Patrakarita : 200 Saal Ki Mahagatha
“अपनापन’ एक ऐसी आत्मीय और प्रेरणादायी कृति है, जिसमें श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के साथ विभिन्न भूमिकाओं में देखे, सीखे और आत्मसात् किए गए अनुभवों का सजीव संकलन प्रस्तुत किया गया है। श्री चौहान ने तीन दशकों से भी अधिक समय तक मोदीजी को विभिन्न भूमिकाओं में निकट से देखा है, और उनसे सीखा है-जब दोनों भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता थे, जब वे अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्री थे, जब वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री थे और आज जब वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री हैं। यह पुस्तक उन मूल्यों, दृष्टिकोण और कार्यशैली को भी अभिव्यक्त करती है, जिन्हें उन्होंने इस दीर्घ सहयात्रा में आत्मसात् किया।
यह केवल घटनाओं-मात्र का विवरण नहीं, बल्कि एक विचार-यात्रा है- जहाँ संगठन, समर्पण और संदेश के माध्यम से नेतृत्व, सेवा और राष्ट्र-निर्माण के सूत्र उभरकर सामने आते हैं। ‘सेवा’, ‘अंत्योदय’, ‘जन भागीदारी’, ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘लोक कल्याण’ जैसे मूलमंत्र पुस्तक के केंद्र में हैं, जो न केवल गवर्नेस की दिशा तय करते हैं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा भी देते हैं।
यह कृति पाठकों को बताती है कि कैसे दृढ़ संकल्प, स्पष्ट दृष्टि और निरंतर परिश्रम से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। ‘अपनापन’ एक नेता के साथ बिताए गए पलों का संग्रह ही नहीं, बल्कि उन मूल्यों का दर्पण है, जो राष्ट्र को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं।”
Lal Mirch ka Bharua Achar : Red Chilli Pickle (250g)
Indulge in the rich, tangy taste of our homemade authentic mango pickle, crafted with handpicked, ripe mangoes and a blend of traditional spices. Each jar is a labor of love, ensuring that you experience the vibrant flavors of Indian cuisine right at your table. Perfect as a side dish or a flavorful accompaniment to any meal, our mango pickle captures the essence of summer all year round. Enjoy it with rice, parathas, or even as a zesty topping on your favorite snacks! Delight your taste buds with our Authentic Homemade Mango Pickle, crafted from the finest, handpicked mangoes and traditional spices.…
Haridarshan Chanda Tika
Narendra Modi ka Dhokha aur Sach – Bachpan se Rajnitik Jeevan ka Safar (PB)

Narendra Modi ka Dhokha aur Sach – Bachpan se Rajnitik Jeevan ka Safar (PB)
The veracity of the claims related to Narendra Modi’s life and the way his name came out as anti-Muslim after the Godhra riots made him known as the Hindu Hriday Samrat. After becoming the Prime Minister, has he become secular or is he secretly carrying forward the agenda of Hindutva by taking Muslims into confidence? After becoming the PM,what changes did he make in the appeasement politics that was already going on? To what extent could he wash away the stain of Godhra riots that was on his forehead? Is winning the trust of the Muslim community just a show off or has anything been done for it? Could it bring any change for Hindus or are Hindus still politically neglected like before? Is Sanatan culture being revived under Modi government? What is the situation of anti-Modi and development of the country?
Kamsutram (HB) : कामसूत्रम्

Kamsutram (HB) : कामसूत्रम्
कामसूत्र का संछिप्त विवरण : वात्सायन के कामसूत्र में कुल सात भाग हैं | प्रत्येक भाग कई अध्यायों में बंटे हैं| प्रत्येक अध्याय में कई श्लोक हैं | साहित्य प्रेमियों की सुविधा के लिए पहले संस्कृत और उसके नीचे उसका हिंदी अनुवाद दिया गया | महर्षि वात्सायन का जन्म बिहार राज्य में हुआ था और प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण साहित्यकारों में से एक हैं | महर्षि वात्सायन ने कामसूत्र में न केवल दांपत्य जीवन का श्रंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी सम्पादित किया है………
Bhaarateey Chintan Me Karm Evan Punarjanm

Bhaarateey Chintan Me Karm Evan Punarjanm
यह पुस्तक भारतीय चिन्तनधारा का प्रायः सर्वसम्मत सिद्धान्त है। कर्म और पुनर्जन्म भारतीय दर्शन-परम्परा में वस्तुतः परस्पराश्रित माने गये हैं। कर्म नहीं तो पुनर्जन्म नहीं, पुनर्जन्म नहीं तो दृश्य कर्म नहीं। कारण-कार्य सिद्धान्त सृष्टि का सार्वभौम सिद्धान्त है तथा कर्म एवं पुनर्जन्म का सिद्धान्त इस कारणता नियम पर ही आधृत होने से सर्वथा तर्कसङ्ग एवं समीचीन है। प्रस्तुत ग्रन्थ इस सर्वमान्य एवं रहस्यात्मक ‘कर्म और पुनर्जन्म सिद्धान्त’ के विविध आयामों पर आधारित विद्वतापूर्ण 46 शोधपत्रों का सङ्कलन है। यह ग्रन्थ संस्कृत एवं भारतीय विद्या के मूर्धन्य विचारकों ने विविध दृष्टिकोणें से कर्म एवं पुनर्जन्म के सिद्धान्त पर विपुल विचार-सामग्री प्रस्तुत की है, जो जिज्ञासू अध्येताओं के लिए अवश्य ही लाभप्रद होगी।
Hindus in Hindu Rashtra (Eighth-Class Citizens and Victims of State-Sanctioned Apartheid)

Hindus in Hindu Rashtra (Eighth-Class Citizens and Victims of State-Sanctioned Apartheid)
To those who claim we are now living in a totalitarian, fascist, Hindu Rashtra, one
must ask: What kind of a Hindu Rashtra is this where a billion-strong Hindus have
been, through our parliament, through our courts, our education system, and our
constitution, reduced to not just second-class but, rather, eighth-class citizens?
What kind of Hindu Rashtra is this where Ram Navami, Hanuman Jayanti, Durga
pooja processions, and even Garba celebrations, are attacked and stoned with
impunity? What kind of Hindu Rashtra is this where a sitting Prime minister says
minorities have the first right to resources? What kind of Hindu Rashtra is this
where Hindus are forced to be refugees in their own land, where one can settle
40,000 Rohingya Muslims but not 700,000 Kashmiri Hindus, the land’s original
inhabitants; where the judiciary says it is too late to prosecute those who raped,
murdered, and ethnically cleansed lacs of Hindus? What kind of Hindu Rashtra is
this where Hindu temples are exclusively controlled by the State, where Hindus
must beg for Waqf land to celebrate their festival while the government usurps
hundreds of thousands of acres of temple land and is responsible for more than
100,000 temples losing lacs of crores in rental income? What kind of Hindu Rashtra
is this where Right to Education Act discriminates only against Hindus and their
schools, forcing tens of thousands of them to shut down? What kind of Hindu
Rashtra is this where monsters like Aurangzeb and Tipu who perpetrated large-scale
Hindu genocides are eulogised through State sponsored publications, naming of
roads and cities, and organising of festivals? What kind of Hindu Rashtra is this
where a law was about to be enacted through with only the Hindus would have been
held guilty in a communal riot even if they were in a minority for example in
Kashmir? What kind of Hindu Rashtra is this where court judgments like the
Sabarimala and legislative enactments like the Hindu Code Bill purport to reform
only Hindu religious practices but dare not touch practices of other religions, and if
they do, the decisions are promptly reversed like in the Shah Bano case? What kind
of Hindu Rashtra is this where The Places of Worship Act continues to deny the
Hindus their legitimate right to correct historical injustices and reclaim thousands
of demolished temples? What kind of Hindu Rashtra is this where the Waqf Act
gives overarching powers to Muslims to declare a 1500-year-old Hindu temple to be
on Islamic land when Islam is only 1300 years old? If this is how a Hindu is rewarded
in a Hindu Rashtra, he’d much rather be in a Muslim Rashtra because then at least
there’d be no pretence of equality – a Kafir will get what he deserves. In this searing
commentary penned with clinical precision, the author shreds to smithereens once
and for all the guilt-tripping, self-loathing fake narrative that Hindus have been
duped with since Independence. There is no pretence, no political correctness, only
unvarnished truth – that the Hindus are living under State-sanctioned Apartheid.
Hindu Rashtr Kya? kyon ? kaise ?

Hindu Rashtr Kya? kyon ? kaise ?
ऋषितुल्य श्रद्धेय Rameshwar Mishra Pankaj जी, महान विदुषी Kusumlata Kedia जी और स्वामी निगमानंद जी द्वारा लिखित इस पुस्तक की बहुत दिनों से प्रतीक्षा थी. पुस्तक प्रकाशित हो गयी है, ये एक अद्भुत रचना है. पढ़िये और जानिये हिन्दू राष्ट्र क्या? क्यों? कैसे?
Do Seengon Wala Rishi
“क्या आपने उस राजा के बारे में सुना है, जिसने कबूतर की रक्षा के लिए अपना मांस बलिदान कर दिया था?या उस सिंहासन के बारे में, जो जिस किसी को भी दिया जाता है, उसमें न्याय प्रदान करने की अद्वितीय क्षमता आ जाती है?और उस मूर्तिकार के बारे में क्या खयाल है, जो बिना हाथों के भी शानदार मूर्तियाँ बनाने में कामयाब रहा?देवताओं के बीच झगड़ों और विवादों से राजाओं की भलाई के लिए महान् ऋषियों और सामान्य मनुष्यों के गुण।सुप्रसिद्ध लेखिका सुधा मूर्ति ने भारतीय पौराणिक कथाओं की अल्पज्ञात-ज्ञात कहानियों को नई भावभूमि के साथ प्रस्तुत किया है। मनभावन चित्रों के साथ और सादगी भरे अंदाज में सुनाई गई, ‘दो सींगों वाला साधु’ निश्चित रूप से प्रिय कहानीकार के प्रशंसकों को प्रसन्न करेगा।”
NETAJI GUMNAMI BABA AUR SARKARI JHOOTH

NETAJI GUMNAMI BABA AUR SARKARI JHOOTH
क्या उत्तर प्रदेश में दशकों तक अज्ञातवास करने वाले गुमनामी बाबा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस थे? गहन शोध के पश्चात्, चन्द्रचूड़ घोष और अनुज धर इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि सत्य हमारी कल्पनाओं से कहीं अधिक विचित्र है। वे नेताजी ही थे। और यदि यह सत्य है, तो क्यों सरकार के आधिकारिक कथनों एवं जस्टिस विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट का निष्कर्ष इससे भिन्न हैं? नेताजी कब और कैसे भारत लौटे? क्यों इतने वर्षों तक वे अपने ही देश में छिपकर रहे? क्यों सरकार इस सत्य को हम देशवासियों से छिपा रही है?—इन सभी प्रश्नों के समाधान आपको विचलित कर देंगे। जानिए: कैसे कई दशकों से इस देश की जनता की आँखों में धूल झोंकी जा रही है। कैसे फ़ॉरेन्सिक विज्ञान ने नाम पर बनाईं गईं DNA एवं हस्तलेख की झूठी रिपोर्टें और संसद में दिए गए झूठे वक्तव्य। …सरकार नहीं चाहती कि आप ये सब कुछ जानें।
Indra Vijay

Indra Vijay
An Old and Rare Book
पण्डित मधुसूदन ओझा ग्रन्थमाला 6 – इन्द्रविजयः – पण्डित मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ | Pandit Madhusudan Ojha Granthamala 6 – Indravijay – Pt. Madhusudan Ojha Research Cell
Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)

Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
THE AUTHOR
संदीप देव
संदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
Mahatma Gandhi Aur Unki Mahila Mitr | महात्मा गांधी और उनकी महिला मित्र

Mahatma Gandhi Aur Unki Mahila Mitr | महात्मा गांधी और उनकी महिला मित्र
एल्यानोर मॉर्टोन ने सन् 1954 में एक पुस्तक लिखी थी वीमेन बिहाइंड महात्मा गाधी और उसके बाद से इस विषय में कोई पुस्तक नहीं लिखी गयी । तमाम महिलाओं की निकटता गांधीजी के जीवन में एक आकर्षक अध्याय की तरह है खासकर तब जब हम उनके जीवन का अध्ययन ब्रह्मचर्य के दर्शन के साथ करते हैं । यह कृति एक व्यक्ति के पीछे के व्यक्ति और आत्मकथा के भीतर की आत्मकथा की तरह है ।
एक दर्जन से अधिक महिलाए ऐसी थीं, जो एक या अलगअलग समय मे महात्मा गाधी से निकटता के साथ जुडी हुई थीं । कस्तुरबा से संबंधित आख्यान गांधीजी के जीवन के एक अलग अध्याय की तरह है । लेकिन इन महिलाओं मे गांधीजी ने अपनी माता पुतलीबाई और सर्वज्ञ अर्द्धांगिनी कस्तूरबा का प्रतिरूप देखा । उनमें से छह महिलाएं विदेशी मूल की थीं और एक्? अनिवासी भारतीय । मिली ग्राहम पोलक, निला क्रैम कूक और मीरा बहन जैसी कुछ महिलाएँ उस समय की महिलाओं में बुद्धिजीवी कही जा सकती थीं । वे महिलाए महात्मा गाधी के लिए बेटी बहनें और माताएं थीं । हालाकि सरलादेवी चौधरानी अपवाद की तरह थी । गांधीजी उन्हें अपनी आध्यात्मिक पत्नी कहा करते थे ।
ब्रह्मचर्य, गांधी और उनकी सहयोगी महिलाएं बहुत ही आकर्षक विषय है । लेखक ने इस विषय पर आठ वर्ष रवे अधिक तक शोध किया है और उसके बाद इसे पुस्तक के रूप मे कलमबद्ध किया है । नवजीवन ट्रस्ट के सहयोग एरे भारत सरकार के सूचना एव प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक कॉलेक्टेड वर्क्स इस सम्पूर्ण काल के लिए उनकी बाइबिल की तरह है, जिसे व्यापक तौर पर इसमें उद्धृत किया गया है ।
गांधीजी के बारे में पढना कभी भी उबाऊ नहीं रहा । वह हमेशा से ही अपूर्वानुमेय अपरम्परागत नवप्रवर्तनशील, दयालु और निष्कपट रहे । चेहरे पर भ्रान्तिकारी मुस्कान मौजूद होने के बावजूद वह शरारती थे । अपने सम्पूर्ण जीवन काल मे उन्हे अपने विचारों का कडू। प्रतिरोध सहना पड़ा था । उनका प्रतिरोध करने वालो मे से ज्यादा उनके करीबी दरबारी ही थे । गांधीजी ने एक्? बार श्रीमती पोलक को कहा था कि उनका (श्रीमती पोलक का) जन्म उनके एवं उनरने जुडी महिला सहयोगिनो के अनुप्रयोग के लिए ही हुआ है । गांधीजी अपनी ही पीड़ा से आंतरिक शांति हासिल करते रहे थे ।
रोमा रौलां ने उन्हें दूसरे ईसा मसीह की संज्ञा दी थी । ठीक ईसा मसीह की तरह ही गाँधीजी की सहनशीलता भी पीडा. मौत और मृतोत्थान का प्रतीक बन गयी । यह पुस्तक गाँधीजी के नजरिये से स्त्रीत्व के तमाम पहलुओ को प्रदर्शित करती है । गांधीजी वैसे इक्कादुक्का लोगों में शुमार है, जिन्होंने खुद को स्वनिर्मित हिजड़ा कहकर सेक्स की विभाजन रेखा समाप्त करने का दुस्साहस किया था ।
गाँधीजी महिलाओं की संगत में हमेशा राहत महसूस करते थे । सभी महिला सहयोगिनी ने उन्हें समान महत्त्व दिया । ब्रह्मचर्य महात्मा गाँधीजी और उनकी महिला मित्र पांच दशक तक गांधीजी और उन महिलाओं के बीच संवाद का विश्वसनीय दस्तावेज है, जो भारतीय सौंदर्य परम्परा में वर्णित सम्पूर्ण रसों से सराबोर थीं ।
बाल्मीकि रामायण- Valmiki Ramayana
स्वामी जगदीष्वरानन्द सरस्वती आर्य जगत् के सुप्रसिद्ध विद्वान्, निरन्तर साहित्य साधना में संलग्न, रामायण के समालोचक एवं मर्मज्ञ लेखक थे।
इस पुस्तक द्वारा आप अपने प्राचीन गौरवमय इतिहास की झांकी, मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन का अध्ययन, प्राचीन राज्यव्यवस्था का स्वरुप देख सकते हैं।
यदि आप भ्रातृ-प्रेम नारी-गौरव आदर्ष सेवक, आदर्ष मित्र, आदर्ष राज्य, आदर्ष पुत्र के स्वरुपों का अवलोकन या आप रामायण का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहते हैं तो यह रामायण अवष्य पढ़ें।
यह ग्रन्थ सैकड़ों टिप्पणियों से समलंकृत सम्पूर्ण रामायण 7000 श्लोकों में पूर्ण हुआ है।
Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)

Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)
THE AUTHOR
संदीप देव
संदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
Hindutva (PB)
‘हिंदुत्व’ एक ऐसा शब्द है, जो संपूर्ण मानवजाति के लिए आज भी अपूर्व स्फूर्ति तथा चैतन्य का स्रोत बना हुआ है। इस शब्द से संबद्ध विचार, महान् ध्येय, रीति-रिवाज तथा भावनाएँ कितनी विविध तथा श्रेष्ठ हैं। ‘हिंदुत्व’ कोई सामान्य शब्द नहीं है। यह एक परंपरा है। एक इतिहास है। यह इतिहास केवल धार्मिक अथवा आध्यात्मिक इतिहास नहीं है। अनेक बार ‘हिंदुत्व’ शब्द को उसी के समान किसी अन्य शब्द के समतुल्य मानकर बड़ी भूल की जाती है। वैसे यह इतिहास मात्र नहीं है, वरन् एक सर्वसंग्रही इतिहास है। ‘हिंदू धर्म’, यह शब्द ‘हिंदुत्व’ से ही उपजा उसी का एक रूप है, उसी का एक अंश है।
‘हिंदुत्व’ शब्द में एक राष्ट्र, हिंदूजाति के अस्तित्व तथा पराक्रम के सम्मिलित होने का बोध होता है। इसीलिए ‘हिंदुत्व’ शब्द का निश्चित आशय ज्ञात करने के लिए पहले हम लोगों को यह समझना आवश्यक है कि ‘हिंदू’ किसे कहते हैं। इस शब्द ने लाखों लोगों के मानस को किस प्रकार प्रभावित किया है तथा समाज के उत्तमोत्तम पुरुषों ने, शूर तथा साहसी वीरों ने इसी नाम के लिए अपनी भक्तिपूर्ण निष्ठा क्यों अर्पित की, इसका रहस्य ज्ञात करना भी आवश्यक है।
प्रखर राष्ट्रचिंतक एवं ध्येयनिष्ठ क्रांतिधर्मा वीर सावरकर की लेखनी से निःसृत ‘हिंदुत्व’ को संपूर्णता में परिभाषित करती अत्यंत चिंतनपरक एवं पठनीय पुस्तक।
Main Aryaputra Hoon (PB)

Main Aryaputra Hoon (PB)
‘‘हे आर्य! कोई बाहरी आक्रमणकारी जब किसी अन्य देश में प्रवेश करता है तो बाहर से भीतर आता है या भीतर से बाहर जाता है?’’
‘‘यह कैसा प्रश्न हुआ, आर्या! स्वाभाविक रूप से बाहर से भीतर
आता है।’’
‘‘और इसी स्वाभाविक तर्क के आधार पर ही मैं भी एक प्रश्न पूछना चाहूँगी। अगर यह मान लिया जाए कि हम आर्य बाहर से आए थे तो पश्चिम दिशा से प्रवेश करने पर सर्वप्रथम सिंधु के तट पर बसना चाहिए था और फिर पूरब दिशा की ओर बढ़ना चाहिए था। लेकिन वेद और पुरातत्त्व के प्रमाण कहते हैं कि हम आर्य पहले सरस्वती के तट पर बसे थे, फिर सिंधु की ओर बढ़े। यही नहीं, सरस्वती काल से भी पहले हम आर्यों का इतिहास विश्व की प्राचीनतम नगरी शिव की काशी और मनु की अयोध्या से संबंधित रहा है। और ये दोनों नगर भारत भूखंड के भीतर सरस्वती नदी की पूरब दिशा में हैं अर्थात् हम आर्य पूरब से पश्चिम दिशा की ओर बढ़े थे।…तो फिर ये कैसे बाहरी (?) आर्य थे जो भीतर से बाहर (!!) की ओर बढ़े थे।…झूठ के पाँव नहीं होते हैं आर्य, ये झूठे इतिहासकार आपके प्रामाणिक प्रश्नों के उत्तर क्या ही देंगे, जब ये मेरे इस सरल तर्क और सामान्य तथ्य पर बात नहीं कर सकते।’’
‘‘असाधारण तर्क आर्या!’’
Main Aryaputra Hoon (HB)

Main Aryaputra Hoon (HB)
‘‘हे आर्य! कोई बाहरी आक्रमणकारी जब किसी अन्य देश में प्रवेश करता है तो बाहर से भीतर आता है या भीतर से बाहर जाता है?’’
‘‘यह कैसा प्रश्न हुआ, आर्या! स्वाभाविक रूप से बाहर से भीतर
आता है।’’
‘‘और इसी स्वाभाविक तर्क के आधार पर ही मैं भी एक प्रश्न पूछना चाहूँगी। अगर यह मान लिया जाए कि हम आर्य बाहर से आए थे तो पश्चिम दिशा से प्रवेश करने पर सर्वप्रथम सिंधु के तट पर बसना चाहिए था और फिर पूरब दिशा की ओर बढ़ना चाहिए था। लेकिन वेद और पुरातत्त्व के प्रमाण कहते हैं कि हम आर्य पहले सरस्वती के तट पर बसे थे, फिर सिंधु की ओर बढ़े। यही नहीं, सरस्वती काल से भी पहले हम आर्यों का इतिहास विश्व की प्राचीनतम नगरी शिव की काशी और मनु की अयोध्या से संबंधित रहा है। और ये दोनों नगर भारत भूखंड के भीतर सरस्वती नदी की पूरब दिशा में हैं अर्थात् हम आर्य पूरब से पश्चिम दिशा की ओर बढ़े थे।…तो फिर ये कैसे बाहरी (?) आर्य थे जो भीतर से बाहर (!!) की ओर बढ़े थे।…झूठ के पाँव नहीं होते हैं आर्य, ये झूठे इतिहासकार आपके प्रामाणिक प्रश्नों के उत्तर क्या ही देंगे, जब ये मेरे इस सरल तर्क और सामान्य तथ्य पर बात नहीं कर सकते।’’
‘‘असाधारण तर्क आर्या!’’
Popular Categories this Week
-
Prabhat Prakashan, Suggested Books
Hamare Shri Guruji – Hindi (PB)
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मेरी पुस्तक ‘हमारे गुरुजी’ को ‘अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर पुरस्कार’ प्रदान किया गया है। इसके लिए साहित्य अकादमी और मध्यप्रदेश सरकार का हृदय से धन्यवाद।
धन्यवाद उन पाठकों और दर्शकों का भी जिनके स्नेह के कारण यह पुस्तक एक लंबी यात्रा तय कर सकी। मैं अपना यह पुरस्कार मेरे सभी सुधी पाठकों को समर्पित करता हूं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन् 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी, लेकिन इसे वैचारिक आधार द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’ ने प्रदान किया था।
SKU: n/a -
Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
-25%
Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
THE AUTHOR
संदीप देवसंदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Shri Guruji : Prerak Vichar (Hindi)
विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्रीगुरुजी’ आध्यात्मिक विभूति थे। सन् 1940 से 1973 तक करीब 33 वर्ष संघ प्रमुख होने के नाते उन्होंने न केवल संघ को वैचारिक आधार प्रदान किया, उसके संविधान का निर्माण कराया, उसका देश भर में विस्तार किया, पूरे देश में संघ की शाखाओं को फैलाया।
SKU: n/a -
Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)
-33%
Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)
THE AUTHOR
संदीप देवसंदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
SKU: n/a -
Downloads, eBook, Sandeep Deo Books, Suggested Books
Kejriwal Truth or Conspiracy eBook
1- अन्ना – अरविंद आंदोनलन के पीछे खड़ी थी ‘टीम सोनिया’!
2- अन्ना के गिरफ़्तारी से लेकर ‘आआपा’ (AAP) के निर्माण तक सब कुछ था फ़िक्स!
3- भारत में राजनैतिक अस्थिरता के लिए विदेशी फ़ंडिंग का खेलअभी डाउनलोड करें और जाने ऐसे और भे सनसनी ख़ुलासे इस ebook में।
SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Kala Pani (PB)
काला पानी की भयंकरता का अनुमान इसी एक बात से लगाया जा सकता है कि इसका नाम सुनते ही आदमी सिहर उठता है। काला पानी की विभीषिका, यातना एवं त्रासदी किसी नरक से कम नहीं थी। विनायक दामोदर सावरकर चूँकि वहाँ आजीवन कारावास भोग रहे थे, अत: उनके द्वारा लिखित यह उपन्यास आँखों-देखे वर्णन का-सा पठन-सुख देता है। इस उपन्यास में मुख्य रूप से उन राजबंदियों के जीवन का वर्णन है, जो ब्रिटिश राज में अंडमान अथवा ‘काला पानी’ में सश्रम कारावास का भयानक दंड भुगत रहे थे। काला पानी के कैदियों पर कैसे-कैसे नृशंस अत्याचार एवं क्रूरतापूर्ण व्यवहार किए जाते थे, उनका तथ वहाँ की नारकीय स्थितियों का इसमें त्रासद वर्णन है। इसमें हत्यारों, लुटेरों, डाकुओं तथा क्रूर, स्वार्थी, व्यसनाधीन अपराधियों का जीवन-चित्र भी उकेरा गया है। उपन्यास में काला पानी के ऐसे-ऐसे सत्यों एवं तथ्यों का उद्घाटन हुआ है, जिन्हें पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
SKU: n/a
Fiction & Non-Fiction Books
-
Hindi Books, Prabhat Prakashan, रामायण/रामकथा
Ramayana Ki Kahaniyan- Harish Sharma
‘रामायण’ भारतीय पौराणिक ग्रंथों में सबसे पूज्य एवं जन-जन तक पहुँच रखनेवाला ग्रंथ है। रामकथा की पावन गंगा सदियों से हिंदू जन-मानस में प्रवाहित होती रही है। भारत ही नहीं, संसार भर में बसनेवाले हिंदू रामायण के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं।
रामकथा का प्रसार और प्रभाव इतना व्यापक है कि इससे संबंधित कथाओं-उपकथाओं की चर्चा बड़ी श्रद्धा के साथ की जाती है। रामकथा इतनी रसात्मक है कि बार-बार सुनने-जानने को मन सदैव उत्सुक रहता है।
विद्वान् लेखक ने पुस्तक को इस उद्देश्य के साथ लिखा है कि हमारी नई पीढ़ी भारतीय संस्कार, आदर्श एवं जीवन-मूल्यों को आत्मसात् कर सके। इन कहानियों में पर्वतों, नदियों, नगरों, योद्धाओं के पराक्रम, शस्त्रास्त्रों एवं दिव्यास्त्रों, मायावी युद्धों के साथ-साथ ऋषियों, महर्षियों एवं राजर्षियों के पावन चरित्रों का वर्णन अत्यंत सरल भाषा में किया गया है।
विश्वास है, प्रस्तुत पुस्तक को पढ़कर इसके आदर्शों, सदाचारों एवं सद्गुणों का अपने जीवन में अनुकरण-अनुसरण करेंगे।SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, Yoga and Pranayam
Sampoorna Sawasthya ke Liye Yoga
‘योग’ इस युग में सबसे अधिक प्रयोग में लाया जानेवाला शब्द बन गया है। बीते पच्चीस वर्षों में इसका उपयोग विभिन्न विचारों और अर्थों को व्यक्त करने के लिए किया गया। उनमें से इसका सबसे अधिक प्रयोग शारीरिक व्यायाम के लिए किया गया है।
यौगिक अभ्यासों पर फिलहाल जितनी भी पुस्तकें हैं, वे योग को महज धीमे जिमनास्टिक के रूप में प्रस्तुत करती हैं। योग पर कुछ और पुस्तकें भी हैं, जो इस विधा को पूरी तरह से हिंदू परंपरा में ढालती हैं, जिसे स्वीकार करना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। उन्हें एक ओर यौगिक मुद्राओं को करने में शारीरिक कठिनाई आती है तो दूसरी ओर वे योग के दार्शनिक पहलू को नहीं समझ पाते।
इस पुस्तक में दिए गए यौगिक अभ्यास का कोर्स पूरी तरह मौलिक है। यही नहीं, इसे अच्छा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य देने के मूल उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इस पुस्तक में, दैनिक जीवन के सभी पहलुओं, शरीर की दशाओं तथा हम सब के अस्तित्व से जुड़ी मानसिक स्थितियों का खयाल रखा गया है। यह पुस्तक किसी एक निश्चित आयु वर्ग को ध्यान में रखकर नहीं लिखी गई है, वरन् यह सबके लिए उपयोगी है।
स्वस्थ शरीर और मन के लिए योग का व्यावहारिक उपयोग बताती एक संपूर्ण पुस्तक।SKU: n/a
Popular Books
-
Bloomsbury, Religious & Spiritual Literature, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Ashutosh Maharaj – Mahayogi Ka Maharahasya
Bloomsbury, Religious & Spiritual Literature, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरणAshutosh Maharaj – Mahayogi Ka Maharahasya
This book is about Shri Ashutosh Maharaj Ji, whose disciples have a firm conviction that he is established in the highest state of Samadhi but the medical world considers him to be clinically dead.
SKU: n/a -
Bloomsbury, English Books, Religious & Spiritual Literature, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Mahayogi Ashutosh Maharaj – The Master and the Mystic
Bloomsbury, English Books, Religious & Spiritual Literature, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरणMahayogi Ashutosh Maharaj – The Master and the Mystic
This book is about Shri Ashutosh Maharaj Ji, whose disciples have a firm conviction that he is established in the highest state of Samadhi since 28th January, 2014.
SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, Suggested Books
Hamare Shri Guruji – Hindi (PB)
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मेरी पुस्तक ‘हमारे गुरुजी’ को ‘अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर पुरस्कार’ प्रदान किया गया है। इसके लिए साहित्य अकादमी और मध्यप्रदेश सरकार का हृदय से धन्यवाद।
धन्यवाद उन पाठकों और दर्शकों का भी जिनके स्नेह के कारण यह पुस्तक एक लंबी यात्रा तय कर सकी। मैं अपना यह पुरस्कार मेरे सभी सुधी पाठकों को समर्पित करता हूं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन् 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी, लेकिन इसे वैचारिक आधार द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’ ने प्रदान किया था।
SKU: n/a -
Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
-25%
Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
THE AUTHOR
संदीप देवसंदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
SKU: n/a
Recommendation For You
View All Recommendations-
Govindram Hasanand Prakashan, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Vishuddh Manusmriti – विशुद्ध मनुस्मृति
Govindram Hasanand Prakashan, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिVishuddh Manusmriti – विशुद्ध मनुस्मृति
स्मृतियों या धर्मशास्त्रों में मनुस्मृति सर्वाधिक प्रामाणिक आर्ष ग्रन्थ है। मनुस्मृति के परवर्तीकाल में अनेक स्मृतियाँ प्रकाश में आयीं किन्तु मनुस्मृति के तेज के समक्ष वे अपना प्रभाव न जमा सकीं, जबकि मनुस्मृति का वर्चस्व आज तक पूर्ववत् विद्यमान है। मनुस्मृति में एक ओर मानव-समाज के लिए श्रेष्ठतम सांसारिक कर्तव्यों का विधान है, तो साथ ही मानव को मुक्ति प्राप्त कराने वाले आध्यात्मिक उपदेशों का निरूपण भी है, इस प्रकार मनुस्मृति भौतिक एवं आध्यात्मिक आदेशों-उपदेशों का मिला-जुला अनूठा शास्त्र है।
इस प्रकार अनेकानेक विशेषताओं के कारण मनुस्मृति मानवमात्र के लिए उपयोगी एवं पठनीय है। किन्तु खेद के साथ कहना पड़ता है कि आज ऐसे उत्तम और प्रसिद्ध ग्रन्थ का पठन-पाठन लुप्त-प्रायः होने लगा है।
इसके प्रति लोगों में अश्रद्धा की भावना घर करती जा रही है। इसका कारण है-‘मनुस्मृति में प्रक्षेपों की भरमार होना‘। प्रक्षेपों के कारण मनुस्मृति का उज्ज्वल रूप गन्दा एवं विकृत हो गया है। परस्परविरुद्ध, प्रसंगविरोध एवं पक्षपातपूर्ण बातों से मनुस्मृति का वास्तविक स्वरूप और उसकी गरिमा विलुप्त हो गये हैं। एक महान तत्त्वद्रष्टा ऋषि के अनुपम शास्त्र को स्वार्थी प्रक्षेपकर्ताओं ने विविध प्रक्षेपों से दूषित करके न केवल इस शास्त्र के साथ अपितु महर्षि मनु के साथ भी अन्याय किया है।
प्रस्तुत संस्कारण का भाष्य पर्याप्त अनुसंधान के बाद किया गया है तथा प्रक्षिप्त माने गये श्लोकों को निकाल दिया गया है।
इसकी विषेषताएँ हैं-प्रक्षिप्त श्लोकों के अनुसंधान के मानदण्डों का निर्धारण और उनपर समीक्षा, विभिन्न शास्त्रों के प्रमाणों से पुष्ट अनुषीलन समीक्षा, मनु के वचनों से मनु के भावों की व्याख्या, मनु की मान्यता के अनुकूल और प्रसंगसम्मत अर्थ, भूमिका-भाग में मनुस्मृति का नया मूल्याकंन, महर्षि दयानन्द के अर्थ और भावार्थ, प्रथम बार हिन्दी-पदार्थ टीका प्रस्तुत, सभी अनुक्रमणिकाओं एवं सूचियों से युक्त, मनुस्मृति के प्रकरणों का उल्लेख।सम्पूर्ण श्लोकों के इस संस्करण में प्रक्षिप्त माने गये श्लोकों को उनके आरम्भ में ‘एस्टरिस्क‘(तारांकन) सितारे के चिन्ह के साथ प्रकाषित किया है। बिना चिन्ह वाले श्लोक मौलिक हैं।
SKU: n/a -
Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Kenopanishad
सामवेदीय तलवकार ब्राह्मण के अन्तर्गत वर्णित इस उपनिषद में भगवान के स्वरूप और प्रभाव-वर्णन के साथ परमार्थ ज्ञान की अनिर्वचनीयता, अभेदोपासना तथा यक्षोपाख्यान में भगवान का सर्वप्रेरकत्व एवं सर्वकर्तृत्व स्वरूप दर्शनीय है। सानुवाद शांकरभाष्य।
SKU: n/a -
Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Ishadi Nau Upanishad 66
विषय की दृष्टि से वेदों के तीन विभाग हैं- कर्म, उपासना और ज्ञान। इसी ज्ञानकाण्ड का नाम उपनिषद् या ‘ब्रह्मविद्या’ है। तत्त्व जिज्ञासुओं के कल्याणार्थ इस पुस्तक में नौ उपनिषद् (ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, श्वेताश्वतर) को एक साथ संगृहीत किया गया है। श्रीहरिकृष्ण गोयन्दका कृत अन्वय, सरल व्याख्या सहित।
SKU: n/a -
Brij ka Gulal
Herbal And Natural Gulal Pink (100 gm)
- होली पर केमिकल वाले कलर और गुलाल से स्किन पर रैशेज और एलर्जी हो सकती है. इस परेशानी से बचने के लिये ऑर्गेनिक और हर्बल कलर खरीदें जिनसे चेहरे और आंखों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता. इन कलर्स को खाने के सामान जैसे चुकंदर, हल्दी, लेमनग्रास और फूलों से बनाया जाता है.
SKU: n/a -
Govindram Hasanand Prakashan, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Upanishad Ek Saral Parichaya
भारतीय चिन्तन में ही नहीं, मानव-चिन्तन में उपनिषदों का चिन्तन उल्लेखनीय स्थान रखता है। उपनिषदें भारतीयों और आर्यों के आध्यात्मिक चिन्तन की विश्वसनीय स्रोत हैं। आधुनिक विचारक भी उपनिषदों को भारत का सर्वश्रेष्ठ दार्शनिक साहित्य स्वीकार करते हैं। मुक्तक उपनिषद् में 108 उपनिषदों का उल्लेख है।
मुख्य प्रामाणिक सर्वसम्मत 11 उपनिषदें कही जाती हैं। इन प्रसिद्ध उपनिषदों में सर्वाधिक विख्यात ‘ईशोपनिषद्‘ यजुर्वेद का अन्तिम 40वाँ अध्याय है। इसी प्रकार शतपथ ब्राह्मण का अन्तिम भाग ही बृहदारण्यक उपनिषद् है, इसमें अद्भुत वन-संस्कृति का नमूना देखने को मिलता है। ये प्रधान उपनिषदें हैं-(1) ईश, (2) केन, (3) कठ, (4) प्रश्न, (5) मुण्डक, (6) माण्डूक्य, (7) तैत्तिरीय, (8) ऐतरेय, (9) छान्दोग्य, (10) बृहदारण्यक (11) श्वेताश्वतर। आइए, ग्यारह उपनिषदों का सरल परिचय प्राप्त करें।SKU: n/a -
Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Abridged Shrimad Devibhagvat (Code1133)
यह पुराण परम पवित्र वेद की प्रसिद्ध श्रुतियों के अर्थ से अनुमोदित, अखिल शास्त्रों के रहस्य का स्रोत तथा आगमों में अपना प्रसिद्ध स्थान रखता है। यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पाँचों लक्षणों से पूर्ण हैं। पराम्बा भगवती के पवित्र आख्यानों से युक्त यह पुराण त्रितापों का शमन करने वाला तथा सिद्धियों का प्रदाता है।
SKU: n/a -
Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Shrimad Bhagvat Sudha Sagar, (Code1930)
श्रीमदभागवत भारतीय वाङ्मयका मुकुटमणि है। भगवान शुकदेवद्वारा महाराज परीक्षितको सुनाया गया भक्तिमार्गका तो मानो सोपानही है। इसके प्रत्येक श्लोकमें श्रीकृष्ण-प्रेमकी सुगन्धि है। इसमें साधन-ज्ञान, सिद्धज्ञान, साधन-भक्ति, सिद्धा-भक्ति, मर्यादा-मार्ग, अनुग्रह-मार्ग, द्वैत, अद्वैत समन्वयके साथ प्रेरणादायी विविध उपाख्यानों का अद्भुत संग्रह है।
SKU: n/a -
-
Hindi Books, Parimal Publications, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
VAIDIK KALIN VIDUSHIYA
इस पुस्तक में सम्पूर्ण वैदिक काल (ऋग्वैदिक काल से लेकर सूत्र ग्रन्थों तक) की विदुषियों के योगदान को प्रकाश में लाने का कार्य किया गया है। चारों वेदों में मन्त्र रचना करने वाली ऋषिकाओं तथा ब्राह्मण और उपनिषद् में अपने तार्किक विचारों से समाज को दिशा प्रदान करने वाली प्रबल मेधा सम्पन्न स्त्रियों के विचारों को जनसामान्य के सम्मुख लाया गया है। तत्कालीन समाज में स्त्रियों की सामाजिक स्थिति तथा परवर्ती समाज में उनकी दशा में ह्रास के कारणों को जानने का प्रयत्न किया गया है। आज के समाज में स्त्रियों की समस्याएँ तथा उनके सम्बन्ध में वेदों का दृष्टिकोण साथ ही स्त्रियों की दशा को सुधारने के कौन से सम्भावित उपाय हो सकते हैं, इनकी विवेचना की गई है।
SKU: n/a -
Brij ka Gulal
Herbal And Natural Gulal Yellow
- होली पर केमिकल वाले कलर और गुलाल से स्किन पर रैशेज और एलर्जी हो सकती है. इस परेशानी से बचने के लिये ऑर्गेनिक और हर्बल कलर खरीदें जिनसे चेहरे और आंखों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता. इन कलर्स को खाने के सामान जैसे चुकंदर, हल्दी, लेमनग्रास और फूलों से बनाया जाता है.
SKU: n/a -
Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Shrimad Devibhagvat Mahapuranam
यह पुराण परम पवित्र वेद की प्रसिद्ध श्रुतियों के अर्थ से अनुमोदित, अखिल शास्त्रों के रहस्य का स्रोत तथा आगमों में अपना प्रसिद्ध स्थान रखता है। यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पाँचों लक्षणों से पूर्ण हैं। पराम्बा भगवती के पवित्र आख्यानों से युक्त यह पुराण त्रितापों का शमन करने वाला तथा सिद्धियों का प्रदाता है।
SKU: n/a -
Brij ka Gulal
Herbal And Natural Gulal Green
- होली पर केमिकल वाले कलर और गुलाल से स्किन पर रैशेज और एलर्जी हो सकती है. इस परेशानी से बचने के लिये ऑर्गेनिक और हर्बल कलर खरीदें जिनसे चेहरे और आंखों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता. इन कलर्स को खाने के सामान जैसे चुकंदर, हल्दी, लेमनग्रास और फूलों से बनाया जाता है.
SKU: n/a -
Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Shri Shiv Mahapuranam (Code2020)
इस पुराण में परात्पर ब्रह्म शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। इसमें इन्हें पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है।
SKU: n/a -
Govindram Hasanand Prakashan, Hindi Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Vedas Sanhita Set of 4
-10%
Govindram Hasanand Prakashan, Hindi Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिVedas Sanhita Set of 4
वेद चार हैं, ऋग्वेद ज्ञानकाण्ड है, यजुर्वेद कर्मकाण्ड, सामवेद उपासनाकाण्ड तथा अथर्ववेद विज्ञानकाण्ड है। ऋग्वेद मस्तिष्क का वेद है, यजुर्वेद हाथों का वेद है, सामवेद हृदय का वेद है और अथर्ववेद उदर=पेट का वेद है।
वेद में भी परमात्मा के आदेश, उपदेश और सन्देश हैं। महर्षि दयानन्द के शब्दों में ‘वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है। वेद का पढ़ना-पढ़ाना और सुनना-सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है।‘ स्वयं वेद पढ़ो, उनपर आचरण करो।
हमने चारों वेदों को शुद्धतम छापने का संकल्प किया था। अपनी ओर से हमने पूर्ण प्रयत्न किया है। अब तक जितने भी संस्करण छपे हैं और जहाँ से भी छपे हैं, यह उनमें सर्वोत्कृष्ट हैं।
इस संस्करण की कुछ विशेषताएँ निम्न हैं-इन वेदों के ईक्ष्यवाचन प्रूफ रीडिंग में विषेष ध्यान रक्खा गया है। इतने शुद्ध, नयनाभिराम और सस्ते वेद अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं होंगे। इसकी टाइप अन्य संस्करणों की अपेक्षा मोटी रक्खी गई है। कम्प्यूटर की कम्पोजिंग, उत्तम कागज, बढ़िया छपाई, टिकाऊ पक्की जिल्द, इसकी अन्य विशेषताएँ हैं। पाठगण ! इन्हे आप स्वयं क्रय कीजिए और अन्यों को प्रेरित कीजिए।
गुरुकुलों में अभ्यास के लिए, वेद पाठ के लिए, वेद परायण यज्ञों के लिए तथा वेद-मन्त्रों को कण्ठस्त करने के लिए इन चारों वेदों (मूल मात्र) के यह संस्करण अत्यन्त उपर्युक्त हैं।
सामवेद में स्वर-चिह्न मन्त्रों पर जो 1, 2, 3, आदि संख्या डली हुई हैं, ये संख्याएँ उदात्त, अनुदात्त और स्वरित के चिह्न हैं। ऋग्वेद आदि अन्य वेदों में अनुदात्त का चिह्न पड़ी रेखा से और स्वरित का चिह्न खड़ी रेखा से दिखाया जाता है।
अनेक विशेषताओं से युक्त होने पर भी इसका मूल्य प्रचार-प्रसार की दृष्टि से रक्खा गया है। हम वेद का स्वाध्याय करें, वेद के अर्थों को जानें, वेद को जीवन में उतारकर अपने जीवन को सुजीवन बनाएँ।SKU: n/a -
Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Shwetashwatar-Upanishad
कृष्णयजुर्वेदीय इस उपनिषद् के वक्ता श्वेताश्वतर ऋषि हैं। इसमें जगतके कारणतत्त्वके रूपमें ब्रह्मका निरूपण करते हुए साधक, साधन और साध्य-विषयपर मार्मिक भाषामें प्रकाश डाला गया है। शंकराचार्य जी द्वारा करी गयी व्याख्या और हिन्दी अनुवाद सहित।
SKU: n/a


























































