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Sanatan Hindu Dharma ke Mool Tatva (PB)

Sanatan Hindu Dharma ke Mool Tatva (PB)
सनातन हिंदू धर्म के मूल तत्व (1916 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज, काशी द्वारा आखिरी बार प्रकाशित और अब लुप्त हो चुके दुर्लभ ग्रंथ SANATANA DHARMA: AN ELEMENTARY TEXT- BOOK of Hindu Religion and Ethics का हिंदी अनुवाद)
बनारस के सेन्ट्रल हिन्दू कॉलेज द्वारा सनातन धर्म पर तीन पुस्तकों की श्रृंखला प्रकाशित की गई थी। इनमें ‘एन एलिमेंटरी टैक्स्ट बुक ऑफ सनातन धर्म’ का प्रथम प्रकाशन सन् 1902 में तथा कॉलेज द्वारा अंतिम प्रकाशन 1916 में हुआ था। इंटरनेट पर यह पुस्तक अंग्रेजी में मिल जाती है किन्तु हिन्दी का विशाल पाठक-वर्ग आज तक इस महत्वपूर्ण पुस्तक से वंचित था और इसके हिन्दी अनुवाद की मांग कर रहा था। इस मांग को पूरा किया हिन्दी के चर्चित पत्रकार, चिंतक और सुप्रसिद्ध लेखक संदीप देव की कंपनी Kapot Media Network ने। कपोत ने इस पुस्तक का सरल-सुबोध हिन्दी अनुवाद प्रकाशित कर बेहद सराहनीय कार्य किया है। इस तरह से एक सदी से भी अधिक समय बाद इस पुस्तक का हिन्दी संस्करण प्रकाशित हो रहा है।
Makhana (Phool Makhana) Hand Picked Foxnuts (100 gm)
Lal Mirch ka Bharua Achar : Red Chilli Pickle (250g)
Indulge in the rich, tangy taste of our homemade authentic mango pickle, crafted with handpicked, ripe mangoes and a blend of traditional spices. Each jar is a labor of love, ensuring that you experience the vibrant flavors of Indian cuisine right at your table. Perfect as a side dish or a flavorful accompaniment to any meal, our mango pickle captures the essence of summer all year round. Enjoy it with rice, parathas, or even as a zesty topping on your favorite snacks! Delight your taste buds with our Authentic Homemade Mango Pickle, crafted from the finest, handpicked mangoes and traditional spices.…
Haridarshan Chanda Tika
Narendra Modi ka Dhokha aur Sach – Bachpan se Rajnitik Jeevan ka Safar (PB)

Narendra Modi ka Dhokha aur Sach – Bachpan se Rajnitik Jeevan ka Safar (PB)
The veracity of the claims related to Narendra Modi’s life and the way his name came out as anti-Muslim after the Godhra riots made him known as the Hindu Hriday Samrat. After becoming the Prime Minister, has he become secular or is he secretly carrying forward the agenda of Hindutva by taking Muslims into confidence? After becoming the PM,what changes did he make in the appeasement politics that was already going on? To what extent could he wash away the stain of Godhra riots that was on his forehead? Is winning the trust of the Muslim community just a show off or has anything been done for it? Could it bring any change for Hindus or are Hindus still politically neglected like before? Is Sanatan culture being revived under Modi government? What is the situation of anti-Modi and development of the country?
Kamsutram (HB) : कामसूत्रम्

Kamsutram (HB) : कामसूत्रम्
कामसूत्र का संछिप्त विवरण : वात्सायन के कामसूत्र में कुल सात भाग हैं | प्रत्येक भाग कई अध्यायों में बंटे हैं| प्रत्येक अध्याय में कई श्लोक हैं | साहित्य प्रेमियों की सुविधा के लिए पहले संस्कृत और उसके नीचे उसका हिंदी अनुवाद दिया गया | महर्षि वात्सायन का जन्म बिहार राज्य में हुआ था और प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण साहित्यकारों में से एक हैं | महर्षि वात्सायन ने कामसूत्र में न केवल दांपत्य जीवन का श्रंगार किया है वरन कला, शिल्पकला एवं साहित्य को भी सम्पादित किया है………
Bhaarateey Chintan Me Karm Evan Punarjanm

Bhaarateey Chintan Me Karm Evan Punarjanm
यह पुस्तक भारतीय चिन्तनधारा का प्रायः सर्वसम्मत सिद्धान्त है। कर्म और पुनर्जन्म भारतीय दर्शन-परम्परा में वस्तुतः परस्पराश्रित माने गये हैं। कर्म नहीं तो पुनर्जन्म नहीं, पुनर्जन्म नहीं तो दृश्य कर्म नहीं। कारण-कार्य सिद्धान्त सृष्टि का सार्वभौम सिद्धान्त है तथा कर्म एवं पुनर्जन्म का सिद्धान्त इस कारणता नियम पर ही आधृत होने से सर्वथा तर्कसङ्ग एवं समीचीन है। प्रस्तुत ग्रन्थ इस सर्वमान्य एवं रहस्यात्मक ‘कर्म और पुनर्जन्म सिद्धान्त’ के विविध आयामों पर आधारित विद्वतापूर्ण 46 शोधपत्रों का सङ्कलन है। यह ग्रन्थ संस्कृत एवं भारतीय विद्या के मूर्धन्य विचारकों ने विविध दृष्टिकोणें से कर्म एवं पुनर्जन्म के सिद्धान्त पर विपुल विचार-सामग्री प्रस्तुत की है, जो जिज्ञासू अध्येताओं के लिए अवश्य ही लाभप्रद होगी।
Hindus in Hindu Rashtra (Eighth-Class Citizens and Victims of State-Sanctioned Apartheid)

Hindus in Hindu Rashtra (Eighth-Class Citizens and Victims of State-Sanctioned Apartheid)
To those who claim we are now living in a totalitarian, fascist, Hindu Rashtra, one
must ask: What kind of a Hindu Rashtra is this where a billion-strong Hindus have
been, through our parliament, through our courts, our education system, and our
constitution, reduced to not just second-class but, rather, eighth-class citizens?
What kind of Hindu Rashtra is this where Ram Navami, Hanuman Jayanti, Durga
pooja processions, and even Garba celebrations, are attacked and stoned with
impunity? What kind of Hindu Rashtra is this where a sitting Prime minister says
minorities have the first right to resources? What kind of Hindu Rashtra is this
where Hindus are forced to be refugees in their own land, where one can settle
40,000 Rohingya Muslims but not 700,000 Kashmiri Hindus, the land’s original
inhabitants; where the judiciary says it is too late to prosecute those who raped,
murdered, and ethnically cleansed lacs of Hindus? What kind of Hindu Rashtra is
this where Hindu temples are exclusively controlled by the State, where Hindus
must beg for Waqf land to celebrate their festival while the government usurps
hundreds of thousands of acres of temple land and is responsible for more than
100,000 temples losing lacs of crores in rental income? What kind of Hindu Rashtra
is this where Right to Education Act discriminates only against Hindus and their
schools, forcing tens of thousands of them to shut down? What kind of Hindu
Rashtra is this where monsters like Aurangzeb and Tipu who perpetrated large-scale
Hindu genocides are eulogised through State sponsored publications, naming of
roads and cities, and organising of festivals? What kind of Hindu Rashtra is this
where a law was about to be enacted through with only the Hindus would have been
held guilty in a communal riot even if they were in a minority for example in
Kashmir? What kind of Hindu Rashtra is this where court judgments like the
Sabarimala and legislative enactments like the Hindu Code Bill purport to reform
only Hindu religious practices but dare not touch practices of other religions, and if
they do, the decisions are promptly reversed like in the Shah Bano case? What kind
of Hindu Rashtra is this where The Places of Worship Act continues to deny the
Hindus their legitimate right to correct historical injustices and reclaim thousands
of demolished temples? What kind of Hindu Rashtra is this where the Waqf Act
gives overarching powers to Muslims to declare a 1500-year-old Hindu temple to be
on Islamic land when Islam is only 1300 years old? If this is how a Hindu is rewarded
in a Hindu Rashtra, he’d much rather be in a Muslim Rashtra because then at least
there’d be no pretence of equality – a Kafir will get what he deserves. In this searing
commentary penned with clinical precision, the author shreds to smithereens once
and for all the guilt-tripping, self-loathing fake narrative that Hindus have been
duped with since Independence. There is no pretence, no political correctness, only
unvarnished truth – that the Hindus are living under State-sanctioned Apartheid.
Hindu Rashtr Kya? kyon ? kaise ?

Hindu Rashtr Kya? kyon ? kaise ?
ऋषितुल्य श्रद्धेय Rameshwar Mishra Pankaj जी, महान विदुषी Kusumlata Kedia जी और स्वामी निगमानंद जी द्वारा लिखित इस पुस्तक की बहुत दिनों से प्रतीक्षा थी. पुस्तक प्रकाशित हो गयी है, ये एक अद्भुत रचना है. पढ़िये और जानिये हिन्दू राष्ट्र क्या? क्यों? कैसे?
Do Seengon Wala Rishi
“क्या आपने उस राजा के बारे में सुना है, जिसने कबूतर की रक्षा के लिए अपना मांस बलिदान कर दिया था?या उस सिंहासन के बारे में, जो जिस किसी को भी दिया जाता है, उसमें न्याय प्रदान करने की अद्वितीय क्षमता आ जाती है?और उस मूर्तिकार के बारे में क्या खयाल है, जो बिना हाथों के भी शानदार मूर्तियाँ बनाने में कामयाब रहा?देवताओं के बीच झगड़ों और विवादों से राजाओं की भलाई के लिए महान् ऋषियों और सामान्य मनुष्यों के गुण।सुप्रसिद्ध लेखिका सुधा मूर्ति ने भारतीय पौराणिक कथाओं की अल्पज्ञात-ज्ञात कहानियों को नई भावभूमि के साथ प्रस्तुत किया है। मनभावन चित्रों के साथ और सादगी भरे अंदाज में सुनाई गई, ‘दो सींगों वाला साधु’ निश्चित रूप से प्रिय कहानीकार के प्रशंसकों को प्रसन्न करेगा।”
NETAJI GUMNAMI BABA AUR SARKARI JHOOTH

NETAJI GUMNAMI BABA AUR SARKARI JHOOTH
क्या उत्तर प्रदेश में दशकों तक अज्ञातवास करने वाले गुमनामी बाबा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस थे? गहन शोध के पश्चात्, चन्द्रचूड़ घोष और अनुज धर इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि सत्य हमारी कल्पनाओं से कहीं अधिक विचित्र है। वे नेताजी ही थे। और यदि यह सत्य है, तो क्यों सरकार के आधिकारिक कथनों एवं जस्टिस विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट का निष्कर्ष इससे भिन्न हैं? नेताजी कब और कैसे भारत लौटे? क्यों इतने वर्षों तक वे अपने ही देश में छिपकर रहे? क्यों सरकार इस सत्य को हम देशवासियों से छिपा रही है?—इन सभी प्रश्नों के समाधान आपको विचलित कर देंगे। जानिए: कैसे कई दशकों से इस देश की जनता की आँखों में धूल झोंकी जा रही है। कैसे फ़ॉरेन्सिक विज्ञान ने नाम पर बनाईं गईं DNA एवं हस्तलेख की झूठी रिपोर्टें और संसद में दिए गए झूठे वक्तव्य। …सरकार नहीं चाहती कि आप ये सब कुछ जानें।
Indra Vijay

Indra Vijay
An Old and Rare Book
पण्डित मधुसूदन ओझा ग्रन्थमाला 6 – इन्द्रविजयः – पण्डित मधुसूदन ओझा शोध प्रकोष्ठ | Pandit Madhusudan Ojha Granthamala 6 – Indravijay – Pt. Madhusudan Ojha Research Cell
Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)

Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
THE AUTHOR
संदीप देव
संदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
Mahatma Gandhi Aur Unki Mahila Mitr | महात्मा गांधी और उनकी महिला मित्र

Mahatma Gandhi Aur Unki Mahila Mitr | महात्मा गांधी और उनकी महिला मित्र
एल्यानोर मॉर्टोन ने सन् 1954 में एक पुस्तक लिखी थी वीमेन बिहाइंड महात्मा गाधी और उसके बाद से इस विषय में कोई पुस्तक नहीं लिखी गयी । तमाम महिलाओं की निकटता गांधीजी के जीवन में एक आकर्षक अध्याय की तरह है खासकर तब जब हम उनके जीवन का अध्ययन ब्रह्मचर्य के दर्शन के साथ करते हैं । यह कृति एक व्यक्ति के पीछे के व्यक्ति और आत्मकथा के भीतर की आत्मकथा की तरह है ।
एक दर्जन से अधिक महिलाए ऐसी थीं, जो एक या अलगअलग समय मे महात्मा गाधी से निकटता के साथ जुडी हुई थीं । कस्तुरबा से संबंधित आख्यान गांधीजी के जीवन के एक अलग अध्याय की तरह है । लेकिन इन महिलाओं मे गांधीजी ने अपनी माता पुतलीबाई और सर्वज्ञ अर्द्धांगिनी कस्तूरबा का प्रतिरूप देखा । उनमें से छह महिलाएं विदेशी मूल की थीं और एक्? अनिवासी भारतीय । मिली ग्राहम पोलक, निला क्रैम कूक और मीरा बहन जैसी कुछ महिलाएँ उस समय की महिलाओं में बुद्धिजीवी कही जा सकती थीं । वे महिलाए महात्मा गाधी के लिए बेटी बहनें और माताएं थीं । हालाकि सरलादेवी चौधरानी अपवाद की तरह थी । गांधीजी उन्हें अपनी आध्यात्मिक पत्नी कहा करते थे ।
ब्रह्मचर्य, गांधी और उनकी सहयोगी महिलाएं बहुत ही आकर्षक विषय है । लेखक ने इस विषय पर आठ वर्ष रवे अधिक तक शोध किया है और उसके बाद इसे पुस्तक के रूप मे कलमबद्ध किया है । नवजीवन ट्रस्ट के सहयोग एरे भारत सरकार के सूचना एव प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक कॉलेक्टेड वर्क्स इस सम्पूर्ण काल के लिए उनकी बाइबिल की तरह है, जिसे व्यापक तौर पर इसमें उद्धृत किया गया है ।
गांधीजी के बारे में पढना कभी भी उबाऊ नहीं रहा । वह हमेशा से ही अपूर्वानुमेय अपरम्परागत नवप्रवर्तनशील, दयालु और निष्कपट रहे । चेहरे पर भ्रान्तिकारी मुस्कान मौजूद होने के बावजूद वह शरारती थे । अपने सम्पूर्ण जीवन काल मे उन्हे अपने विचारों का कडू। प्रतिरोध सहना पड़ा था । उनका प्रतिरोध करने वालो मे से ज्यादा उनके करीबी दरबारी ही थे । गांधीजी ने एक्? बार श्रीमती पोलक को कहा था कि उनका (श्रीमती पोलक का) जन्म उनके एवं उनरने जुडी महिला सहयोगिनो के अनुप्रयोग के लिए ही हुआ है । गांधीजी अपनी ही पीड़ा से आंतरिक शांति हासिल करते रहे थे ।
रोमा रौलां ने उन्हें दूसरे ईसा मसीह की संज्ञा दी थी । ठीक ईसा मसीह की तरह ही गाँधीजी की सहनशीलता भी पीडा. मौत और मृतोत्थान का प्रतीक बन गयी । यह पुस्तक गाँधीजी के नजरिये से स्त्रीत्व के तमाम पहलुओ को प्रदर्शित करती है । गांधीजी वैसे इक्कादुक्का लोगों में शुमार है, जिन्होंने खुद को स्वनिर्मित हिजड़ा कहकर सेक्स की विभाजन रेखा समाप्त करने का दुस्साहस किया था ।
गाँधीजी महिलाओं की संगत में हमेशा राहत महसूस करते थे । सभी महिला सहयोगिनी ने उन्हें समान महत्त्व दिया । ब्रह्मचर्य महात्मा गाँधीजी और उनकी महिला मित्र पांच दशक तक गांधीजी और उन महिलाओं के बीच संवाद का विश्वसनीय दस्तावेज है, जो भारतीय सौंदर्य परम्परा में वर्णित सम्पूर्ण रसों से सराबोर थीं ।
बाल्मीकि रामायण- Valmiki Ramayana
स्वामी जगदीष्वरानन्द सरस्वती आर्य जगत् के सुप्रसिद्ध विद्वान्, निरन्तर साहित्य साधना में संलग्न, रामायण के समालोचक एवं मर्मज्ञ लेखक थे।
इस पुस्तक द्वारा आप अपने प्राचीन गौरवमय इतिहास की झांकी, मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन का अध्ययन, प्राचीन राज्यव्यवस्था का स्वरुप देख सकते हैं।
यदि आप भ्रातृ-प्रेम नारी-गौरव आदर्ष सेवक, आदर्ष मित्र, आदर्ष राज्य, आदर्ष पुत्र के स्वरुपों का अवलोकन या आप रामायण का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहते हैं तो यह रामायण अवष्य पढ़ें।
यह ग्रन्थ सैकड़ों टिप्पणियों से समलंकृत सम्पूर्ण रामायण 7000 श्लोकों में पूर्ण हुआ है।
Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)

Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)
THE AUTHOR
संदीप देव
संदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
Hindutva (PB)
‘हिंदुत्व’ एक ऐसा शब्द है, जो संपूर्ण मानवजाति के लिए आज भी अपूर्व स्फूर्ति तथा चैतन्य का स्रोत बना हुआ है। इस शब्द से संबद्ध विचार, महान् ध्येय, रीति-रिवाज तथा भावनाएँ कितनी विविध तथा श्रेष्ठ हैं। ‘हिंदुत्व’ कोई सामान्य शब्द नहीं है। यह एक परंपरा है। एक इतिहास है। यह इतिहास केवल धार्मिक अथवा आध्यात्मिक इतिहास नहीं है। अनेक बार ‘हिंदुत्व’ शब्द को उसी के समान किसी अन्य शब्द के समतुल्य मानकर बड़ी भूल की जाती है। वैसे यह इतिहास मात्र नहीं है, वरन् एक सर्वसंग्रही इतिहास है। ‘हिंदू धर्म’, यह शब्द ‘हिंदुत्व’ से ही उपजा उसी का एक रूप है, उसी का एक अंश है।
‘हिंदुत्व’ शब्द में एक राष्ट्र, हिंदूजाति के अस्तित्व तथा पराक्रम के सम्मिलित होने का बोध होता है। इसीलिए ‘हिंदुत्व’ शब्द का निश्चित आशय ज्ञात करने के लिए पहले हम लोगों को यह समझना आवश्यक है कि ‘हिंदू’ किसे कहते हैं। इस शब्द ने लाखों लोगों के मानस को किस प्रकार प्रभावित किया है तथा समाज के उत्तमोत्तम पुरुषों ने, शूर तथा साहसी वीरों ने इसी नाम के लिए अपनी भक्तिपूर्ण निष्ठा क्यों अर्पित की, इसका रहस्य ज्ञात करना भी आवश्यक है।
प्रखर राष्ट्रचिंतक एवं ध्येयनिष्ठ क्रांतिधर्मा वीर सावरकर की लेखनी से निःसृत ‘हिंदुत्व’ को संपूर्णता में परिभाषित करती अत्यंत चिंतनपरक एवं पठनीय पुस्तक।
Kala Pani (PB)
काला पानी की भयंकरता का अनुमान इसी एक बात से लगाया जा सकता है कि इसका नाम सुनते ही आदमी सिहर उठता है। काला पानी की विभीषिका, यातना एवं त्रासदी किसी नरक से कम नहीं थी। विनायक दामोदर सावरकर चूँकि वहाँ आजीवन कारावास भोग रहे थे, अत: उनके द्वारा लिखित यह उपन्यास आँखों-देखे वर्णन का-सा पठन-सुख देता है। इस उपन्यास में मुख्य रूप से उन राजबंदियों के जीवन का वर्णन है, जो ब्रिटिश राज में अंडमान अथवा ‘काला पानी’ में सश्रम कारावास का भयानक दंड भुगत रहे थे। काला पानी के कैदियों पर कैसे-कैसे नृशंस अत्याचार एवं क्रूरतापूर्ण व्यवहार किए जाते थे, उनका तथ वहाँ की नारकीय स्थितियों का इसमें त्रासद वर्णन है। इसमें हत्यारों, लुटेरों, डाकुओं तथा क्रूर, स्वार्थी, व्यसनाधीन अपराधियों का जीवन-चित्र भी उकेरा गया है। उपन्यास में काला पानी के ऐसे-ऐसे सत्यों एवं तथ्यों का उद्घाटन हुआ है, जिन्हें पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
Mopla (Hindi) – Veer Savarkar
मोपला अर्थात मुझे इससे क्या यह पुस्तक केरल में हुए हिन्दू नरसंहार के ऊपर आधारित है एवं इस पुस्तक में हिंदुओं की कमज़ोरी पर ध्यान दिया गया है । हर हिन्दू को यह पुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए और वीर सावरकर ने हिंदुओ की जिस कमज़ोरी को इस पुस्तक में बताया है उस से छुटकारा पाना चाहिए । मालाबार का भीषण रक्त पात व हिंदू वीनाओं का मार्मिक उपन्यास आधुनिक युग के महान क्रांतिकारी Vinayak Damodar Savarkar की लेखनी से लिखा मुसलमानों की मनोवृति का यथार्थ जीवन चित्रण।
Main Aryaputra Hoon (PB)

Main Aryaputra Hoon (PB)
‘‘हे आर्य! कोई बाहरी आक्रमणकारी जब किसी अन्य देश में प्रवेश करता है तो बाहर से भीतर आता है या भीतर से बाहर जाता है?’’
‘‘यह कैसा प्रश्न हुआ, आर्या! स्वाभाविक रूप से बाहर से भीतर
आता है।’’
‘‘और इसी स्वाभाविक तर्क के आधार पर ही मैं भी एक प्रश्न पूछना चाहूँगी। अगर यह मान लिया जाए कि हम आर्य बाहर से आए थे तो पश्चिम दिशा से प्रवेश करने पर सर्वप्रथम सिंधु के तट पर बसना चाहिए था और फिर पूरब दिशा की ओर बढ़ना चाहिए था। लेकिन वेद और पुरातत्त्व के प्रमाण कहते हैं कि हम आर्य पहले सरस्वती के तट पर बसे थे, फिर सिंधु की ओर बढ़े। यही नहीं, सरस्वती काल से भी पहले हम आर्यों का इतिहास विश्व की प्राचीनतम नगरी शिव की काशी और मनु की अयोध्या से संबंधित रहा है। और ये दोनों नगर भारत भूखंड के भीतर सरस्वती नदी की पूरब दिशा में हैं अर्थात् हम आर्य पूरब से पश्चिम दिशा की ओर बढ़े थे।…तो फिर ये कैसे बाहरी (?) आर्य थे जो भीतर से बाहर (!!) की ओर बढ़े थे।…झूठ के पाँव नहीं होते हैं आर्य, ये झूठे इतिहासकार आपके प्रामाणिक प्रश्नों के उत्तर क्या ही देंगे, जब ये मेरे इस सरल तर्क और सामान्य तथ्य पर बात नहीं कर सकते।’’
‘‘असाधारण तर्क आर्या!’’
Main Aryaputra Hoon (HB)

Main Aryaputra Hoon (HB)
‘‘हे आर्य! कोई बाहरी आक्रमणकारी जब किसी अन्य देश में प्रवेश करता है तो बाहर से भीतर आता है या भीतर से बाहर जाता है?’’
‘‘यह कैसा प्रश्न हुआ, आर्या! स्वाभाविक रूप से बाहर से भीतर
आता है।’’
‘‘और इसी स्वाभाविक तर्क के आधार पर ही मैं भी एक प्रश्न पूछना चाहूँगी। अगर यह मान लिया जाए कि हम आर्य बाहर से आए थे तो पश्चिम दिशा से प्रवेश करने पर सर्वप्रथम सिंधु के तट पर बसना चाहिए था और फिर पूरब दिशा की ओर बढ़ना चाहिए था। लेकिन वेद और पुरातत्त्व के प्रमाण कहते हैं कि हम आर्य पहले सरस्वती के तट पर बसे थे, फिर सिंधु की ओर बढ़े। यही नहीं, सरस्वती काल से भी पहले हम आर्यों का इतिहास विश्व की प्राचीनतम नगरी शिव की काशी और मनु की अयोध्या से संबंधित रहा है। और ये दोनों नगर भारत भूखंड के भीतर सरस्वती नदी की पूरब दिशा में हैं अर्थात् हम आर्य पूरब से पश्चिम दिशा की ओर बढ़े थे।…तो फिर ये कैसे बाहरी (?) आर्य थे जो भीतर से बाहर (!!) की ओर बढ़े थे।…झूठ के पाँव नहीं होते हैं आर्य, ये झूठे इतिहासकार आपके प्रामाणिक प्रश्नों के उत्तर क्या ही देंगे, जब ये मेरे इस सरल तर्क और सामान्य तथ्य पर बात नहीं कर सकते।’’
‘‘असाधारण तर्क आर्या!’’
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Prabhat Prakashan, Suggested Books
Hamare Shri Guruji – Hindi (PB)
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मेरी पुस्तक ‘हमारे गुरुजी’ को ‘अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर पुरस्कार’ प्रदान किया गया है। इसके लिए साहित्य अकादमी और मध्यप्रदेश सरकार का हृदय से धन्यवाद।
धन्यवाद उन पाठकों और दर्शकों का भी जिनके स्नेह के कारण यह पुस्तक एक लंबी यात्रा तय कर सकी। मैं अपना यह पुरस्कार मेरे सभी सुधी पाठकों को समर्पित करता हूं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन् 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी, लेकिन इसे वैचारिक आधार द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’ ने प्रदान किया था।
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
THE AUTHOR
संदीप देवसंदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
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Prabhat Prakashan, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Shri Guruji : Prerak Vichar (Hindi)
विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्रीगुरुजी’ आध्यात्मिक विभूति थे। सन् 1940 से 1973 तक करीब 33 वर्ष संघ प्रमुख होने के नाते उन्होंने न केवल संघ को वैचारिक आधार प्रदान किया, उसके संविधान का निर्माण कराया, उसका देश भर में विस्तार किया, पूरे देश में संघ की शाखाओं को फैलाया।
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Sajish Ki Kahani Tathyo Ki Zubani (Hindi, Sandeep Deo)
THE AUTHOR
संदीप देवसंदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
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Kejriwal Truth or Conspiracy eBook
1- अन्ना – अरविंद आंदोनलन के पीछे खड़ी थी ‘टीम सोनिया’!
2- अन्ना के गिरफ़्तारी से लेकर ‘आआपा’ (AAP) के निर्माण तक सब कुछ था फ़िक्स!
3- भारत में राजनैतिक अस्थिरता के लिए विदेशी फ़ंडिंग का खेलअभी डाउनलोड करें और जाने ऐसे और भे सनसनी ख़ुलासे इस ebook में।
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Prabhat Prakashan, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Kala Pani (PB)
काला पानी की भयंकरता का अनुमान इसी एक बात से लगाया जा सकता है कि इसका नाम सुनते ही आदमी सिहर उठता है। काला पानी की विभीषिका, यातना एवं त्रासदी किसी नरक से कम नहीं थी। विनायक दामोदर सावरकर चूँकि वहाँ आजीवन कारावास भोग रहे थे, अत: उनके द्वारा लिखित यह उपन्यास आँखों-देखे वर्णन का-सा पठन-सुख देता है। इस उपन्यास में मुख्य रूप से उन राजबंदियों के जीवन का वर्णन है, जो ब्रिटिश राज में अंडमान अथवा ‘काला पानी’ में सश्रम कारावास का भयानक दंड भुगत रहे थे। काला पानी के कैदियों पर कैसे-कैसे नृशंस अत्याचार एवं क्रूरतापूर्ण व्यवहार किए जाते थे, उनका तथ वहाँ की नारकीय स्थितियों का इसमें त्रासद वर्णन है। इसमें हत्यारों, लुटेरों, डाकुओं तथा क्रूर, स्वार्थी, व्यसनाधीन अपराधियों का जीवन-चित्र भी उकेरा गया है। उपन्यास में काला पानी के ऐसे-ऐसे सत्यों एवं तथ्यों का उद्घाटन हुआ है, जिन्हें पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
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Fiction & Non-Fiction Books
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, रामायण/रामकथा
Ramayana Ki Kahaniyan- Harish Sharma
‘रामायण’ भारतीय पौराणिक ग्रंथों में सबसे पूज्य एवं जन-जन तक पहुँच रखनेवाला ग्रंथ है। रामकथा की पावन गंगा सदियों से हिंदू जन-मानस में प्रवाहित होती रही है। भारत ही नहीं, संसार भर में बसनेवाले हिंदू रामायण के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं।
रामकथा का प्रसार और प्रभाव इतना व्यापक है कि इससे संबंधित कथाओं-उपकथाओं की चर्चा बड़ी श्रद्धा के साथ की जाती है। रामकथा इतनी रसात्मक है कि बार-बार सुनने-जानने को मन सदैव उत्सुक रहता है।
विद्वान् लेखक ने पुस्तक को इस उद्देश्य के साथ लिखा है कि हमारी नई पीढ़ी भारतीय संस्कार, आदर्श एवं जीवन-मूल्यों को आत्मसात् कर सके। इन कहानियों में पर्वतों, नदियों, नगरों, योद्धाओं के पराक्रम, शस्त्रास्त्रों एवं दिव्यास्त्रों, मायावी युद्धों के साथ-साथ ऋषियों, महर्षियों एवं राजर्षियों के पावन चरित्रों का वर्णन अत्यंत सरल भाषा में किया गया है।
विश्वास है, प्रस्तुत पुस्तक को पढ़कर इसके आदर्शों, सदाचारों एवं सद्गुणों का अपने जीवन में अनुकरण-अनुसरण करेंगे।SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, Yoga and Pranayam
Sampoorna Sawasthya ke Liye Yoga
‘योग’ इस युग में सबसे अधिक प्रयोग में लाया जानेवाला शब्द बन गया है। बीते पच्चीस वर्षों में इसका उपयोग विभिन्न विचारों और अर्थों को व्यक्त करने के लिए किया गया। उनमें से इसका सबसे अधिक प्रयोग शारीरिक व्यायाम के लिए किया गया है।
यौगिक अभ्यासों पर फिलहाल जितनी भी पुस्तकें हैं, वे योग को महज धीमे जिमनास्टिक के रूप में प्रस्तुत करती हैं। योग पर कुछ और पुस्तकें भी हैं, जो इस विधा को पूरी तरह से हिंदू परंपरा में ढालती हैं, जिसे स्वीकार करना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। उन्हें एक ओर यौगिक मुद्राओं को करने में शारीरिक कठिनाई आती है तो दूसरी ओर वे योग के दार्शनिक पहलू को नहीं समझ पाते।
इस पुस्तक में दिए गए यौगिक अभ्यास का कोर्स पूरी तरह मौलिक है। यही नहीं, इसे अच्छा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य देने के मूल उद्देश्य से तैयार किया गया है।
इस पुस्तक में, दैनिक जीवन के सभी पहलुओं, शरीर की दशाओं तथा हम सब के अस्तित्व से जुड़ी मानसिक स्थितियों का खयाल रखा गया है। यह पुस्तक किसी एक निश्चित आयु वर्ग को ध्यान में रखकर नहीं लिखी गई है, वरन् यह सबके लिए उपयोगी है।
स्वस्थ शरीर और मन के लिए योग का व्यावहारिक उपयोग बताती एक संपूर्ण पुस्तक।SKU: n/a
Popular Books
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Bloomsbury, Religious & Spiritual Literature, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Ashutosh Maharaj – Mahayogi Ka Maharahasya
Bloomsbury, Religious & Spiritual Literature, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरणAshutosh Maharaj – Mahayogi Ka Maharahasya
This book is about Shri Ashutosh Maharaj Ji, whose disciples have a firm conviction that he is established in the highest state of Samadhi but the medical world considers him to be clinically dead.
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Bloomsbury, English Books, Religious & Spiritual Literature, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Mahayogi Ashutosh Maharaj – The Master and the Mystic
Bloomsbury, English Books, Religious & Spiritual Literature, Suggested Books, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरणMahayogi Ashutosh Maharaj – The Master and the Mystic
This book is about Shri Ashutosh Maharaj Ji, whose disciples have a firm conviction that he is established in the highest state of Samadhi since 28th January, 2014.
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Prabhat Prakashan, Suggested Books
Hamare Shri Guruji – Hindi (PB)
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मेरी पुस्तक ‘हमारे गुरुजी’ को ‘अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर पुरस्कार’ प्रदान किया गया है। इसके लिए साहित्य अकादमी और मध्यप्रदेश सरकार का हृदय से धन्यवाद।
धन्यवाद उन पाठकों और दर्शकों का भी जिनके स्नेह के कारण यह पुस्तक एक लंबी यात्रा तय कर सकी। मैं अपना यह पुरस्कार मेरे सभी सुधी पाठकों को समर्पित करता हूं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन् 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी, लेकिन इसे वैचारिक आधार द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’ ने प्रदान किया था।
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Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
-25%
Kapot Prakashan, On Sale, Sandeep Deo Books, Suggested Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Kahani Communisto Ki: Khand 1 (1917-1964)
THE AUTHOR
संदीप देवसंदीप देव मूलतः समाज शास्त्र और इतिहास के विद्यार्थी हैं | बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (समाजशास्त्र) करने के दौरान न केवल समाजशास्त्र, बल्कि इतिहास का भी अध्ययन किया है । मानवाधिकार से परास्नातक की पढ़ाई करने के दौरान भी मानव जाति के इतिहास के अध्ययन में इनकी रुचि रही है । वीर अर्जुन, दैनिक जागरण, नईदुनिया, नेशनलदुनिया जैसे अखबारों में 15 साल के पत्रकारिता जीवन में इन्होंने लंबे समय तक क्राइम और कोर्ट की बीट कवर किया है । हिंदी की कथेतर (Non-fiction) श्रेणी में संदीप देव भारत के Best sellers लेखकों में गिने जाते हैं । इनकी अभी तक 9 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । संदीप देव भारत में Bloombury Publishing के पहले मौलिक हिंदी लेखक थे, लेकिन वैचारिक कारणों से इन्होंने Bloombury से अपनी अब तक प्रकाशित सभी पुस्तकें वापस ले ली हैं । ऐसा करने वाले वो देश के एक मात्र लेखक हैं | इसके उपरांत कपोत प्रकाशन को पुनः प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में संदीप देव हिंदी के एकमात्र लेखक हैं, जिनकी पुस्तकों ने बिक्री में लाख के आंकड़ों को पार किया है | संदीप देव indiaspeaksdaily.com के संस्थापक संपादक हैं ।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Sankshipt Yog Vasishtha
योगवासिष्ठ के इस संक्षिप्त रूपान्तर में जगत् की असत्ता और परमात्मसत्ता का विभिन्न दृष्टान्तों के माध्यम से प्रतिपादन है। पुरुषार्थ एवं तत्त्व-ज्ञान के निरूपण के साथ-साथ इसमें शास्त्रोक्त सदाचार, त्याग-वैराग्ययुक्त सत्कर्म और आदर्श व्यवहार आदि पर भी सूक्ष्म विवेचन है।
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Hindi Books, Luminous Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)
Ganga Teerth
Hindi Books, Luminous Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)Ganga Teerth
भारत में गंगा नदी को बहुत पवित्र के साथ उनको माता का दर्जा प्राप्त है। गंगा केवल जीवनदायिनी नहीं है, बल्कि वह सभी पापों को नष्ट करती है और मोक्ष की प्राप्ति करवाती है। जन्म से लेकर मृत्यु तक गंगा के जल का हर कार्य में प्रयोग किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से गंगा कामनाओं को पूर्ण करने वाली, पापों को हरने वाली, मंगलकरणी, सुख, समृद्धि, शांति देने वाली मानी गई है। भारतीय ऋषि-महर्षियों को गंगा के वैज्ञानिक महत्व एवं अद्भुत प्राकृतिक संरचना का ज्ञान था, इसी कारण गगीता व अन्य शास्त्र-पुराणों में गंगा भारतीय संस्कृति का प्राण बताया है। भारतीय जन मानस में गंगा को परब्रह्म, निर्विकार, निराकार, पापहारिणी और सत्-चित् आनंद का प्रतीक माना जाता है। वे जीवन पोषण की पूर्णता हैं तो पूर्णमुक्ति की संदेश वाहक तथा कारक भी।
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English Books, Parimal Publications, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Vishnu Purana English
Vishnu Purana is one of the oldest Purana in the Hindu scriptures that is split into six parts and contains 7,000 versus. The Purana reveals some interesting details and is of high importance in Hindu religion.
One of the foremost Purana in the Hindu scriptures is the Vishnu Purana, which is a constituent of the eighteen great Puranas. The text of this Purana today contains 7,000 verses though it is thought to have 23,000 verses in its original form.
The Purana is in the form of a dialogue between Maharishi Parasara and the disciple Maitreya. It is however thought some of the parts have been written by Maharishi Parasara. Veda Vyasa is considered as the original source of the Puranas. Besides, these texts have survived through the age old tradition of oral reading. It is to be noted that most of the characters in this Purana cover events that are described in the Mahabharata and few of the verses describe certain events occurring after the Mahabharata froze. Some of the issues mentioned are about Lord Buddha and the reign of Chandra Gupta Maurya.
The Purana is split into six parts called amsas and have 126 chapters called adhyayas in total. The first part (amsa) details the stories of creation of the universe, the pralaya and the samundra manthanan (churning of the ocean). The concept of the four yugas in introduced in this part along with the stories of Hiranyakashipu and Prahlada. The Earth, with its seven continents and seven oceans, is elaborately described in the second section of the Purana along with the description of the nether world, the Patala, where the snake gods dwell and the hell, Naraka.
On the other side, you can see the description of the heavenly bodies, the sun and the planetary system. The third part of the Purana discusses the cycle of creation and destruction through the stories of Manvantara and the account of the Manus (ancestor of the human race). This section also discusses the four phases of life (ashramas), the four Vedas with the basis of their division and how they have been divided by Veda Vyasa.
The genealogy of the famous kings from the Suryavanshi and Chandravanshi dynasties forms part of the fourth division of the Vishnu Purana. Short summaries on the legends like the Pururavas, Urvasi, Lord Rama, birth of Pandavas and Lord Krishna can be found in this section of the Purana. Mahabharata is also touched upon briefly. The section concludes with the prophecy referring to the future kings of Magadha, Nandas, Kanvanayas and others, and the time when there would be no religion or morality which would end when Vishnu will incarnate as ‘Kalki’.
The fifth part of the Vishnu Purana focuses completely with the life and times of Lord Krishna, beginning from his birth till he leaves for heavenly abode and the destruction of the Yadava clan. It is to be noted that the same stories are repeated in the same order in Harivamsa Parv of Mahabharata. This section of the Purana is the biggest with 38 chapters. Part VI of the Purana is the shortest with only eight chapters. This part deals once again with the four yugas and the effects of kaliyuga culminating in pralaya of the cosmos, the travails of being born, being a child, being an adult, old age and death, hell and heaven and finally being liberated from existence and re-birth (Moksha)
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Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, Suggested Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Sri Bhavishya Mahapuranam (Set Of 3 Vols)
-10%
Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, Suggested Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिSri Bhavishya Mahapuranam (Set Of 3 Vols)
प्रस्तुत भविष्यपुराण में भगवान सूर्य की महिमा का वर्णन किया गया है ।
व्यास जी द्वारा रचित हमारे 18 वैदिक पुराणों मे से भविष्य पुराण भी एक है…
भविष्य पुराण में सूर्य का महत्व और वर्ष के 12 महीनों के निर्माण का उल्लेख मिलती है। इस पुराण में सांपों की पहचान, विष और विषदंश की संपूर्ण जानकारी दी गई है। इस पुराण में राजवंशों के अतिरिक्त भविष्य में आने वाले नंद वंशों, मौर्य वंशों, मुगल वंश, छत्रपति शिवाजी और महारानी विक्टोरिया का वर्णन मिलता है। साथ ही विक्रम बेताल और बेताल पच्चीसी की कथाएं भी इसी का हिस्सा है।
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Hindi Books, Jiyalal Kamboj, Vidyanidhi Prakashan, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
The Rigveda (Set of 8 Volumes)
-10%
Hindi Books, Jiyalal Kamboj, Vidyanidhi Prakashan, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिThe Rigveda (Set of 8 Volumes)
प्राक्कथन
बहुत लम्बे समय तक वेद का अध्ययन-अध्यापन श्रुतिपरम्परा से ही होता रहा। गुरु मन्त्र का उच्चारण करता था और शिष्य उसी रूप में उसे ग्रहण करने का प्रयास करता था। यह श्रुतिपरम्परा वेद का अविभाज्य अङ्ग थी, इस सीमा तक कि वेद को श्रुति ही कहा जाने लगा। इस परम्परा का सारा बल शुद्ध उच्चारण पर था, एक स्वर या वर्ण की अशुद्धि भी सह्य नहीं थी दुष्टः शब्दः स्वरतो वर्णतो वा मिथ्याप्रयुक्तो न तम् अर्थम् आह। स वाग्वज्जो यजमानं हिनस्ति। यदि अशुद्ध उच्चारण हो गया तो यजमान को हानि पहुँच सकती थी। अतः शुद्ध उच्चारण एक अनिवार्यता थी।
मन्त्रों का किसी न किसी यज्ञ-याग में विनियोग होना होता था। याज्ञिक प्रक्रिया मूलतः उन्हीं पर निर्भर थी। मन्त्रशक्ति पर सभी की अपूर्व आस्था थी। यदि मन्त्र ही अशुद्ध उच्चरित हुए तो वे अपना फल न दे सकेंगे और अनिष्ट फल की प्राप्ति भी सम्भव हो जाएगी। नैसर्गिक और काम्य कर्मों के सन्दर्भ में उनका अभीष्टफलप्रदायी होना यजमान और याजक दोनों को अभीष्ट था।
यज्ञप्रक्रिया से अन्यत्र कभी अशुद्ध उच्चारण हो भी जाए पर यज्ञप्रक्रिया में वह क्षम्य नहीं था। महाभाष्यकार पतञ्जलि ने इस तथ्य को एक पुरानी घटना के उल्लेख के द्वारा रेखाङ्कित किया है। दो ऋषि थे। वे यद्वानः और तद्वानः शब्दों का उच्चारण यर्वाण और तर्वाण करते थे। इस उच्चारण के कारण उनका नाम ही यर्वाण तर्वाण पड़ गया। वे विद्वान् भी थे, दूर और निकट की सब चीजों के जानकार थे, विदितवेदितव्य थे और तत्त्वज्ञानी थे, फिर भी उच्चारण में त्रुटि उनसे हो गई। यह त्रुटि बोलचाल में भले ही उनसे हुई हो, पर यज्ञकर्म में कभी नहीं होती थी। ते तत्रभवन्तो यद्वानस् तद्वान इति प्रयोक्तव्ये यर्वाणस् तर्वाण इति प्रयुञ्जते, याज्ञे पुनः कर्मणि नापभाषन्ते। (पस्पशाहिक)।
उच्चारणशुद्धि के इस बल का यह प्रभाव हुआ कि सारा ध्यान शुद्ध उच्चारण पर ही केन्द्रित हो गया। बस उच्चारण भर करते जाना यही मन्त्रों का लक्ष्य बन गया। उच्चारणशुद्धि के लिये अनेक उपायों का आविर्भाव हुआ। अष्ट विकृतियां उसी की परिणति हैं। इसका यह प्रभाव तो अवश्य हुआ कि वेद अपने मूल उच्चारण में सहस्राब्दियों तक बने रह गए और आज भी उसी रूप में चले आ रहे हैं। सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान् मैक्समूलर का कथन सर्वथा सत्य है कि यदि किसी कारणवश वेदों की प्रकाशित सभी प्रतियां नष्ट हो जाएं तो भी ब्राह्मणों के मुख से आज भी अपने मूल अविकल रूप में उन्हें प्राप्त किया जा सकता है।
उच्चारणशुद्धि पर बल का एक प्रभाव यह भी पड़ा कि अर्थ की ओर ध्यान कम हुआ। जब तक यह भाषा व्यवहार में आती थी लोगों को इसके अर्थ समझ आते रहे होंगे, पर जैसे-जैसे समय बीतता गया, लौकिक संस्कृत का उदय होता गया और वैदिक और लौकिक संस्कृत का अन्तर बढ़ता गया, मन्त्र लोगों के लिये दुरूह से दुरूहतर होते गए। एक समय ऐसा भी आया जब कहा जाने लगा कि मन्त्रों के अर्थ ही नहीं हैं। महर्षि यास्क ने महर्षि कौत्स के सन्दर्भ से मन्त्रों की अनर्थकता और सार्थकता पर एक पूरा शास्त्रार्थ ही प्रस्तुत कर दिया है। उन्हों ने सशक्त तकों के आधार पर कौत्स के इस मत का कि मन्त्र अर्थविहीन हैं (अनर्थका हि मन्त्राः) का खण्डन किया है और जिस निरुक्तशास्त्र का वे प्रणयन करने जा रहे हैं, उसकी उपयोगिता को सिद्ध किया है। निरुक्त की उपयोगिता मन्त्रों का अर्थ समझने के लिये है। यदि मन्त्रों का कोई अर्थ ही नहीं है,
तो उनका शास्त्र किस का बोध कराएगा।SKU: n/a -
English Books, Govindram Hasanand Prakashan, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Vaidika Ethics
The sources of many core Vaidik values are documented for people’s knowledge and inspiration. The goal of VAIDIKA ETHICS is to constantly strive to live a life of moral responsibility even in the face of challenges and failures.
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English Books, Garuda Prakashan, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
The Walking Brahmin
In 1857, Vishnubhat Godse and his uncle Rambhat, unwittingly walked smack in the middle of The First War of Indian Independence. Having the misfortune of being at the wrong place at the wrong time, the duo were caught in the crossfire between the loyalist Indian troops and the British. They witnessed the fall of Jhansi first hand, survived the aftermath of British savagery, were robbed of all their belongings multiple times, and even managed to avoid getting hanged. Twice. Being on the road for two years, they finally returned to Varsai village, near Pen, Maharashtra. Back home, Vishnubhat penned down his adventure for his descendants which was eventually published as a Marathi book in 1907.
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Hindi Books, Jiyalal Kamboj, Vidyanidhi Prakashan, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Yajurveda (Set of 2 Volumes)
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Hindi Books, Jiyalal Kamboj, Vidyanidhi Prakashan, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिYajurveda (Set of 2 Volumes)
यजुर्वेद-भूमिका
१. यजुर्वेद का वेदों में स्थान और महत्त्व
वेद चार हैं ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। ऋग्वेद में मुख्य रूप से देवताओं की स्तुतियाँ हैं। भारतीय परम्परा में इसे ज्ञानकाण्ड कहा गया है। यजुर्वेद में यज्ञों के अनुष्ठान के लिये मन्त्र हैं। इसे कर्मकाण्ड कहा गया है। सामवेद देवताओं के स्तुतिगान के लिये मन्त्रों का संग्रह है। इसे उपासनाकाण्ड के नाम से पुकारा गया है। अथर्ववेद में विषयों की विविधता है। इसमें ज्ञान, कर्म और उपासना तीनों ही प्रकार के मन्त्र उपलब्ध हैं।
-वैसे तो सभी वेदों में यज्ञ के महत्त्व को स्वीकार किया गया है और सबमें ही यज्ञसम्बन्धी मन्त्र उपलब्ध हैं, परन्तु यजुर्वेद विशेष रूप से यज्ञों से सम्बन्धित वेद है। इसमें विविध प्रकार के यज्ञों के अनुष्ठानों में विनियुक्त होने वाले मन्त्रों का संग्रह है। इस प्रकार यजुर्वेद अन्य वेदों से नितान्त भिन्न प्रकृति वाला वेद है। यजुर्वेद यज्ञप्रधान है। यास्काचार्य ने यजुर्वेद का निर्वचन करते हुए कहा है यजुर् यजतेः। अर्थात् यजुः शब्द की निष्पत्ति यज धातु से हुई है और इस प्रकार यजु मन्त्रों का यजनक्रिया से विशेष सम्बन्ध है। एक अन्य परिभाषा के अनुसार अनियताक्षरावसानो यजुः कहा गया है। अर्थात् यजुः वह है जिसमें अक्षरों की संख्या निश्चित नहीं है। जहाँ ऋक् अथवा ऋचा में गायत्री, अनुष्टुप् आदि छन्दों की संख्या निश्चित होती है, वहाँ यजुः में अक्षरों की संख्या निश्चित नहीं होती। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि ऋक् या ऋचा पद्म है और यजुः गद्या है। कहा भी गया है गद्यात्मको यजुः। –
२. बबुर्वेद की शाखाएँ
बनुर्वेद मुख्य रूप से दो प्रकार का है कृष्णयजुर्वेद और शुक्लयजुर्वेद। कृष्णयजुर्वेद वह है, किसमें ब्राह्मण अंश भी मिला हुआ है। ब्राह्मण अंश के मिश्रण के कारण उसे शुक्ल अर्थात् शुद्ध, पवित्र नहीं माना गया और उसे कृष्णयजुर्वेद की संज्ञा दी गई। इसके विपरीत वह यजुर्वेद जिसमें ब्राह्मण अंश जुड़ा हुआ नहीं है, उसे शुक्ल अर्थात् शुद्ध, पवित्र, मिश्रणमुक्त यजुर्वेद कहा गया है। यजुर्वेद के इस दो प्रकार के विभाजन के विषय में महीधर ने अपने भाष्य के आरम्भ में एक बहुत रोचक कथा का वर्णन किया है व्यास ने मनुष्यों की बौद्धिक क्षमता के निरन्तर ह्रास को दृष्टि में रखते हुए वेद का ऋक्, यजुष्, साम और अथर्व इन चार भागों में विभाजन किया और इन्हें क्रमशः अपने चार शिष्यों पैल, वैशम्पायन, जैमिनि और सुमन्तु को पढ़ाया। इन शिष्यों ने इन्हें अपने शिष्यों को पढ़ा दिया। एक बार वैशम्पायन अपने शिष्य याज्ञवल्क्य पर किसी कारण से क्रुद्ध हो गए और उसने जो कुछ पढ़ा था उसे वापस देने को कहा। याज्ञवल्क्य ने अपनी योगशक्ति के द्वारा पठित यजुर्वेद को वमन कर दिया। गुरु की आज्ञा से अन्य शिष्यों ने तीतर पक्षी का रूप धारणSKU: n/a -
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Bharatiya Kala : Lok Parampra evm Sangeet me Ganga ka Pravah
Hindi Books, Luminous Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)Bharatiya Kala : Lok Parampra evm Sangeet me Ganga ka Pravah
भारतीय जन मानस के लिए गंगा भारत की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता की प्रतीक है। अपने स्वरूप एवं प्रवाह में निरंतर बदलाव लाने पर भी अपने मूल रुप में तो वही गंगा ने युगों-युगों तक एक समूची सभ्यता को न केवल सिंचित किया है, बल्कि उसका भरण-पोषण भी किया है। गंगा शाश्वता का प्रतीक है तथा कला, पौराणिक कथाएँ एवं साहित्य सभी उसका गुणगान करते हैं। आज भी हिंदुओं के सभी धार्मिक कार्य और संस्कारों में अनिवार्य तत्व के रूप में गंगाजल की प्रधानता है। भारतीय कला में गंगा नदी को देवी के रूप में अनेक प्रतीकों के साथ अपने संरक्षक की भूमिका में प्रेषित की गई है। मकर कुंभ तथा अनेक अलंकारों से सुसज्जित किया गया है। यह सभी विशेषताएं गंगा के अर्थ को विस्तार देती है । धर्म के अनेक पक्षों, मिथकों तथा कलाओं में शताब्दियों से स्वरूपों तथा कथ्यो के द्वारा उन्हें प्रदर्शित किया जाता रहा है। प्रस्तुत पुस्तक धर्माचार्यों, जिज्ञासुओं, शोधकर्ताओं, आचार्यों, राजनेताओं इतिहासकारों एवं आमजन के लिए नितांत उपयोगी साबित होगा।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Mahabharat Khilbhag – Shri Harivansh Puran (Code 38)
श्रीहरिवंशपुराण वेदार्थ-प्रकाशक महाभारत ग्रन्थ का अन्तिम पर्व है। पुत्र प्राप्ति की कामना से श्रीहरिवंशपुराण के श्रवण की परम्परा भारतवर्ष में चिरकाल से प्रचलित है। अनन्त भावुक धर्मपराण लोग इसके श्रवण से पुत्र-प्राप्ति का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भगवद्भक्ति तथा प्रेरणादायी कथानकों की दृष्टि से भी इसका बड़ा महत्व है। भगवान् श्रीकृष्ण से सम्बन्धित अगणित कथाएँ इसमें ऐसी हैं, जो अत्यन्त दुर्लभ हैं। धार्मिक जन-सामान्य के कल्याणार्थ इसके अन्त में सन्तानगोपाल-मन्त्र, अनुष्ठान-विधि, सन्तान-गोपाल-यन्त्र, सन्तान-गोपालस्तोत्र भी संगृहीत हैं। सचित्र, सजिल्द।
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