संदीप देव –
पुरणों में बताया गया है कि भगवान श्रीहरि विष्णु का कलियुग में कल्कि अवतार होगा। इसका लाभ उठाते हुए कई लोग कल्कि नाम का अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल भी करने लगे। सबसे पहले पूर्व में कांग्रेस के आचार्य और वर्तमान में भाजपा के अघोषित आचार्य बने प्रमोद कृष्णम ने इसका दोहन किया, कल्कि आश्रम बनाकर, उसके बाद उड़ीसा में एक महोदय ने तो अपने बेटे को ही कल्कि का अवतार घोषित कर दिया, फिर कल्कि पर फिल्म भी बन गई और कल्कि नाम से कई उपन्यास और पुस्तकें भी लिखी जाने लगीं।
इस सबके अलावा असंख्य कल्कि संगठन, कल्कि सेना, कल्कि अभियान, कल्कि संघ आदि नाम से दुकानदारी करने वालों ने छोटे-छोटे संगठन खड़ा कर लिए। यह सब केवल भोले-भाले हिंदुओं को ठगने और धन लूटने के उद्देश्य से किया गया। परंतु इसका समाधान क्या हो? अनेक पुराणों में बिखरी कल्कि कथा को आम जन कैसे पढ़े और झूठों को दूर से ही पहचान जाए?
इसका समाधान किया चौखंबा प्रकाशन ने। उसने महर्षि वेदव्यास कृत अनेक पुराणों से कल्कि कथा को समेटते हुए एक अलग ‘कल्कि पुराण’ प्रकाशित किया। इसका संपादन और संस्कृत से हिंदी व्याख्या किया रामस्वरूप शर्मा जी ने।
