योग वशिष्ठ कहता है, ज्ञान ही मुक्ति का एक मात्र आधार है! Leave a comment

संदीप देव। आज कल कुछ पाखंडी ब्राह्मणों को भी देख रहा हूं कि वह बिना मनुस्मृति को पढ़े ही मनुस्मृति के विरुद्ध विषवमन कर रहे हैं और उनका दावा देखिए कि कह रहे हैं कि उन्होंने मनुस्मृति पढ़ रखी है! कमाल है! झूठ बोलते लज्जा भी नहीं आती ऐसे लोगों को!

भगवान श्रीराम अपने छोटे भाई भरत से कहते हैं कि भरत ज्ञानवान ब्राह्मणों को साथ रखना, लेकिन पाखंडी ब्राह्मणों से बच कर रहना। ये पाखंडी ब्राह्मण धर्म नहीं जानते, लेकिन धर्म को जानने का दावा करते हुए उसकी मनमानी व्याख्या करते हैं! आंबेडरवाद के प्रभाव में आज ऐसे ब्राह्मण युवकों की भरमार होती जा रही है!

अभी पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज कह रहे थे कि बौद्धों का दर्शन पहले इतना मजबूत नहीं था, लेकिन ब्राह्मण जब बौद्ध बने तो उन्होंने उनके दर्शन को मजबूत बनाकर नयी ऊंचाई पर पहुंचा दिया। इसी तरह भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन को भी ब्राह्मणों ने मजबूत बनाया। नंबूदरीपाद दुनिया के पहले चुने हुए कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री बने।

ब्राह्मणों को सोचना चाहिए कि उनके इस आचरण के कारण आज वो ‘पोलिटिकल-अछूत’ बन चुके हैं। किसी संगठन, पार्टी और नेता का सबसे अधिक झंडा ब्राह्मण युवक ही उठाए दिखते हैं, भले उनका नेता उनसे ‘हिसाब चुकता’ करने की बात करता हो! अतः अन्य जातियों को दोष देने की जगह ब्राह्मणों को स्वयं में झांकना चाहिए कि वह धर्म विरुद्ध आचरण क्यों कर रहे हैं? मनु स्मृति भी ऐसे ब्राह्मणों को फटकारती है।

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