राज्य, राजा एवं जनता। Leave a comment

चौखंबा ने शुक्रनीति छापनी बंद कर दी थी। कई सनातनियों ने शुक्रनीति का ऑर्डर दे रखा था, लेकिन हम उन्हें भेज नहीं पा रहे थे। वो अपने पैसे भी वापस नहीं ले रहे थे यह कह कर कि मुझे विश्वास है कि आप पब्लिशर को मनाकर पुनः इसे पब्लिश अवश्य करा लेंगे। मुझे और मेरी टीम पर इतना विश्वास करने के लिए आप सभी का बहुत धन्यवाद। 🙏
आज सुबह चौखंबा प्रकाशन का फोन Amardeep Deo के पास आया कि शुक्र नीति को हमने आपके कहने पर छाप दिया है‌। आप मंगवा लीजिए। हमने उन्हें धन्यवाद किया।
शुक्राचार्य असुरों के गुरु थे और उन्हें महादेव की ओर से मृत संजीवनी विद्या प्राप्त हुई थी। वह इतने कूटनीतिज्ञ थे कि देवताओं के गुरु बृहस्पति ने अपने पुत्र कच को विद्या ग्रहण खासकर मृत संजीवनी विद्या सीखने के लिए शुक्राचार्य के पास भेजा था।
सनातन शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण, विदुर और चाणक्य के अलावा वह शुक्राचार्य ही हैं जिनकी कूटनीति और राजनीतिक विद्या सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। शुक्राचार्य ने राजनीति को ठंडे दिमाग से सोचने का विषय माना है, जल्दबाजी का नहीं। शुक्र नीति के प्रमुख विषय हैं:- राज्य, राजा एवं जनता।
नीति का अध्ययन करने वालों का अध्ययन तब तक अधूरा है जब तक कि वह शुक्र नीति का अध्ययन नहीं कर लेता। शुक्र नीति दो खंडों में उपलब्ध है।

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