CHAUKHAMBHA ORIENTALIA
Showing the single result
-
CHAUKHAMBHA ORIENTALIA, Hindi Books, Jiyalal Kamboj, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Samaveda (Set of 2 Volumes)
-10%
CHAUKHAMBHA ORIENTALIA, Hindi Books, Jiyalal Kamboj, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिSamaveda (Set of 2 Volumes)
१. सामवेद का वेदों में स्थान
वेद चार हैं ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। ऋग्वेद को ज्ञानकाण्ड कहा जाता है, यजुर्वेद को कर्मकाण्ड, सामवेद को उपासनाकाण्ड और अथर्ववेद में ज्ञान, कर्म और उपासना तीनों ही प्रकार के मन्त्र हैं। इन वेदों को विद्यात्रयी भी कहा जाता है, वह इसलिये क्योंकि वेद चार होते हुए भी इनमें विद्याएँ तीन ही हैं ज्ञान, कर्म और उपासना। ज्ञान और कर्म का अधिकतर सम्बन्ध सांसारिकता से है, जबकि उपासना का सीधा सम्बन्ध आत्मा और परमात्मा से है। उपासना के बिना मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती। आत्मकल्याण की इस दृष्टि से सामवेद का महत्त्व वेदों में सर्वोपरि माना गया है। इसी माहात्म्य के कारण भगवान् श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन करते हुए स्पष्ट कहा है वेदों में सामवेद हूँ मैं ‘वेदानां सामवेदो ऽस्मि।” सामवेद गेय है, मधुर है, वेदों का सार है। छान्दोग्योपनिषद् में कहा है वाणी का रस ऋक् है, ऋक् का रस साम है, और साम का रस उद्गीथ है। —SKU: n/a
