Sasta Sahitya Mandal
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Achoot Matwad Ke Sach : Gandhi aur Ambedkar
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Achoot Matwad Ke Sach : Gandhi aur Ambedkar
भारतीय राजनीतिक मंच पर अस्पृश्यता के बढ़ते हुए खतरों को उजागर करनेवाले दो प्रमुख व्यक्ति- गांधी और अंबेडकर थे। गांधीजी ने अपने सार्वजनिक जीवन के प्रारंभ से ही अस्पृश्य समाज के साथ हिंदू समाज के अनुचित व्यवहार का उग्र विरोध किया। हरिजनों का उत्थान ही गांधी जीवन का मुख्य उद्देश्य बन गया था। 1932 में ‘हरिजन सेवक संघ’ की स्थापना की और 1933 में साप्ताहिक ‘हरिजन’ का प्रकाशन किया। 17 नवंबर, 1933 को गांधी ने अस्पृश्यता विरोधी हरिजन दौरा शुरू किया और 2 अगस्त, 1934 को समाप्त हुआ। निरंतर 10 महीने चले इस दौरे में गांधीजी ने 12,500 मील की यात्रा की और हरिजन-कल्याण के लिए 8 लाख रुपए जमा किए। डॉ. अंबेडकर ने दलित मुक्ति पर अपनी सारी शक्ति केंद्रित करने के उद्देश्य से 1924 में ‘बहिष्कृत हितकारी’ सभा की स्थापना की और मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ का प्रकाशन प्रारंभ किया। वस्तुतः दलितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में अनेक प्रयास बहुत पहले से चल रहे थे। गांधी और डॉ. अंबेडकर को इन प्रयासों की निरंतरता में देखा जाना उचित है।
डॉ. विवेकानंद तिवारी ने अपनी पुस्तक ‘अछूत मतवाद के सच गांधी और अंबेडकर’ पर प्रशंसनीय परिश्रम किया है तथा महत्त्वपूर्ण संदर्भ जुटाए हैं। पाठकों के लिए ये तथ्य पठनीय विवेचनीय हैं।SKU: n/a -
Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)
APNE APNE RAM
भारतीय वाङ्मय के आधिकारिक विद्वान श्री भगवान सिंह की अनुपम कृति है अपने-अपने राम’। राम का चरित्र भारतीय साहित्य में रमा हुआ है। उनके व्यक्तित्व की यह विशेषता है कि विभिन्न भाषाओं में अब तक राम को आधार बनाकर हजारों रचनाएँ लिखी जा चुकी हैं। इसके बावजूद रचनात्मक स्रोत रचनाकारों के लिए कम नहीं हुआ है। हिंदी में तुलसीदास से लेकर निराला तक और उसके बाद के रचनाकारों ने भी राम को आधार बनाकर महत्त्वपूर्ण कृति का सृजन किया। इस कड़ी में यह महाकाव्यात्मक औपन्यासिक रचना स्वयं में महान रचना स्थापित करता है।
इस पुस्तक के प्रकाशन के साथ ही पाठकों और समीक्षकों ने इसे हाथों-हाथ लिया। प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह ने विश्व की श्रेष्ठतम कृति कहा और यह भी माना कि इसमें कोई दोष नहीं है। ‘हंस’ के संपादक राजेंद्र यादव ने इसकी समीक्षा प्रमुखता से अपनी पत्रिका में छापी। इसकी लोकप्रियता बहुतों के लिए ईष्र्या का केंद्र भी बनी। सस्ता साहित्य मण्डल के लिए यह गौरव की बात है कि सभ्यता विमर्श की अनन्य रचना ‘ अपने-अपने राम’ का प्रकाशन वह करने जा रहा है। हमें पूरा विश्वास है कि अधिक-से- ‘अधिक पाठकों के बीच यह रचना मण्डल के माध्यम से पहुँचेगी, साथ ही ‘लोग अपने स्वजनों को उपहार के रूप में यह पुस्तक भेंट करेंगे।
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
Bharat Savitri (HB)
हमारे प्राचीन साहित्य में जिन महान् ग्रंथों को असाधारण लोकप्रियता प्राप्त हुई है, उनमें महाभारत का अपना स्थान है। भारत का शायद ही कोई ऐसा शिक्षत और अशिक्षित परिवार हो, जिसमें महाभारत का नाम न पहुंचा हो और जो उसकी महिमा को न जानता हो। रामायण की भांति इस अमर ग्रंथ को भी बड़ा धार्मिक महत्व प्राप्त है और इसकी कथा सर्वत्र बड़े चाव और आदर-भाव से पढ़ी और सुनी जाती है। प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय साहित्य के अध्येता तथा चिंतक श्री वासुदेवशरण अग्रवाल ने इस महान् ग्रंथ का एक नीवन एवं सारगर्भित अध्ययन प्रस्तुत किया है। यह अध्ययन वस्तुतः एक नई दृष्टि प्रदान करता है। यह पुस्तक तीन खंडों में प्रस्तुत की गई है। ‘विराट पर्व’ तक की सामग्री पहले खंड में आ गई है। युद्ध के अंत तक का अंश दूसरे खंड में, शेष तीसरे खंड में। इस प्रकार इन तीनों खंडों में संपूर्ण महाभारत का सार पाठकों को मिल जाता है।
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, इतिहास
Bhartiya Swadhinta Sangram Ka Itihas
प्रस्तुत पुस्तक को पाठकों के सम्मुख उपस्थित करते हुए हमें जहाँ एक ओर। हर्ष हो रहा है, वहाँ खेद भी। हर्ष इसलिए कि एक महत्त्वपूर्ण कृति पाठकों को प्राप्त हो रही है। खेद इसलिए कि पुस्तक के प्रकाशित होते-होते इसके विद्वान लेखक महायात्रा पर चले गए। उनकी बड़ी इच्छा थी कि पुस्तक जल्दी प्रकाशित हो जाए। अपनी मृत्यु के तीन दिन पूर्व उन्होंने हमें सूचित किया था कि यदि पुस्तक के छपे फर्मे हम उन्हें भिजवा दें तो वह इसकी भूमिका लिख दें। पर काल की गति को कौन जानता है ! दूसरे ही दिन उनको ब्रांको-निमोनिया का हमला हुआ और वह एकाएक चले गए!
पुस्तक के लेखक से हिन्दी के पाठक भलीभांति परिचित हैं। वह न केवल अच्छे लेखक तथा पत्रकार थे, अपितु भारत के स्वाधीनता-संग्राम के एक प्रमुख सेनानी भी रहे थे। आजादी के लिए जितने आन्दोलन हुए, उन सबमें उन्होंने सक्रिय भाग लिया और कई बार जेल गए। इतना ही नहीं, अपनी वाणी, लेखनी तथा दैनिक पत्र के द्वारा आजादी के संदेश के व्यापक प्रसार में भी उन्होंने सहायता दी।
हमारे लिए निस्संदेह यह बड़े सौभाग्य की बात है कि लेखक ने परिश्रम-पूर्वक आजादी का यह इतिहास लिखकर पाठकों के लिए सुलभ कर दिया। सन् 1857 की सुविख्यात क्रान्ति से आरंभ करके स्वाधीनता-प्राप्ति तक की सभी प्रमुख घटनाओं तथा आन्दोलनों का इस पुस्तक में समावेश कर दिया है। वैसे इस विषय पर डॉ० पट्टाभि सीतारमैया का लिखा हुआ ‘कांग्रेस का इतिहास’ उपलब्ध है, लेकिन इस पुस्तक का अपना महत्त्व है। इसमें विस्तारों से यथासंभव बचने का प्रयत्न । किया गया है, साथ ही इस बात की सावधानी भी रखी गई है कि कोई भी महत्त्वपूर्ण घटना छूटने न पाये।
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, इतिहास
Bhartiya Swadhinta Sangram Ka Itihas (HB)
प्रस्तुत पुस्तक को पाठकों के सम्मुख उपस्थित करते हुए हमें जहाँ एक ओर। हर्ष हो रहा है, वहाँ खेद भी। हर्ष इसलिए कि एक महत्त्वपूर्ण कृति पाठकों को प्राप्त हो रही है। खेद इसलिए कि पुस्तक के प्रकाशित होते-होते इसके विद्वान लेखक महायात्रा पर चले गए। उनकी बड़ी इच्छा थी कि पुस्तक जल्दी प्रकाशित हो जाए। अपनी मृत्यु के तीन दिन पूर्व उन्होंने हमें सूचित किया था कि यदि पुस्तक के छपे फर्मे हम उन्हें भिजवा दें तो वह इसकी भूमिका लिख दें। पर काल की गति को कौन जानता है ! दूसरे ही दिन उनको ब्रांको-निमोनिया का हमला हुआ और वह एकाएक चले गए!
पुस्तक के लेखक से हिन्दी के पाठक भलीभांति परिचित हैं। वह न केवल अच्छे लेखक तथा पत्रकार थे, अपितु भारत के स्वाधीनता-संग्राम के एक प्रमुख सेनानी भी रहे थे। आजादी के लिए जितने आन्दोलन हुए, उन सबमें उन्होंने सक्रिय भाग लिया और कई बार जेल गए। इतना ही नहीं, अपनी वाणी, लेखनी तथा दैनिक पत्र के द्वारा आजादी के संदेश के व्यापक प्रसार में भी उन्होंने सहायता दी।
हमारे लिए निस्संदेह यह बड़े सौभाग्य की बात है कि लेखक ने परिश्रम-पूर्वक आजादी का यह इतिहास लिखकर पाठकों के लिए सुलभ कर दिया। सन् 1857 की सुविख्यात क्रान्ति से आरंभ करके स्वाधीनता-प्राप्ति तक की सभी प्रमुख घटनाओं तथा आन्दोलनों का इस पुस्तक में समावेश कर दिया है। वैसे इस विषय पर डॉ० पट्टाभि सीतारमैया का लिखा हुआ ‘कांग्रेस का इतिहास’ उपलब्ध है, लेकिन इस पुस्तक का अपना महत्त्व है। इसमें विस्तारों से यथासंभव बचने का प्रयत्न । किया गया है, साथ ही इस बात की सावधानी भी रखी गई है कि कोई भी महत्त्वपूर्ण घटना छूटने न पाये।
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