Shivalik Prakashan
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Hindi Books, Jiyalal Kamboj, Shivalik Prakashan, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Atharva Veda (Set of 4 Volumes)
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Hindi Books, Jiyalal Kamboj, Shivalik Prakashan, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिAtharva Veda (Set of 4 Volumes)
पुस्तक परिचय
अथर्ववेद की व्याख्या लेखक द्वारा ऋग्वेदसंहिता की व्याख्या में अपनाई गई पद्धति के अनुसार ही की गई है। सर्वप्रथम मन्त्र और उसका पदपाठ दिया गया है। पदपाठ के पश्चात् मन्त्र में पदों के क्रम के अनुसार हिन्दीरूपान्तर और फिर संक्षिप्त व्याख्या दी गई है। जिस क्रम में मन्त्रों के पद हैं, उसी क्रम में उनका अनुवाद देने से पाठकों को शब्दों के अर्थों को समझने में सुविधा होगी। पदक्रम से किये गए अनुवाद ने छन्दोमुक्त कविता का सा रूप ग्रहण कर लिया है, जिससे पाठकों को ऋग्वेद के हिन्दी काव्यपाठ का आनन्द भी प्राप्त होगा। संक्षिप्त व्याख्या के पश्चात् टिप्पणियों में प्राचीन एवं अर्वाचीन भाष्यकारों, व्याख्याकारों और अनुवादकों के मत दिये गए हैं।
नामों और शब्दों की यौगिक व्याख्या पर विशेष ध्यान दिया गया है। भाषा और आलङ्कारिक प्रयोगों के रहस्य को भी स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है। देवतानामों और शब्दों की प्रतीकात्मक व्याख्या की ओर विशेष ध्यान दिया गया है। प्राचीन और अर्वाचीन भाषाविदों के सिद्धान्तों से व्याख्या में सहायता ली गई है। लुप्तकल (elliptical) मन्त्रों में लुप्त पदों और वाक्यांशों को खोजकर मन्त्रार्थ की प्राप्ति का प्रयास किया गया है। असङ्गत अर्थ वाले वाक्यों में काकु से अर्थ की सङ्गति लगाई गई है। मन्त्रों में सन्धि को अक्षुण्ण रखते हुए पदों को अलग-अलग करके रखा गया है। इससे अथर्ववेद के अध्येताओं और जिज्ञासुओं को जहाँ मन्त्रों के उच्चारण में सुविधा होगी, वहीं अर्थ को समझने में भी सहायता मिलेगी।
यह ग्रन्थ चार खण्डों में पूर्ण हो रहा है। पहले खण्ड में काण्ड १-५, दूसरे खण्ड में काण्ड ६-१०, तीसरे खण्ड में काण्ड ११-१८,१९ (सूक्त १-३३), और चौथे खण्ड में काण्ड १९ (सूक्त ३४-७२), और काण्ड २० होंगे।
लेखक परिचय
डा. जियालाल कम्बोज का जन्म १५ फरवरी १९३२ को ग्राम सान्तड़ी, ज़िला करनाल, हरियाणा, में हुआ।
शिक्षा: बी.ए. (आनर्स) १९५४ में डी.ए.वी. कॉलेज अम्बाला शहर (पंजाब विश्वविद्यालय) से, एम.ए (संस्कृत) दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली से १९६० में। दिल्ली विश्वविद्यालय से ही पोस्ट एम.ए. डिप्लोमा (भाषाविज्ञान) १९६३ में, एम.लिट्. (भाज्ञविज्ञान) १९६६ में, और पीएच.डी की उपाधि ‘Semantic Change in Sanskrit’ विषय पर शोधप्रबन्ध लिखकर १९७३ में।
अध्यापन कार्य दिल्ली शिक्षा निदेशालय में भाषा-अध्यापक और स्नातकोत्तर अध्यापक के रूप में १९६० से १९७४ तक। हिन्दुकालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, में प्रवक्ता और प्रवाचक के पदों पर १९७४ से १९९७ तक कार्य किया।
लेखन-कार्य : एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें ‘प्राचीन कम्बोज जन और जनपद’ (इतिहासग्रन्थ) और ‘Semantic Change in San-skrit’ (शोधप्रबन्ध) विशेष उल्लेखनीय हैं। सेवानिवृत्त होने के पश्चात् ऋग्वेदसंहिता का आठ बड़े खण्डों में हिन्दीभाषान्तर, संक्षिप्त व्याख्या और प्राचीन एवं आधुनिक विद्वानों की टिप्पणियों के साथ प्रकाशन एक बृहत् कार्य है। हिन्दी, अंग्रेज़ी और संस्कृत में डेढ़ दर्जन से अधिक शोधनिबन्ध उच्च स्तर की शोधपत्रिकाओं और जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं।
सम्मान : दिल्ली संस्कृत अकादमी के द्वारा फर्वरी २००२ में ‘संस्कृत साहित्य सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। महामहिम राष्ट्रपति द्वारा Certificate of Honour 2016 (संस्कृत), से सम्मानित किया गया।SKU: n/a