Hindi Books
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Hindi Books, Suggested Books, Vani Prakashan, रामायण/रामकथा
Abhyuday Set Of 2 (Hindi, Narendra Kohali)
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Hindi Books, Suggested Books, Vani Prakashan, रामायण/रामकथाAbhyuday Set Of 2 (Hindi, Narendra Kohali)
अभ्युदय – 1
‘अभ्युदय’ रामकथा पर आधृत हिन्दी का पहला और महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। ‘दीक्षा’, ‘अवसर’, ‘संघर्ष की ओर’ तथा ‘युद्ध’ के अनेक सजिल्द, अजिल्द तथा पॉकेटबुक संस्करण प्रकाशित होकर अपनी महत्ता एवं लोकप्रियता प्रमाणित कर चुके हैं। महत्वपूर्ण पत्र पत्रिकाओं में इसका धारावाहिक प्रकाशन हुआ है। उड़िया, कन्नड़, मलयालम, नेपाली, मराठी तथा अंग्रेज़ी में इसके विभिन्न खण्डों के अनुवाद प्रकाशित होकर प्रशंसा पा चुके हैं। इसके विभिन्न प्रसंगों के नाट्य रूपान्तर मंच पर अपनी क्षमता प्रदर्शित कर चुके हैं तथा परम्परागत रामलीला मण्डलियाँ इसकी ओर आकृष्ट हो रही हैं। यह प्राचीनता तथा नवीनता का अद्भुत संगम है। इसे पढ़कर आप अनुभव करेंगे कि आप पहली बार एक ऐसी रामकथा पढ़ रहे हैं, जो सामयिक, लौकिक, तर्कसंगत तथा प्रासंगिक है। यह किसी अपरिचित और अद्भुत देश तथा काल की कथा नहीं है। यह इसी लोक और काल की, आपके जीवन से सम्बन्धित समस्याओं पर केन्द्रित एक ऐसी कथा है, जो सार्वकालिक और शाश्वत है और प्रत्येक युग के व्यक्ति का इसके साथ पूर्ण तादात्म्य होता है।
‘अभ्युदय’ प्रख्यात कथा पर आधृत अवश्य है; किन्तु यह सर्वथा मौलिक उपन्यास है, जिसमें न कुछ अलौकिक है, न अतिप्राकृतिक। यह आपके जीवन और समाज का दर्पण है। पिछले पच्चीस वर्षों में इस कृति ने भारतीय साहित्य में अपना जो स्थान बनाया है, हमें पूर्ण विश्वास है कि वह क्रमशः स्फीत होता जाएगा, और बहुत शीघ्र ही ‘अभ्युदय’ कालजयी क्लासिक के रूप में अपना वास्तविक महत्त्व तथा गौरव प्राप्त कर लेगा।अभ्युदय – 2
‘अभ्युदय’ रामकथा पर आधृत हिन्दी का पहला और महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। ‘दीक्षा’, ‘अवसर’, ‘संघर्ष की ओर’ तथा ‘युद्ध’ के अनेक सजिल्द, अजिल्द तथा पॉकेटबुक संस्करण प्रकाशित होकर अपनी महत्ता एवं लोकप्रियता प्रमाणित कर चुके हैं। महत्वपूर्ण पत्र पत्रिकाओं में इसका धारावाहिक प्रकाशन हुआ है। उड़िया, कन्नड़, मलयालम, नेपाली, मराठी तथा अंग्रेज़ी में इसके विभिन्न खण्डों के अनुवाद प्रकाशित होकर प्रशंसा पा चुके हैं। इसके विभिन्न प्रसंगों के नाट्य रूपान्तर मंच पर अपनी क्षमता प्रदर्शित कर चुके हैं तथा परम्परागत रामलीला मण्डलियाँ इसकी ओर आकृष्ट हो रही हैं। यह प्राचीनता तथा नवीनता का अद्भुत संगम है। इसे पढ़कर आप अनुभव करेंगे कि आप पहली बार एक ऐसी रामकथा पढ़ रहे हैं, जो सामयिक, लौकिक, तर्कसंगत तथा प्रासंगिक है। यह किसी अपरिचित और अद्भुत देश तथा काल की कथा नहीं है। यह इसी लोक और काल की, आपके जीवन से सम्बन्धित समस्याओं पर केन्द्रित एक ऐसी कथा है, जो सार्वकालिक और शाश्वत है और प्रत्येक युग के व्यक्ति का इसके साथ पूर्ण तादात्म्य होता है।
‘अभ्युदय’ प्रख्यात कथा पर आधृत अवश्य है; किन्तु यह सर्वथा मौलिक उपन्यास है, जिसमें न कुछ अलौकिक है, न अतिप्राकृतिक। यह आपके जीवन और समाज का दर्पण है। पिछले पच्चीस वर्षों में इस कृति ने भारतीय साहित्य में अपना जो स्थान बनाया है, हमें पूर्ण विश्वास है कि वह क्रमशः स्फीत होता जाएगा, और बहुत शीघ्र ही ‘अभ्युदय’ कालजयी क्लासिक के रूप में अपना वास्तविक महत्त्व तथा गौरव प्राप्त कर लेगा।
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Hindi Books, Manjul Publishing House, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Acche Mata Pita Kaise Bane
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Hindi Books, Manjul Publishing House, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Acche Mata Pita Kaise Bane
दादा जे.पी. वासवानी के शब्दों में, ‘घर ही ईश्वर के राज्य का प्रवेश द्वार है, और वही सच्ची प्रसन्नता का राज्य है.’अगर आप भी अपने घर को धरती का स्वर्ग बनाना चाहते हैं, तो दादा आपको इसके लिए राह दिखा रहे हैं. दादा की यह पुस्तक प्रेम, धैर्य, उचित मार्गदर्शन, तथा स्नेहिल अनुशासन को ऐसी योग्यताओं के रूप में प्रकट करती है जिन्हें माता-पिता को अपने भीतर विकसित करना चाहिए ताकि वे अपने बच्चों का यथासंभव बेहतर पालन-पोषण कर सकें. वे कहते हैं कि आपके बच्चे ही आपकी असली संपदा और खज़ाना हैं. वे हमें मूल्यों और आदर्शों के अनुसार बच्चो को पालने का उचित तरीका सीखा रहे हैं, जो बच्चों को अच्छा इंसान बनाने में सहायक होगा और वे ज़िम्मेदार नागरिकों के रूप में जीवन जी सकेंगे. तो आगे बढ़ें और तथाकथित पीढ़ी-अंतराल से ऊपर उठते हुए, अपने बच्चों के साथ मातृ भाव स्थापित करें!
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Gita Press, Hindi Books
Achchhe Bano 0425
मानव अपने उद्धार और पतन का दायित्व स्वतः वहन करता है, अतः उसे कर्तव्य-कर्म को शास्त्रोचित ढंग से सम्पादित करते हुए केवल उत्कट अभिलाषा से परमात्मज्ञान प्राप्त कर जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर लेना चाहिये। प्रस्तुत पुस्तक में व्यवहार तथा परमार्थ-सम्बन्धी अनेक लेखों का संग्रह किया गया है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास
Achhoot: Kyon, Kaun Aur Kaise?
“भारतरत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर जीवनपर्यंत शोषितों-वंचितों के उत्थान और उन्नयन के लिए कृत-संकल्पित रहे। उनके चिंतन में सदैव इनके कल्याण का भाव रहता था। उसी क्रम में उन्होंने अनेक लेख-पुस्तकें लिखीं, जो उनके इस सुचिंतित मंतव्य की परिचायक हैं। प्रस्तुत पुस्तक ‘अछूत’ इसी चिंतन का सुपरिणाम है।
अछूत कौन हैं और अस्पृश्यता की उत्पत्ति क्या है ? ये मुख्य विषय हैं, जिनकी जाँच करने का प्रयास किया गया है और जिनके निष्कर्ष इस पुस्तक में प्रस्तुत किए गए हैं। इस जाँच को शुरू करने से पहले कुछ प्रारंभिक प्रश्नों पर विचार करना आवश्यक है। पहला प्रश्न यह है-क्या हिंदू ही दुनिया में अकेले ऐसे लोग हैं, जो अस्पृश्यता का पालन करते हैं ? दूसरा प्रश्न यह है- यदि अस्पृश्यता गैर-हिंदुओं द्वारा भी मानी जाती है, तो हिंदुओं के बीच प्रचलित अस्पृश्यता की तुलना गैर-हिंदुओं की अस्पृश्यता से कैसे की जा सकती है ? इस विषय पर अब तक किए गए अध्ययनों में यह तुलना शायद ही की गई है।
छुआछूत उन्मूलन और समाज में पारस्परिकता की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण पुस्तक, जो हर भारतीय के चिंतन को दिशा देकर सामाजिक समरसता विकसित करने का पथ-प्रशस्त करेगी।”
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Achoot Matwad Ke Sach : Gandhi aur Ambedkar
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Achoot Matwad Ke Sach : Gandhi aur Ambedkar
भारतीय राजनीतिक मंच पर अस्पृश्यता के बढ़ते हुए खतरों को उजागर करनेवाले दो प्रमुख व्यक्ति- गांधी और अंबेडकर थे। गांधीजी ने अपने सार्वजनिक जीवन के प्रारंभ से ही अस्पृश्य समाज के साथ हिंदू समाज के अनुचित व्यवहार का उग्र विरोध किया। हरिजनों का उत्थान ही गांधी जीवन का मुख्य उद्देश्य बन गया था। 1932 में ‘हरिजन सेवक संघ’ की स्थापना की और 1933 में साप्ताहिक ‘हरिजन’ का प्रकाशन किया। 17 नवंबर, 1933 को गांधी ने अस्पृश्यता विरोधी हरिजन दौरा शुरू किया और 2 अगस्त, 1934 को समाप्त हुआ। निरंतर 10 महीने चले इस दौरे में गांधीजी ने 12,500 मील की यात्रा की और हरिजन-कल्याण के लिए 8 लाख रुपए जमा किए। डॉ. अंबेडकर ने दलित मुक्ति पर अपनी सारी शक्ति केंद्रित करने के उद्देश्य से 1924 में ‘बहिष्कृत हितकारी’ सभा की स्थापना की और मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ का प्रकाशन प्रारंभ किया। वस्तुतः दलितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में अनेक प्रयास बहुत पहले से चल रहे थे। गांधी और डॉ. अंबेडकर को इन प्रयासों की निरंतरता में देखा जाना उचित है।
डॉ. विवेकानंद तिवारी ने अपनी पुस्तक ‘अछूत मतवाद के सच गांधी और अंबेडकर’ पर प्रशंसनीय परिश्रम किया है तथा महत्त्वपूर्ण संदर्भ जुटाए हैं। पाठकों के लिए ये तथ्य पठनीय विवेचनीय हैं।SKU: n/a -
Ayuvardhak Health Care, Hindi Books, Prabhat Prakashan, Yog Ayurvedic books, सही आख्यान (True narrative)
Acupressure Aur Swastha Jeevan (PB)
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Ayuvardhak Health Care, Hindi Books, Prabhat Prakashan, Yog Ayurvedic books, सही आख्यान (True narrative)Acupressure Aur Swastha Jeevan (PB)
एक्यूप्रेशर प्राचीनतम चिकित्सा-पद्धतियों में से एक है। यह पूर्णतया प्राकृतिक उपचार पर आधारित है। यह एक सरल, प्रभावकारी एवं सुरक्षित चिकित्सा-पद्धति है। शरीर के अधिकांश महत्त्वपूर्ण अंगों के प्रतिबिंब-केंद्र हथेलियों एवं तलवों में पाए जाते हैं। इन प्रतिबिंब-केंद्रों को ‘प्रतिक्रिया बिंदु’ भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत शरीर को दर्द, तनाव, थकान, पीड़ा एवं रोग से मुक्ति प्रदान करने के लिए किसी ओषधि का सेवन किए बिना अँगूठे, उँगलियों अथवा इस उद्देश्य हेतु निर्मित उपकरण से कुछ विशेष प्रतिबिंब (रिफ्लेक्स) बिंदुओं पर दबाव डाला जाता है। इस पद्धति का विशेष लाभ यह है कि इसका प्रयोग घर में भी किया जा सकता है और इससे शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। एक्यूप्रेशर के माध्यम से उपचार का अन्य लाभ यह है कि यह न केवल रोग-निवारक है अपितु आरोग्यकर भी है। सप्ताह में दो दिन घर बैठे 20-25 मिनट प्रतिदिन मुख्य-मुख्य प्रतिबिंब-केंद्रों पर दबाव देने से बिना कुछ खर्च किए रोग-निवारण हेतु आप संपूर्ण एक्यूप्रेशर प्रक्रिया अपना सकते हैं। यह पुस्तक रोग-निवारण हेतु अत्यंत उपयोगी होने के साथ-साथ दैनिक जीवन में विभिन्न प्रकार के रोगों से रोगी को छुटकारा दिलाने में सहायक है। पुस्तक की एक अन्य विशेषता है इसमें दिए गए सैकड़ों चित्र, जो विषय को समझने में सहायक हैं।
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Gita Press, Hindi Books, कहानियां
Adarsh Kahaniya 1093
कहानियों के माध्यम से उपदेशात्मक सूत्रों की व्याख्या भारत की प्राचीन कला है। कहानियों के द्वारा पारमार्थिक एवं लौकिक शिक्षा सरलता से दी जा सकती है। इस पुस्तक में स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज के प्रवचनों से संकलित तत्त्व-ज्ञानकी प्रेरणास्रोत 32 कहानियों का सुन्दर संग्रह है।
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Gita Press, Hindi Books, अन्य कथेतर साहित्य
Adarsh Upkaar 0159
यह पुस्तक कल्याण में समय-समय पर प्रकाशित सत्य घटनाओं का प्रेरक प्रसंगों के रूपमें ऐसा मार्मिक चित्रण है कि इसे पढ़ते-पढ़ते आँखों से प्रेमाश्रु छलक पड़ें। आदर्श उपकार, स्वप्न के स्वरूप में सत्य, बहू की बुद्धि, विद्यालय की मित्रता आदि 48 प्रसंगों के रूपमें वर्णित ये प्रेरक-प्रसंग पठनीय तथा अनुकरणीय हैं।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, धार्मिक पात्र एवं उपन्यास
ADBHUT SANNYASI
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, धार्मिक पात्र एवं उपन्यासADBHUT SANNYASI
यह गाथा है एक निस्पृह योगी की, चिरंजीवी तपस्वी की, कठिनतम कर्तव्यरत निर्विकार पुरुषार्थी की, अपराजेय योद्धा की।
वे आवेशावतार नहीं थे, न ही अंशावतार। क्रोधावतार कहकर उन्हें सीमित नहीं किया जा सकता।
आज तक पृथ्वी पर उनके शौर्य की झलक है, वह उनकी साक्षात् उपस्थिति में कितनी प्रभावी रही होगी। वे उस भृगुकुल के भूषण थे, जिसकी महिमा का विस्तार पवित्र नदियों और समुद्रों, पर्वतों और गहन वनों में विद्यमान असंख्य आश्रमों में ही नहीं संपूर्ण त्रैलोक्य में था, भगवान् विष्णु के वक्षस्थल से लेकर हिमगिरि में भृगु शिखर तक। मदांध सत्ता की कुटिलता के विरुद्ध जनप्रतिरोध का प्रबलतम स्वर हैं परशुराम। आजकल के कथित लोकतंत्रों के जन्म के युगों पूर्व वे तंत्र पर लोक के प्रभावी नियंत्रण के अधिष्ठाता हैं। यदि भारतीय चेतना यूरोपीय प्रभुत्व की बंधक न हुई होती तो स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय के लिए मानवीय संघर्ष की गाथा परशुराम से प्रारंभ हुई होती; कथित फ्रांसीसी क्रांति से नहीं।
वे कोरे योद्धा नहीं थे। उन्होंने साधारण मनुष्यों को शास्त्र और शस्त्र दोनों सौंपकर वह सामर्थ्य दिया कि वे स्वयं अभ्युदय और निःश्रेयस पा सकें।
उनकी अद्भुत जीवनगाथा हमारे युग को भी स्वमंगल से सर्वमंगल और अराज से स्वराज हेतु प्रेरित कर सके, यही इस कृति का पावन प्रयोजन है।SKU: n/a -
Bhuvan Vani Trust, Hindi Books, इतिहास, रामायण/रामकथा
Adbhuta Ramayana -Maharishi Valmik
नमोऽस्तु रामाय भवोद्भवाय कालाय सर्वेकहाय तुभ्यम् । नमोऽस्तु रामाय कर्पादने ते नमोऽग्नये दर्शय रूपमग्र्यम् ॥ (१५-२२)
‘रामायण’ ‘सीता के महान चरित्र की अवतारणा” के रूप में भारतीय संस्कृति के लिए दिव्य आकाशदीप के समान एक ज्वलन्त सत्य है। परन्तु इसके साथ राम का परब्रह्म परमात्मा के रूप में निरूपण और मर्यादापुरुषोत्तम के रूप में चरित्न-वर्णन अर्थात् ‘रामायण’ – इस ख्याति
को अधिक दृढ़ करने का श्रेय भी सीताजी के चरित्र को मिलता है । ‘अद्भुत रामायण’ वास्तव में राम-सीता में अभेद बताने के लिए निर्मित हुआ है । इस विश्वसृष्टि में सब कुछ राम ही राम है, सब परब्रह्म परमात्मा है, ऐसा ज्ञानीजनों का अनुभव सामान्य मनुष्य के मन का समाधान नहीं कर सकता । उनका समाधान तो भगवान की लीला-कथा से ही संभव है । जीव-मात्र पर कृपा करने के लिए उनका लीलावतार होता है। राम और सीता ऐसे दो रूप धारण करके परमात्मा ने राक्षसों का संहार किया ।
इस कथा में सीताजी ‘सहस्रमुख रावण’ का वध करती हैं, राम इस कार्य में असमर्थ बताये गये हैं। ‘श्रीसीता-माहात्म्य’ शीर्षक लेख में इस विषय की चर्चा की गई है। परन्तु राम की महिमा इससे कम नहीं होती । पुरुष और प्रकृति, निर्गुण-निराकार, अकर्ता-अभोक्ता ब्रह्म और सृष्टि-स्थिति-संहार की शक्ति अभिन्न हैं। जब दो भिन्न रूपों में इनका अवतार होता है, तब दोनों अपना विशिष्ट स्वरूप-परिचय देते हैं।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)
Adhyapak | Maali Stories By Rabindra Nath Thakur
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)Adhyapak | Maali Stories By Rabindra Nath Thakur
“अधयापक कहानी में रवींद्रनाथ ठाकुर ने शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते की गहराई और जटिलताओं को प्रस्तुत किया है। यह कहानी एक शिक्षक और उसके विद्यार्थियों के बीच के संबंधों को लेकर लिखी गई है। कहानी में यह दिखाया गया है कि शिक्षक का काम केवल किताबों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह अपने विद्यार्थियों के जीवन को आकार देने का भी जिम्मेदार होता है।
माली कहानी में रवींद्रनाथ ठाकुर ने प्रकृति और मनुष्य के रिश्ते को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया है। माली कहानी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है, जो बागवानी और पौधों से जुड़ा हुआ है। माली अपने काम में इतनी तन्मयता और प्रेम से लगा हुआ है कि वह न केवल पौधों की देखभाल करता है, बल्कि अपने जीवन में भी शांति और संतुलन की खोज करता है।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Adviteey Samaajashastr
विद्वान् लेखक ने भारतीय समाजशास्त्र के एक ऐसे ग्रंथ की रचना की है, जो विगत 77 वर्षों से शासन द्वारा भारतीय बुद्धि को बाधित रखने के कारण निकृष्ट पदावलियों व मुहावरों से आक्रांत चित्त वाले पाठकों की भी समझ में आ सके। ऐसा दुष्कर कार्य वही विद्वान् कर सकता है, जो धर्मशास्त्रों का मर्मज्ञ तो हो ही, पाठकों की सीमाओं से भी भलीभाँति परिचित हो । मिश्रजी इस पुरुषार्थ के लिए साधुवाद के पात्र हैं। मनुष्य के संपूर्ण कल्याण में जिनकी रुचि हो, उनके लिए यह अवश्य पठनीय पुस्तक है।
धर्मशास्त्रों के परम ज्ञाता ऋषि-तुल्य आदरणीय पंकजजी ने संपूर्ण मानवता के उत्थान के लिए प्रस्तुत ग्रंथ की रचना की है। बौद्धिक वर्ग से अनुरोध है कि वह इस दुर्लभ ग्रंथ का अध्ययन व मनन-चिंतन करे। इस श्रेष्ठ ग्रंथ के निर्माण के लिए मनीषी पंकजजी को साधुवाद।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास
Ae Mere Pyase Watan Book in Hindi
पुस्तक ‘ऐ मेरे प्यासे वतन’ नई पीढ़ी के लिए जल संरक्षण का पासवर्ड है। जलगुरु महेंद्र मोदी ने अपने अवकाश के दिनों में लगातार जल संरक्षण की विभिन्न विधाओं और तकनीकों पर व्यावहारिक रिसर्च करके जल अभाव की विकराल समस्या का पूर्ण समाधान दिया है। प्रदूषण रहित, किफायती, सरल तकनीक व रख-रखाव की सुगमता आम आदमी की जरूरतें हैं। कानूनी तौर पर तो जल संरक्षण सबके लिए अनिवार्य है, लेकिन आम आदमी किसके पास जाए ? मितव्ययी तरीके कहाँ से सीखे ? कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए पेरिस समझौता 2015 व बाद के निर्धारित लक्ष्यों को कैसे प्राप्त करे ? इन सभी समस्याओं का समाधान लेखक की पुस्तकों में है।
लेखक ने पेयजल तथा वर्षाजल के उपयोगी प्रबंधन के लिए मितव्ययी, प्रदूषणमुक्त, कम जमीन व कम समय में सुखद परिणाम देनेवाले व्यावहारिक व कार्यरत मॉडल दिया। इस मॉडल से पूरे देश को वर्तमान प्रणाली की अपेक्षा अत्यंत कम खर्च में पेयजल उपलब्ध कराना तथा अर्थोपार्जन संभव है। इस मॉडल को अपनाने से पूरे देश को लगभग 2.5 से 5 खरब किलोवाट बिजली की बचत प्रतिवर्ष होगी ।
पुस्तकें पढ़ें, जल संरक्षण सिस्टम स्वयं बनाएँ और अपनी प्यारी संतानों को सबसे महत्त्वपूर्ण उपहार दें – ‘जल सुरक्षा कवच’ का।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास
Afghanistan
अफगानिस्तान : शांति की तलाश, । युद्ध की राह’ एक ऐसे देश का प्रामाणिक विवरण है, जो कभी युद्ध से समृद्ध था और अब युद्ध से तबाह हो गया है । प्रेम राजा जहीर शाह के सौम्य शासन के तहत एक उदार, स्वतंत्र, स्थिर और धर्मनिरपेक्ष अफगानिस्तान की झलक पेश करके पाठकों को समृद्ध करते हैं, जो कई लोगों के लिए अब भी पहेली ही है। लेखक अप्रैल 1978 की क्रांति के बाद अस्थिरता की लंबी अवधि पर चर्चा करते हैं, जिसकी वजह से सोवियत संघ के जरिए कम्युनिस्ट सत्ता में आए।
लेखक सोवियत संघ को हराने के लिए तालिबान बनाने में अमेरिका और पाकिस्तान की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण करते हैं । अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना करते हुए तालिबान के खिलाफ अमेरिका द्वारा लड़े गए बीस साल के युद्ध का एक दिलचस्प विवरण प्रदान करते हुए वह अमेरिकी वापसी की दुःखद तसवीर प्रस्तुत करते हैं, जिससे अफगान एक बार फिर तालिबान की दया पर छोड़ दिए गए और गरीबी के साथ-साथ पाषाण युग में वापस धकेल दिए गए। वर्तमान कथा, हालाँकि काफी संक्षेप में है, लेकिन आधिकारिक, मनोरम और कलात्मक रूप से निर्मित है। यह पाठकों की कल्पना एक ऐसे देश को ले आती है, जिसका उथल-पुथल से भरा अतीत अब भी शांति की तलाश में है।
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Aghanya Ka Astitva: Gau Mata ki Abhinav Gatha
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Aghanya Ka Astitva: Gau Mata ki Abhinav Gatha
-:पुस्तक परिचय:-
गौ माता सनातन धर्म की सबसे महत्वपूर्ण धरोहर है। भगवान श्री कृष्ण और भगवान श्री राम के अवतार गौ माता से बहुत घनिष्ठ संबंध रखते हैं। इस पुस्तक में गौ माता के अस्तित्व पर जो संकट मँडरा रहा है, उसकी चर्चा की गई है। गाय के महत्व के शास्त्रीय प्रमाण, पिछले 1000 वर्षों से चल रहे गौ वध का इतिहास, गौ रक्षा का इतिहास और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के कानूनी समाधानों की चर्चा की गई है। इसके अलावा गौ माता से संबंधित कई नए पक्षों का विवेचन किया गया है, जिससे भारतीयों विशेषकर और हिंदुओं को, गौ संरक्षण और गौ संवर्धन के लिए प्रेरित होना चाहिए। जब सदियों से ऋषि और कृषि की भारतीय संस्कृति गोवंश पर आधारित थी तो भारत राष्ट्र समृद्ध था।
गौरक्षा कोई आधुनिक राजनीति नहीं, सदियों पुराना तपस्विक संकल्प है।
संजीव नेवर ✍
गाय पूज्य माता है।
हंसराज भारद्वाज ✍
इस पुस्तक में पूरे भारत में गौ हत्या पाबंदी के समाधान भी बताए गए हैं।
विष्णु शंकर जैन ✍
भारत एक भी गाय का वध क्यों होने दे?
उदय माहुरकर ✍
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