ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
1000 BHARAT GYAN PRASHANOTTARI
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति1000 BHARAT GYAN PRASHANOTTARI
किसी भी विषय की बढ़िया-से-बढ़िया पठन-सामग्री को उसके विस्तृत कलेवर के साथ पढ़ना और उसे याद करना कठिन होता है, परंतु यदि उसी सामग्री को प्रश्नोत्तर रूप में प्रस्तुत किया जाए तो वह अत्यंत रुचिकर हो जाती है और उसे सहजता से याद भी किया जा सकता है।
भारत जैसे विशाल एवं विविधतापूर्ण देश को 1000 प्रश्नों में समेट पाना निश्चय ही जोखिम भरा काम है। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का अपना एक दायरा होता है। इस स्थिति का आकलन करते हुए इस पुस्तक में प्रश्नों का चयन एवं प्रस्तुतीकरण इस तरह किया गया है कि पाठकों के समक्ष अधिक-से-अधिक जानकारी पहुँचाई जा सके। पुस्तक में शामिल किए गए अधिकतर प्रश्न ऐसे हैं, जिनमें कई उप-प्रश्न और उनके उत्तर छिपे हुए हैं।
प्रस्तुत पुस्तक को यथासंभव ज्ञानवर्धक एवं रोचक बनाने की कोशिश की गई है। प्रश्नों का चयन करते समय प्रत्येक विषय के हर पहलू को छूने की कोशिश की गई है।
पुस्तक संतुलित हो, इसका भी हर संभव प्रयास किया गया है। आशा है, भारत को भलीभाँति समझने में पुस्तक पाठकों की भरपूर मदद तो करेगी ही, भरपूर ज्ञानवर्द्धन भी करेगी।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
1000 Bharatiya Sanskriti Prashnottari(PB)
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति1000 Bharatiya Sanskriti Prashnottari(PB)
‘1000 भारतीय संस्कृति प्रश्नोत्तरी’ पाठकों को भारतीय संस्कृति से संबद्ध—प्राचीन एवं नवीन—विभिन्न जानकारियों, वस्तुनिष्ठ तथ्यों व महत्वपूर्ण संदर्भों से परिचित कराएगी। इसे पढ़कर पाठकगण भारतीय संस्कृति से संबद्ध ग्रंथों व उनके रचनाकारों; महत्त्वपूर्ण तिथियों, दिवसों, पक्षों, माहों व व्रतों; विभिन्न अंकों से संबद्ध जानकारियों; रोमांचक जानकारियों; महापुरुषों, नदियों, देवी-देवताओं, प्रतीकों; साधु-संतों, ऋषि-मुनियों; स्थलों, नदियों, जीव-जंतुओं; मेले, पर्वों त्योहारों व उत्सवों; नृत्य-नाट्य शैलियों, चित्रकला, गीत-संगीत, वाद्यों एवं वादकों, गायकों; अस्त्र-शस्त्रों, विभिन्न अवतारों; विभिन्न व्यक्तियों के उपनामें, उपाधियों व सम्मानों; संस्कार, योग, वेद, स्मृति, दर्शन एवं अन्यान्य ग्रंथों के संबंध में संक्षिप्त व महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कर सकेंगे। विश्वास है, प्रस्तुत पुस्तक सामान्य पाठकों के अलावा लेखकों, संपादकों, पत्रकारों, वक्ताओं, शिक्षओं, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी। वस्तुतः, यह भारतीय संस्कृति का संदर्भ कोश है।.
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, ऐतिहासिक उपन्यास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
32000 Saal Pahale (PB)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, ऐतिहासिक उपन्यास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति32000 Saal Pahale (PB)
“हाल के दिनों में गल्फ ऑफ खंभात (गुजरात) की गहराइयों में बत्तीस हजार साल पुराने हिमयुग में नगर होने के साक्ष्य मिले हैं। संसार में अबतक मिली नगरीय सभ्यताओं में यह सबसे पुराना नगर होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों-पुरातत्त्ववेत्ताओं के नवीन शोध और खोज को केंद्र में रखकर महायुग उपन्यास-त्रयी लिखा गया है। ‘32000 साल पहले तीन उपन्यासों की शृंखला का पहला उपन्यास है।
उन दिनों संसार में सांस्कृतिक विकास के साथ कई नवीन प्रयोग हुए। संसार में पहली बार देह ढकने से लेकर, तेल का दीया जलाने, दूध का सेवन करने, बाँसुरी बजाने, नृत्य करने, गीत गाने, कथा वाचन आदि शुरू हुए। इन्हीं लोगों ने पहली बार नौका, हिमवाहन और चक्के के साथ विविध अस्त्रों का निर्माण किया। पहली बार मनुष्य के ओठों ने खाने और बोलने के आलावा प्रेम करना सीखा। खुले सेक्स की अवधारणा के साथ पहले परिवार की परिकल्पना भी शुरू हुई। कुछ अज्ञात-प्राकृतिक संघर्ष के कारण वहाँ प्रार्थना की शुरुआत हुई।
परग्रहियों ने होमो सेपियंस के डी.एन.ए. का पुनर्लेखन किया। कुछ वैज्ञानिकों और पुरातत्त्ववेत्ताओं ने समुद्र की गहराइयों से जीरो पॉइंट फील्ड में संरक्षित ध्वनियों को संगृहीत कर उसे फिल्टर किया। कड़ी मेहनत के बाद उनकी भाषा को डिकोड किया गया और उसे इंडस अल्ट्रा कंप्यूटर पर चित्रित किया गया। उनकी आवाजों से ही बत्तीस हजार साल पहले की पूरी कहानी सामने आई।”
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Rajasthani Granthagar, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Aaj Bhi Khare Hain Talab
आज भी खरे हैं तालाब : विश्वभर में बुद्धिजीव निरन्तर दोहरा रहे हैं कि तृतीय विश्वयुद्ध पानी के कारण होगा। राजस्थान में वर्षा का औसत अन्य क्षेत्रों की तुलना में बहुत कम है इसलिए जल-संग्रहण के अनेक उपाय परम्परागत रूप से किये जा रहे हैं। ‘आज भी खरे हैं तालाब’ के लेखक अनुपम मिश्र ने गहराई से राजस्थान के परम्परागत जल संग्रहण के उपायों का विवेचन किया है। प्रस्तुत ग्रंथ में राजस्थान के विभिन्न तालाबों का शोधपरक विवरण प्रस्तुत किया है। अनुपम मिश्र के लेखन की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि उन्होंने सुदूर अंचलों में स्थित तालाबों का सूक्ष्मता से अध्ययन कर उनकी समस्त विशेषताओं को प्रकट करते हुए रोचक शैली में विवरण प्रस्तुत किया है। ‘आज भी खरे हैं तालाब’ की सार्थकता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक अल्प अवधि में ही इसकी लगभग एक लाख प्रतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। निःसंदेह राजस्थान के जल स्रोतों से संबंधित यह पुस्तक इस दिशा में शोध करने वाले विषयों के साथ ही जल-संग्रहण संबंधी चेतना जागृत करने वालों के लिए भी अत्यन्त ही उपयोगी एवं लाभप्रद सिद्ध होगी।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Aise The Bharat Ke Gaon
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृतिAise The Bharat Ke Gaon
देश का अधिकांश गुणी समाज आज भी गाँवों में ही निवास करता है। कभी-कभार, बुजुर्गों की जुबानी सामाजिक ज्ञान की बहुत सी बातें सुनने को मिल जाती हैं, जो हमारी किताबों का हिस्सा नहीं होतीं। सच में, भारतीय गाँवों की कल्पना के पीछे पुरखों का गजब चिंतन रहा है। जहाँ आहार और गौरव की सुरक्षा होय विज्ञान, कला, अध्यात्म और सामाजिक अर्थशास्त्र के चारों मजबूत स्तंभ हों। छोटे-छोटे औजारों से बड़े-बड़े काम करने संभव हों। घर का वास्तु-विज्ञान आरोग्य के लिए श्रेष्ठ हो, प्रकृति से घिरे हुए गाँव में हरे-भरे खेत-खलियान, निर्मल जल लेकर बहती हुई नदियाँ, तालाब, कुएँ, हमेशा गुनगुनाती और उत्सव मनातीं, मेहनती औरतों की मुसकान हो। युवाओं के चेहरे पर संतोष का भाव हो। गाय के साथ भागते-दौड़ते बच्चों की खिलखिलाहट हो। बुजुर्गों के होंठों पर भी मुस्कान हो। ऐसे गाँवों की कहानी है इस पुस्तक में।
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Rajasthani Granthagar, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Aitihasik Kalkram mein Gurjar
ऐतिहासिक कालक्रम में गुर्जर : भारतीय संस्कृति को लम्बे समय तक विदेशी आक्रांताओं के आघातों से सुरक्षित रखने का दायित्व गुर्जर शासकों ने बखूवी निभाया है। इस वीर जाति ने प्रागैतिहासिक काल से आज तक अपने शौर्य से भारतीय संस्कृति को अक्षुण बनाये रखने हेतु हर कालखण्ड में महती भूमिका निभाई है। समय के थपेड़ो में कतिपय गुर्जर समूह इस्लाम या अन्य धर्मावलम्बी बनें, परन्तु वहाँ भी इन्होनें अपनी संस्कृति व स्वरुप को नही छोड़ा।
इस वीर जाति की शौर्य गाथाओं के मूल से इनकी उत्पति एवं विकास, कालान्तर में राजनैतिक पतन तक की तत्व तथा विवेचना करने का प्रयास इस पुस्तक में संकलित आलेखों में किया गया है।
यह पुस्तक सुधि पाठकों की उत्कंठा को पूर्ण करने का प्रयास है, जो इतिहास में भ्रान्तियों से मुक्त इतिहास के अध्ययन की जिज्ञासा रखते हैं। पुस्तक में प्रकाशित आलेख, प्रस्तुतकर्ता विद्वानों का स्वयं का शोध प्रयत्न है।SKU: n/a -
Hindi Books, Rajasthani Granthagar, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Aitihasik Kila : RANTHAMBHORE
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Hindi Books, Rajasthani Granthagar, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृतिAitihasik Kila : RANTHAMBHORE
ऐतिहासिक किला : रणथम्भौर किले के गौरवशाली इतिहास को प्रस्तुत कृति के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने हेतु कई प्राचीन ग्रंथों का समीक्षात्मक अध्ययन किया गया। वर्तमान सन्दर्भ में इसका निरीक्षण करके, वहाँ उपस्थित पर्यटकों, आसपास के ग्रामीण लोगों एवं पुरातत्त्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों व विषय से सम्बन्धित व्यक्तियों का साक्षात्कार किया गया। पुस्तक में रणथम्भौर किले का इतिहास, यहाँ शासन करने वाले चैहान वंश के वीर शासकों व अन्य शासकों का इतिहास, किले की स्थापत्य कला, जल प्रबंधन, हम्मीर विषयक रचनाओं व सम्बन्धित साहित्य का विश्लेषणात्मक वर्णन है। किले का हर वह हिस्सा जो अब तक अछूता रहा, उसे भी सहेजने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है।
प्रस्तुत कृति में न केवल ऐतिहासिक वर्णन है अपितु रणथम्भौर की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक स्थितियों के साथ किले की वास्तुकला को विवेचित करते हुए संगीत कला, धर्म और शिक्षा को वर्णित करने का प्रयास किया गया है। इसमें बाघ परियोजना का भी संक्षिप्त विवरण है।
मुझे पूरा विश्वास है कि यह पुस्तक रणथम्भौर किले के इतिहास व किले से सम्बन्धित अन्य पहलुओं की जानकारी हेतु मील का पत्थर साबित होगी। यह पाठकों, शोधार्थियों एवं पर्यटकों की किले के प्रति जिज्ञासा को शांत कर सकेगी व उनके लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण और उपयोगी साबित होगी।SKU: n/a -
English Books, Garuda Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
An Anthology of Discourses on Bharat
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English Books, Garuda Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृतिAn Anthology of Discourses on Bharat
An Anthology of Discourses on Bharat: Essays in the Honour of Pof Kuldip Chand Agnihotri is a collection of essays elaborating on the unique aspects of Bharatiya history, culture and polity including Bharatiya Dharma and its religions, ancient language Sanskrit and the present geopolitics based on things Bharatiya that have shaped Bharat.
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Rajasthani Granthagar, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Architecture of Rajasthan
This book is about the historic city of Jaipur, the pink city of India. It is a unique city designed and established by Sawai Jai Singh II in 1727 A.D. The grandeur blueprint of this walled city has largely remained unchanged until now, even after 293 years. Despite various ups and downs, the city continued to flourish as a trade and religious center till mid 20th century.
Jai-Nagar, stamped as the World Heritage City by UNSECO, was fabricated in a blooming and charming architectural style, which is unique in many senses. It is a testimony of the intellect of Sawai Jai Singh and his successors. It is their inherent passion for art and architecture that unfolds into the magnificent buildings of this walled city.
The book will explore the palaces, Havelis, temples, gardens, kharkhanas, bawaris, streets, mohallas, etc. of the walled city, along with the forts in its vicinity. It is an attempt to bring forward the Rajput architectural features, and also highlight the impact of Mughal architecture. In fact, in Jaipur, the regional art and architectural traditions of Rajputs perfectly blended with the Mughal architectural traditions and emerged as the Dhoondhari style of architecture.SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Atulya Bharat Ki Khoj
समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विविध पर्यटक आकर्षण, कई धार्मिक तीर्थ केंद्रों का घर तथा कई बड़ी पवित्र नदियों का समागम है भारत। वर्षों से इसकी संस्कृति अलग, अनोखी एवं अद्वितीय रही है। बहुधार्मिक, बहुभाषी तथा पारंपरिक भारतीय पारिवारिक मूल्यों से सम्मिलित इस देश को रचनाकार आदर से प्रणाम करते हैं। लेखक को भारत के 31 राज्यों को जानने और समझने का मौका मिला। भारत की गरिमामयी मिट्टी से प्राप्त अनुभवों को लेखक ने इस पुस्तक में सँजोया है। भारत की सांस्कृतिक विरासत की सुगंध से मन आज भी महक उठता है, परंतु मोक्ष एवं ज्ञान का प्रवेश-द्वार कहे जानेवाले भारत की विरासत के रहस्य को एक तरफ समस्त संसार देखने आता है तो दूसरी तरफ खुद भारतीय ही इसे भूलते जा रहे हैं। लेखक अपनी इस पुस्तक में भारत की अनूठी सांस्कृतिक उपलब्धियों तथा अपने अनुभवों का सुंदर वर्णन करते हुए अत्यंत गौरवान्वित हैं। अपनी इस भ्रमण यात्रा को इस पुस्तक में ‘अतुल्य भारत की खोज’ का नामकरण दिया गया है, जो स्वयं में इस उपमा को चरितार्थ करता है कि भारत जैसा अनुपम देश दुनिया में दूसरा नहीं है।
भाग्यशाली हूँ मैं जो इस पावन धरा पर मेरा जन्म हुआ, भारत माँ की गोद में खेलकर जीवन मेरा धन्य हुआ, काश! कभी चुका पाऊँ कर्ज इस धरा का, रात-दिन ध्यान रहता सी का।SKU: n/a -
Hindi Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)
Avishvasniya Bharat
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Hindi Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)Avishvasniya Bharat
अविश्वसनीय भारत, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इसके अद्भुत भौगोलिक परिदृश्य और हजारों वर्ष पुराने इतिहास की व्यापक खोज प्रस्तुत करता है। हिमालय की ऊँची चोटियों और पवित्र मंदिरों से लेकर रहस्यमयी अनुष्ठानों और हिंदू दर्शन की गहन अवधारणाओं तक, यह पुस्तक उस बहुस्तरीय पहचान को उजागर करती है, जिसके कारण भारत को अक्सर ‘अतुल्य भारत’ या ‘अमेजिंग इंडिया’ कहा जाता है। भारत के प्राचीन इतिहास पर चर्चा से प्रारंभ होकर—सिंधु घाटी सभ्यता से आधुनिक समय तक की यात्रा—यह विवरण उपमहाद्वीप की अखंड समयरेखा को उजागर करता है, जो यह दर्शाता है कि अनेक आक्रमणों और सांस्कृतिक परिवर्तन के बावजूद भारतीय सभ्यता सदैव जीवंत बनी रही है। उदाहरणों, लोक परंपराओं और कम ज्ञात तथ्यों से समृद्ध, ‘अविश्वसनीय भारत’ भारतीय राज्यों, भाषाओं, त्यौहारों, वनस्पतियों और जीवों, ऐतिहासिक स्मारकों और आध्यात्मिक स्थलों की विविधता को खूबसूरती से समेटता है। यह पुस्तक एक व्यापक संदर्भ ग्रंथ और एक रोमांचक यात्रा वृत्तांत का संयोजन है, जो यह दर्शाता है कि भारत ने सदियों से स्वयं को कैसे पुनः परिभाषित किया है।
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Vani Prakashan, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Awadh Ki Tharu Janjati : Sanskar Evam Kala
‘आदिवासी थारू जनजाति’ भारत-नेपाल सीमा के दोनों तरफ़ तराई क्षेत्र में घने जंगलों के बीच निवास करती है जो कि भारत की प्रमुख जनजातियों में से उत्तर भारत की एक प्रमुख जनजाति है। उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र के तीन ज़िलों लखीमपुर खीरी, बहराइच व गोण्डा में थारू जनजाति निवास करती है। जहाँ अवध क्षेत्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी का जन्म स्थान पावन धाम प्राचीन धार्मिक धर्म नगरी है और मेरा परम सौभाग्य है कि मेरा जन्म अवध के अयोध्या में हुआ है। वहीं अवध क्षेत्र की एक विशेषता रही है। थारू जनजाति का आवासित होना उनकी समृद्धि, संस्कृति व लोक परम्परा से युक्त उनका इतिहास गौरवशाली होना इनकी कला और संस्कृति का हमारी लोक संस्कृति के साथ घनिष्ठ सम्पर्क है। थारू जनजाति की सभ्यता, संस्कृति, संस्कार, लोक कला अपने आप में लालित्यपूर्ण विधा है। इसका प्राचीन इतिहास से लेकर आधुनिक इतिहास तक विस्तार है लेकिन कतिपय कारणों से यह अभी तक समृद्ध कला प्रकाश में नहीं आयी है। इनकी संस्कृति, सभ्यता अभी तक पूरे अवध और उसके बाहर भी प्रकाश में नहीं आयी है और ना ही प्रचार-प्रसार हुआ है। मेरा लक्ष्य है कि थारू जनजाति की लोक कला संस्कृति और लोक जीवन पद्धति जो कि हमारे अवध का एक गौरवशाली अंग है, इस पुस्तक के माध्यम से जन सामान्य में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। थारू जनजाति एक जनजाति ही नहीं एक लोक परम्परा है, इसको एक जाति के रूप में जब हम देखते हैं, तो पाते हैं कि इन्होंने हमारी एक विरासत को सँभाल कर रखा है जो अभी तक बची हुई और सुरक्षित है। इस संस्कृति, कला और परम्परा को नयी पीढ़ी तक पहुँचाने, सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह सर्वेक्षण का कार्य किया गया है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)
AYODHYA KA ITIHAS (Rai Bahadur Lala Sitaram)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)AYODHYA KA ITIHAS (Rai Bahadur Lala Sitaram)
लाला सीताराम ने 1932 में अयोध्या का इतिहास लिखा था। इनके पूर्वज राम के अनन्य भक्त थे। इसलिए जौनपुर छोड़ अयोध्या नगरी में बस गए थे। लाला सीताराम ने अयोध्या में अपने घर के एक कमरे में रामायण मंदिर भी बना रखा था। यहाँ रहते हुए उन्होंने ‘अयोध्या का इतिहास’ लिखना प्रारंभ किया। वेद से लेकर पुराणों में अयोध्या का उल्लेख तो मिलता है लेकिन अयोध्या के इतिहास पर कोई समग्र दृष्टि डालती पुस्तक का अभाव लगातार उन्हें यह इतिहास लिखने के लिए प्रेरित करता रहा। लाला सीताराम ने गहन शोध कर वेद काल से लेकर ब्रिटिश काल के अयोध्या पर प्रकाश डाला है। अयोध्या न सिर्फ हिंदुओं का एक पवित्रतम तीर्थ है वरन् जैन, बौद्ध और सिख के लिए भी उतना ही पावन और श्रद्धा का केंद्र है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Ayodhya Ne Kaise Badal Di Bambai
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृतिAyodhya Ne Kaise Badal Di Bambai
“6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी ढाँचे के विध्वंस के बाद पूरा भारत दंगों की चपेट में आ गया था। सांप्रदायिक अशांति को लेकर हमेशा ही अतिसंवेदनशील रही मुंबई में दिसंबर 1992 और फिर जनवरी 1993 में जो हिंसा हुई, वह अभूतपूर्व थी। दो महीने बाद, मार्च के महीने में सिलसिलेवार धमाकों ने शहर को दहला दिया, जिसमें 250 से अधिक लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हो गए। सांप्रदायिक दंगों के बाद छिड़े गैंगवार और अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदाओं ने शहर को तहस-नहस कर दिया। इन सबने मुंबई को हमेशा के लिए बदल दिया।
प्रस्तुत पुस्तक बताती है कि पिछले तीन दशकों में मुंबई ने अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का कैसा दौर देखा है। 1992 के बाद, मुंबई अंडरवल्र्ड में एक विभाजन ने राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दिया, जिसने शहर की जनसांख्यिकी को बदल दिया और नई नई बस्तियों को जन्म दिया। कुछ समय की खामोशी के बाद, वर्ष 2002 में एक बार फिर धमाकों और आतंकवादी हमलों ने इसे हिला दिया। यह हिंसा का एक ऐसा चक्र था, जो 2008 में 26/11 के भयानक आतंकवादी हमलों के साथ चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया। मुंबई को जिन प्रमुख घटनाओं और लोगों ने वर्तमान रूप दिया है, उनके विषय में बताने के साथ ही, इस पुस्तक ने शहर के चरित्र में बदलाव, इसके भौतिक रूप और नागरिक मुद्दों से लेकर इसकी अर्थव्यवस्था, रियल एस्टेट और राजनीति तक में बदलाव को शब्दों में बुना है।”SKU: n/a -
Rajasthani Granthagar, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Baneda Sangrahalaya ke Dastawej – Vol. 4
प्रो. के.एस. गुप्ता ने बनेड़ा दस्तावेजों के 1758 ई. से 1818 ई. तक तीन भाग पूर्व में प्रकाशित किए है, जिनका इतिहास जगत में अच्छा स्वागत हुआ है। इन दस्तावेजों के आधार पर प्रसिद्ध इतिहासवेत्ताओं की अनेक मान्यताओं का पुनर्वलोकन की आवश्यकता प्रतीत हुई।
विश्वास है कि दस्तावेजों का चतुर्थ भाग भी भारतीय इतिहास में नई मान्यतायें स्थापित करेगा। 1857 की क्रान्ति सम्बंधित दस्तावेजों में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं का दिग्दर्शन होता है। विशेषतः क्रान्ति की समाप्ति के पश्चात् अंग्रेजों ने जिस अमानुषिकता का परिचय दिया उसका विवरण इस ग्रन्थ की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है।
मुझे विश्वास है कि मेवाड़ राजस्थान ही नहीं अपितु भारतीय इतिहास लेखन में ये दस्तावेज आधारभूत स्रोत के रूप में प्रतिष्ठापित होंगे।SKU: n/a -
Vishwavidyalaya Prakashan, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Bauddha Kapalika Sadhana Aura Sahitya
हिन्दी के आदिकालीन साहित्य और भक्तिकालीन साहित्य की भूमिका प्रस्तुत करनेवाली बौद्ध सिद्धों की अपभ्रंश रचनाओं का अध्ययन केवल हिन्दी ही नहीं सम्पूर्ण समकालीन साहित्य, किंबहुना तत्कालीन समग्र धर्मदार्शनिक एवं साधनात्मक जीवन के अध्ययन के लिए उपयोगी है; क्योंकि तंत्रदर्शन एवं साधना का अति व्यापक एवं गंभीर प्रभाव सर्वत्र दिखाई पड़ता है। इसी दृष्टि से बहुत पहले १९५८ में तांत्रिक बौद्ध साधना और साहित्य की रचना की गई थी। यह ग्रन्थ उस अध्ययन के एक पक्ष का विस्तार है। बहुत पहले आचार्य डॉ० हजारीप्रसाद जी द्विवेदी ने अपने ग्रंथ ‘नाथ सम्प्रदाय’ में जालंधर पाद और कान्हुपा के कापालिक साधन और ‘बामारग’ की चर्चा नाथ सम्प्रदाय के परिप्रेक्ष्य में ही की थी। दूसरे उस समय बौद्धों के कापालिक साधन और दर्शन से सम्बन्धित किसी शास्त्रीय ग्रन्थ की सहायता नहीं ली गई थी। अत: बौद्धों के कापालिक तत्त्वों, साधनों, दार्शनिक सिद्धान्तों की मीमांसा भी नहीं हो पाई। यहाँ तक कि श्री स्नेलग्रोव ने हेवज्रतंत्र और उसकी टीका हेवज्रपंजिका का संपादन करके भी उसके कापालिक तत्त्वों का विस्तृत विवेचन नहीं किया और न एक पृथक् बौद्ध साधनाधारा के रूप में इसे प्रस्तुत ही किया। यह ग्रंथ बौद्ध साधना और साहित्य के अनेक अछूते, विस्मृत, तिरस्कृत और महत्त्वपूर्ण सूत्रों को एकत्रित कर उनका व्यवस्थापन करते हुए बौद्धों के कापालिकतत्त्व का स्वरूप प्रस्तुत करता है। सामान्यतया केवल शैवों में ही कापालिकों की स्थिति माननेवालों को इस ग्रंथ से नया प्रकाश, नई सूचनाएँ एवं भारतीय कापालिक साधना का एक नया स्वरूप देखने को मिलेगा। कापालिक साधना के विषय में फैली अनेक भ्रांतियों का निराकरण भी होगा, इसमें संदेह नहीं।
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English Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)
Beyond the Misty Veil
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English Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)Beyond the Misty Veil
Uttarakhand is the land where magnificent temples are dedicated not only to Brahmanical deities but also to folk Gods who are as colourful as they are revered. These grand edifices are virtually poetry in stone where every stone tells a story.
Their ornamental exuberance and intricate craftsmanship can be compared to the handiwork of a gem setter as they stand in timeless harmony with centuries settling softly on their shoulders. Encompassing the faith of millions of people they are also the windows to the past of this proud land where there is little recorded history.But most fascinating are the manifold legends that they clasp to their bosoms as they stand tall at the cusp of heaven and earth. Here mythology merges into reality.
These temples talk. The Himalayas speak. The author has listened to them and attempted to lift the misty veil to capture some of the fascinating stories of Gods and Men, as seen through the eyes of these temple. This book is perhaps, one of the first such documentations of the temples of Uttarakhand.
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