इतिहास
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Hindi Books, Rajasthani Granthagar, इतिहास
Aadhunik Bharat ka Itihas
आधुनिक भारत का इतिहास (1740 ई. से 1950 ई. तक) : आधुनिक भारत का इतिहास, अत्यंत रोचक, पठनीय एवं प्रेरणादायक हैं। यह इतिहास उस समय से आरम्भ होता है, जब मुगलों का समस्त वैभव धूल-धूसरित होकर केवल लाल किले तक सीमित रह जाता है और मराठों के हाथों की कठपुतली बनकर अंतिम सांसें गिनने लगता है। इस युग में होने वाले अफगान आक्रमणों के हाथों, मराठों की भी कमर टूट जाती है और वे बिखरने लगते हैं। इस काल में पूरा देश हिन्दुओं, मराठों और मुस्लिम रियासतों में विभक्त होकर एक दूसरे के विनाश के लिये भयानक रक्तपात करता हुआ दिखाई देता है। ईस्ट इण्डिया कम्पनी भारत की इस दुर्दशा का लाभ उठाती है और तेजी से पसरती हुईं पहले मद्रास, फिर बंगाल और इलाहबाद और अंत में दिल्ली तक जा पहुंचती है। 1857ई. में भारत अपनी खोई हुई स्वतंत्रता प्राप्त करने का प्रयास करता है किंतु ईस्ट इण्डिया कम्पनी के हाथों से निकलकर ब्रिटिश ताज के अधीन हो जाता है। लगभग तीन दशकों बाद ही भारत अपनी मुक्ति के लिये पुनः आंदोलन करता है। यह आंदोलन 1947ई. में तब तक चलता रहता है, जब तक कि भारत दासता की बेड़ियां पूरी तरह काट नहीं डालता। इतिहासकार डॉ. मोहनलाल गुप्ता द्वारा लिखित यह इतिहास भारत के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर लिखा गया है।
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Rajasthani Granthagar, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Aaj Bhi Khare Hain Talab
आज भी खरे हैं तालाब : विश्वभर में बुद्धिजीव निरन्तर दोहरा रहे हैं कि तृतीय विश्वयुद्ध पानी के कारण होगा। राजस्थान में वर्षा का औसत अन्य क्षेत्रों की तुलना में बहुत कम है इसलिए जल-संग्रहण के अनेक उपाय परम्परागत रूप से किये जा रहे हैं। ‘आज भी खरे हैं तालाब’ के लेखक अनुपम मिश्र ने गहराई से राजस्थान के परम्परागत जल संग्रहण के उपायों का विवेचन किया है। प्रस्तुत ग्रंथ में राजस्थान के विभिन्न तालाबों का शोधपरक विवरण प्रस्तुत किया है। अनुपम मिश्र के लेखन की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि उन्होंने सुदूर अंचलों में स्थित तालाबों का सूक्ष्मता से अध्ययन कर उनकी समस्त विशेषताओं को प्रकट करते हुए रोचक शैली में विवरण प्रस्तुत किया है। ‘आज भी खरे हैं तालाब’ की सार्थकता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक अल्प अवधि में ही इसकी लगभग एक लाख प्रतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। निःसंदेह राजस्थान के जल स्रोतों से संबंधित यह पुस्तक इस दिशा में शोध करने वाले विषयों के साथ ही जल-संग्रहण संबंधी चेतना जागृत करने वालों के लिए भी अत्यन्त ही उपयोगी एवं लाभप्रद सिद्ध होगी।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास
Aankhan Dekhi Bihar Andolan
एक आंदोलन दूसरे आंदोलन की याद दिलाता है। हाल के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के कारण 1974 के बिहार (जेपी) आंदोलन की खूब चर्चा हुई है। 1974 के दशक में या उसके बाद की जनमी नई पीढ़ी 1974 के आंदोलन के बारे में जानना-समझना चाहती है, लेकिन उसके लिए पर्याप्त सामग्री की कमी है।
हाल में दिल्ली के नृशंस गैंप रेप के विरोध में दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में स्वतःस्फूर्त जन विस्फोट हुआ। बिहार आंदोलन के बाद पहली बार सामाजिक सरोकार के सवाल पर देश के छात्र-छात्राओं की इतनी बड़ी शक्ति दिल्ली के राजपथ (जिन पर आंदोलनात्मक गतिविधियाँ प्रतिबंधित रही हैं) पर अपनी आवाज बुलंद कर रही थी। क्या भारत की यह युवा शक्ति इस पुरुष-प्रधान समाज एवं पूँजीवादी व्यवस्था की गैर-बराबरी, अन्याय एवं अत्याचार को खत्म करने तथा समतामूलक लोकतांत्रिक समाज की स्थापना करने की दिशा में पहल कर पाएगी?
प्रस्तुत पुस्तक बिहार आंदोलन की व्यापकता और उसमें बुनियादी परिवर्तन और क्रांति के बीज होने की क्षमता का आँखों देखा प्रामाणिक विवरण पेश करती है। एक पत्रिका में छपे लेखों, रपटों और दस्तावेजों के माध्यम से किसी आंदोलन पर ऐसी पुस्तक शायद ही हिंदी में कोई दूसरी हो। बिहार की संघर्षशीलता, जुझारूपन और आंदोलन-शक्ति को समझने में सहायक एक उपयोगी पुस्तक।SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Aarakshan Ka Dansh
Prabhat Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Aarakshan Ka Dansh
आरक्षण का देश में विभिन्न संदर्भों, साक्ष्यों एवं वक्तव्यों के परिप्रेक्ष्य में प्रसिद्ध पत्रकार एवं चिंतक श्री अरुण शौरी ने यह बताने का प्रयास किया गया है कि आरक्षण को लेकर भारत की राजनीति किस दिशा में जा रही है। चूँकि आज राजनेता और राजनीतिक दल अपने कार्य-प्रदर्शन के आधार पर स्वयं को स्थापित नहीं कर पा रहे हैं; अत: इसके लिए उन सबने एक मानक तकनीक अपनाई है—कोई ऐसा बिंदु ढूँढ़ निकालना, कोई ऐसा दोष ढूँढ़ निकालना, जिससे यह दिखाया जा सके कि अमुक समूह या दल पिछड़ गया है—और फिर उस समूह के एकमात्र शुभचिंतक के रूप में, हिमायती के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करना। राजनेता कानून-पर-कानून पारित करते चले जाते हैं, लेकिन आरक्षण का दंश किसी भी रूप में कम होने का नाम नहीं लेता। जातिवादी राजनीति से अपना जीवन चलानेवाले राजनेताओं के लंबे-चौड़े और रटे-रटाए भाषणों से फैली पथभ्रष्टता और उसके लिए देश द्वारा चुकाई जा रही कीमत को बखूबी समझा जा सकता है।
इस पुस्तक का विषय आरक्षण पर चली आ रही सार्वजनिक बहस को सामने लाना है, जो विगत तीस वर्षों में अलग-अलग मोड़ और उतार-चढ़ाव लेती आ रही है। विषय को स्पष्ट करने एवं परिणामों को सामने लाने के लिए विद्वान् लेखक ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों को माध्यम बनाया है। ‘आरक्षण’ का विषय अत्यंत चिंतनीय एवं विचारणीय है। इस बहस में सुधी पाठक भी शामिल हों तो इस पुस्तक का प्रकाशन सार्थक होगा।SKU: n/a -
Hindi Books, Prakashan Sansthan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Aaryavart
भारतीय आर्य, वैदिक सभ्यता की स्थापना, संघर्ष, इतिहास, भूगोल, स्त्री-स्थिति और ब्रह्माण्डीय विज्ञान की औपन्यासिक कथा
ऋग्वेद विश्व मानव के जीवन दर्शन का पाठ है। मानव का जीवन सरल बनाने के लिए भूगोल और खगोल का पाठ है। मानव-मस्तिष्क में चलने वाले कोलाहल की परिणति स्त्री-पुरुष के प्रेम-संसर्ग और वर्चस्व ;सत्ताद्ध स्थापना की आकांक्षा के लिए संघर्ष है। मनुष्य में दूसरे की उन्नति और बढ़ती धन-संपदा को लेकर ईर्ष्या और विद्वेष है। शरीर में उपलब्ध इन दुर्गुणों के रसायन प्राणलेवा प्रतिस्पर्ध के विदू्रप हैं। शरीर के इसी मन में परिवार, समाज और देश के प्राण न्यौछावर करने वाले उदात्त गुणों का प्रकाट्य भी है। पफलतः शांति, संतोष, अहिंसा के साथ, अपरिग्रह, समता और न्याय का पालन भी है।
उम्र के सोपान चढ़ता जीवन कुछ ऐसी होनी-अनहोनी घटनाओं से गुजरता है, जो अचंभित करती हैं। अतएव मनुष्य इनकी परिणति भाग्य-दुर्भाग्य और प्रारब्ध् में देखता है। निरंतर गतिशील ब्रह्मांड में एक आश्चर्यजनक अनुशासन है। इस गतिशील अनुशासन पर नियंत्राण की वल्गाएं कोई नहीं जानता किसके हाथ में हैं ? यह संशय है, सो ईश्वर है। इस चराचर जगत् को किसने रचा? इस ज्ञान के परिणाम में पंचभूत हैं। इन पंच तत्त्वों का संतुलन गड़बड़ाता है तो मनुष्य का स्वास्थ्य तो गड़बड़ाता ही है, इनके असंतुलन के भैरव-मिश्रण का तालमेल ऐसा कोलाहल रच देता है कि तांडव की विराट प्रलयलीला मनुष्य के समस्त भौतिक-अभौतिक विज्ञान समस्त तथाकथित विकास की उपलब्ध्यिों को लील जाता है। बचा मनुष्य fफर इसी दिशा में चल पड़ता है। भारतीय दर्शन की यही जिजीविशा सर्वग्राही है।
इसी उपन्यास की भूमिका सेSKU: n/a -
Hindi Books, Rajasthani Granthagar, इतिहास, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Aas Na Aangane
आस ना आँगणै
अक’ज तारो आसरौ, ओक’ज तारी वात। मात सरसती राखजे, म्हारै माथै हाथ।।
accordingly वागड़ी मंय म्हारी पेहली चोपड़ी “आस ना आँगणै” घणेमान थकी आप सब हुदी पुगाड़ते म्हारा मन मंय घणौ हरख है। घणं वरसं थकी म्हारै मन मों ओक वात हमेस आवती रह्यी के अणा नवा ज़मारा नै नवा ऊसर नं मानवी सप्पा बदलाईग्यं हैं नै जूनी वातै अणी नवी पीड़ी ने कौण वताड़े अर कौण हमझावे? all in all अणां विस्यार हाते म्हें नानूं मोटू लखवूं सरू कर्यु। अटला मों आदरजोग दादा श्री उपेन्द्रजी ‘अणु’, ऋषभदेव, श्री दिनेशजी पंचाल, विकास नगर नै श्री घनश्याम सिंहजी भाटी ‘प्यासा’ नो साथ मल्यौ अर अना लीधै’ज आ चोपड़ी नौ रूप लई आपनै हाथ मों है। Aas Na Aanganealso आणी जातरा मों वागड़ अर वागड़ी नी वात करतै थकै नवा ऊसर नै नवा ज़मारा मों जै वातै जौवा न्हें मलै हैं अर ओम लागे के ई वात अर ई विगत क्य खोवणीं पत्तू ज न्हें है। या’ज विच्यार मन मों उबराताग्या अर म्हूं कौसिस करतौग्यौ। जै वाते विगत म्हारे साथै वीती अर म्हें पण देखी, होंची हमझी या ‘ज वात अर विच्यार आणी चोपड़ी मों लाब्बा नी पूरी कोसिस रह्यी है। औणा हाते जे सबद अवै वागड़ी मों हांबळवा न्हें मलता हैं अर क्यं भी वापरवा मों न्हें आवता हैं औणा सबद नो परिचै करावा नी कोसिस कीदी है। Aas Na Aangane
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Hindi Books, Motilal Banarsidass International, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Aasan Pranayama Mudra Bandh
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Hindi Books, Motilal Banarsidass International, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Aasan Pranayama Mudra Bandh
पुस्तक परिचय स्वयं के अनुभव और प्रामाणिक महर्षियों के वचनों से लेखक ने पाया कि न केवल योग ही स्वयं में पूर्ण है अपितु उसके सभी अंग भी अपने आप में संपूर्ण हैं। ‘आसन प्राणायाम मुद्रा बन्ध’ इस पुस्तक में इन चारों अंगों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है। लेखक ने इस पुस्तक में बताया है कि आसनों के माध्यम से शारीरिक, प्राणायाम के माध्यम से प्राणिक, मुद्राओं के माध्यम से मानसिक और बन्धों के अभ्यास से ऐन्द्रिक विजय किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है। सभी विषय प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन और गहन अनुसंधान के पश्चात् आपके समक्ष पुस्तक के रूप प्रस्तुत किये गये हैं। यह पुस्तक योग विद्यार्थियों, जिन्हे योग विषय में प्रतियोगी परीक्षाओं (UGC-NET, QCI, YCB इत्यादि) में सम्मिलित होना है, उनके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। साथ ही साथ सामान्य जन भी इस पुस्तक का संपूर्ण लाभले सकते हैं।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, उपन्यास
Aatmanubhooti Ke Khule Rahasya
“गुरदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था, “यदि आप भारत को जानना चाहते हैं, तो विवेकानंद को पढ़िए। उनमें आप सबकुछ सकारात्मक ही पाएँगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं ।”’
जिस प्रकार कछुआ अपने सिर एवं पैरों को खोल के अंदर समेट लेता है और तब उसे हम मार ही क्यों न डालें, उसके टुकड़े-टुकड़े ही क्यों न कर डालें, पर वह बाहर नहीं निकलता, इसी प्रकार जिस मनुष्य ने अपने मन एवं इंद्रियों को वश में कर लिया है, उसका चरित्र भी सदैव स्थिर रहता है। वह अपनी आभ्यंतरिक शक्तियों को वश में रखता है और उसकी इच्छा के विरुद्ध संसार की कोई भी वस्तु उसे बहिर्मुख होने के लिए विवश नहीं कर सकती।
प्रस्तुत पुस्तक ‘आत्मानुभूति के खुले रहस्य’ में स्वामीजी ने सरल शब्दों में ‘अपने आत्म यानी स्व’ को पहचानने की कला सिखाई है। जो व्यक्ति स्वयं को भलीभाँति पहचान लेता है, उसके जीवन में फिर कभी कोई अभाव नहीं रहता। अपने आपको गहराई से जानने-समझने वाले चिंतनशील व्यक्ति के लिए एक प्रेरक, जीवनोपयोगी और संग्रहणीय पुस्तक ।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास
Abhayarani Abakka
“यह पुस्तक भारत की एक विस्मृत परंतु विलक्षण वीरांगना महारानी अबक्का चौटा के अद्भुत जीवन और संघर्ष को पुनः जनमानस के सम्मुख प्रस्तुत करने का एक सशक्त प्रयास है। इतिहास की परतों में दबे उस स्वर्णिम अध्याय को शब्दों के माध्यम से जीवंत किया गया है, जिसमें साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अद्वितीय निष्ठा की अनुपम मिसाल मिलती है। महारानी अबक्का न केवल विदेशी आक्रांताओं से वीरतापूर्वक लड़ीं, बल्कि एक संगठित सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक भी रहीं।
यह रचना केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संकलन नहीं, बल्कि उस युग की संवेदना, संघर्ष और आत्मगौरव को अनुभूत करने का आमंत्रण है। लेखक का उद्देश्य पाठक को एक ऐसी यात्रा पर ले जाना है, जहाँ वह इतिहास को केवल पढ़े नहीं, बल्कि उसे महसूस भी करे। यह पुस्तक जिज्ञासु मनों में शोध, अन्वेषण और नवलेखन की प्रेरणा जाग्रत् करने का माध्यम बने, यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी। महारानी अबक्का का तेजस्वी जीवन आज के समय में भी प्रासंगिक है, और यह पुस्तक उस आलोक को पुनर्प्रकाशित करने का विनम्र यत्न है।”SKU: n/a -
Hindi Books, Manjul Publishing House, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Acche Mata Pita Kaise Bane
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Hindi Books, Manjul Publishing House, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Acche Mata Pita Kaise Bane
दादा जे.पी. वासवानी के शब्दों में, ‘घर ही ईश्वर के राज्य का प्रवेश द्वार है, और वही सच्ची प्रसन्नता का राज्य है.’अगर आप भी अपने घर को धरती का स्वर्ग बनाना चाहते हैं, तो दादा आपको इसके लिए राह दिखा रहे हैं. दादा की यह पुस्तक प्रेम, धैर्य, उचित मार्गदर्शन, तथा स्नेहिल अनुशासन को ऐसी योग्यताओं के रूप में प्रकट करती है जिन्हें माता-पिता को अपने भीतर विकसित करना चाहिए ताकि वे अपने बच्चों का यथासंभव बेहतर पालन-पोषण कर सकें. वे कहते हैं कि आपके बच्चे ही आपकी असली संपदा और खज़ाना हैं. वे हमें मूल्यों और आदर्शों के अनुसार बच्चो को पालने का उचित तरीका सीखा रहे हैं, जो बच्चों को अच्छा इंसान बनाने में सहायक होगा और वे ज़िम्मेदार नागरिकों के रूप में जीवन जी सकेंगे. तो आगे बढ़ें और तथाकथित पीढ़ी-अंतराल से ऊपर उठते हुए, अपने बच्चों के साथ मातृ भाव स्थापित करें!
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Prabhat Prakashan, अन्य कथेतर साहित्य, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Acharya Chanakya Ki Kahaniyan
Prabhat Prakashan, अन्य कथेतर साहित्य, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्रAcharya Chanakya Ki Kahaniyan
चाणक्य के काल में पाटलीपुत्र (वर्तमान में पटना) बहुत शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था। उस समय नंदवंश का साम्राज्य था और राजा था धनानंद। कुछ लोग इस राजा का नाम महानंद भी बताते हैं। एक बार महानंद ने भरी सभा में चाणक्य का अपमान किया था और इसी अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए आचार्य ने चंद्रगुप्त को युद्धकला में पारंपत किया।
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