प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
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Prabhat Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
ACHCHHA BOLNE KI KALA AUR KAMYABI
प्रखर वक्ता होना, ओजस्वी वाणी का स्वामी होना, प्रभावी शैली में श्रोताओं को मंत्र-मुग्ध कर देने की क्षमता जिसमें हो, वह सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक सफल होने की संभावना रखता है। बातचीत करना भाषण की कला सीखने का सबसे पहला सिद्धांत है। शुरुआती दौर में स्वर एवं अंदाज जैसी कलाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं होती है। बातचीत करना कला को सीखने का पहला सिद्धांत है; अर्थात् बोलिए, वाद-विवाद में हिस्सा लीजिए, अपनी प्रतिभा का स्वयं आकलन कीजिए और दर्शकों की आलोचना से सीखने की कोशिश कीजिए।
सवाल है कि खुद की गलतियों को कैसे समझा जाए? इसके लिए कुछ तथ्यों को समझने की आवश्यकता है—महान् वक्ता में कौन से विशेष गुण होते हैं और उन गुणों को कैसे प्राप्त किया जा सकता है? स्वयं के व्यक्तित्व में ऐसी कौन सी कमी है, जो इन गुणों की प्राप्ति में बाधा बन सकती है? इस विषय पर महान् लेखक डेल कारनेगी की सदाबहार एवं सर्वाधिक पसंद की जानेवाली इस पुस्तक के द्वारा कोई भी सामान्य व्यक्ति दर्शकों के समक्ष बोलने के क्षेत्र में कामयाबी के शिखर तक पहुँच सकता है।SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Adamya Utsaha
भारत में मिसाइल के जनक, विश्वविख्यात वैज्ञानिक भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अद्भुत जिजीविषा और विलक्षण दूरदृष्टि के स्वामी थे। उन्होंने अपने प्रेरक विचारों से समाज को दिशा दी, हर भारतीय को प्रेरणा दी।
उनके संबोधनों का यह संग्रह युवाओं का मार्गदर्शन करेगा, जिससे कि वे विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग से भारत को विकास के पथ पर ले जा सकें। भारत की कृषि, अर्थव्यवस्था, वातावरण एवं नागरिकों के स्वास्थ्य को सही तकनीक के प्रयोग से लाभ पहुँचाने तथा उनमें सुधार करने के लिए डॉ. कलाम के अत्यधिक शिक्षाप्रद और सूचनात्मक भावों का यह विचार-पुंज अत्यंत प्रभावी और उपयोगी सिद्ध होगा।
डॉ. कलाम ने जहाँ एक ओर बच्चों में सतत विकास और नवाचार के लिए उत्साह के बीज बोए, वहीं दूसरी तरफ वयस्क भी उनके विचारों से अछूते नहीं रहे। यह संकलन उन लोगों के लिए मन को मोह लेनेवाला अध्ययन होगा, जो डॉ. कलाम के मानवीय दृष्टिकोण तथा विचारों को पढ़ने में दिलचस्पी रखते हैं। इन भाषणों से पाठकों को डॉ. कलाम की ज्ञानसंपन्नता, विविध विषयों की सूक्ष्म जानकारियाँ और सर्वस्व राष्ट्र को समर्पित करने के महती भाव का बोध होगा।SKU: n/a -
English Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Agent Black Tiger
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English Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)Agent Black Tiger
“This biography chronicles the extraordinary and tragic journey of Ravindra Kaushik, a daring Indian intelligence operative whose legacy is hidden from public view. Recruited by R&AW, India’s external intelligence agency, during the 1970s, Kaushik mastered the art of espionage, multiple languages and psychological endurance through rigorous training. Under the assumed identity of Nabi Ahmed Shakir, he entered Pakistan, converted to Islam, pursued education and integrated into the Pakistan Army.
For years, he funnelled vital military intelligence to India, earning the title ‘The Black Tiger. This book transcends simple espionage, presenting a deeply human narrative of patriotism, sacrifice and betrayal. It delves into the immense emotional burden of living without identity, family, or recognition and probes how nations remember or occasionally forget their unsung heroes. It is a profoundly thrilling read for every audience, capturing the human cost behind national security while honouring a life spent in the shadows for motherland and nation.”
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Prabhat Prakashan, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Agni Ki Udaan
त्रिशूल ‘ के लिए मैं ऐसे व्यक्ति की सुलाश में था जिसे न सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मिसाइल युद्ध की ठोस जानकारी हो बल्कि जो टीम के सदस्यों में आपसी समझ बढ़ाने के लिए पेचीदगियों को भी समझा सके और टीम का समर्थन प्राप्त कर सके । इसके लिए मुझे कमांडर एस.आर. मोहन उपयुक्त लगे, जिनमें काम को लगन के साथ करने की जादुई शक्ति थी । कमांडर मोहन नौसेना से रक्षा शोध एवं विकास में आए थे ।
‘ अग्नि ‘, जो मेरा सपना थी, के लिए किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो इस परियोजना में कभी-कभी मेरे दखल को बरदाश्त कर सके । यह बात मुझे आर.एन. अग्रवाल में नजर आई । वह मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेकोलॉजी के विलक्षण छात्रों में से थे । वह डी.आर.डी.एल. में वैमानिकी परीक्षण सुविधाओं का प्रबंधन सँभाल रहे थे ।
तकनीकी जटिलताओं के कारण ‘ आकाश ‘ एवं ‘ नाग ‘ को तब भविष्य की मिसाइलों के रूप में तैयार करने पर विचार किया गया । इनकी गतिविधियाँ करीब आधे दशक बाद तेजी पर होने की उम्मीद थी । इसलिए मैंने ‘ आकाश ‘ के लिए प्रह्लाद और ‘ नाग ‘ के लिए एन. आर. अय्यर को चुना । दो और नौजवानो-वी.के. सारस्वत एवं ए.के. कपूर को क्रमश: सुंदरम तथा मोहन का सहायक नियुक्त किया गया ।
-इसी पुस्तक से
प्रस्तुत पुस्तक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन की ही कहानी नहीं है बल्कि यह डॉ. कलाम के स्वयं की ऊपर उठने और उनके व्यक्तिगत एवं पेशेवर संघर्षों की कहानी के साथ ‘ अग्नि ‘, ‘ पृथ्वी ‘, ‘ आकाश ‘, ‘ त्रिशूल ‘ और ‘ नाग ‘ मिसाइलों के विकास की भी कहानी है; जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को मिसाइल-संपन्न देश के रूप में जगह दिलाई । यह टेकोलॉजी एवं रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की आजाद भारत की भी कहानी है ।SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, अन्य कथा साहित्य, कहानियां, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Amar Karantiveer Chandrashekhar Azad
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Prabhat Prakashan, अन्य कथा साहित्य, कहानियां, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)Amar Karantiveer Chandrashekhar Azad
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उनका मूल नाम चंद्रशेखर तिवारी था। भले ही लोग स्वतंत्रता-संग्राम में उनके योगदान को पूर्ण रूप से न जानते हों, लेकिन इतना अवश्य जानते हैं कि वे इस संग्राम के अग्रगण्य क्रांतिकारियों में एक थे और उनके नाम से बड़े-बड़े अंग्रेज पुलिस अधिकारी तक काँप उठते थे। बाल्यावस्था में ही उन्होंने पुलिस की बर्बरता का विरोध प्रकट करते हुए एक अंग्रेज अफसर के सिर पर पत्थर दे मारा था। अपने क्रांतिकारी जीवन में आजाद ने कदम-कदम पर अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। उन्होंने सुखी जीवन का त्याग करके कँटीला रास्ता चुना और अपना जीवन देश पर बलिदान कर दिया। भले ही वे अपने जीवन में आजादी का सूर्योदय न देख पाए, लेकिन गुलामी की काली घटा को अपने क्रांति-तीरों से इतना छलनी कर गए कि आखिरकार उस काली घटा को भारत की भूमि से दुम दबाकर भागना पड़ा। महान् क्रांतिकारी, अद्वितीय देशाभिमानी एवं दृढ़ संकल्पवान् चंद्रशेखर आजाद के अनछुए जीवन-प्रसंगों के साथ संपूर्ण व्यक्तित्व का दिग्दर्शन करानेवाली अनुपम कृति|
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Prabhat Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Apane Chanakya Swayam Banen
Prabhat Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्रApane Chanakya Swayam Banen
चाणक्य ने अपने पिता की हत्या के बाद बचपन से ही जीवन का उद्देश्य बना लिया था मगध को एक नेक, सुशील, ईमानदारी और प्रतापी राजा प्रदान करना। अपने इस संकल्प को पूर्ण करने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। उन्होंने सदाचारी और पराक्रमी युवराज खोजने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और चंद्रगुप्त को ढूँढ़ निकाला। चंद्रगुप्त का पूरा व्यक्तित्व चाणक्य के द्वारा ही गढ़ा गया था। उन्होंने अपने अनेक शिष्यों को जीवन के पाठ पढ़ाए। वे यहीं तक नहीं रुके अपितु अपने ज्ञान को ‘अर्थशास्त्र’ पुस्तक में समेट दिया। अर्थशास्त्र का ग्रंथ आज अनेक रूपों में समाज के पास उपलब्ध है; बस आवश्यकता है तो उस ग्रंथ को गहनता से पढ़ने की, समझने की और जानने की।
चाणक्य ने अपने बुद्धि-कौशल से हर तरह की बाधा से पार पाने के उपाय निकाले हुए थे, जो आज भी उपयोगी हैं। सफलता पाने के लिए यथेष्ट है कि व्यक्ति चाणक्य के व्यक्तित्व को पढ़ें, समझें, जानें और फिर खुद को पहचानें। ऐसा करके प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को एक नए बिंदु पर ले जा सकता है। वह नया बिंदु संतुष्टि, सुख, खुशी, स्वास्थ्य, समृद्धि सबकुछ प्रदान करता है।
यह पुस्तक आचार्य चाणक्य के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने को उनके अनुरूप ढालकर सफलता के शिखर छूने का एक प्रबल माध्यम है।SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, अन्य कथा साहित्य, कहानियां, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Azad Bachpan Ki Ore
Prabhat Prakashan, अन्य कथा साहित्य, कहानियां, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)Azad Bachpan Ki Ore
अस्सी के दशक के बाद से विगत कुछ वर्षों तक लिखे गए मेरे लेखों ने बाल मजदूरी, बाल दुर्व्यापार, बाल दासता, यौन उत्पीड़न, अशिक्षा आदि विषयों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक आधार दिया। जहाँ तक मेरी जानकारी है, ये बच्चों के अधिकारों से संबंधित विषयों पर लिखे गए सबसे शुरुआती लेख हैं। मैं आपको विनम्रतापूर्वक बताना चाहूँगा कि ये लेख ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिन्होंने भारत में ही नहीं, दुनिया भर में बाल अधिकारों के आंदोलन को जन्म दिया। साधारण लोगों से लेकर बुद्धिजीवियों, कानून निर्माताओं तथा संयुक्त राष्ट्र संघ तक में हलचल पैदा की। मैंने पैंतीस सालों में इन्हीं विचारों की ताकत को संगठनों व संस्थाओं के निर्माणों, सरकारी महकमों के गहन शोध प्रबंधों, br>
‘कॉरपोरेट जगत् की नीतियों, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सरकारी बजटों में परिवर्तित होते देखा है। —br>—कैलाश सत्यार्थी.SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Bharat Bhagya Vidhata (PB)
2014 में भारत में 16वीं लोकसभा का चुनाव हुआ। देशभर के मतदाताओं ने शासन और चुनावों से जुडे़ मुद्दों पर बहस की। यह पुस्तक ऐसे व्यक्ति ने लिखी है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति को बहुत निकट से देखा है। यह पुस्तक ऐसा वैचारिक कथन है, जो हर नागरिक को पढ़ना और समझना चाहिए।
भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीविद्, शिक्षक और विचारक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने देशभर का गहन दौरा किया है और करीब 1 करोड़ 70 लाख नौजवान भारतीयों से बात की है। उन्होंने अपने विस्तृत अनुभव और ब्योरों की बारीक जानकारी के आधार पर शासन के विभिन्न आयामों पर चर्चा की है और भारत के लिए एक विजन दिया है, जिसे साकार करने के लिए हर भारतीय ईमानदार और नैतिक रूप से श्रेष्ठ बने तथा कड़ा परिश्रम करे, ताकि हम विकसित भारत का लक्ष्य हासिल कर सकें।
डॉ. कलाम ने भ्रष्टाचार, शासन और जवाबदेही के मुद्दों केव्यावहारिक और चरणबद्ध समाधान भी प्रस्तुत किए हैं। आशावादी, प्रगतिशील और सकारात्मक सोच के साथ उन्होंने ऐसे भारत का स्वप्न देखा है, जो हर नागरिक के समग्र विकास से ही हासिल हो सकता है। इसमें विकास की समयबद्ध कार्ययोजना बताई गई है, जिसे हर नागरिक को आत्मसात् करना चाहिए। इससे वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल सोच-समझ एवं विश्लेषणात्मक ढंग से करके भारत में वास्तविक परिवर्तन ला सकता है।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सही आख्यान (True narrative)
Bharat Ka Rashtradharm (PB)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सही आख्यान (True narrative)Bharat Ka Rashtradharm (PB)
“राष्ट्र की चिति और राष्ट्रधर्म
सत्य तो यह है कि यह सुनिश्चित करना असंभव है कि भारत के सुदीर्घ राष्ट्रजीवन के पुण्य प्रवाह में राष्ट्रधर्म की अवधारणा कब अंकुरित हो गई।
शायद तब, जब पर्वतराज हिमालय के उत्तुंग शिखरों पर स्थित गहन गुफा में समाधिस्थ आदियोगी ने ॐ का उद्घोष कर आँख खोलते ही स्वयं से प्रश्न किया-कोऽहं ? तथा तुरंत स्वयं ही उत्तर भी दे दिया- सोऽहं !
या तब, जब महासागर की अपार जलराशि पर तैरती लघुकाय मछली की कातर पुकार सुनकर करुणा-विगलित वैवस्वत मनु ने उसे अपने कमंडल की रक्षा-परिधि में लेकर जीवमात्र के जीने के अधिकार को ही स्वीकृति नहीं दी, अपितु निर्बल की रक्षा करना मनुष्यमात्र का दायित्व भी निर्धारित कर दिया।
अथवा तब, जब ऋषिमुख से देववाणी फूट पड़ी-‘एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति’, अर्थात् सत्य एक है, अविभाज्य है, सार्वदेशिक है, सार्वकालिक है। विद्वान् लोग अपनी-अपनी मति अनुसार उसकी व्याख्या करते हैं। ऐसा करना उनका अधिकार भी है।”
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Patanjali-Divya Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Bharat Ke Adarsh Vyaktitwa (Hindi)
Patanjali-Divya Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)Bharat Ke Adarsh Vyaktitwa (Hindi)
This book is a collection of 50 short biographies of well-known personalities including spiritual gurus, freedom fighters and brave revolutionaries of India. It is an effort of Patanjali Yogpeeth to inspire people and motivate them for offering their share in the development of our country through the life stories of these strong personalities.
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सही आख्यान (True narrative)
Bharat Ki Mahan Rashtriya Vibhootiyan
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सही आख्यान (True narrative)Bharat Ki Mahan Rashtriya Vibhootiyan
“भारत के प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास को लेकर आधुनिक इतिहासकारों ने कई भ्रांत धारणाएँ हमारे बीच फैला दीं, जिनसे भारतीयों में निराशा का संचार हुआ। प्रस्तुत पुस्तक गहन अनुसंधान व प्रमाण सहित इन भ्रांत धारणाओं का एक सटीक उत्तर है। देश की स्वाधीनता के आंदोलन का प्रारंभ केवल अंग्रेजों से ही आरंभ नहीं होता, वह विगत ढाई हजार वर्ष पुराना संघर्ष है, जिसमें भारत की जनता ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया है।
अखंड भारत में ऐसी अनेक महान् विभूतियाँ हुईं, जिन्होंने अपने पराक्रम के बल पर विदेशी आततायियों का डटकर मुकाबला किया और भारत को एक सनातन राष्ट्र बने रहने में अपना योगदान दिया। धर्म और संस्कृति के रक्षार्थ किए गए जौहर और साके विश्व-इतिहास में दुर्लभ हैं।
विदेशी आक्रांताओं को खदेड़कर देश में शांति स्थापित करने वाले ऐसे महानायकों के प्रामाणिक व प्रेरक जीवन-चरित से परिपूर्ण यह पुस्तक भारतीय नायक-नायिकाओं पर गर्व करने वालों के लिए पठनीय है। भारतीय अस्मिता, साहस, पराक्रम और संघर्ष की जिजीविषा व संकल्प-शक्ति का दिग्दर्शन करवाती प्रेरक पुस्तक ।”
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Hindi Books, Kalpana Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)
Bharateey Sangeet Ka Itihaas
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Hindi Books, Kalpana Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)Bharateey Sangeet Ka Itihaas
भारतीय संगीत का इतिहास
अपनी पुस्तक के प्रथम प्रकरण में जोशीजी ने “संगीत
का जन्म” पर विश्व के अनेक विद्वानों के विभिन्न मतों का उल्लेख किया है जोकि मनोरंजनात्मक, हृदयस्पर्शी तथा मार्मिक भी है।
दूसरे प्रकरण में संगीत और भाषा के जन्म का विश्लेषणात्मक विवेचन किया गया, जिसमें कि यह सिद्ध किया है कि भाषा से पूर्व, संगीत का जन्म हो चुका था।
तीसरे प्रकरण में “भारत की प्राकृतिकावस्था का संगीत पर क्या प्रभाव पड़ा” पर सुन्दर प्रकाश डाला है।
चौथे प्रकरण में प्रागैतिहासिक काल के संगीत पर प्रकाश डाला है। इस काल को पूर्व पाषाणकाल, उत्तर पाषाण काल, ताम्र काल तथा लौह काल इत्यादि चार भागों में विभक्त किया है।
पाँचवें प्रकरण में सिंधु नदी की घाटी तथा हड़प्पा (पंजाब) की सभ्यता व संगीत पर ऐतिहासिक दृष्टि से विचार किया है जोकि बड़ा महत्त्वपूर्ण है।
छठे प्रकरण में वैदिक युग के सांस्कृतिक विकास का गौरवपूर्ण ढंग से विस्तृत रूप का वर्णन करके यह प्रमाणित किया है कि वैदिक संस्कृति का विकास भारत में ही हुआ और यहीं से निकलकर भारतीय संगीत विश्व में फैला।
सातवें प्रकरण में पौराणिक काल के संगीत व सामाजिक परिस्थिति का प्रलुब्धकारी वर्णन किया गया है।
आठवाँ प्रकरण रामायण काल में संगीत के विकास पर प्रकाश डालता है, इसमें यह दर्शाया है कि तब, संगीत का आत्मिक सौन्दर्य, समाज में पूर्णतया विकसित हो चुका था। संगीत-चरित्र की मर्यादा की रक्षा का साधन बन गया था।
नवें प्रकरण में महाभारत काल में संगीत के महत्त्व पर बड़े रोचक शब्दों में लिखा है। भगवान् श्रीकृष्ण को, संगीत के युग प्रवर्त्तक आचार्य प्रमाणित किया है।
दसवें प्रकरण में पाणिनि काल के संगीत की लोकप्रियता का वर्णन है।
ग्यारहवाँ प्रकरण में जनपदों के विषय में है। इसमें यह प्रमाणित किया है कि भारतीय संगीत, विदेशों में किस प्रकार पहुँचा। महाराजा वत्सराज उदयन के संगीत प्रेम का वर्णन गौरवमय है।SKU: n/a -
Hindi Books, Kalpana Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)
Bihar ke Nirgun Bhakt Kavi (San 1900 Tak)
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Hindi Books, Kalpana Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)Bihar ke Nirgun Bhakt Kavi (San 1900 Tak)
निर्गुण भक्ति-काव्य की परम्परा
संत शब्द ‘सत्’ का वाचक है। सत्-ब्रहृम अर्थात् सच्चा साधु, जो सत्य साध् ान में वर्त्तमान है, सत्य जीवन जी रहा है एवं जो सज्जन, धीर, नित्य, स्थायी, मान्य, पूज्य, प्रशस्त, शुद्ध, पवित्र, श्रेष्ठ, उत्तम, भला, पण्डित, विद्वान् आदि सबकुछ है ।
संत शब्द के अन्तर्गत साधु संन्यासी, विरक्त, त्यागी, महात्मा सबका समावेश है । इसमें हरिभक्त धार्मिक एवं सर्वगुण सम्पन्न पुरूष भी समाये हैं। ऐसे उदार महात्माओं में ऐसा अहंकार कभी जन्म ही नहीं ले सकता कि मैं संत हूँ। संत लोग ‘तृणादपि सुनीच’ एवं ‘तरोरपि सहिष्णु’ होते हैं। यहाँ तक कि सहसा कोई व्यक्ति उनकी ‘साधुता’ एवं ‘संतपना’ समझ और देख नहीं पाते। क्योंकि ऐसे व्यक्ति किसी बाह्य दिखावा धारण कर, या शरीर को विशेष प्रकारके वस्त्रों से सजाकर संत, महात्मा नहीं बनते । संसारी बनावट, संसारिकों, मायावियों के लिए है, उससे संत को लेशमात्र का भी लगाव नहीं है। कोई भी साधक अपनी कठोर साधना और सहज भाव के साधन से ही अपने परम साध्य (संतत्व) को प्राप्त कर सकता है। संत की समस्त ज्ञानेन्द्रियाँ अर्हनिश ब्रह्ममय बनी रहती हैं। उसकी जिह्वा पर प्रभु का नाम शब्द कर्ण कुहर मे नाम-ध्वनि और आँखों से चराचर को ब्रह्ममय देखता है। ऐसे महापुरूष प्रतिपल अपने अंतः का निरीक्षण और परीक्षण करते रहते हैं। ऐसे तो उनके निर्मल मन में किसी प्रकार के विकार की जगह होती ही नहीं; दुर्योग से कहीं से कुछ हल्की-सी सांसारिकता ने प्रवेश किया कि वे उस असंत भाव को तत्क्षण निष्कासित कर देते हैं। ऐसे लोग सतत् जागरूक और सावधान रहते हैं। परदुख कातरता और परोपकार ही उनका व्यसन होता है। उनके प्रति दुर्विचार, शत्रु भाव रखने वाले के प्रति भी वे उसके प्रति सद्भाव ही रखते हैं। वे पंच क्लेशों और षड्विकारों को पल भर के लिए भी अपने पास फटकने नहीं देते, अनिष्ट करने वालों की भी वे उनकी इष्ट साधना ही करते हैं। वैसे ही महापुरूषों के लिए गोस्वामी तुलसी दास जी ने कहा
‘तुलसी संत सुअम्ब तरू, फूलै फलै पर हेत । जितते वे पाहन हनै, उतते वे फल देत ।।
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Govindram Hasanand Prakashan, Others, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Budape se Javani ki Ore
Govindram Hasanand Prakashan, Others, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)Budape se Javani ki Ore
यह पुस्तक एक ऐसी पुस्तक के आधार पर लिखी गई है जो हजारों रुपए खर्च कर देने पर भी दुर्लभ थी। आज से 350 वर्ष पहले फ्रांस की एक महिला मदाम डी लेनक्लोस निनोन, जो कि 91 वर्ष की होकर मरीं, तब भी उनके चेहरे पर एक भी झूरी नहीं पड़ी थी।
सन् 1710 में फ्रांस के लेखक जीन सौवल ने एक पुस्तिका प्रकाशित की थी जिसमें उन प्रयोगों तथा व्यायाम का उल्लेख था जो उक्त महिला के युवा-सम स्वास्थ्य का कारण थे।
इन प्रयोगों को आधार बनाकर सैन फ्रांसिस्को के श्री सैनफोर्ड बेनेट ने यह प्रयोग अपने ऊपर किए और उन्हें सफलता प्राप्त हुई। उस आधार पर उन्होंने एक पुस्तक लिखी जिसका नाम था ‘ओल्ड एज इट्स कॉजेज एंड प्रिवेंशन‘। यह पुस्तक मदाम निनोन के प्रयोगों के आधार पर लिखी गई थी। इसकी एक ही प्रति भारत में उपलब्ध थी, जिसे लेखक ने प्राप्त कर उसके आधार पर इस ग्रंथ की रचना की।
इस पुस्तक में जो लिखा गया है उसे नियम पूर्वक क्रिया में परिणत किया जाए, तो मनुष्य वृद्धावस्था में युवावस्था का-सा सुखद स्वास्थ्य तथा चेहरा-मोहरा कायम रख सकता है। इसलिए इस पुस्तक का नाम रखा है ‘बुढ़ापे से जवानी की ओर‘।
जिन प्रयोगों का इस पुस्तक में वर्णन है उनका वैज्ञानिक-विवेचन भी इसमें किया गया है। दीर्घ-जीवन का वैज्ञानिक दृष्टि से विवेचन करने के साथ-साथ, दीर्घ-जीवन की आसन, प्राणायाम, ब्रह्मचर्य आदि भारतीय-पद्धतियों का विवरण भी इसमें दिया है।
इस पुस्तक की यह भी विशेषता है कि इसमें वृद्धावस्था की अनेक शारीरिक समस्याओं के लिए होम्योपैथिक उपचार का भी निर्देश दिया गया है। बुढ़ापे के आने पर भी बुढ़ापा ना आए-इस उपाय को सामने रख देना इस पुस्तक का मुख्य लक्ष्य है।SKU: n/a -
English Books, Garuda Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सही आख्यान (True narrative)
Butshikan: Tears of Somanatha
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English Books, Garuda Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), सही आख्यान (True narrative)Butshikan: Tears of Somanatha
1001 CE: A 30-year-old Maḥmūd takes over the reins of the Ghaznavid Empire & turns his eye East. Persuaded by religious zealotry, he starts a cycle of mayhem & massacre in Bhāratavarṣa—the land of infidels & black magic, and of riches & glory—the likes of which the world had never seen before.
1025 CE: Rajendra Chola—the vanquisher of the Cherā-s & Pāndyā-s, the conqueror of River Gangā, and the overlord of Vengai—is ready to embark on a naval expedition to Ṣrivijaya Kingdom when the news of Somnath Temple’s destruction reaches him.
~*~
Meanwhile, an ancient book in an unknown script calls out to its keeper, waiting for its secrets to be revealed.
An enraged son, yearning for battle—with a destiny yet unfulfilled—leaves a trail of destruction in his wake.
A lethal female warrior from a primitive tradition uses her skills to fulfil the rapacious ambitions of her Sultan & ingratiate him.
~*~
In this alternative timeline, the Chola king, enraged by the destruction of Somanātha Temple, impulsively changes his plans and decides to take Maḥmūd head-on.
Will this one decision of Rajendra Chola change the future and deter the future Ghauris, Khiljis, Bābars & prevent the recurrent massacres? Or will there be no Bhāratavarṣa anymore?
This is the story of Pūrva Pakṣa, Swayambodh, & Śatrubodha, the tale of a war between Dharma & adharma—a war that never happened but had the potential to change the course of history.
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Patanjali-Divya Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Chanakya Sutra
This book includes the Chanakya Sutra with Hindi translation and the tricks of economics presented in a very simple language. Further, it explains the important terms related to the economics with the Hindi meaning. Chanakya Sutra can be considered as the perfect medium for presenting the ideologies of ancient Indian political leaders.
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Prabhat Prakashan, अन्य कथा साहित्य, कहानियां, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Chandrashekhar Azad
Prabhat Prakashan, अन्य कथा साहित्य, कहानियां, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)Chandrashekhar Azad
Chandra Shekhar Azad (23 July 1906 – 27 February 1931), popularly known as by his self-taken name Azad (“The Free”), was an Indian revolutionary.
Chandrashekhar Azad’s short and chequered life of a revolutionary is remembered in the annals of the history of India’s freedom struggle not merely for his indomitability in the face of odds; but for the human values he cherished. In today’s world; with the edifice of every conceivable value crumbling all around us; Azad’s life offers a paradigm for the redemption of a generation resigned to shallow ideals.
Adversity came a dime a dozen to this village youth born to poor parents rich in morality and humaneness. It’s the roots that determine the actions of a person and actions; his destiny.
At a time when we seem to be taking our freedom for granted; Azad’s biography is a reminder of the blood and toil that went into securing it. The road to preservation of freedom must be hemmed with respect for what we have; for being fortunate to be able to breathe in free air.
The crucial caveat embedded in Azad’s biography is that we face a far greater threat from the enemies within than from enemies without.SKU: n/a












