राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
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Prabhat Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Aarakshan Ka Dansh
Prabhat Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Aarakshan Ka Dansh
आरक्षण का देश में विभिन्न संदर्भों, साक्ष्यों एवं वक्तव्यों के परिप्रेक्ष्य में प्रसिद्ध पत्रकार एवं चिंतक श्री अरुण शौरी ने यह बताने का प्रयास किया गया है कि आरक्षण को लेकर भारत की राजनीति किस दिशा में जा रही है। चूँकि आज राजनेता और राजनीतिक दल अपने कार्य-प्रदर्शन के आधार पर स्वयं को स्थापित नहीं कर पा रहे हैं; अत: इसके लिए उन सबने एक मानक तकनीक अपनाई है—कोई ऐसा बिंदु ढूँढ़ निकालना, कोई ऐसा दोष ढूँढ़ निकालना, जिससे यह दिखाया जा सके कि अमुक समूह या दल पिछड़ गया है—और फिर उस समूह के एकमात्र शुभचिंतक के रूप में, हिमायती के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करना। राजनेता कानून-पर-कानून पारित करते चले जाते हैं, लेकिन आरक्षण का दंश किसी भी रूप में कम होने का नाम नहीं लेता। जातिवादी राजनीति से अपना जीवन चलानेवाले राजनेताओं के लंबे-चौड़े और रटे-रटाए भाषणों से फैली पथभ्रष्टता और उसके लिए देश द्वारा चुकाई जा रही कीमत को बखूबी समझा जा सकता है।
इस पुस्तक का विषय आरक्षण पर चली आ रही सार्वजनिक बहस को सामने लाना है, जो विगत तीस वर्षों में अलग-अलग मोड़ और उतार-चढ़ाव लेती आ रही है। विषय को स्पष्ट करने एवं परिणामों को सामने लाने के लिए विद्वान् लेखक ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों को माध्यम बनाया है। ‘आरक्षण’ का विषय अत्यंत चिंतनीय एवं विचारणीय है। इस बहस में सुधी पाठक भी शामिल हों तो इस पुस्तक का प्रकाशन सार्थक होगा।SKU: n/a -
Rajasthani Granthagar, अन्य कथा साहित्य, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Aashauchpanjika
आशौचपंजिका (हिन्दीभाषानुवादसहित)
पण्डित मधुसूदन ओझा ग्रन्थमाला – 17
वेदरहस्योद्घाटक पण्डित मधुसूदन ओझा ने जन्मसम्बन्धी तथा मरणसम्बन्धी आशौच का सम्यक् वेदानुसारी चिन्तन ‘आशौचपञ्जिका’ में प्रस्तुत किया है। इस ग्रन्थ में आधुनिक तर्कप्रधान समाज के लिए आशौच का स्वरूप, आशौच का कारण, आशौच का प्रभव, सापिण्ड्य आदि वस्तुओं का विज्ञान भी प्रमाण तथा युक्ति के साथ निरूपित किया गया है। इस प्रकार यह ग्रन्थ आशौचविषय का अपूर्व ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में 1. परिभाषाध्याय 2. सूत्राध्याय 3. जन्माध्याय 4. मरणाध्याय 5 उत्तरक्रियाध्याय 6. दोषाध्याय 7 पाताध्याय 8 अतीतकालाध्याय 9 अपवादाध्याय 10 वाक्यसंग्रहाध्याय, भेद से दस अध्याय हैं।
पं. ओझा ने बीस प्रमुख स्मृतियों एवं तत्तत् आचार्यों द्वारा ग्रथित बासठ निबन्धग्रन्थों को आधार बनाकर देशकाल परिस्थिति के अनुसार प्रत्येक दृष्टि से चिन्तन प्रस्तुत किया है।SKU: n/a -
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Prabhat Prakashan, अन्य कथेतर साहित्य, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Acharya Chanakya Ki Kahaniyan
Prabhat Prakashan, अन्य कथेतर साहित्य, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्रAcharya Chanakya Ki Kahaniyan
चाणक्य के काल में पाटलीपुत्र (वर्तमान में पटना) बहुत शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था। उस समय नंदवंश का साम्राज्य था और राजा था धनानंद। कुछ लोग इस राजा का नाम महानंद भी बताते हैं। एक बार महानंद ने भरी सभा में चाणक्य का अपमान किया था और इसी अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए आचार्य ने चंद्रगुप्त को युद्धकला में पारंपत किया।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Adviteey Samaajashastr
विद्वान् लेखक ने भारतीय समाजशास्त्र के एक ऐसे ग्रंथ की रचना की है, जो विगत 77 वर्षों से शासन द्वारा भारतीय बुद्धि को बाधित रखने के कारण निकृष्ट पदावलियों व मुहावरों से आक्रांत चित्त वाले पाठकों की भी समझ में आ सके। ऐसा दुष्कर कार्य वही विद्वान् कर सकता है, जो धर्मशास्त्रों का मर्मज्ञ तो हो ही, पाठकों की सीमाओं से भी भलीभाँति परिचित हो । मिश्रजी इस पुरुषार्थ के लिए साधुवाद के पात्र हैं। मनुष्य के संपूर्ण कल्याण में जिनकी रुचि हो, उनके लिए यह अवश्य पठनीय पुस्तक है।
धर्मशास्त्रों के परम ज्ञाता ऋषि-तुल्य आदरणीय पंकजजी ने संपूर्ण मानवता के उत्थान के लिए प्रस्तुत ग्रंथ की रचना की है। बौद्धिक वर्ग से अनुरोध है कि वह इस दुर्लभ ग्रंथ का अध्ययन व मनन-चिंतन करे। इस श्रेष्ठ ग्रंथ के निर्माण के लिए मनीषी पंकजजी को साधुवाद।
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Hindi Books, Occam (An Imprint of BluOne Ink), इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Ambedkar Gandhi and Patel
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Hindi Books, Occam (An Imprint of BluOne Ink), इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्रAmbedkar Gandhi and Patel
About the Book: Ambedkar, Gandhi and Patel: The Making of Indias Electoral System
In 1931 Mahatma Gandhi and Dr. B R Ambedkar met in London and clashed on the future of Indias electoral system. Later in 1932 when the British announced reserved seats for dalits, Gandhi went on a fast unto death. Ambedkar saved his life by agreeing to the changed terms of representation, which changed the course of electoral system of India.
The Gandhi-Ambedkar engagement was only on the electoral system and method of election by separate electorates which Muslims enjoyed till then. Till the partition of India in 1947, the draft Constitution provided reserved seats for minorities and Dalits, which Sardar Patel chose to abolish. The fate of Indias electoral system shifted to Ambedkar and Sardar Patel after Gandhis assassination in 1948. Sardar Patel tried to abolish reserved seats for Dalits also in 1948 only to be thwarted by Ambedkar. Those reserved seats continue.
Based on a singular pursuit of tracing the electoral system and methods that define Indiathe worlds largest democracy, this book is the first to document the evolution and account of electoral history of colonial and independent India. Do we know how Sardar Patel and Gandhi used electoral system to integrate India? Since the first provincial elections in 1937, do we know that double member constituencies existed till 1961, only to be abolished by Jawaharlal Nehru? Do we know that Ambedkar lost his first election in independent India because voters threw away their ballots? If we need women reserved seats, we need to know that we might have to try to double memberconstituencies. This book tells all.
The story of electoral thoughts and ideas of Ambedkar, Gandhi and Patel and Ambedkars struggle to get a representative electoral system appear for the first time in a book. In India only election results are predicted, analysed and compiled. Theelectoral method that determines Indias every election comes into focus in this book. Can any political party get away without offering tickets to one minority community or Dalits? The history is the answer to the future-through this book.
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Ambedkar Islam Aur Vampanth (PB)
-13%
Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Ambedkar Islam Aur Vampanth (PB)
कभी मीम-भीम के नाम पर, तो कभी हिन्दू धर्म के विरोधी के तौर पर बाबा साहब अम्बेडकर को अपना बनाने को दोनों ही खेमे उत्सुक दिखाई देते हैं। पुस्तक में अम्बेडकर के विचारों को आज के परिप्रेक्ष्य में रख कर लेखक ने इन दोनों खेमों के कुत्सित तर्कों को बिंदुवार ध्वस्त किया है, और ये बताया है कि अम्बेडकर के विचार इस्लाम और वामपंथ, दोनों को लेकर कितने स्पष्ट थे और जिनसे ये स्थापित होता है कि वे इन दोनों के हिमायती तो बिलकुल भी नहीं थे और इसलिए इन दोनों खेमों द्वारा अम्बेडकर को अपना बताने के प्रयास एक छलावा हैं, जिससे वे आज की अपनी राजनीति का उल्लू सीधा करना चाहते हैं।
अम्बेडकर क्या सोचते थे इस्लाम और वामपंथ के बारे में? आज के इस्लामी और वामपंथी नेतृत्व में उन्हें अपना बनाने की होड़ के पीछे रंच मात्र भी सत्यता है क्या? मिथिलेश कुमार सिंह की पुस्तक इन सभी बातों को स्पष्टता से रखती है।
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Rajasthani Granthagar, अन्य कथा साहित्य, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Ambhowad
अम्भोवाद (हिन्दीभाषानुवादटिप्पणसहित)
पण्डित मधुसूदन ओझा ग्रन्थमाला – 9
प्रकृत ग्रन्थ में अम्भःपद से पानी या जल का निषेध न करते हुए विशेष रूप से यह प्रतिपादित किया गया है कि अम्भः से आपः की सृष्टि, आपः से व्योम आदि की सृष्टि तथा इसके बाद स्थूल भूतों की सृष्टि में जल की सृष्टि है। इस स्थूल जल से पृथिवी की रचना सम्भव नहीं है तो उसके इस सृष्टि का मूल होने का तो प्रश्न ही कहाँ है ?SKU: n/a -
EKA Prakashan, Westland Publisher, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
AMETHI SANGRAM (PB-Hindi)
EKA Prakashan, Westland Publisher, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)AMETHI SANGRAM (PB-Hindi)
पिछले कुछ दशकों में अमेठी की असली पहचान तो भुला ही दी गई। एक ऐसी भूमि, जो महर्षि च्यवन की तपस्थली, माता कालिकन देवी का धाम और राजा सोढ़ देव की वीरगाथाओं के साथ ही स्थानीय निवासियों की आस्था, विश्वास व श्रम से निर्मित होकर परिपूर्ण थी, उसने आजादी के बाद आगे बढ़ने की बजाय उलटी राह पकड़ ली। इस पर सियासत का एक कृत्रिम आवरण सा चढ़ गया और इसे एक राजनीतिक पर्यटन स्थल के रूप में तब्दील कर दिया गया।
अमेठी, कहने को तो वीवीआईपी क्षेत्र था, पर क्या स्थिति वाकई ऐसी थी? क्या इसे वह विशेष दर्जा प्राप्त हुआ था? 2014 के लोकसभा चुनाव में जब भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार के रूप में स्मृति इरानी यहाँ पहुँचीं, तब अमेठी की पहचान का यह आवरण खुला।
अमेठी संग्रामउसी अनदेखे सच को उजागर करती है। इसमें स्मृति इरानी की वर्ष 2014 से वर्ष 2019 की संघर्ष यात्रा है। उनकी विजय के कारकों को समझने के बहाने भारतीय राजनीतिक दलों और नेताओं की कार्यशैली, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दूरदृष्टि, भाजपा की रणनीति, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता, गाँधी परिवार की ताकत का मिथक और क्षेत्रीय दलों के स्वार्थ का लेखा-जोखा है। इसके अलावा स्मृति इरानी की रणनीतिक, व्यवहारिक और राजनीतिक कार्यशैली को भी यह किताब सूक्ष्मता से खोलती है।
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Prabhat Prakashan, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Anandmath (Hindi)
जीवानंद ने महेंद्र को सामने देखकर कहा, ‘‘बस, आज अंतिम दिन है। आओ, यहीं मरें।’’महेंद्र ने कहा, ‘‘मरने से यदि रण-विजय हो तो कोई हर्ज नहीं, किंतु व्यर्थ प्राण गँवाने से क्या मतलब? व्यर्थ मृत्यु वीर-धर्म नहीं है।’’जीवानंद- ‘‘मैं व्यर्थ ही मरूँगा, लेकिन युद्ध करके मरूँगा।’’कहकर जीवानंद ने पीछे पलटकर कहा, ‘‘भाइयो! भगवान् के नाम पर बोलो, कौन मरने को तैयार है?’’अनेक संतान आगे आ गए। जीवानंद ने कहा, ‘‘यों नहीं, भगवान् की शपथ लो कि जीवित न लौटेंगे।’’—इसी पुस्तक से‘आनंद मठ’ बँगला के सुप्रसिद्ध लेखक बंकिमचंद्र चटर्जी की अनुपम कृति है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में इसे स्वतंत्रता सेनानियों की ‘गीता’ कहा जाता था। इसके ‘वंदे मातरम्’ गीत ने भारतीयों में स्वाधीनता की अलख जगाई, जिसको गाते हुए हजारों रणबाँकुरों ने लाठी-गोलियाँ खाइऔ और फाँसी के फंदों पर झूल गए। देशभक्ति का जज्बा पैदा करनेवाला अत्यंत रोमांचक, हृदयस्पर्शी व मार्मिक उपन्यास।
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Prabhat Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Apane Chanakya Swayam Banen
Prabhat Prakashan, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्रApane Chanakya Swayam Banen
चाणक्य ने अपने पिता की हत्या के बाद बचपन से ही जीवन का उद्देश्य बना लिया था मगध को एक नेक, सुशील, ईमानदारी और प्रतापी राजा प्रदान करना। अपने इस संकल्प को पूर्ण करने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। उन्होंने सदाचारी और पराक्रमी युवराज खोजने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और चंद्रगुप्त को ढूँढ़ निकाला। चंद्रगुप्त का पूरा व्यक्तित्व चाणक्य के द्वारा ही गढ़ा गया था। उन्होंने अपने अनेक शिष्यों को जीवन के पाठ पढ़ाए। वे यहीं तक नहीं रुके अपितु अपने ज्ञान को ‘अर्थशास्त्र’ पुस्तक में समेट दिया। अर्थशास्त्र का ग्रंथ आज अनेक रूपों में समाज के पास उपलब्ध है; बस आवश्यकता है तो उस ग्रंथ को गहनता से पढ़ने की, समझने की और जानने की।
चाणक्य ने अपने बुद्धि-कौशल से हर तरह की बाधा से पार पाने के उपाय निकाले हुए थे, जो आज भी उपयोगी हैं। सफलता पाने के लिए यथेष्ट है कि व्यक्ति चाणक्य के व्यक्तित्व को पढ़ें, समझें, जानें और फिर खुद को पहचानें। ऐसा करके प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को एक नए बिंदु पर ले जा सकता है। वह नया बिंदु संतुष्टि, सुख, खुशी, स्वास्थ्य, समृद्धि सबकुछ प्रदान करता है।
यह पुस्तक आचार्य चाणक्य के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने को उनके अनुरूप ढालकर सफलता के शिखर छूने का एक प्रबल माध्यम है।SKU: n/a -
Rajasthani Granthagar, अन्य कथा साहित्य, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Aparwad
अपरवाद (टिप्पणनुवादसाहित)
पण्डित मधुसूदन ओझा ग्रन्थमाला – 3
पर का अर्थ है आत्मा तथा अपर का अर्थ है प्रकृति। प्रकृति का दूसरा नाम स्वभाव भी है। इसलिए प्रकृति या स्वभाव को सृष्टि का कारण मानने वाले सभी अपरवादी हैं। प्रकृत ग्रन्थ इसी विषय का पूर्णविस्तार से विवेचन करने वाला उत्कृष्ट ग्रन्थ है।SKU: n/a -
Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Artha Samgraha
Written by Sri Laugakshi Bhaskar. With ‘Mimansa Samgrah Kaumudi’ Sanskrit Commentary by Sri Rameshwar Yogi and Hindi Commentary by Dr. Kameshwar Nath mishra :
लौगाक्षिभास्करकृत l रामेश्वरयोगिकृत ‘मीमांसासंग्रहकौमुदी’ संस्कृत तथा डॉ. कामेश्वरनाथमिश्रकृत ‘प्रकाशिका’ हिन्दी व्याख्या सहित
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Rajasthani Granthagar, अन्य कथा साहित्य, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Atrikhyatih
अत्रिख्यातिः (हिन्दीभाषानुवादसहित)
पण्डित मधुसूदन ओझा ग्रन्थमाला 13
पुरातन विश्व और पुरातन भारत के सर्वविध ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति-सभ्यता, भूगोल इतिहास तथा व्यष्टि समष्टि चरित के निर्धान्त ज्ञान के लिए अत्रिख्याति एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। यहाँ वर्णित अत्रि प्राणविध भी है तथा नरविध भी। ओझा जी ने इस ग्रन्थ में वैज्ञानिक एवं ऐतिहासिक उभयविध अत्रि के स्वरूप का निरूपण किया है।SKU: n/a -
Suruchi Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Aur Desh Bat Gaya
Suruchi Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Aur Desh Bat Gaya
अंग्रेजों द्वारा भारत में सत्ता-हस्तान्तरण, देश-विभाजन और स्वाधीनता-संघर्ष तथा 1947 से पूर्व की मुस्लिम समस्या पर यद्यपि बहुत कुछ लिखा गया है, फिर भी विभाजन की दुर्भाग्यपूर्ण घटना और उससे सम्बन्धित अनेक प्रश्नों का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। देश-विभाजन की उस विकराल विभीषिका में लाखों लोगों ने अपने प्राण गवाएँ, सगे-सम्बन्धी, परिवार-जन खोये। जान-माल के इस भीषण संहार, विनाशलीला, दुव्र्यवहार और करोड़ों लोगों को उनकी जन्म-भूमि से विस्थापित करने का मानव इतिहास में दूसरा दृष्टान्त नहीं मिलता।
जागरूक, अध्ययनशील और विचारवान् राष्ट्रसेवी व लेखक श्री हो. वे. शेषाद्रि ने इस पुस्तक में देश की इस त्रासदी का गहन अध्ययन व आकलन के आधार पर तथ्यपरक एवं यथार्थ विवेचन प्रस्तुत किया है।
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Yash Publication, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Bengal Voto Ka Khuni Loottantra
पुस्तक के बारे मै
पश्चिम बंगाल में नक्सलवाद पनपने के बाद पिछले 50 वर्षों की राजनीतिक हिंसा से पूरी तरह परिचित कराती पहली पुस्तक। 1967 में किसानों के आंदोलन, उद्योगों में बंद और हड़ताल, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में बमों के धमाके तथा रिवाल्वरों से निकलती गोलियों के साथ अराजकता भरे आंदोलनों की जानकारी। 1972 में कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय के दमनचक्र के बाद 1977 में वाम मोर्चे की सरकार के गठन के बाद राजनीतिक हिंसा का विस्तृत विवरण। माकपा ने त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू करने के बाद किस तरह राजनीतिक हिंसा के सहारे सत्ता पर पकड़ बनाए रखी। 1978 से 2018 तक हुए नौ पंचायत चुनावों के दौरान हत्याओं और हिंसा का पूरी जानकारी के साथ 2013 और 2018 में सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस द्वारा पंचायत चुनाव में वोटों की खूनी लूट का पुस्तक में खुलासा किया गया है।
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Vitasta Publishing, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Bhagva Aatank ek shadyantra
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Vitasta Publishing, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Bhagva Aatank ek shadyantra
What role did ministers like shivraj Patil, br Chidambaram, to arouse antulay, digvijay Singh and officials like chitkala zutshi, Dharmendra Sharma, Hemant karkare, RV Raju play in the Hindu terror narrative. Here is a version of a man who almost was taken captive and was to be traded for release of ajax kasab, but saved by sheer Providence. In his insider account, author rvs Mani discloses how the country internal security establishment functioned in the period of 2004-2014 when India faced some of the bloodiest terrorist carnage. This former home Ministry official posted in the internal security division between 2006-2010 poses several questions which the nation should seek answers to.
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Prabhat Prakashan, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
BHARAT 2020 AUR USKE BAAD- DR APJ ABDUL KALAM & YS RAJAN
Prabhat Prakashan, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्रBHARAT 2020 AUR USKE BAAD- DR APJ ABDUL KALAM & YS RAJAN
परिवर्तन का समय अभी है। विकल्प स्पष्ट और भयानक है। अगर हम वर्तमान ढर्रे पर ही चलते रहे तो विश्व के अन्य लोग हमसे आगे निकल जाएँगे। गरीबी व बेरोजगारी और ज्यादा बढ़ जाएगी, जो हमारे समाज को अंतर्विस्फोट की ओर ले जाएगी। और अगर हम बदलाव लाएँगे तो हम वास्तविक प्रगति कर पाएँगे—गरीबी से समृद्धि की ओर, गतिरोध से तीव्र विकास की ओर।’
भारत अभी भी एक दशक के भीतर ही विकसित देशों की सूची में शामिल हो सकता है। ‘भारत 2020 और उसके बाद’ नामक यह पुस्तक इस रूपांतरण के लिए एक पूरी कार्ययोजना प्रदान करती है।SKU: n/a -
Garuda Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Bharat Akhandan (भारत अखण्डन)
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Garuda Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Bharat Akhandan (भारत अखण्डन)
‘भारत अखण्डन: अनुच्छेद 370 और नागरिकता संशोधन अधिनियम पर लिए गए निर्णय’ विभाजन के कारणों पर डॉ बी आर अम्बेडकर के विश्लेषण, तथा ‘पृथक राष्ट्र’ के इस्लामी मतवादीय सिद्धांत (जो सफल हुआ) – कि मुसलमान किसी गैर-मुसलमान शासन में अल्पसंख्यक की भाँति रहना कदापि स्वीकार नहीं करते – इन बातों का आधार लेते हुए आगे बढ़ती है। एक विद्वत्तापूर्ण विश्लेषण करते हुए श्री दीक्षित सीएए-विरोधी प्रदर्शनों और तदन्तर हुए दंगों की जड़ तक जाते हैं, जिनका प्रारूप वही था जिसे डॉ अम्बेडकर ने “राजनीति की गैंगस्टर पद्धति” की संज्ञा दी थी। यह पुस्तक ‘शांतिप्रिय सूफियों’, और यह कि मुसलमान भारत में इस कारण रुके क्योंकि उन्होंने ‘पंथनिरपेक्ष भारत’ की अवधारणा को चुना था, इन राजनैतिक लीपा-पोती से परिपूर्ण मिथकों को ध्वस्त करती है।
अनुच्छेद 370 के लिए श्री दीक्षित कश्मीर के इतिहास को तबसे खँगालते हैं, जब सुल्तान सिकंदर बुतशिकन (मूर्ति-भंजक) के अधीन कश्मीर से पहला बहिष्करण हुआ, और धरती के इस मनोहर स्वर्ग का इस्लामीकरण प्रारम्भ हुआ। 1989-90 का कश्मीरी हिन्दू बहिष्करण वास्तव में सातवाँ था।
यह पुस्तक उस इस्लामी रणनीति के अंतस में झाँकती है, जो निरन्तर जिहाद में विश्वास करती है, समाज को अर्ध-सत्य बता कर उन्हें दिग्भ्रमित करती है, ताकि उसका अंतिम लक्ष्य, जो कि दार-उल-इस्लाम बनाना है, प्राप्त किया जा सके।
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