पाठ्य-पुस्तक
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Gita Press, Hindi Books, Suggested Books, पाठ्य-पुस्तक
Gita Dainandini (Geeta Press Diary 2026)
गीता दैनन्दिनी डायरी 2026
इसमें सम्पूर्ण गीता का मूल पाठ, उपासना योग्य आठ बहुरंगे चित्र, प्रार्थना, कल्याणकारी लेख, वर्ष भर के व्रत-त्योहार, तिथि, वार, संक्षिप्त पंचांग, और लिखने के लिये रुलदार पृष्ठ हैं।
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Prabhat Prakashan, इतिहास, पाठ्य-पुस्तक
Hindi Sahitya Ka Itihas- Acharya Ramchandra Shukla
हिंदी साहित्य का भंडार पर्याप्त समृद्ध है। गद्य तथा पद्य की लगभग सभी विधाओं का प्रचुर मात्रा में साहित्य-सर्जन हुआ है। अनेक कालजयी कृतियाँ सामने आईं। लेखक-कवियों ने भी सर्जना के उच्च मानदंड स्थापित किए, जिन पर साहित्य-सृजन को कालबद्ध किया गया; वह युग उनके नामों से जाना गया। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने गहन शोध और चिंतन के बाद हिंदी साहित्य के पूरे इतिहास पर विहंगम दृष्टि डाली है।
हिंदी भाषा के मूर्धन्य इतिहासकार- साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का जो इतिहास रचा है, वह सर्वाधिक प्रामाणिक तथा प्रयोगसिद्ध ठहरता है। इससे पहले भी हिंदी का इतिहास लिखा गया; पर आचार्यजी का ज्ञान विस्तृत फलक पर दिग्दर्शित है। इसमें आदिकाल यानी वीरगाथा काल का अपभ्रंश काव्य एवं देशभाषा काव्य के विवरण के बाद भक्तिकाल की ज्ञानमार्गी, प्रेममार्गी, रामभक्ति शाखा, कृष्णभक्ति शाखा तथा इस काल की अन्य रचनाओं को अपने अध्ययन का केंद्र बनाया है। इसके बाद के रीतिकाल के सभी लेखक-कवियों के साहित्य को इसमें समाहित किया है।
अध्ययन को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक काल के गद्य साहित्य, उसकी परंपरा तथा उत्थान के साथ काव्य को अपने विवेचन केंद्र में रखा है। हिंदी साहित्य का क्षेत्र चहुँदिशि विस्तृत है। हिंदी साहित्य के इतिहास को सम्यक् रूप में तथा गहराई से जानने-समझने के लिए आचार्य रामचंद्र शुक्ल का यह इतिहास-ग्रंथ सर्वाधिक उपयुक्त है।SKU: n/a -
Prabhat Prakashan, पाठ्य-पुस्तक, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र
Kautilya Arthshastra (HB)
‘अर्थशास्त्र’ कौटिल्य यानी चाणक्य द्वारा रचित संस्कृत वाड्.मय का एक अद्भुत ग्रंथ है। इसका पूरा नाम ‘कौटिलीय अर्थशास्त्र’ है।
चाणक्य सम्राट् चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। उन्होंने चंद्रगुप्त के प्रशासकीय उपयोग के लिए इस ग्रंथ की रचना की थी। यह मुख्यतः सूत्र-शैली में लिखा हुआ है। यह शास्त्र अनावश्यक विस्तार से रहित, समझने और ग्रहण करने योग्य सरल शब्दों में रचा गया है।
‘अर्थशास्त्र’ में समसामयिक राजनीति, अर्थनीति, विधि, समाजनीति तथा धर्मादि पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है। अभी तक इस विषय के जितने भी ग्रंथ उपलब्ध हैं, वास्तविक जीवन का चित्रण करने के कारण उनमें यह सबसे अधिक मूल्यवान् है। इस शास्त्र के प्रकाश में न केवल धर्म, अर्थ और काम का प्रणयन तथा पालन होता है अपितु अधर्म, अनर्थ तथा अवांछनीय का शमन भी होता है।
राजनीतिक, आर्थिक, विधि आदि सिद्धांतों को जानने-समझने और व्यवहार में लाने के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कृति।SKU: n/a -
Akshaya Prakashan, English Books, Suggested Books, इतिहास, पाठ्य-पुस्तक, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)
Sanatan Dharma Of Hindu Religion And Ethics
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Akshaya Prakashan, English Books, Suggested Books, इतिहास, पाठ्य-पुस्तक, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)Sanatan Dharma Of Hindu Religion And Ethics
The Fundamental Principles of Sanatana Hindu Dharma (Hindi translation of the rare and now out-of-print book SANATANA DHARMA: AN ELEMENTARY TEXT-BOOK of Hindu Religion and Ethics, last published in 1916 by Central Hindu College, Kashi)
A series of three books on Sanatana Dharma was published by Central Hindu College in Banaras.These include ‘An Elementary Textbook of Sanatana Dharma’, which was first published in 1902, and the last edition published by the college in 1916.This book is available in English on the internet, but the vast Hindi-speaking readership has so far been deprived of this important book and has been demanding its Hindi translation.This demand was fulfilled by Kapot Media Network, a company founded by Sandeep Dev, a renowned Hindi journalist, thinker, and celebrated author.Kapoot has done a highly commendable job by publishing a simple and easy-to-understand Hindi translation of this book. In this way, a Hindi edition of this book is being published after more than a century.
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Hindi Books, Kapot Prakashan, Suggested Books, इतिहास, पाठ्य-पुस्तक, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)
Sanatan Hindu Dharma ke Mool Tatva (PB)
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Hindi Books, Kapot Prakashan, Suggested Books, इतिहास, पाठ्य-पुस्तक, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)Sanatan Hindu Dharma ke Mool Tatva (PB)
सनातन हिंदू धर्म के मूल तत्व (1916 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज, काशी द्वारा आखिरी बार प्रकाशित और अब लुप्त हो चुके दुर्लभ ग्रंथ SANATANA DHARMA: AN ELEMENTARY TEXT- BOOK of Hindu Religion and Ethics का हिंदी अनुवाद)
बनारस के सेन्ट्रल हिन्दू कॉलेज द्वारा सनातन धर्म पर तीन पुस्तकों की श्रृंखला प्रकाशित की गई थी। इनमें ‘एन एलिमेंटरी टैक्स्ट बुक ऑफ सनातन धर्म’ का प्रथम प्रकाशन सन् 1902 में तथा कॉलेज द्वारा अंतिम प्रकाशन 1916 में हुआ था। इंटरनेट पर यह पुस्तक अंग्रेजी में मिल जाती है किन्तु हिन्दी का विशाल पाठक-वर्ग आज तक इस महत्वपूर्ण पुस्तक से वंचित था और इसके हिन्दी अनुवाद की मांग कर रहा था। इस मांग को पूरा किया हिन्दी के चर्चित पत्रकार, चिंतक और सुप्रसिद्ध लेखक संदीप देव की कंपनी Kapot Media Network ने। कपोत ने इस पुस्तक का सरल-सुबोध हिन्दी अनुवाद प्रकाशित कर बेहद सराहनीय कार्य किया है। इस तरह से एक सदी से भी अधिक समय बाद इस पुस्तक का हिन्दी संस्करण प्रकाशित हो रहा है।
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Rajpal and Sons, पाठ्य-पुस्तक, भाषा, व्याकरण एवं शब्दकोश
Sanskrit Swayam Shikshak | संस्कृत स्वयं-शिक्षक
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Rajpal and Sons, पाठ्य-पुस्तक, भाषा, व्याकरण एवं शब्दकोशSanskrit Swayam Shikshak | संस्कृत स्वयं-शिक्षक
Sanskrit Self Learner An easy guide to learning Sanskrit on your own without attending any classes or going to a teacher. * Written by the renowned Sanskrit scholar, Shripad Damodar Satvalekar, complete with self-testing exercises, the book has proved popular both with students as well as educational institutions. Bi-lingual
संस्कृत स्वयं शिक्षक किसी भी कक्षा में भाग लेने या शिक्षक के पास जाए बिना अपने दम पर संस्कृत सीखने के लिए एक आसान गाइड * प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान, श्रीपाद दामोदर सातवलेकर द्वारा लिखित, आत्म-परीक्षण अभ्यासों के साथ, यह पुस्तक छात्रों और शैक्षिक संस्थानों के साथ लोकप्रिय साबित हुई है। द्वि-बहुभाषी”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, Religious & Spiritual Literature, Suggested Books, पाठ्य-पुस्तक
Vastu Vidya
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, Religious & Spiritual Literature, Suggested Books, पाठ्य-पुस्तकVastu Vidya
‘अनंत शयन संस्कृत ग्रंथावली’ के तीसवाँ (३०) अंक का प्रसिद्ध ‘वास्तु विद्या’ का यह द्वितीय संस्करण है। यह ११०६वें वर्ष (कोलंबाब्द) में आरम्मुळ वासुदेव मूस महाशय से प्राप्त वास्तु विद्या का केरल भाषा में लिखित व्याख्या के आधार पर, इसी ग्रंथालय में तात्कालिक अध्यक्ष, श्री महादेव शास्त्री के द्वारा प्रस्तुत लघु विवृत्ति नाम के व्याख्यान को अर्थ स्पष्टीकरण के लिए संयोजित किया है। वास्तु संबंधी ज्ञान इस ग्रंथ से प्राप्त हो, अतः इसका ‘वास्तु विद्या’, संज्ञा करण समुचित लगता है।
और यह ‘साधन कथन’ से आरंभ होकर, ‘मृल्लोष्ट विधान’ तक सोलह अध्यायों में सगुंफित है। ग्रंथ के सोलहवें अध्याय के अंत में, समाप्ति प्रकटन का कोई दूसरा वाक्य उपलब्ध नहीं है। ‘इति वास्तु विद्या समाप्त’, ऐसा दृश्यमान होने पर भी—
“दारुस्वीकरणं वक्ष्ये निधिगेहस्य लक्षणे।”
(अध्याय १३)
अर्थात् निधि गेह के लक्षण में दारु ग्रहण (लकड़ी का चयन) करना बताऊँगा।
इस प्रकार ग्रंथकर्ता के ‘दारुस्वीकरण’ आदि स्वयं की वचनबद्धता से बोध के अभाव से (अज्ञानता या भ्रम के कारण) लेखक के द्वारा (‘इति वास्तु विद्या समाप्त’ ऐसा) लिखित होना संभावित होता है।
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