सही आख्यान (True narrative)
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Hindi Books, Manjul Publishing House, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Acche Mata Pita Kaise Bane
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Hindi Books, Manjul Publishing House, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Acche Mata Pita Kaise Bane
दादा जे.पी. वासवानी के शब्दों में, ‘घर ही ईश्वर के राज्य का प्रवेश द्वार है, और वही सच्ची प्रसन्नता का राज्य है.’अगर आप भी अपने घर को धरती का स्वर्ग बनाना चाहते हैं, तो दादा आपको इसके लिए राह दिखा रहे हैं. दादा की यह पुस्तक प्रेम, धैर्य, उचित मार्गदर्शन, तथा स्नेहिल अनुशासन को ऐसी योग्यताओं के रूप में प्रकट करती है जिन्हें माता-पिता को अपने भीतर विकसित करना चाहिए ताकि वे अपने बच्चों का यथासंभव बेहतर पालन-पोषण कर सकें. वे कहते हैं कि आपके बच्चे ही आपकी असली संपदा और खज़ाना हैं. वे हमें मूल्यों और आदर्शों के अनुसार बच्चो को पालने का उचित तरीका सीखा रहे हैं, जो बच्चों को अच्छा इंसान बनाने में सहायक होगा और वे ज़िम्मेदार नागरिकों के रूप में जीवन जी सकेंगे. तो आगे बढ़ें और तथाकथित पीढ़ी-अंतराल से ऊपर उठते हुए, अपने बच्चों के साथ मातृ भाव स्थापित करें!
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Achoot Matwad Ke Sach : Gandhi aur Ambedkar
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Achoot Matwad Ke Sach : Gandhi aur Ambedkar
भारतीय राजनीतिक मंच पर अस्पृश्यता के बढ़ते हुए खतरों को उजागर करनेवाले दो प्रमुख व्यक्ति- गांधी और अंबेडकर थे। गांधीजी ने अपने सार्वजनिक जीवन के प्रारंभ से ही अस्पृश्य समाज के साथ हिंदू समाज के अनुचित व्यवहार का उग्र विरोध किया। हरिजनों का उत्थान ही गांधी जीवन का मुख्य उद्देश्य बन गया था। 1932 में ‘हरिजन सेवक संघ’ की स्थापना की और 1933 में साप्ताहिक ‘हरिजन’ का प्रकाशन किया। 17 नवंबर, 1933 को गांधी ने अस्पृश्यता विरोधी हरिजन दौरा शुरू किया और 2 अगस्त, 1934 को समाप्त हुआ। निरंतर 10 महीने चले इस दौरे में गांधीजी ने 12,500 मील की यात्रा की और हरिजन-कल्याण के लिए 8 लाख रुपए जमा किए। डॉ. अंबेडकर ने दलित मुक्ति पर अपनी सारी शक्ति केंद्रित करने के उद्देश्य से 1924 में ‘बहिष्कृत हितकारी’ सभा की स्थापना की और मराठी पाक्षिक ‘बहिष्कृत भारत’ का प्रकाशन प्रारंभ किया। वस्तुतः दलितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में अनेक प्रयास बहुत पहले से चल रहे थे। गांधी और डॉ. अंबेडकर को इन प्रयासों की निरंतरता में देखा जाना उचित है।
डॉ. विवेकानंद तिवारी ने अपनी पुस्तक ‘अछूत मतवाद के सच गांधी और अंबेडकर’ पर प्रशंसनीय परिश्रम किया है तथा महत्त्वपूर्ण संदर्भ जुटाए हैं। पाठकों के लिए ये तथ्य पठनीय विवेचनीय हैं।SKU: n/a -
Ayuvardhak Health Care, Hindi Books, Prabhat Prakashan, Yog Ayurvedic books, सही आख्यान (True narrative)
Acupressure Aur Swastha Jeevan (PB)
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Ayuvardhak Health Care, Hindi Books, Prabhat Prakashan, Yog Ayurvedic books, सही आख्यान (True narrative)Acupressure Aur Swastha Jeevan (PB)
एक्यूप्रेशर प्राचीनतम चिकित्सा-पद्धतियों में से एक है। यह पूर्णतया प्राकृतिक उपचार पर आधारित है। यह एक सरल, प्रभावकारी एवं सुरक्षित चिकित्सा-पद्धति है। शरीर के अधिकांश महत्त्वपूर्ण अंगों के प्रतिबिंब-केंद्र हथेलियों एवं तलवों में पाए जाते हैं। इन प्रतिबिंब-केंद्रों को ‘प्रतिक्रिया बिंदु’ भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत शरीर को दर्द, तनाव, थकान, पीड़ा एवं रोग से मुक्ति प्रदान करने के लिए किसी ओषधि का सेवन किए बिना अँगूठे, उँगलियों अथवा इस उद्देश्य हेतु निर्मित उपकरण से कुछ विशेष प्रतिबिंब (रिफ्लेक्स) बिंदुओं पर दबाव डाला जाता है। इस पद्धति का विशेष लाभ यह है कि इसका प्रयोग घर में भी किया जा सकता है और इससे शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। एक्यूप्रेशर के माध्यम से उपचार का अन्य लाभ यह है कि यह न केवल रोग-निवारक है अपितु आरोग्यकर भी है। सप्ताह में दो दिन घर बैठे 20-25 मिनट प्रतिदिन मुख्य-मुख्य प्रतिबिंब-केंद्रों पर दबाव देने से बिना कुछ खर्च किए रोग-निवारण हेतु आप संपूर्ण एक्यूप्रेशर प्रक्रिया अपना सकते हैं। यह पुस्तक रोग-निवारण हेतु अत्यंत उपयोगी होने के साथ-साथ दैनिक जीवन में विभिन्न प्रकार के रोगों से रोगी को छुटकारा दिलाने में सहायक है। पुस्तक की एक अन्य विशेषता है इसमें दिए गए सैकड़ों चित्र, जो विषय को समझने में सहायक हैं।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)
Adhyapak | Maali Stories By Rabindra Nath Thakur
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)Adhyapak | Maali Stories By Rabindra Nath Thakur
“अधयापक कहानी में रवींद्रनाथ ठाकुर ने शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते की गहराई और जटिलताओं को प्रस्तुत किया है। यह कहानी एक शिक्षक और उसके विद्यार्थियों के बीच के संबंधों को लेकर लिखी गई है। कहानी में यह दिखाया गया है कि शिक्षक का काम केवल किताबों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह अपने विद्यार्थियों के जीवन को आकार देने का भी जिम्मेदार होता है।
माली कहानी में रवींद्रनाथ ठाकुर ने प्रकृति और मनुष्य के रिश्ते को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया है। माली कहानी एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है, जो बागवानी और पौधों से जुड़ा हुआ है। माली अपने काम में इतनी तन्मयता और प्रेम से लगा हुआ है कि वह न केवल पौधों की देखभाल करता है, बल्कि अपने जीवन में भी शांति और संतुलन की खोज करता है।”
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English Books, Motilal Banarsidass International, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
ADOLF HITLER AND TIBETAN BUDDHISM
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English Books, Motilal Banarsidass International, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)ADOLF HITLER AND TIBETAN BUDDHISM
What I’m doing with this book and in my life’s mission is that I’m after people’s mind stream. I want to make imprints on your mind stream so that now and in future lifetimes you will be helped by the information that I am promoting. My intention is to steer people in the direction of the real Buddha while encouraging them to work with pseudo Buddhism. With discriminating insight I have loaded this book full of documented evidence that will dispel false beliefs about Buddhism. This book is about loyalty and honesty. I am loyal to Gotama Buddha so I am honest about Buddhism. Even if uncomfortable for you, the reader, once a message is in your mind stream, then it is planted in the most sensitive field of karma-storage and any suggestions that you have registered with your senses will send seeds into your deepest mental continuum. Therefore, the heart and soul benefits of reading this book can flower now or in lifetimes to come. Perhaps in your next life you will be walking down a hallway and instead of looking at a poster on your left, you will look at a poster on your right and see something about a Buddhist talk, and then you will go to that. That’s the kind of influence I want this book to have upon you.
For the reader with a general interest in Buddhism, the two parts of this book progress from an easy to read basic course on meditation and the major aspects of Buddhist wisdom, to a provocative landscape of diverse essays that challenge and stretch the readers’ imagination. This book was not written to reinvent the wheel and offer up “just another introduction to Buddhism.” To repeat the same teachings printed in many other introductory books on Buddhism would only add further pollution to the world by creating more confusion, diluting the many excellent dharma books available. Not only is this a fresh approach to Buddhism, but this book stirs up dust in areas that most people have not thought of. There are Buddhist teachers who will discuss things privately such as Buddhist views on UFO’s, Adolf Hitler and the historical Jesus, but they will not give public talks or publish books about these controversial subjects. In this book I have decided to do just that, because I feel that the subject matter is very important and relevant to our lives, our history and our destiny. Buddhism provides a special cosmological perspective on our modern world, and I believe that this should be shared in Buddhist books. Not only does it help us with a mythology, but it helps to promote Buddhism by relating the dharma to new territories of thought in the Western mind. I feel that people can read and decide for themselves what is the truth.
The title of this book Freeing the Buddha was selected because studies indicate that a provocative title can increase book sales from 5% to 15%. Freeing the Buddha does not mean Freeing the Buddha Within (that’s been done before). It literally means freeing the Buddha from the false words that have been put in his mouth. The meaning is appropriate because the author is a Theravada Buddhist and a major theme in this book is about how the Mahayana Buddhists have distorted, diluted and deemphasized the Buddha’s words. As a Theravada Buddhist I claim greater orthodoxy and seniority over the entire institution of Mahayana Buddhism. Althought this book is very sympathetic to Mahayana Buddhism, “freeing” means giving back to the Buddha the more central importance that he deserves in the Buddhist religion. This book raises awareness for the need to free the Buddha and his teachings from the cultural traditions that Buddhists have been piling all over him, and to free the Buddha from being associated with false sutras. The tendency to “defer to the guru” can be wrong and cause people to be convinced that the true is false and that the false is true. The “Large Scale Concerns” part of the subtitle was taken from a talk by the Dorje Loppön Lödro Dorje in which he referred to the great compassionate view of the bodhisattvas. “Diversity on a Sacred Path” was chosen because these essays explore how Buddhism relates to the diverse picture of humanity in the world. Also, because of the diverse aspirations of sentient beings, there are diverse ways for people to enter onto the Buddhist path to enlightenment. Below the subtitle it states “a dangerous collection of essays.” because Oscar Wilde said, “An idea that is not dangerous is unworthy of being called an idea at all.
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Aghanya Ka Astitva: Gau Mata ki Abhinav Gatha
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Aghanya Ka Astitva: Gau Mata ki Abhinav Gatha
-:पुस्तक परिचय:-
गौ माता सनातन धर्म की सबसे महत्वपूर्ण धरोहर है। भगवान श्री कृष्ण और भगवान श्री राम के अवतार गौ माता से बहुत घनिष्ठ संबंध रखते हैं। इस पुस्तक में गौ माता के अस्तित्व पर जो संकट मँडरा रहा है, उसकी चर्चा की गई है। गाय के महत्व के शास्त्रीय प्रमाण, पिछले 1000 वर्षों से चल रहे गौ वध का इतिहास, गौ रक्षा का इतिहास और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के कानूनी समाधानों की चर्चा की गई है। इसके अलावा गौ माता से संबंधित कई नए पक्षों का विवेचन किया गया है, जिससे भारतीयों विशेषकर और हिंदुओं को, गौ संरक्षण और गौ संवर्धन के लिए प्रेरित होना चाहिए। जब सदियों से ऋषि और कृषि की भारतीय संस्कृति गोवंश पर आधारित थी तो भारत राष्ट्र समृद्ध था।
गौरक्षा कोई आधुनिक राजनीति नहीं, सदियों पुराना तपस्विक संकल्प है।
संजीव नेवर ✍
गाय पूज्य माता है।
हंसराज भारद्वाज ✍
इस पुस्तक में पूरे भारत में गौ हत्या पाबंदी के समाधान भी बताए गए हैं।
विष्णु शंकर जैन ✍
भारत एक भी गाय का वध क्यों होने दे?
उदय माहुरकर ✍
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)
Aghori (PB)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)Aghori (PB)
“””देखो, जानो और अपनी आत्मा में बिठा लो कि उस देह की अब कोई कीमत नहीं है इस दुनिया में। इनसान तो वह बचा नहीं, उसके घरवाले भी उसको शव बोल रहे हैं। जब शरीर जल रहा होता है तो एकदम से आग नहीं पकड़ता, काफी देर तक तो वह फूलता रहता है, जैसे किसी ने अंदर गैस भर दी हो। यही सत्य है हमारा- तुम्हारा। अंत में बचती है केवल एक मुट्ठी राख। फिर यह बची हुई राख माँ गंगा को अर्पण हो जाती है। और एक जीवन अपनी अंतिम यात्रा पर गोलोक की ओर निकल जाता है।””
सामने चिता जल रही थी और कुछ अघोरी अनुष्ठान कर रहे थे। वे दोनों वहाँ खड़े हैरानी से चिता से उठती लपटों को देख रहे थे। वे सोच रहे थे कि अघोरियों का जीवन कितना रहस्यमयी है। शरीर पर मुर्दे की भस्म लगाए, नरमुंडों की माला पहने वे अजीब तरह के तंत्र-मंत्र करने में संलग्न थे। लेकिन कोई यह नहीं जानता कि अघोरी बनने के लिए उन्हें कितनी कठिन साधना करनी पड़ती है। कोई नहीं जानता कि उनके जीवन का उद्देश्य मानवता को लाभ पहुँचाना और जनकल्याण करना है।
अघोरियों के जीवन, साधना, शक्तियों एवं मृत्यु के सच को उजागर करनेवाला रोचक शैली में लिखा उपन्यास, जो उनके अनजाने तथ्यों से परिचय करवाएगा।”
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Hindi Books, Rajpal and Sons, कहानियां, सही आख्यान (True narrative)
Agra Ki Kahani
“आगरा में आपका स्वागत है! ‘प्रेम का शहर’, दुनिया के सात अजूबों में से एक – ताजमहल का निवास! जानिए इस ऐतिहासिक शहर की और इसकी ख़ूबसूरत हस्तकला और स्वादिष्ट व्यंजनों की कहानी! भारत के प्रसिद्ध शहरों और नगरों की कहानियों को करीबी से जानिए, मनोरंजक अन्दाज़ में लिखी और सुंदर चित्रों से भरपूर इस अद्भुत शृंखला के साथ!”
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Hindi Books, Rajpal and Sons, कहानियां, सही आख्यान (True narrative)
Ahmedabad Ki Kahani
अहमदाबाद में आपका स्वागत है! साबरमती नदी के तट पर बसी आदिवासी बस्ती, अशावल, कैसे बनी अहमदाबाद—भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते शहरों में से एक? जानने के लिए पढ़ें अहमदाबाद की कहानी!
भारत के प्रसिद्ध शहरों और नगरों की कहानियों को करीबी से जानिए, मनोरंजक अन्दाज़ में लिखी और सुंदर चित्रों से भरपूर इस अद्भुत शृंखला के साथ!
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, कहानियां, सही आख्यान (True narrative)
Ajit Kumar Ki Lokpriya Kahaniyan
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, कहानियां, सही आख्यान (True narrative)Ajit Kumar Ki Lokpriya Kahaniyan
“अजितजी की कहानियों का यह संकलन उनकी सतत रचनाशीलता का गवाह है। इन कहानियों से गुजरते हुए उनकी रचना-प्रक्रिया का, उनके रचनाशिल्प का तथा कुछ रचनाओं में उनके विचार-पक्ष का भी दिग्दर्शन होता है। ‘बात बोलेगी, हम नहीं’ की तर्ज पर इन संकेत-सूत्रों से अजितजी की कथा-रचनाशीलता के विविध आयामों का पता खोजने की छोटी सी कोशिश की गई है।
संग्रह में कुल डेढ़ दर्जन कहानियाँ हैं। कहानियों की विषयवस्तु मूलतः दैनिक जीवन से जुड़ी है। इस संग्रह को पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि ये कृत्रिम कहानियाँ नहीं हैं। वास्तव में कुछ तो इस तरह की हैं कि आपको लगे कि अरे, यह तो रोज मेरे घर में भी होता है। पाठकों से तादात्म्य बनाने के लिए कहानी के विषय का चुनाव बहुत महत्त्वपूर्ण है। अत्यंत सरल एवं सहज विषयों पर लगभग कही जाने वाली शैली में लिखी ये कहानियाँ खूब पठनीय बन पड़ी हैं।
कुल मिलाकर संग्रह अपने नाम की सार्थकता सिद्ध करता है। ये कुछ कहानियाँ हैं, जो अपने समय में छपकर लोकप्रिय हुईं। इनकी लोकप्रियता के पीछे अजितजी की कहानी कहने की कला, विषयों का चुनाव और उनकी भाषा-शैली का योगदान तो था ही, साथ ही उनकी सूक्ष्म अवलोकन क्षमता और सहज बोध का भी उतना ही योगदान रहा।”
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Ambedkar Islam Aur Vampanth (PB)
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Ambedkar Islam Aur Vampanth (PB)
कभी मीम-भीम के नाम पर, तो कभी हिन्दू धर्म के विरोधी के तौर पर बाबा साहब अम्बेडकर को अपना बनाने को दोनों ही खेमे उत्सुक दिखाई देते हैं। पुस्तक में अम्बेडकर के विचारों को आज के परिप्रेक्ष्य में रख कर लेखक ने इन दोनों खेमों के कुत्सित तर्कों को बिंदुवार ध्वस्त किया है, और ये बताया है कि अम्बेडकर के विचार इस्लाम और वामपंथ, दोनों को लेकर कितने स्पष्ट थे और जिनसे ये स्थापित होता है कि वे इन दोनों के हिमायती तो बिलकुल भी नहीं थे और इसलिए इन दोनों खेमों द्वारा अम्बेडकर को अपना बताने के प्रयास एक छलावा हैं, जिससे वे आज की अपनी राजनीति का उल्लू सीधा करना चाहते हैं।
अम्बेडकर क्या सोचते थे इस्लाम और वामपंथ के बारे में? आज के इस्लामी और वामपंथी नेतृत्व में उन्हें अपना बनाने की होड़ के पीछे रंच मात्र भी सत्यता है क्या? मिथिलेश कुमार सिंह की पुस्तक इन सभी बातों को स्पष्टता से रखती है।
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EKA Prakashan, Westland Publisher, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
AMETHI SANGRAM (PB-Hindi)
EKA Prakashan, Westland Publisher, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)AMETHI SANGRAM (PB-Hindi)
पिछले कुछ दशकों में अमेठी की असली पहचान तो भुला ही दी गई। एक ऐसी भूमि, जो महर्षि च्यवन की तपस्थली, माता कालिकन देवी का धाम और राजा सोढ़ देव की वीरगाथाओं के साथ ही स्थानीय निवासियों की आस्था, विश्वास व श्रम से निर्मित होकर परिपूर्ण थी, उसने आजादी के बाद आगे बढ़ने की बजाय उलटी राह पकड़ ली। इस पर सियासत का एक कृत्रिम आवरण सा चढ़ गया और इसे एक राजनीतिक पर्यटन स्थल के रूप में तब्दील कर दिया गया।
अमेठी, कहने को तो वीवीआईपी क्षेत्र था, पर क्या स्थिति वाकई ऐसी थी? क्या इसे वह विशेष दर्जा प्राप्त हुआ था? 2014 के लोकसभा चुनाव में जब भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार के रूप में स्मृति इरानी यहाँ पहुँचीं, तब अमेठी की पहचान का यह आवरण खुला।
अमेठी संग्रामउसी अनदेखे सच को उजागर करती है। इसमें स्मृति इरानी की वर्ष 2014 से वर्ष 2019 की संघर्ष यात्रा है। उनकी विजय के कारकों को समझने के बहाने भारतीय राजनीतिक दलों और नेताओं की कार्यशैली, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दूरदृष्टि, भाजपा की रणनीति, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता, गाँधी परिवार की ताकत का मिथक और क्षेत्रीय दलों के स्वार्थ का लेखा-जोखा है। इसके अलावा स्मृति इरानी की रणनीतिक, व्यवहारिक और राजनीतिक कार्यशैली को भी यह किताब सूक्ष्मता से खोलती है।
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Hindi Books, MANAV PRAKASHAN, On Sale, Suggested Books, इतिहास, संतों का जीवन चरित व वाणियां, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)
Amit Kaal Rekha Adi Sankaracarya Aur Unka Avirbhav Kaal (507 – 475 Es. Pu.)
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Hindi Books, MANAV PRAKASHAN, On Sale, Suggested Books, इतिहास, संतों का जीवन चरित व वाणियां, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन, सही आख्यान (True narrative)Amit Kaal Rekha Adi Sankaracarya Aur Unka Avirbhav Kaal (507 – 475 Es. Pu.)
पुरातात्विक मौद्रिक अभिलेखीय ऐतिहासिक आदि साक्ष्यों से परिपूर्ण शोध – ग्रंथ
एक अद्भुत पुस्तक मेरे हाथ लगी है। राम जन्मभूमि मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सबसे अधिक समय तक बहस करने और स्कंद पुराण से श्रीराम जी के जन्म स्थल को पुरातात्विक साक्ष्यों से प्रमाणित करने वाले शंकराचार्य के वकील डॉ पी.एन.मिश्रा ने आदि शंकराचार्य की जन्मतिथि और काल निर्धारण के लिए अत्यंत श्रम साध्य कार्य करते हुए जो शोध प्रबंध लिखा है, वह ‘अमिट काल रेखा: आदि शंकराचार्य और उनका आविर्भाव काल'(507-475 ईसा पूर्व) इस पुस्तक के रूप में सामने है। यह पुस्तक दो बार में करीब दो दशक में लिखी गई है।
पहले मैं भी अंधेरे में था और सोचता था कि आदि शंकराचार्य का कार्य महत्वपूर्ण है, उनके जन्मतिथि से क्या लेना? परंतु जब पढ़ा तब पता लगा कि पश्चिमी इतिहासकारों व वितंडावादियों ने मूसा (यहूदी पैगंबर), ईसा(इसाई पैगंबर) और मोहम्मद(इस्लामी पैगंबर) के बाद आदि शंकर के जन्म की चाल क्यों चली? असल में उपनिषदों से एकेश्वरवाद (अद्वैत वेदांत दर्शन) को विश्व में सबसे पहले मजबूती से अदि शंकराचार्य ने स्थापित किया था। अपने दिग्विजय के दौरान उन्होंने शास्त्रार्थ से इसे संसार भर में स्थापित किया था। बाद में इसी एकेश्वरवाद के आधार पर मूसा, ईसा और मोहम्मद ने अपने अपने पंथों की रचना की।
आदि शंकराचार्य के जन्म की तिथि को 1000 साल कम करते ही, अब्राहमिकों की अवधारणा प्रथम हो गई और पश्चिमी इतिहासकारों ने यह वितंडा फैला दिया कि आदि शंकराचार्य ने अब्राहमिकों द्वारा स्थापित एकेश्वरवाद के विस्तार को देखते हुए भारतीयों को एकेश्वरवाद की ओर ले जाने का प्रयास किया!
अर्थात् आदि शंकर के जन्म को 1000 साल घटाते ही अब्राहमिकों को एकेश्वरवाद का क्रेडिट चला गया और सनातन वेदांत की अवधारणा लोगों को विस्मृत हो गई।
पश्चिम की इस साजिश को न समझते हुए कई भारतीय इतिहासकारों व विद्वानों ने भी यही वितंडा फैलाया। मैं स्वयं जनसंघ के संस्थापकों में एक दीन दयाल उपाध्याय की आदि शंकराचार्य पर लिखी पुस्तक को पढ़ कर शंकराचार्य के जन्म के समय केरल में इस्लाम के आगमन पर कंस्टीट्यूशन क्लब में मूर्खतापूर्ण भाषण दे चुका हूं। पी.एन. मिश्रा के इस शोध को पढ़कर मुझे अपनी मूर्खता पर आत्मग्लानि है। और दुख है कि लेफ्ट-राईट दोनों के इतिहासकार एक ही बात दोहराते हैं, बस उनके कहने का तरीका अलग होता है और उनके काल गणना में बस 100-200 वर्ष का अंतर होता है!
पी.एन.मिश्रा जी की इस पुस्तक से बुद्ध संबंधित जो बयान पुरी के शंकराचार्य जी देते हैं, उसकी भी पुष्टि हो जाती है। पुराणों में भगवान विष्णु के अवतार के रूप में आए पूर्व बुद्ध, शुद्धोधन पुत्र सिद्दार्थ गौतम बुद्ध से बहुत पहले थे। सिद्धार्थ बुद्ध से पहले कई और बुद्ध हो चुके हैं, जिनकी पूरी व्याख्या इस पुस्तक में है और यह बौद्ध ग्रंथों में भी है, बस हम सब ने ध्यान नहीं दिया था।
इस पुस्तक से आदि शंकराचार्य के समय राजा सुधन्वा की वंशावली भी मिल गई है। राजा सुधन्वा ने आदि शंकराचार्य के साथ सेना लेकर पुनः सनातन धर्म की स्थापना की थी।
इस पुस्तक से दो प्राचीन नगरों की खोज भी स्थापित होती है।
यह पूरी पुस्तक पुरातात्विक, मौद्रिक, अभिलेखीय, ताम्रपत्र और ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित शोध प्रबंध है।
दुख है कि यह पुस्तक अब नहीं मिलती। एक तो यह बहुत मोटी ग्रंथ है, दूसरा इसका मूल्य ₹2500 है। अतः प्रकाशक छापते ही नहीं। प्रकाशक के पास केवल तीन कॉपी बची थी, मैंने मूल्य भेजकर एक कॉपी अपने लिए मंगवा ली।
उनसे बात की कि यदि इच्छुक शोधार्थी या विद्वान पाठक यह पुस्तक मंगवाना चाहें तो कैसे मिलेगा? उनका कहना है कि 10 से अधिक लोगों की मांग यदि आप भेज दें तो डिजिटल प्रिंट करवा कर आपको भेज दूंगा। अतः जिनको वास्तव में आदि शंकराचार्य से जुड़ी वास्तविकता को जानना-समझना हो तो वह 8826291284 पर केवल WhatsApp कर दें। मूल्य न भेजें। 10 से अधिक लोगों का आर्डर यदि आ गया तो मैं मंगवाने का प्रयत्न करूंगा।
आगे इस पुस्तक की महत्वपूर्ण स्थापनाओं को छोटे-छोटे पोस्ट के रूप में भी मैं आपको देता रहूंगा। धन्यवाद।
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English Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Ancient Buddhist Wisdom for A Peaceful & Happy Life
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English Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Ancient Buddhist Wisdom for A Peaceful & Happy Life
Ancient Buddhist Wisdom is a profound exploration of key ideas and timeless wisdom derived from various Buddhist scriptures and ancient texts penned by revered Buddhist scholars, all rooted in the teachings of Lord Buddha. This transformative book aims to bridge the gap between ancient Eastern philosophy and the challenges faced by modern readers, offering practical insights to lead a simpler, more meaningful life.
Drawing upon the rich tapestry of Buddhist literature, this book distills the essence of the Buddha’s teachings into accessible and relatable concepts, guiding readers towards self-discovery, inner peace, and authentic contentment. By presenting these teachings in a contemporary context, the book empowers readers to apply them in their daily lives, leading to greater harmony and well-being.
Throughout the book readers are invited to explore fundamental Buddhist principles, such as impermanence, compassion,
mindfulness and non-attachment. The book delves into the core teachings of the Four Noble Truths and the Noble Eightfold Path, unraveling their significance in navigating the complexities of modern existence. By embracing these ancient principles, modern readers can find the keys to unlocking a simpler more purposeful life that celebrates the timeless essence of Buddhist wisdom.
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