सही आख्यान (True narrative)
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Hindi Books, Rajpal and Sons, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Ankhon Dekha Pakistan
ज़ल के इतिहास में जाने की ज़रूरत मैं महसूस नहीं करता। साहित्य की हर विधा अपनी बात और उसे कहने के ढब से, संस्कारों से फ़ौरन पहचानी जाती है। ग़ज़ल की तो यह ख़ासियत है। आप उर्दू जानें या न जानें, पर ग़ज़ल को जान भी लेते हैं और समझ भी लेते हैं। जब 13वीं सदी में, आज से सात सौ साल पहले हिन्दी खड़ी बोली के बाबा आदम अमीर खुसरो ने खड़ी बोली हिन्दी की ग़ज़ल लिखी: जब यार देखा नयन भर दिल की गई चिंता उतर,ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाय कर।जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया,हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर।तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है,तुझे दोस्ती बिसियार है इक शब मिलो तुम आय कर।जाना तलब तेरी करूंदीगर तलब किसकी करूं,तेरी ही चिंता दिल धरूं इक दिन मिलो तुम आय कर।तो ग़ज़लका इतिहास जानने की ज़रूरत नहीं थी। अमीर खुसरो के सात सौ साल बाद भी बीसवीं सदी के बीतते बरसों में जब दुष्यंत ने ग़ज़ल लिखी :कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए,कहाँ चिराग़ मय्यसर नहीं शहर के लिए।तब भी इतिहास को जानने की ज़रूरत नहीं पड़ी। जो बात कही गयी, वह सीधे लोगों के दिलो-दिमाग़ तक पहुँच गयी। और जब ‘अदम’ गोंडवी कहते हैं:ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़रों में,मुसलसल फ़नका डीएम घुटता है इन अदबी इदारों में।तब भी इस कथन को समझने के लिए इतिहास को तकलीफ़ देने की ज़रूरत नहीं पड़ती। ग़ज़ल एकमात्र ऐसी विधा हजो किसी ख़ास भाषा के बंधन में बँधने से इंकार करती है। इतिहास को ग़ज़ल की ज़रूरत है, ग़ज़ल को इतिहास की नहीं।इसलिए यह संकलन अभी अधूरा है। ग़ज़ल की तूफ़ानी रचनात्मक बाढ़ को संभाल सकना सम्भव नहीं है। शेष-अशेष अगले संकलनों में।- कमलेश्वर
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, सही आख्यान (True narrative)
Ant Abhi Shesh Hai
“कहानी शब्द को गूगल पर सर्च करें तो उसका एक साधारण सा अर्थ सामने आता है- मनगढंत बात, पर क्या सच में कहानी मनगढ़ंत बातें होती हैं ? क्या ‘उसने कहा था’, ‘हार की जीत’, ‘सद्गति’ या ‘कफन’ जैसी कहानियाँ मनगढ़ंत की श्रेणी में आती हैं ? कहानियाँ निरंतर हमारे आसपास दौड़ रही हैं। अपने आप में पूर्ण कहानी किसी भी व्यक्ति पर अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहती है।
लेखक होने की सबसे अच्छी बात है लिख पाना; और लिख पाने के कारण ही हम किसी भी चीज को उसकी गहराई तक देखते हैं, जहाँ तक साधारणतः लोग नहीं देख पाते और उसकी सबसे अच्छी बात यह भी है कि लेखन हमारे विचारों को स्पष्ट करता है। किसी के भी लैपटॉप से निकली हुई कहानी किरदारों की संभावनाओं का वर्णन करती है कि यह भी संभव था। उन्हीं संभावनाओं की एक छोटी सी कोशिश है-‘अंत अभी शेष है’।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Anubhooti
वनवासी युवक-युवतियाँ प्रतिभा के धनी होते हैं। जिनका जीवन असीम शक्ति और आत्मविश्वास से लबालब भरा होता है। यह अनुभूति भी प्रेरणा जगाती है। समाज जीवन में अनेक ऐसे प्रेरणादायी महिला-पुरुष हैं, जिनके जीवन में निस्स्वार्थ प्रेम, असीम ईश्वरनिष्ठा, जागरूकता, त्याग-समर्पण आदि है, जिनके दर्शनमात्र से ही आगे बढ़ने की भावना बलवती हो जाती है। यह अनुभव भी श्री अतुल जोग को प्राप्त हुआ। देश में अनेक विभिन्न संप्रदायों के गुरु, संत-महात्माओं का दर्शन और समाज जागरण का पदचिह्न भी जगह-जगह स्थापित है, यह भी अनुभव में आया। प्रवास के दौरान महिलाओं द्वारा प्रदर्शित शक्तियों का भी दर्शन हुआ है कि नारियाँ सबला होती हैं।
जनजाति जीवन-दर्शन में विभिन्न प्रकार की भाषाएँ, रीति-रिवाज, परंपराएँ हैं, लेकिन सभी की मूल संस्कृति एक ही है। सभी इस धरती को माँ कहकर पुकारते हैं और विभिन्न अवसरों पर पूजा भी करते हैं। जनजाति जीवन-दर्शन की बुनियाद में सामूहिक जीवन-पद्धति, सामाजिक उत्तरदायित्व, स्त्री-पुरुष सहभाग, श्रम-मूलक प्रतिष्ठा का जीवन, पारंपरिक जनतंत्र, सामुदायिक गणतंत्र व्यवस्था है, जो संपूर्ण जीवन की गारंटी देती है।
जनजातीय जीवन में कार्य करते हुए कर्मयोद्धा अतुल जोगजी के समर्पण, त्याग और सहभाग का प्रेरक संकलन है ‘ अनुभूति’।”
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)
APNE APNE RAM
भारतीय वाङ्मय के आधिकारिक विद्वान श्री भगवान सिंह की अनुपम कृति है अपने-अपने राम’। राम का चरित्र भारतीय साहित्य में रमा हुआ है। उनके व्यक्तित्व की यह विशेषता है कि विभिन्न भाषाओं में अब तक राम को आधार बनाकर हजारों रचनाएँ लिखी जा चुकी हैं। इसके बावजूद रचनात्मक स्रोत रचनाकारों के लिए कम नहीं हुआ है। हिंदी में तुलसीदास से लेकर निराला तक और उसके बाद के रचनाकारों ने भी राम को आधार बनाकर महत्त्वपूर्ण कृति का सृजन किया। इस कड़ी में यह महाकाव्यात्मक औपन्यासिक रचना स्वयं में महान रचना स्थापित करता है।
इस पुस्तक के प्रकाशन के साथ ही पाठकों और समीक्षकों ने इसे हाथों-हाथ लिया। प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह ने विश्व की श्रेष्ठतम कृति कहा और यह भी माना कि इसमें कोई दोष नहीं है। ‘हंस’ के संपादक राजेंद्र यादव ने इसकी समीक्षा प्रमुखता से अपनी पत्रिका में छापी। इसकी लोकप्रियता बहुतों के लिए ईष्र्या का केंद्र भी बनी। सस्ता साहित्य मण्डल के लिए यह गौरव की बात है कि सभ्यता विमर्श की अनन्य रचना ‘ अपने-अपने राम’ का प्रकाशन वह करने जा रहा है। हमें पूरा विश्वास है कि अधिक-से- ‘अधिक पाठकों के बीच यह रचना मण्डल के माध्यम से पहुँचेगी, साथ ही ‘लोग अपने स्वजनों को उपहार के रूप में यह पुस्तक भेंट करेंगे।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Apne Kurukshetra Mein Akela (PB)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Apne Kurukshetra Mein Akela (PB)
जीवन एक कुरुक्षेत्र है, जहाँ निरंतर कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध चलता रहता है। पांडवों की अवश्यंभावी जीत सदा ही दुर्धर्ष संघर्षों के पश्चात् ही प्राप्त होती है । यह संघर्ष तामसी और सात्त्विक प्रवृत्तियों के बीच, अच्छे और बुरे के बीच, शोषक और शोषित के बीच, गाँव और शहर के बीच सहित विभिन्न रूपों में निरंतर जारी है। महत्त्वपूर्ण यह है कि हर व्यक्ति अपने जीवन के महाभारत में अकेला होता है, यह युद्ध उसे स्वयं ही लड़ना होता है। अयोध्यानाथ मिश्र के इस कहानी- संकलन ‘अपने कुरुक्षेत्र में अकेला’ की कहानियों में जीवन और समाज की विषमताओं और उनके विरुद्ध संघर्ष की व्यंजना को जनपदीय सरोकारों और रचनात्मक विवेक के साथ बहुत ही प्रतिबद्धता से दर्ज किया गया है ।
अयोध्यानाथ मिश्र अपनी कहानियों में लोक में प्रचलित उक्तियों एवं मुहावरों का बहुत ही सुंदरता से प्रयोग करते हैं। उनकी कहानियाँ भोजपुरी अंचल में व्याप्त देशज व्यवहार एवं मनोजगत् का भूगोल रचती हैं। इनकी कहानियों में जो जीवन का प्रवाह, सौंदर्य, दुविधाएँ, नैतिक संघर्ष एवं सुख-दुःख का भाव – संसार सृजित होता है, वह अत्यंत प्रामाणिक एवं जीवनानुभव से ओतप्रोत प्रतीत होता है। इस संग्रह की कहानियाँ पाठकों का प्यार पाएँगी ऐसी मुझे आशा है।
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Abrahamic religions (अब्राहमिक मजहब), Hindi Books, Vani Prakashan, सही आख्यान (True narrative)
Artificial Intelligence : Ek Adhyayan
Abrahamic religions (अब्राहमिक मजहब), Hindi Books, Vani Prakashan, सही आख्यान (True narrative)Artificial Intelligence : Ek Adhyayan
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस : एक अध्ययन – मानव जीवन को एक जटिल भविष्य की तरफ़ ले जाने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विशेषकर मशीन इंटेलिजेंस के माध्यम से अन्तर्निहित इन्फेरेंस इंजनों से युक्त विशेषज्ञ प्रणालियों द्वारा जनित तीव्र एवं अप्रतिरोध्य परिवर्तनों ने मानव बुद्धि की अनन्त क्षमता को उजागर किया है। एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) द्वारा प्रदत्त शक्तियों से अधिकतर अनभिज्ञ लोग मूक बने हुए हैं, और जानकार लोग कुछ हद तक विवरणों से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के साथ-साथ समाज के संरक्षक एआई के सर्वव्यापी अनुप्रयोगों से सम्बन्धित नैतिक मुद्दों को लेकर थोड़े चिन्तित हैं। यह पुस्तक एआई सम्बन्धी विचारों और अवधारणाओं में स्पष्टता, समझ को आसान बनाने के लिए प्रस्तुति में सरलता और सटीकता के मानदण्डों के कारण उपरोक्त तीनों वर्गों के पाठकों की आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास करती है। वास्तव में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास का सन्देश देने के इस सामयिक उद्यम के लिए लेखक प्रशंसा के पात्र हैं, जिसे बड़े पैमाने पर पाठकों द्वारा पसन्द किया जायेगा। ज्ञान की खोज को अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए और विषय के सम्पूर्ण कवरेज के लिए कोई दावा नहीं होना चाहिए, यही बात डॉ. शर्मा के मन में है, और यह पुस्तक इसका प्रमाण।
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Hindi Books, Manjul Publishing House, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Ashwathama (Hindi)
अश्वत्थामा महाभारत का शापित योद्धा इसे नियति की विडंबना ही कहेंगे कि महाभारत की गाथा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अमर पात्र होने के बावजूद, अश्वत्थामा सदा उपेक्षित रहा है. पौराणिक साहित्य में अश्वत्थामा सहित और भी लोग हैं, जिन्हें अमर मन जाता है. परंतु जहाँ अन्य लोगों को अमर होने का ‘वरदान’ प्राप्त हुआ, वहीँ अश्वत्थामा को अमरता ‘शाप’ में मिली थी! युद्ध की कथा सदा निर्मम नरसंहार, निर्दोषों की हत्या और दुष्कर्मों की काली स्याही से ही लिखी जाती है. तो फिर महाभारत जैसे महायुद्ध में अश्वत्थामा से ऐसे कौन-से दो अक्षम्य अपराध हो गये थे, जिनके लिए श्रीकृष्ण ने उसे एकाकी व जर्जर अवस्था में हज़ारों वर्षों तक पृथ्वी पर भटकने का विकट शाप दे डाला? उसके मन में यह प्रश्न उठता है कि श्रीकृष्ण ने इतना कठोर शाप देकर उसके साथ अन्याय किया या फिर इसके पीछे भगवान का कोई दैवी प्रयोजन था? क्या अश्वत्थामा के माध्यम से भगवान कृष्ण आधुनिक समाज को कोई संदेश देना चाहते थे? अधिकांश जगत अश्वथामा को दुर्योधन कि भांति कुटिल और दुराचारी समझता है. लेखक ने इस उपन्यास में अश्वत्थामा के जीवन के अनछुए पहलुओं को उजागर करते हुए, उस महान योद्धा के दृष्टिकोण से महाभारत की कथा को नए रूप में प्रस्तुत किया है. साहित्य के कन्धों पर यह ज़िम्मेदारी है कि विस्मृत नायक-नायिकाओं को पुनर्स्थापित करें. ‘अश्वत्थामा’ इस श्रेणी में एक आवश्यक महनीय प्रयास है. – डॉ. कुमार विश्वास, कवि एवं राजनेता अर्धसत्य, मनुष्य के लिए सदैव सुख का कारण और आत्म-मंथन का विषय रहा है. ‘अश्वत्थामा’ का पात्र इसी द्वंद्व का प्रतीक है. – सुतपा सिकदार, लेखिका एवं फिल्म निर्माता.
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Asur Puran : History of Demons And Devils
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Asur Puran : History of Demons And Devils
असुर पुराण’ एक ऐसी अद्वितीय कृति है, जो देवताओं के विरुद्ध खड़े उन प्राचीन योद्धाओं की अनसुनी गाथाओं को उजागर करती है, जिन्हें इतिहास ने असुर कहा गया है। इस पुस्तक में दानव, दैत्य और राक्षसों के जन्म, कर्म, संघर्ष, वध और मृत्यु का गहन वर्णन है। हर पात्र का जीवन यह दरशाता है कि अच्छाई और बुराई केवल दृष्टिकोण का परिणाम है। लेखक ने इस ग्रंथ में शक्ति, नीति, प्रतिशोध जैसे तत्त्वों को कथारूप में पिरोया है, जिससे यह पुस्तक न केवल पठनीय बल्कि दार्शनिक भी बन गई है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Ath Haveli Katha Novel Book in Hindi
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Ath Haveli Katha Novel Book in Hindi
“भावना शेखर का यह उपन्यास पिछली सदी में जनमे पाठकों के लिए नॉस्टैल्जिया है जबकि नई पीढ़ी के लिए इस पुस्तक से गुजरना पुरखों की डायरी पढ़ने जैसा है।
भौतिक विकास की चुधियाती दुनिया में हम उत्तरोत्तर असभ्य हो रहे हैं। रक्तपात की खबरों से सने अखबार रोज आईना दिखाते हैं। पर अफसोस, दिलो- दिमाग कुंद और संवेदनहीन होता जा रहा है। कारण हमारा अपनी संस्कृति से विमुख होना है। संस्कृति की कोख में ही सभ्यता पलती है। स्मारक, हवेलियाँ, इमारतें हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं, जिनके झरोखों से इतिहास झाँकता है, जिनकी आबोहवा में कहानियाँ तैरती हैं। इनकी खामोशी और चहल-पहल में कल तथा आज के अनगिनत फसाने पैबस्त हैं।
यह उपन्यास पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में बसी एक भव्य हवेली के जीवन को बयाँ करता है, जो कभी पुरानी तहजीब और रवायतों का पल्लू थामे अपने वैभव पर गुमान किया करती थी पर वक्त के थपेड़ों से अपना वजूद खो चुकी है; आज कानों में उसकी सिसकियाँ सुनाई देती हैं।
लेखिका ने उसके बाशिंदों की चित्र- विचित्र कथा के व्याज से पुरानी दिल्ली की बदलती रूह, रस्मो-रिवाज, अच्छे- बुरे हालात और बनती-बिगड़ती इनसानी फितरत की स्याह-सफेद तसवीरें पेश की हैं। साथ ही निर्माण और ध्वंस का सनातन चक्र मानव विकास-यात्रा की अनिवार्य प्रक्रिया है-यह भी दरशाया है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Athashri Vedavyasa Katha (HB)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Athashri Vedavyasa Katha (HB)
Athashri Vedavyasa Katha “अथ श्री वेदव्यास कथा” Book In Hindi – Omprakash Pandey
महर्षि व्यास भारतीय वाङ्मय के शिखर प्रणेता हैं। उनकी प्रसिद्धि कृष्ण द्वैपायन, वेदव्यास और महर्षि पाराशर के रूप में भी है। उन्होंने चारों वेदों का वर्गीकरण, महाभारत जैसी शतसाहस्री संहिता, अष्टादश पुराणों और वेदांत के ब्रह्मसूत्रों का भी प्रणयन किया। उन्होंने कुरुवंश को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। पांडवों और कुरुओं, दोनों को ही समय-समय पर सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। द्वापर दुविधा का युग था। अपने युग के दिग्भ्रमित समाज को उन्होंने वासुदेव कृष्ण के साथ सही दिशा देने का भगीरथ प्रयत्न किया। कुरुक्षेत्र के रणस्थल पर श्रीकृष्ण के श्रीमुख से उपदिष्ट गीता का तत्वज्ञान महाभारत के अंतर्गत होने के कारण ही अभी तक हमें उपलब्ध है। इसका श्रेय भी द्वैपायन व्यास को ही है। दशावतार की अवधारणा भी वेदव्यास के प्रयत्न से ही सुरक्षित है। भगवान् श्रीकृष्ण की संपूर्ण जीवन-कथा और विचारराशि को व्यास ने ही श्रीमद्भागवत के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का भगीरथ प्रयत्न किया है। श्रीकृष्ण यदि अपने युग के निर्माता हैं, तो व्यास भी उनके समानांतर ही युगद्रष्टा हैं। द्वापर की यह सबसे बड़ी उपलब्ध है, जो उसे वासुदेव कृष्ण और कृष्ण द्वैपायन के रूप में दो कृष्ण प्राहृश्वत हुए। महाभारत और पुराणों में भगवान् श्रीकृष्ण की कथा तो विस्तार से मिल जाती है, लेकिन व्यासजी ने अपने विषय में कुछ भी नहीं कहा। व्यासजी के जीवन-विषय में जनसामान्य की अजस्र जिज्ञासा आज भी है, जिसे ध्यान में रखकर ही उपलब्ध साक्ष्यों और सूत्रों को सँजोकर इस ‘अथश्री वेदव्यास कथा’ का प्रणयन किया गया है।
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Hindi Books, इतिहास, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, सही आख्यान (True narrative)
Athato Bhakti Jigyasa (Set of 2 Volumes)
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Hindi Books, इतिहास, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, सही आख्यान (True narrative)Athato Bhakti Jigyasa (Set of 2 Volumes)
मनुष्य का अस्तित्व तीन तलों में विभाजित है- शरीर, बुद्धि, हृदय। या दूसरी तरह से कहें तो कर्म, विचार और भाव। इन तीनों तलों से स्वयं की यात्रा हो सकती है। स्थूलतम यात्रा होगी कर्मवाद की। इसलिए धर्म के जगत में कर्मकांड स्थूलतम प्रक्रिया है। दूसरा द्वार होगा ज्ञान का, विचार का, चिंतन-मनन। दूसरा द्वार पहले से ज्यादा सूक्ष्म है। दूसरे द्वार का नाम है- ज्ञानयोग। तीसरा द्वार सूक्ष्मातिसूक्ष्म है- भाव का, प्रीति का, प्रार्थना का। उस तीसरे द्वार का नाम भक्तियोग है।
कर्म से भी लोग पहुंचते हैं। लेकिन बड़ी लंबी यात्रा है। ज्ञान से भी लोग पहुंचते हैं। पर यात्रा संक्षिप्त नहीं है। बहुत सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं। पहले से कम, लेकिन तीसरे की दृष्टि में बहुत ज्यादा। भक्ति छलांग है। सीढ़ियां भी नहीं हैं, दूरी भी नहीं है। भक्ति एक क्षण में घट सकती है! भक्ति तत्क्षण घट सकती है। भक्ति केवल भाव की बात है। इधर भाव, उधर रूपांतरण। कर्म में तो कुछ करना होगा, विचार में कुछ सोचना होगा, भक्ति में न सोचना है, न करना है, होना है। इसलिए भक्ति को सर्वश्रेष्ठ कहा है।…
ज्ञान का मार्ग संकीर्ण है, भक्ति का मार्ग विराट है। अगर भक्तों से तुम्हारा जोड़ मिल जाए, तो फिर तुम किसी और की चिंता मत करना। न मिले दुर्भाग्यवश, तो फिर तुम कोई और मार्ग खोजना। प्रार्थना बन सकती हो, प्रेम बन सकता हो, तो चूकना मत, क्योंकि वह सुगमतम है, स्वाभाविक है।SKU: n/a -
Suruchi Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Aur Desh Bat Gaya
Suruchi Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Aur Desh Bat Gaya
अंग्रेजों द्वारा भारत में सत्ता-हस्तान्तरण, देश-विभाजन और स्वाधीनता-संघर्ष तथा 1947 से पूर्व की मुस्लिम समस्या पर यद्यपि बहुत कुछ लिखा गया है, फिर भी विभाजन की दुर्भाग्यपूर्ण घटना और उससे सम्बन्धित अनेक प्रश्नों का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। देश-विभाजन की उस विकराल विभीषिका में लाखों लोगों ने अपने प्राण गवाएँ, सगे-सम्बन्धी, परिवार-जन खोये। जान-माल के इस भीषण संहार, विनाशलीला, दुव्र्यवहार और करोड़ों लोगों को उनकी जन्म-भूमि से विस्थापित करने का मानव इतिहास में दूसरा दृष्टान्त नहीं मिलता।
जागरूक, अध्ययनशील और विचारवान् राष्ट्रसेवी व लेखक श्री हो. वे. शेषाद्रि ने इस पुस्तक में देश की इस त्रासदी का गहन अध्ययन व आकलन के आधार पर तथ्यपरक एवं यथार्थ विवेचन प्रस्तुत किया है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, कहानियां, सही आख्यान (True narrative)
Australiya Ki Pratinidhi Kahaniyan
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, कहानियां, सही आख्यान (True narrative)Australiya Ki Pratinidhi Kahaniyan
इतिहास साक्षी है कि पूरे विश्व में आक्रांताओं की वहशत का प्रकोप जिस तरह महिलाओं ने सहा है, उसकी शायद ही कोई मिसाल हो । खुद को बचाने के उपक्रम में वह बाल-विवाह, जौहर और सती प्रथा को मान्यता दे देती है । इस धरा पर समूची नारी जाति उस पर हुए इन आक्रमणों के सूत्र में कहीं -न-कहीं गुँथी हुई है। जब ऑस्ट्रेलिया में एक कबीले की सरदार ट्रगनीनी इन विभीषिकाओं से गुजर रही थी, तब भारत में राजा राममोहन राय महिलाओं की सामाजिक स्थिति सुधारने के लिए पुनर्जागरण की लौ जला रहे थे और ब्रह्म समाज एक साल का नवजात शिशु था।
यह वही समय था, जब ऐंग्लो-रशियन शीतयुद्ध अपना आकार ले रहा था। अंग्रेज पूरी
शिद्दत से समूचे विश्व से जंगली आदिवासी जनजातियों को खदेड़ने में लगे हुए थे। सुदूर अमेरिका में आदिवासियों से उनकी जमीनें छीनकर कपास की खेती के लिए तैयार की जा रही थीं। महज साल भर बाद अमेरिका में जो त्राहि-त्राहि मची, उसे इतिहास ‘ट्रेल ऑफ टीयर्स’ कहता है, जिसने बाद में ‘ ब्लैक हॉक वॉर’ का रूप ले लिया । रूस यूरोप में व्यस्त था, साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप पर अंग्रेजों की पैठ में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था। इसकी परिणति (पोलैंड) ‘वॉरसा अप्रायजिंग’ और
‘ अफगान वॉर ‘ में हुई । विश्वपटल पर ये दोनों बड़ी शक्तियाँ एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ती थीं ।
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Hindi Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)
Avishvasniya Bharat
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Hindi Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)Avishvasniya Bharat
अविश्वसनीय भारत, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इसके अद्भुत भौगोलिक परिदृश्य और हजारों वर्ष पुराने इतिहास की व्यापक खोज प्रस्तुत करता है। हिमालय की ऊँची चोटियों और पवित्र मंदिरों से लेकर रहस्यमयी अनुष्ठानों और हिंदू दर्शन की गहन अवधारणाओं तक, यह पुस्तक उस बहुस्तरीय पहचान को उजागर करती है, जिसके कारण भारत को अक्सर ‘अतुल्य भारत’ या ‘अमेजिंग इंडिया’ कहा जाता है। भारत के प्राचीन इतिहास पर चर्चा से प्रारंभ होकर—सिंधु घाटी सभ्यता से आधुनिक समय तक की यात्रा—यह विवरण उपमहाद्वीप की अखंड समयरेखा को उजागर करता है, जो यह दर्शाता है कि अनेक आक्रमणों और सांस्कृतिक परिवर्तन के बावजूद भारतीय सभ्यता सदैव जीवंत बनी रही है। उदाहरणों, लोक परंपराओं और कम ज्ञात तथ्यों से समृद्ध, ‘अविश्वसनीय भारत’ भारतीय राज्यों, भाषाओं, त्यौहारों, वनस्पतियों और जीवों, ऐतिहासिक स्मारकों और आध्यात्मिक स्थलों की विविधता को खूबसूरती से समेटता है। यह पुस्तक एक व्यापक संदर्भ ग्रंथ और एक रोमांचक यात्रा वृत्तांत का संयोजन है, जो यह दर्शाता है कि भारत ने सदियों से स्वयं को कैसे पुनः परिभाषित किया है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)
AYODHYA KA ITIHAS (Rai Bahadur Lala Sitaram)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)AYODHYA KA ITIHAS (Rai Bahadur Lala Sitaram)
लाला सीताराम ने 1932 में अयोध्या का इतिहास लिखा था। इनके पूर्वज राम के अनन्य भक्त थे। इसलिए जौनपुर छोड़ अयोध्या नगरी में बस गए थे। लाला सीताराम ने अयोध्या में अपने घर के एक कमरे में रामायण मंदिर भी बना रखा था। यहाँ रहते हुए उन्होंने ‘अयोध्या का इतिहास’ लिखना प्रारंभ किया। वेद से लेकर पुराणों में अयोध्या का उल्लेख तो मिलता है लेकिन अयोध्या के इतिहास पर कोई समग्र दृष्टि डालती पुस्तक का अभाव लगातार उन्हें यह इतिहास लिखने के लिए प्रेरित करता रहा। लाला सीताराम ने गहन शोध कर वेद काल से लेकर ब्रिटिश काल के अयोध्या पर प्रकाश डाला है। अयोध्या न सिर्फ हिंदुओं का एक पवित्रतम तीर्थ है वरन् जैन, बौद्ध और सिख के लिए भी उतना ही पावन और श्रद्धा का केंद्र है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Azad Bharat
“वर्तमान परिस्थिति के आकलन में एक और मुद्दा उभरकर आया, जिसमें मेरे और गांधीजी के विचारों में मतभेद हो गया। गांधीजी अब ज्यादा-से-ज्यादा विश्वास करने लग गए थे कि मित्र देशों का जीतना कठिन है। उन्हें भय था कि इस युद्ध में कहीं जर्मनी और जापान न जीत जाएँ और यदि जीत न भी पाएँ तो स्थिति में गतिरोध न पैदा हो जाए।
मैंने यह भी नोट किया कि सुभाष चंद्र बोस के देश से पलायन का उन पर बहुत प्रभाव पड़ा है। पहले उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के अनेक कार्यों पर अपनी असहमति दर्ज की थी, लेकिन अब मैं यह देख रहा था कि उनका रुख बदल रहा है।
अंततः भारत आजाद हुआ, किंतु एकता को अक्षुण्ण नहीं रख पाया। एक नया देश पाकिस्तान बना, जिसका निर्माण मुसलिम लीग ने किया था। लिहाजा स्वाभाविक रूप से वही सत्ता में आई। मैं पहले भी कह चुका हूँ कि मुसलिम लीग की पैदाइश केवल कांग्रेस के विरोध से ही हुई थी। इसलिए उसे न तो राजनीतिक समझ थी और न ही उसके नेताओं ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया था, जो उन्हें राजनीतिक रूप से राज-काज सँभालने का ज्ञान देता। पाकिस्तान के नेताओं में राजनीतिक अनुभव शून्य था।
– इसी पुस्तक से
स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक मौलाना अबुल कलाम आजाद की आत्मकथा, जिसमें उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और भारत-विभाजन के विषय में विस्तार से और बेबाकी से लिखा है।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Azad Hind Fauj Ka Lapata KhaZana
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Azad Hind Fauj Ka Lapata KhaZana
“अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को अंग्रेजों से मुक्त कराने के बाद आजाद हिंद फौज ने पोर्ट ब्लेयर में आजाद हिंद बैंक स्थापित करने की योजना बनाई। हालाँकि शाखा खोलने के लिए भेजा गया खजाना रहस्यमय तरीके से खो जाता है।
एक ब्रिटिश पुलिस अधिकारी निकोबार के एक निषिद्ध द्वीप पर एक रहस्यमय हथियार हासिल करने के लिए एक खतरनाक मिशन पर है, जो उन्हें द्वितीय विश्वयुद्ध जीतने में मदद कर सकता है। इस तरल को खोजने का सुराग एक कविता में छिपा है। खजाना और हथियार हासिल करने के लिए भेजे गए कई ब्रिटिश और जापानी खोजी दल इस निषिद्ध द्वीप पर गायब हो जाते हैं।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अपने पिता के रहस्यमय ढंग से लापता होने के पीछे की सच्चाई को जानने के लिए एक बेटे की यात्रा उसे मणिपुर में उसके पैतृक गाँव तक ले जाती है। अपठित पत्रों का एक संग्रह उसे अतीत में ले जाता है।
क्या बेटा अपने खोए हुए पिता को ढूँढ़ पाएगा?
आजाद हिंद बैंक का खजाना कैसे और कहाँ गायब हो गया? निकोबार के निषिद्ध द्वीप पर लोग क्यों गायब होते रहते हैं?
ऐसे रहस्यमय प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए पढ़िए यह रोमांचक उपन्यास।
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Hindi Books, Rajpal and Sons, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Azadi Ka Matlab Kya
आज़ादी क्या है? मुक्ति क्या, क्यों, किस-किस से और कैसे! प्रो. लालबहादुर वर्मा ने अपनी इस अनंतिम किताब में अपनी अध्ययन और अध्ययन सम्पन्न दृष्टि से इन सवालों की दार्शनिक और समयानुकूल पड़ताल की है। सिर्फ़ राजनीतिक आज़ादी से आगे मनुष्य के रोज़-ब-रोज़ के निजी जीवन में मुक्ति के सवालों की संघर्ष-गाथा गरीबी और भूख से मुक्ति के आगे भय और मृत्यु तक से मुक्ति के सवालों तक जाती है और एक सच्चे सुख की तलाश की राह दिखाती है।इतिहास के शिक्षक और आजीवन सामाजिक कार्यकर्ता। 10 जनवरी 1938 को गोरखपुर में जन्म। इतिहास की उच्च शिक्षा, फ्रांस में प्रतिष्ठित इतिहासकार रेमो आरों के साथ शोधकार्य। गोरखपुर, इलाहाबाद, और इम्फाल में अध्ययन। सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों में आजीवन सक्रियता। संपादक रहे, विपुल लेखन किया, अनुवाद किए, रंगमंच पर सक्रिय रहे, अद्भुत वक्ता और जन-इतिहासकार। यूरोप का इतिहास, विश्व इतिहास की झलक, इतिहास: क्यों-क्या-कैसे, अधूरी क्रांतियों का इतिहास बोध, क्रांतियाँ तो होंगी ही, इतिहास के बारे में, कांग्रेस के सौ साल, अपने को गंभीरता से लें, भारत की जनकथा, मानव मुक्तिकथा सहित अनेक किताबें। 19 मई 2021 को कोविड से निधन।
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Azadi Ke Baad Ka Sangharsh
आजादी की लड़ाई से भी ज्यादा आजाद भारत के राजनीतिक परिदृश्य में कृपलानीजी का खास स्थान है। कृपलानी ने जोर-शोर से अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों का निर्वाह किया। कृपलानी कभी चुप न रहे; और गांधी के नजरिए से सही क्या है—इस हिसाब से वह काम करते रहे। काफी फैसले उनके शोर मचाने से या ठीक मौके पर टोक देने भर से भी बदले। यह पुस्तक विशेष महत्व की है, क्योंकि हमारे पास आजादी के बाद की बड़ी घटनाओं पर पुस्तक के नाम पर अखबारी कतरनों के संग्रह के अलावा कुछ नहीं पढ़ने को मिलता।
छत्तीस लेखों के माध्यम से आचार्यजी हमें आजाद भारत की शीर्ष की राजनीति के दाँव-पेंच (और कई बार की दुरभिसंधियों) के साथ शीर्ष के लोगों के आचरण को बताते हैं, चुनावी गड़बड़ और भ्रष्टाचार के गठजोड़ के किस्से बताते हैं, खुद इनके भुक्तभोगी होने का प्रसंग ले आते हैं। चीनी आक्रमण, गोवा की मु€त का आंदोलन, चीन द्वारा तिब्बत हड़पने की कहानी, भूदान के तूफान, राज्यों के भाषायी आधार पर पुनर्गठन का प्रसंग, पुलिस और शासन की ज्यादतियों के बड़े प्रसंग, पंचवर्षीय योजनाओं की समीक्षा, विदेश नीति की समीक्षा समेत काफी सारे विषयों पर उनकी अंतर्दृष्टि है। ये जरूरी और स्तरीय जानकारियाँ तथा जबरदस्त ईमानदारी का विश्लेषण उन सबको जरूर पढ़ना चाहिए, जिन्हें आजाद भारत के पहले तीन दशकों के शासन, नीतियों, फैसलों, घटनाओं और राजनीति के बारे में स्तरीय जानकारी पाने की भूख है।
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