रामायण/रामकथा
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा
1000 Ramayana Prashnottari
क्या आप जानते हैं, ‘वह कौन वीर था, जिसने रावण को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया था और उसके (रावण के) पितामह के निवेदन पर उसे मुक्त किया था’, ‘लक्ष्मण, हनुमान, भरत और शत्रुघ्न को किन दो भाइयों ने युद्ध में पराजित कर दिया था’, ‘कुंभकर्ण के शयन हेतु रावण ने जो घर बनवाया था, वह कितना लंबा-चौड़ा था’, ‘राक्षसों को ‘यातुधान’ क्यों कहा जाता है’, ‘हनुमानजी का नाम ‘हनुमान’ कैसे पड़ा’, ‘लंका जाने हेतु समुद्र पर बनाए गए सेतु की लंबाई कितनी थी’ तथा ‘रामायण में कुल कितने वरदानों और शापों का वर्णन है?’ यदि नहीं, तो ‘रामायण प्रश्नोत्तरी’ पढें। आपको इसमें इन सभी और ऐसे ही रोचक, रोमांचक, जिज्ञासापूर्ण व खोजपरक 1000 प्रश्नों के उत्तर जानने को मिलेंगे। इस पुस्तक में रामायण के अनेक पात्रों, पर्वतों, नगरों, नदियों तथा राक्षसों एवं श्रीराम की सेना के बीच युद्ध में प्रयुक्त विभिन्न शस्त्रास्त्रों एवं दिव्यास्त्रों के नाम, उनके प्रयोग और परिणामों की रोमांचक जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त लगभग डेढ़ सौ विभिन्न पात्रों के माता, पिता, पत्नी, पुत्र-पुत्री, पितामह, पौत्र, नाना, मामा आदि संबंधों का खोजपरक विवरण भी। इसमें संगृहीत प्रश्न रामायण के विस्तृत पटल से चुनकर बनाए गए हैं। यह पुस्तक आम पाठकों के लिए तो महत्त्वपूर्ण है ही, लेखकों, सपादकों, पत्रकारों, वक्ताओं, शोधार्थियों, शिक्षकों व विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। यथार्थतः यह रामायण का संदर्भ कोश है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा
1000 Ramayana Prashnottari (PB)
क्या आप जानते हैं, ‘वह कौन वीर था, जिसने रावण को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया था और उसके (रावण के) पितामह के निवेदन पर उसे मुक्त किया था’, ‘लक्ष्मण, हनुमान, भरत और शत्रुघ्न को किन दो भाइयों ने युद्ध में पराजित कर दिया था’, ‘कुंभकर्ण के शयन हेतु रावण ने जो घर बनवाया था, वह कितना लंबा-चौड़ा था’, ‘राक्षसों को ‘यातुधान’ क्यों कहा जाता है’, ‘हनुमानजी का नाम ‘हनुमान’ कैसे पड़ा’, ‘लंका जाने हेतु समुद्र पर बनाए गए सेतु की लंबाई कितनी थी’ तथा ‘रामायण में कुल कितने वरदानों और शापों का वर्णन है?’ यदि नहीं, तो ‘रामायण प्रश्नोत्तरी’ पढें। आपको इसमें इन सभी और ऐसे ही रोचक, रोमांचक, जिज्ञासापूर्ण व खोजपरक 1000 प्रश्नों के उत्तर जानने को मिलेंगे। इस पुस्तक में रामायण के अनेक पात्रों, पर्वतों, नगरों, नदियों तथा राक्षसों एवं श्रीराम की सेना के बीच युद्ध में प्रयुक्त विभिन्न शस्त्रास्त्रों एवं दिव्यास्त्रों के नाम, उनके प्रयोग और परिणामों की रोमांचक जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त लगभग डेढ़ सौ विभिन्न पात्रों के माता, पिता, पत्नी, पुत्र-पुत्री, पितामह, पौत्र, नाना, मामा आदि संबंधों का खोजपरक विवरण भी। इसमें संगृहीत प्रश्न रामायण के विस्तृत पटल से चुनकर बनाए गए हैं। यह पुस्तक आम पाठकों के लिए तो महत्त्वपूर्ण है ही, लेखकों, सपादकों, पत्रकारों, वक्ताओं, शोधार्थियों, शिक्षकों व विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। यथार्थतः यह रामायण का संदर्भ कोश है।
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Hindi Books, Suggested Books, Vani Prakashan, रामायण/रामकथा
Abhyuday Set Of 2 (Hindi, Narendra Kohali)
-15%
Hindi Books, Suggested Books, Vani Prakashan, रामायण/रामकथाAbhyuday Set Of 2 (Hindi, Narendra Kohali)
अभ्युदय – 1
‘अभ्युदय’ रामकथा पर आधृत हिन्दी का पहला और महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। ‘दीक्षा’, ‘अवसर’, ‘संघर्ष की ओर’ तथा ‘युद्ध’ के अनेक सजिल्द, अजिल्द तथा पॉकेटबुक संस्करण प्रकाशित होकर अपनी महत्ता एवं लोकप्रियता प्रमाणित कर चुके हैं। महत्वपूर्ण पत्र पत्रिकाओं में इसका धारावाहिक प्रकाशन हुआ है। उड़िया, कन्नड़, मलयालम, नेपाली, मराठी तथा अंग्रेज़ी में इसके विभिन्न खण्डों के अनुवाद प्रकाशित होकर प्रशंसा पा चुके हैं। इसके विभिन्न प्रसंगों के नाट्य रूपान्तर मंच पर अपनी क्षमता प्रदर्शित कर चुके हैं तथा परम्परागत रामलीला मण्डलियाँ इसकी ओर आकृष्ट हो रही हैं। यह प्राचीनता तथा नवीनता का अद्भुत संगम है। इसे पढ़कर आप अनुभव करेंगे कि आप पहली बार एक ऐसी रामकथा पढ़ रहे हैं, जो सामयिक, लौकिक, तर्कसंगत तथा प्रासंगिक है। यह किसी अपरिचित और अद्भुत देश तथा काल की कथा नहीं है। यह इसी लोक और काल की, आपके जीवन से सम्बन्धित समस्याओं पर केन्द्रित एक ऐसी कथा है, जो सार्वकालिक और शाश्वत है और प्रत्येक युग के व्यक्ति का इसके साथ पूर्ण तादात्म्य होता है।
‘अभ्युदय’ प्रख्यात कथा पर आधृत अवश्य है; किन्तु यह सर्वथा मौलिक उपन्यास है, जिसमें न कुछ अलौकिक है, न अतिप्राकृतिक। यह आपके जीवन और समाज का दर्पण है। पिछले पच्चीस वर्षों में इस कृति ने भारतीय साहित्य में अपना जो स्थान बनाया है, हमें पूर्ण विश्वास है कि वह क्रमशः स्फीत होता जाएगा, और बहुत शीघ्र ही ‘अभ्युदय’ कालजयी क्लासिक के रूप में अपना वास्तविक महत्त्व तथा गौरव प्राप्त कर लेगा।अभ्युदय – 2
‘अभ्युदय’ रामकथा पर आधृत हिन्दी का पहला और महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। ‘दीक्षा’, ‘अवसर’, ‘संघर्ष की ओर’ तथा ‘युद्ध’ के अनेक सजिल्द, अजिल्द तथा पॉकेटबुक संस्करण प्रकाशित होकर अपनी महत्ता एवं लोकप्रियता प्रमाणित कर चुके हैं। महत्वपूर्ण पत्र पत्रिकाओं में इसका धारावाहिक प्रकाशन हुआ है। उड़िया, कन्नड़, मलयालम, नेपाली, मराठी तथा अंग्रेज़ी में इसके विभिन्न खण्डों के अनुवाद प्रकाशित होकर प्रशंसा पा चुके हैं। इसके विभिन्न प्रसंगों के नाट्य रूपान्तर मंच पर अपनी क्षमता प्रदर्शित कर चुके हैं तथा परम्परागत रामलीला मण्डलियाँ इसकी ओर आकृष्ट हो रही हैं। यह प्राचीनता तथा नवीनता का अद्भुत संगम है। इसे पढ़कर आप अनुभव करेंगे कि आप पहली बार एक ऐसी रामकथा पढ़ रहे हैं, जो सामयिक, लौकिक, तर्कसंगत तथा प्रासंगिक है। यह किसी अपरिचित और अद्भुत देश तथा काल की कथा नहीं है। यह इसी लोक और काल की, आपके जीवन से सम्बन्धित समस्याओं पर केन्द्रित एक ऐसी कथा है, जो सार्वकालिक और शाश्वत है और प्रत्येक युग के व्यक्ति का इसके साथ पूर्ण तादात्म्य होता है।
‘अभ्युदय’ प्रख्यात कथा पर आधृत अवश्य है; किन्तु यह सर्वथा मौलिक उपन्यास है, जिसमें न कुछ अलौकिक है, न अतिप्राकृतिक। यह आपके जीवन और समाज का दर्पण है। पिछले पच्चीस वर्षों में इस कृति ने भारतीय साहित्य में अपना जो स्थान बनाया है, हमें पूर्ण विश्वास है कि वह क्रमशः स्फीत होता जाएगा, और बहुत शीघ्र ही ‘अभ्युदय’ कालजयी क्लासिक के रूप में अपना वास्तविक महत्त्व तथा गौरव प्राप्त कर लेगा।
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Bhuvan Vani Trust, Hindi Books, इतिहास, रामायण/रामकथा
Adbhuta Ramayana -Maharishi Valmik
नमोऽस्तु रामाय भवोद्भवाय कालाय सर्वेकहाय तुभ्यम् । नमोऽस्तु रामाय कर्पादने ते नमोऽग्नये दर्शय रूपमग्र्यम् ॥ (१५-२२)
‘रामायण’ ‘सीता के महान चरित्र की अवतारणा” के रूप में भारतीय संस्कृति के लिए दिव्य आकाशदीप के समान एक ज्वलन्त सत्य है। परन्तु इसके साथ राम का परब्रह्म परमात्मा के रूप में निरूपण और मर्यादापुरुषोत्तम के रूप में चरित्न-वर्णन अर्थात् ‘रामायण’ – इस ख्याति
को अधिक दृढ़ करने का श्रेय भी सीताजी के चरित्र को मिलता है । ‘अद्भुत रामायण’ वास्तव में राम-सीता में अभेद बताने के लिए निर्मित हुआ है । इस विश्वसृष्टि में सब कुछ राम ही राम है, सब परब्रह्म परमात्मा है, ऐसा ज्ञानीजनों का अनुभव सामान्य मनुष्य के मन का समाधान नहीं कर सकता । उनका समाधान तो भगवान की लीला-कथा से ही संभव है । जीव-मात्र पर कृपा करने के लिए उनका लीलावतार होता है। राम और सीता ऐसे दो रूप धारण करके परमात्मा ने राक्षसों का संहार किया ।
इस कथा में सीताजी ‘सहस्रमुख रावण’ का वध करती हैं, राम इस कार्य में असमर्थ बताये गये हैं। ‘श्रीसीता-माहात्म्य’ शीर्षक लेख में इस विषय की चर्चा की गई है। परन्तु राम की महिमा इससे कम नहीं होती । पुरुष और प्रकृति, निर्गुण-निराकार, अकर्ता-अभोक्ता ब्रह्म और सृष्टि-स्थिति-संहार की शक्ति अभिन्न हैं। जब दो भिन्न रूपों में इनका अवतार होता है, तब दोनों अपना विशिष्ट स्वरूप-परिचय देते हैं।SKU: n/a -
Gita Press, रामायण/रामकथा
Adhyatma Ramayan (Code-74)
यह परम पवित्र गाथा भगवान् शंकर द्वारा आदिशक्ति जगदम्बा पार्वतीजी को सुनायी गयी थी। यह कथा ब्रम्हाण्डपुराण के उत्तरखण्ड में आयी है, अतः इसके रचयिता भी महामुनी व्यास हैं। इसमें परम रसायन रामचरित्र का वर्णन और प्रसंगानुसार भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, उपासना, सदाचार सम्बन्धी उपदेश एवं अध्यात्मतत्व के विवेचन की प्रधानता है। सरल भाषानुवाद में मूल के साथ सचित्र, सजिल्द।
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Chaukhamba Prakashan, English Books, रामायण/रामकथा
Adhyatma Ramayana Of Vedavyasa Set Of 2 Vols.
-10%
Chaukhamba Prakashan, English Books, रामायण/रामकथाAdhyatma Ramayana Of Vedavyasa Set Of 2 Vols.
Adhyatma Ramayan is a magnificently rendered, eternally divine classical epic story of Lord Ram, a manifestation of the transcendental Supreme Being, as the king emperor of Ayodhya. Being incorporated in the Brahmand Puran’s Uttar Khand, it is the most ancient, authentic and authoritative version on Lord ram’s eternal and sublime story. Flowing from the prolific, expert and flourishing hand of the legendary sage Veda Vyas, the prodigious classifier of the Vedas and the Captivating narrator of the ancient Purans, this enchanting version of Ramayan is masterpiece of classical literature narrated in a style befitting the exalted stature of its author veda Vyas. The holy book is completely soaked and infused, bristling and brimming over as it is, over as it is, with the eclectic virtues of devotion and faith, morality and ethics, righteousness and virtuousness. The epic stands out from all other myriad versions of Ramayan in its high spiritual and metaphysical quotient, as it incorporates in its text, as its integral fabric, the profoundest of tenets and doctrines enshrined in and expounded by the Vedas and the Upanishads. This volume describes the text in great detail, incorporating commentary explanatory & relevant notes when required. An elaborate life sketch of sage Vedavyasa incorporating numerous little known facts about him, have been included to give a special unique flavour to this book. besides this, important metaphysical concepts appearing in the text have been explained in a separate appendix.SKU: n/a -
Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, Suggested Books, रामायण/रामकथा
Ananda Ramayanam (आनन्द रामायण) by Ramtej Pandey
-14%
Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, Suggested Books, रामायण/रामकथाAnanda Ramayanam (आनन्द रामायण) by Ramtej Pandey
आनन्दरामायण (Ananda Ramayanam) रामतेज पांडेय द्वारा रचित एक विशेष ग्रंथ है, जो हिंदू धर्म और भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह ग्रंथ रामायण की एक विशिष्ट और अद्वितीय प्रस्तुति है।
पुस्तक की विशेषताएँ:
रामायण की प्रस्तुति: इस ग्रंथ में रामायण की कहानी को विशेष रूप से आनंद और भक्ति के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। यह पाठकों को रामायण के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है।
धार्मिक और आध्यात्मिक सामग्री: आनन्दरामायण में न केवल रामायण की कथा है, बल्कि इसमें धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षाओं का भी समावेश है जो भक्ति और साधना को प्रोत्साहित करता है।
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Hindi Books, Sasta Sahitya Mandal, रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)
APNE APNE RAM
भारतीय वाङ्मय के आधिकारिक विद्वान श्री भगवान सिंह की अनुपम कृति है अपने-अपने राम’। राम का चरित्र भारतीय साहित्य में रमा हुआ है। उनके व्यक्तित्व की यह विशेषता है कि विभिन्न भाषाओं में अब तक राम को आधार बनाकर हजारों रचनाएँ लिखी जा चुकी हैं। इसके बावजूद रचनात्मक स्रोत रचनाकारों के लिए कम नहीं हुआ है। हिंदी में तुलसीदास से लेकर निराला तक और उसके बाद के रचनाकारों ने भी राम को आधार बनाकर महत्त्वपूर्ण कृति का सृजन किया। इस कड़ी में यह महाकाव्यात्मक औपन्यासिक रचना स्वयं में महान रचना स्थापित करता है।
इस पुस्तक के प्रकाशन के साथ ही पाठकों और समीक्षकों ने इसे हाथों-हाथ लिया। प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह ने विश्व की श्रेष्ठतम कृति कहा और यह भी माना कि इसमें कोई दोष नहीं है। ‘हंस’ के संपादक राजेंद्र यादव ने इसकी समीक्षा प्रमुखता से अपनी पत्रिका में छापी। इसकी लोकप्रियता बहुतों के लिए ईष्र्या का केंद्र भी बनी। सस्ता साहित्य मण्डल के लिए यह गौरव की बात है कि सभ्यता विमर्श की अनन्य रचना ‘ अपने-अपने राम’ का प्रकाशन वह करने जा रहा है। हमें पूरा विश्वास है कि अधिक-से- ‘अधिक पाठकों के बीच यह रचना मण्डल के माध्यम से पहुँचेगी, साथ ही ‘लोग अपने स्वजनों को उपहार के रूप में यह पुस्तक भेंट करेंगे।
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Vani Prakashan, रामायण/रामकथा
Chhattisgarh ke LokJeevan Mein Ram
संत तुलसीदास के राम एक थे, दुष्टता का पर्याय रावण एक था। उस समय की रामायण बहुत सरल थी और आज की रामायण? वर्तमान की रामायण उस रामायण से कहीं ज्यादा कठिन है, यही बात कवि की इस “ इतने राम कहा से लाऊँ” में दिखाई देता है। और यह सच है कि ‘ राम कि एक अवधी निश्चित थी, अपने दिवस अनिश्चित हैं। छत्तीसगढ़ के निवासियों में राम-राम, जय राम, सीताराम का अभिवादन सुनकर स्पष्ट हो जाता है कि राम कहना हमारी जिह्वा का स्वभाव है और स्वभाव इसलिए है क्योंकि राम छत्तीसगढ़ कि आत्मा में बसे हुए हैं।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा
Chitrakoot Mein Ram-Bharat Milap
चित्रकूट में राम-भरत मिलाप’ रामकथा के महत्त्वपूर्ण प्रसंग का नाट्यरूप में प्रणयन है।
यह घटना जहाँ भ्रातृप्रेम और त्याग का अद्वितीय आदर्श है, वहीं उससे राजधर्म के महान् सिद्धांत प्रस्फुटित हुए हैं।
वर्तमान परिवेश में लेखक ने रामायण की इस घटना को सामान्य जन तक पहुँचाने का प्रयास किया है।
एक ओर इस कृति का स्वागत जहाँ भारतीय जनमानस द्वारा किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर राजशासकों द्वारा भी।
आशा है कि इस कृति का व्यापक रूप से पठन-पाठन तथा मंचन होगा।SKU: n/a -
Gita Press, Hindi Books, रामायण/रामकथा
Chitramay ShriRamCharitManas 2295
श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के द्वारा प्रणीत श्रीरामचरितमानस हिन्दी साहित्य की सर्वोत्कृष्ट रचना है। आदर्श राजधर्म, आदर्श गृहस्थ-जीवन, आदर्श पारिवारिक जीवन आदि मानव-धर्म के सर्वोत्कृष्ट आदर्शों का यह अनुपम आगार है। सर्वोच्य भक्ति, ज्ञान, त्याग, वैराग्य तथा भगवान की आदर्श मानव-लीला तथा गुण, प्रभाव को व्यक्त करनेवाला ऐसा ग्रंथरत्न संसार की किसी भाषा में मिलना असम्भव है। आशिर्वादात्माक ग्रन्थ होने के कारण सभी लोग मंत्रवत् आदर करते हैं। इसका श्रद्धापूर्वक पाठ करने से एवं इसके उपदेशों के अनुरूप आचरण करने से मानवमात्र के कल्याण के साथ भगवत्प्रेम की सहज ही प्राप्ति सम्भव है। श्रीरामचरितमानस के सभी संस्करणों में पाठ-विधि के साथ नवान्ह और मासपरायण के विश्रामस्थान, गोस्वामी जी की संक्षिप्त जीवनी, श्रीरामशलाका प्रश्नावली तथा अंत में रामायण जी की आरती दी गयी है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)
Divyangjan: Vividh Kshamtayen Ekjut Bhavishya
-10%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)Divyangjan: Vividh Kshamtayen Ekjut Bhavishya
“यह पुस्तक दिव्यांगजन को एक समावेशी और मानवीय दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करती है। पहला अध्याय बताता है कि दिव्यांगता केवल शारीरिक या मानसिक अक्षमता नहीं, बल्कि समाज द्वारा निर्मित एक अवधारणा भी है। दूसरा अध्याय सामाजिक मानसिकता की भूमिका स्पष्ट करता है, जो दिव्यांग बच्चों के अनुभवों को गहराई से प्रभावित करती है। तीसरे अध्याय में परिवार की जिम्मेदारियों और समर्थन तंत्र पर चर्चा की गई है। चौथा अध्याय समावेशी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित करता है, जबकि पाँचवाँ अध्याय दोस्ती और सामाजिक रिश्तों की अहमियत पर प्रकाश डालता है, जो दिव्यांग बच्चों को आत्मीयता और सामाजिक जुड़ाव प्रदान करते हैं।
छठा अध्याय जीवन-कौशलों जैसे निर्णय लेने, व्यावहारिक क्षमता और आत्मनिर्भरता के विकास पर जोर देता है। सातवाँ अध्याय प्रौद्योगिकी और नवाचार की परिवर्तनकारी भूमिका समझाता है। आठवाँ अध्याय शारीरिक गतिविधियों, खेल और मनोरंजन के मानसिक व शारीरिक विकास में महत्त्व को दरशाता है। नौवाँ अध्याय स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष चिकित्सा आवश्यकताओं पर केंद्रित है।
दसवाँ अध्याय सहायक समुदाय के निर्माण की आवश्यकता बताता है, जबकि ग्यारहवाँ अध्याय जागरूकता के बदलते स्वरूप पर चर्चा करता है। बारहवाँ अध्याय भविष्य की योजनाओं और नवाचारों की दिशा प्रस्तुत करता है। यह पुस्तक एक सामाजिक दस्तावेज की तरह पाठकों में संवेदनशीलता, समझ और जिम्मेदारी का भाव जगाती है।”
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Kapot Prakashan, On Sale, Suggested Books, रामायण/रामकथा
Global Footprints of Ramayan
This book debunks many misconceptions that have been introduced in the minds of billions of people by vested interests who want to weaken their faith in Shri Ram. The researched facts presented in this book will inspire the reader to read Valmiki’s Ramayan with a new vision and inspiration.
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)
Hanumat Kautuk An Recap of Sunderkand Hanuman Stuti (PB)
-15%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books), रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)Hanumat Kautuk An Recap of Sunderkand Hanuman Stuti (PB)
“श्रीमद्वाल्मीकि रामायण और श्रीरामचरितमानस को केंद्र में रखकर अध्यात्म, कंब आदिरामायण, लोक-परंपराओं, विश्वासों और इतिहास-भूगोल की अवधारणाओं को सहेजते हुए, काव्य-परंपरा, साहित्य, शब्द-संपदा और संवेगों का अनुशीलन इस पुस्तक में किया गया है। अनेक ग्रंथों में वर्णित कथाओं की एक सूत्रता, उनके परस्पर भेद और उनकी युक्ति-तर्क प्रमाण उद्धरणों के साथ द्विवेदीजी ने प्रस्तुत किए हैं।
युगों में प्रवाहित रामकथा में मानव-चेतना के विकास-क्रम से आए परिवर्तन, अलग-अलग भाषा- संस्कृतियों में आकारित होता हुआ, उसका स्वर और जीवन की चिंताओं को सहेजती, उनका उत्तर खोजती रामकथा की सर्वहितैषिणी वृत्ति के अनेक सुंदर दृश्य इस पुस्तक में बारंबार दृष्टिगत होते हैं।
यह एक रामायण पाठ जैसा तो है ही, रामायण पाठ की प्रेरणा भी है, जिसे लेखक की सफलता के रूप में देखा जाना चाहिए। संस्कृत भाषा और आर्ष प्रतिपादन शैली से दूर होते गए लोक को सहज और सामाजिक निर्वचन के माध्यम से रामकथा के तत्त्वों से परिचित कराना एक महत्त्वपूर्ण कार्य है। यह परंपरा का पाठ है।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, रामायण/रामकथा
Hanumat-Katha
“वाल्मीकि रामायण के अनुशीलन से श्रीराम तथा हनुमान की आध्यात्मिक शक्तियों के दिग्दर्शन होते हैं ।सामान्यतया इतिहास लेखन में आध्यात्मिक शक्तियों पर विचार नहीं किया जाता है, परंतु प्राचीनकाल से ही विश्व के बहुत से समुदायों में कुछ विशिष्ट मानवों में आध्यात्मिक शक्तियों की उपस्थिति के उल्लेख मिलते रहे हैं। अत: आध्यात्मिक तथा अतींद्रिय शक्तियों की अवहेलना उचित नहीं है।
इस कृति में श्रीराम तथा हनुमान आदि को ऐतिहासिक समझते हुए उनकी इन शक्तियों का भी कुछ अंश तक परिज्ञान लिया गया है प्रस्तुत उपन्यास मुख्य रूप से वाल्मीकि रामायण तथा सद्गुरुओं के विचारों के आधार पर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से लिखा गया है| अस्तु, यदि प्रस्तुत कृति में कुछ अच्छा है, तो वह महान् कवि वाल्मीकि का प्रसाद है और निर्विवाद प्रतीति यह है कि बिना केसरीनंदन हनुमान की कृपा के तो रामकथा अथवा उसका कोई अंश लिखा ही नहीं जासकता।
श्री हनुमान के समर्पण, भक्ति, पराक्रम, पौरुष और त्याग का दिग्दर्शन करवाता अत्यंत पठनीय उपन्यास ।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)
Hindi Sahitya Ke Vivad-Samvad
-10%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)Hindi Sahitya Ke Vivad-Samvad
“इस पुस्तक में उन महत्त्वपूर्ण विवादों पर चर्चा की गई है, जिन्हें हिंदी साहित्य की विकास यात्रा में स्मरणीय माना गया और जिनका ऐतिहासिक महत्त्व है। साथ ही जिन्होंने एक स्वस्थ बहस को जन्म दिया और व्यापक स्तर पर हिंदी भाषा के विद्वानों और साहित्यिक जगत् को प्रभावित किया।
इस पुस्तक में दो खंड हैं। पुस्तक का पहला खंड समय-समय पर हिंदी साहित्य के इतिहास में उठे उन ऐतिहासिक विवादों पर केंद्रित है, जिन्होंने बहस के लिए अपने समय के साहित्य के महारथियों को आंदोलित किया।
दूसरा खंड भाषा और व्याकरण संबंधी विवादों और संवादों पर केंद्रित है। इन विवादों ने भाषा संस्कार के प्रति पाठकों में अतिरिक्त सजगता पैदा की। हिंदी साहित्य के इतिहास में दर्ज ये विवाद इस बात के प्रमाण हैं कि हमारे वैयाकरणों और भाषाशास्त्रियों ने एक-एक शब्द के लिए, व्याकरण के नियमों के लिए कैसी-कैसी उखाड़-पछाड़ की।
विवादों के बावजूद साहित्यकारों के आपसी संबंधों में एक-दूसरे की चिंता करने का मानवीय भाव किस तरह बचा रहता था, यह सब जानना-समझना साहित्यिक अभिरुचि के पाठकों को निश्चय ही रुचिकर लगेगा।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)
Janki Van Gaman (PB)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा, सही आख्यान (True narrative)Janki Van Gaman (PB)
जिस वर्ष हजारों भारतीयों का सपना पूर्ण होने जा रहा था, भारत के हृदय रामलला अपनी जन्मभूमि पर विराजने वाले थे, उस वर्ष राम को समझने की एक अनूठी ललक हृदय में उठी। राम को समझने के लिए जानकी को जाने बिना कोई और मार्ग नहीं है, यह सोचकर जानकीजी से आशीर्वाद लेकर राम जानकी वनगमन पथ की पैदल यात्रा पर निकलना हुआ। उस पदयात्रा में चलते हुए लगा कि यह कठिन तपस्या साधारण स्त्री नहीं कर सकती, इसे जानकीजी ने अपना अंश देकर पूर्ण कराया। उस पवित्र जानकी के मार्ग की यात्रा से जुड़े संस्मरण इस ‘जानकी वन गमन’ पुस्तक में सँजोने का प्रयास किया है। सरयू से सागर तक की इस पदयात्रा को आप तक पहुँचाने का एक छोटा सा प्रयास इस पुस्तक में है।
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