Suggested Books
Showing 25–48 of 178 results
-
Hindi Books, Hindi Sahitya Sadan, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Bharatvarsh Ka Brihad Itihas (A Set of Two Books)
-10%
Hindi Books, Hindi Sahitya Sadan, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृतिBharatvarsh Ka Brihad Itihas (A Set of Two Books)
पुस्तक का नाम – भारतवर्ष का बृहद इतिहास
लेखक – पंडित भगवद्दत्त जी
भारतीयों का एक प्राचीन ,गौरवशाली इतिहास रहा है | इस इतिहास का संकलन प्राचीन शास्त्रों ,शिलालेखो , सिक्को , विदेशी यात्रियों के वृतान्तो पर है | इनके दुरपयोग और दुर्विश्लेष्ण से अनेको इतिहासकारो ने भारतीय इतिहास ,भारतीय ऋषियों ,महापुरुषो पर मिथ्यारोप किये और काल गणना को अशुद्ध निकाला | भारत का इतिहास अर्वाचीन सिद्ध करने की कोशिस की |
पंडित भगवद्दत्त जी ने अथक प्रयास और अनेको स्थानों के भ्रमण ,अनेको पांडुलिपियों के अध्ययन से भारतवर्ष का बृहद इतिहास नाम पुस्तक लिखी इसके प्रथम भाग में –
प्रथम अध्याय में – इतिहास आदि उन्नीस शब्दों का यथार्थ अर्थ प्रदर्शित किया है | जिससे ज्ञात होगा कि भारत में प्राचीन काल से इतिहास का सम्मान था |
द्वितीय अध्याय में – ब्रह्मा ,नारद ,उशना आदि के काव्यो द्वारा भारत में इतिहास का असाधारण आदर दिखाया है | प्राचीन काल में इतिहास ग्रंथो की विपुलता का परिचय इस अध्याय में मिलेगा | पाश्चात्य लोगो ने तिथि निर्धारण में जो मनमानी कल्पनाये की है उनका आभास भी यहा मिलेगा |
तृतीय अध्याय में – इतिहास के विकृति के कारण पर प्रकाश डाला है |
चतुर्थ अध्याय में – भारतीय इतिहास के स्त्रोत निर्देशित है |
पंचम अध्याय में – प्राचीन वंशावलियो की सत्यता प्रमाणिक की गयी है |
षष्ठ अध्याय में – दीर्घजीवी पुरुष कौन थे ? मानव ऋषि देव आयु का रहस्य खोला गया है |
सप्तम अध्याय में – पुरातन काल मान का संक्षिप्त वर्णन है | सतयुग ,द्वापर,त्रेता कलियुग आदि युगों की शंकाओं का समाधान है |
अष्टम अध्याय में – ब्राह्मण ग्रन्थ और इतिहास का मतैक्य प्रदर्शित किया है |
नवम अध्याय में – वैदिक ग्रंथो एवं महाभारत के रचनाक्रम का स्पष्टीकरण है |
दशम अध्याय में – भारतीय इतिहास को संसार इतिहास की तालिका सिद्ध किया है | कालडिया ,मिश्र ,ईरान ,आदि देशो ने भारत से क्या क्या सीखा यह सब बताया है |
एकादश अध्याय में – भारतीय इतिहास की तिथि गणना के मूलाधार स्तम्भों का उलेख है | विंटर्निटज , जवाहरलाल नेहरु , बट श्रीकृष्ण घोष आदि की कल्पनाओं को अपास्त किया है |
द्वादश अध्याय में –“मिथ “ शब्द पर विचार किया है | पाश्चात्य इतिहासकार द्वारा मिथ बताये जाने वाले इतिहास की वास्तविकता दिखलाई है |
द्वितीय भाग में –
प्रथम अध्याय में – जलपल्लवन की घटना का उलेख किया है |
द्वितीय अध्याय में – पार्थिव उत्पति का क्रम दर्शाया है |
तृतीय अध्याय में – उद्भिज सृष्टि का प्रदुर्भाव बताया है |
चतुर्थ अध्याय में – स्वाम्भुव मन्वन्तर , ब्रह्मा आदि और सतयुग पर प्रकाश डाला है |
पंचम अध्याय में – आदियुग ,स्वाम्भुव मनु उनका राजपाठ ,मनुस्मृति आदि विषयों पर लिखा है |
षष्टम अध्याय में – पितृयुग ,मानुष नामकरण , सप्त ऋषियों की उत्पति को बताया है |
सप्तम अध्याय में – जम्बूदीप का वर्षविभाग ,भारतवर्ष ,भारत की प्रजा ,भारत का विस्तार दर्शाया है |
अष्टम अध्याय में – चाक्षुष मन्वन्तर और वेन पुत्र राजा पृथु का इतिहास बताया है |
नवम अध्याय में – सतयुग के अंत में असुरो का प्रभाव ,देवयुग ,बारह आदित्यो का परिचय .आदि विषय पर लेखन किया है |
दशम अध्याय में – दक्ष प्रजापति का जीवन वृंत लिखा है |
एकादश अध्याय में –मनु की सन्तान और भारतीय राजवंशो का विस्तार बताया है |
द्वादश अध्याय में – ऐल वंश का परिचय ,विस्तार दिया है |
त्र्योदश अध्याय में – इक्ष्वाकु से ककुत्स्थ तक वंश परिचय है |
चतुर्दश अध्याय में- ऐल पुरुरवा से पुरु तक के वंश का इतिहास है |
पंचदश अध्याय में – बृहस्पति और उशना के काव्यो का परिचय और उनमे इतिहास सामग्री का उलेख दिखाया है |
षोडश अध्याय में – कोसल जनपद अंतर्गत अनेना से मान्धाता तक वंशो का राजकाल बताया है |
सप्तदश अध्याय में –जनमजेय से मतिनार पर्यन्त तक राजाओं की वंशावली तथा ऐतिहासिकता को बताया है |
अष्टादश अध्याय में- चक्रवती शशबिंदु ,मरुत का वर्णन किया है |
एकोनविंश अध्याय में – आनवकुल ,पुरातन पंजाब का स्वरूप बताया है |
विशतित अध्याय में – ऋग्वेद सम्बन्धित लेख
एकविशतितं अध्याय में – मतिनारपुत्र तंसु से अजमीढ पर्यन्त ,चक्रवती भरत , चक्रवती सुहोत्र का इतिहास है |
द्वाविश अध्याय में – पुरुकुत्स से हरिश्चंद पर्यन्त इतिहास है |
त्रयोविश अध्याय में – यादव वंशज हैहय अर्जुन के बारे में है |
चतुर्विश अध्याय में – रोहित से श्री रामचन्द्र पर्यन्त इतिहास है | त्रेता द्वापर संधि का क्रम और इतिहास दर्शाया है |
पंचविशति अध्याय में – त्रेता के अंत की घटनाओं का उलेख है वाल्मीक आदि मुनियों का जीवनवृंत ,रचनाओं का उलेख किया है |
षडविशति अध्याय में – अजमीढ पुत्र ऋक्ष से कुरुपर्यन्त इतिहास है |
सप्तविशति अध्याय में – रामपुत्र कुश से भारतयुद्ध पर्यन्त इतिहास है |
अष्टाविशति अध्याय में – कुरु से भारतयुद्ध पर्यन्त वृतातं और कुरुसालव युद्ध का दर्शन कराया है |
ऊनत्रिशत अध्याय में – भारतयुद्ध से लगभग सौ वर्ष पूर्व आर्यदेश की स्थिति का उलेख है |
त्रिशत अध्याय में – विचित्रवीर्य से भारत युद्ध पर्यन्त इतिहास का लेखा जोखा है |
एकत्रिशत अध्याय में – भारतयुद्ध कालीन भारत देश, उदीच्य देश , मध्यदेश , प्राच्य जनपद , विन्ध्य जनपद ,दक्षिण जनपद आदि जनपदों का विस्तार की जानकारी दी हुई है |
द्वात्रिशत अध्याय में – भारत युद्ध का काल लगभग ३००० विक्रम पूर्व सिद्ध किया है |
त्रियस्त्रियशत अध्याय में – भारतयुध्द के आसपास लिखे वांगमयो का परिचय है |
चतुस्त्रिशत अध्याय में – भारतयुद्ध के पश्चात से आर्षकाल तक के अंत तक का ऐतिहासिक वृत्तांत लिखा है |
पंचत्रिशत अध्याय में – युद्धिष्टर के राजपाठ का उलेख है |
षटत्रिशत अध्याय में – चौबीस इक्ष्वाकु राजाओ का वर्णन है |
सप्तत्रिशत अध्याय में – दीर्घ सत्र से गौतम बुद्ध पर्यन्त इतिहास है |
अष्टात्रिशत अध्याय में – गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी आदि के काल और जीवनी का उलेख है |
नवत्रिशत अध्याय में – अवन्ति के राजवंश का उलेख किया है |
चत्वारिशत अध्याय में – वत्सराज उदयन के राजवंश का वर्णन है |
एकचत्वारिशत अध्याय में – बुद्ध से नन्दवंश तक का इतिहास है |
द्विचत्वारिशत अध्याय में –तत्कालीन अन्य राजवंशो का परिचय दिया है |
त्रिचत्वारिशत अध्याय में – नन्द राज्य का दिग्दर्शन कराया है |
चुतुश्चत्वारिशत अध्याय में –मौर्य वंश के उद्गम और राज्य का उलेख किया है |
पंचचत्वारिशत अध्याय में – शुंग राज्य वंश का उलेख है |
षटचत्वारिशत अध्याय में –यवन राज्य आक्रमण आदि समस्याओ का वर्णन है |
सप्तचत्वारिशत अध्याय में – काण्व साम्राज्य का वर्णन किया है |
अष्टचत्वारिशत अध्याय में – आंध्र साम्राज्य और उनके राजाओं का उलेख किया है |
नवचत्वारिशत अध्याय में – विक्रामादित्य प्रथम का राजवंश बताया है |
पंचाशत अध्याय में – आन्ध्रपुरीन्द्रसेन के साम्राज्य का वर्णन है |
एकपंचाशत अध्याय में – अभी तक वर्णित राज्यवंशो का कुल काल निर्धारण किया गया है |
द्विपंचाशत अध्याय में – अभीर , शक , यवन ,तुषार आदि जातियों का इतिहास लिखा है |
त्रिपंचाशत अध्याय में – गुप्त काल का काल निर्धारित किया है |
चतु पंचाशत अध्याय में – गुप्त राजकाल की अवधि बताई है |
पंचपञ्चाशत अध्याय में – गुप्त साम्राज्य का विस्तार ,वंशावली का वर्णन है |
प्रस्तुत पुस्तक इतिहास के शोधार्थियों और इतिहास विशेषज्ञों को नई दिशा प्रदान करेगी |
SKU: n/a -
Govindram Hasanand Prakashan, Hindi Books, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Bharatvarsh Ka Itihas
-5%
Govindram Hasanand Prakashan, Hindi Books, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृतिBharatvarsh Ka Itihas
भारत की सर्वप्रथम सभ्यता तो वैदिक सभ्यता ही थी, जिससे भारतवर्ष का इतिहास प्रारम्भ होता है। भारतीय इतिहास के प्रथम स्रोत भी वैदिक ग्रन्थ ही हैं, जैसे वेदों की वे शाखाएँ जिनमें ब्राह्मण-पाठ सम्मिलित हैं, ब्राह्मण ग्रन्थ, कल्प सूत्र, आरण्यक और उपनिषद् ग्रन्थ!
भारत युद्ध-काल के सहस्रों वर्ष पूर्व की अनेक ऐतिहासिक घटनाएँ वर्णित हैं। भारतीय वाङ्मय में स्थान-स्थान पर इतिहास की घटनाओं का वर्णन भरा पड़ा है, लेखक ने उन घटनाओं को क्रमबद्ध करने का संक्षिप्त प्रयास किया है। भारतीय इतिहास को बहुत विकृत कर दिया गया है। सत्य को असत्य प्रदर्शित किया जाता है और असत्य को सत्य बनाने का यत्न किया गया।
इसके भयंकर दुष्परिणाम हुए-भारतीय अपना भूत ही भूल गए वे इन मिथ्या कल्पनाओं को ही सत्य समझने लगे। लेखक ने अपने अध्ययन काल में ही निश्चय कर लिया था कि वह अपना सारा जीवन भारतीय संस्कृति और इतिहास के पाठ तथा स्पष्टीकरण में लगाएंगे। आशा है इतिहास के लेखक और पाठक उनके इस परिश्रम से लाभान्वित होंगे।SKU: n/a -
Hindi Books, Hindi Sahitya Sadan, Suggested Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Bharatvarsh Ka Sanshipt Itihaas
Hindi Books, Hindi Sahitya Sadan, Suggested Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Bharatvarsh Ka Sanshipt Itihaas
भारतवर्ष का संक्षिप्त इतिहास
रथम उपन्यास ‘‘स्वाधीनता के पथ पर’ से ही ख्याति की सीढ़ियों पर जो चढ़ने लगे कि फिर रुके नहीं। विज्ञान की पृष्ठभूमि पर वेद, उपनिषद् दर्शन इत्यादि शास्त्रों का अध्ययन आरम्भ किया तो उनको ज्ञान का अथाह सागर देख उसी में रम गये। वेद, उपनिषद् तथा दर्शन शास्त्रों की विवेचना एवं अध्ययन अत्यन्त सरल भाषा में प्रस्तुत कराना गुरुदत्त की ही विशेषता है।
मनीषि स्व० श्री गुरुदत्त ने इस ग्रन्थ की रचना लगभग सन् 1979-80 में की। इसकी पाण्डुलिपि को पढ़ने से तथा उनके जीवनकाल में उनसे परस्पर वार्तालाप करने से यह आभास मिलता था कि वे भारतीय स्रोतों के आधार पर भारत वर्ष का प्रामाणिक इतिहास लिखना चाहते थे। पाश्चात्य इतिहास-लेखकों की पक्षपातपूर्ण एवं संकुचित दृष्टि से लिखे गए इतिहास की सदा उन्होंने भर्त्सना की। वे बार-बार यही कहा करते थे कि ‘‘भारतवर्ष का प्रामाणिक इतिहास लिखा जाना चाहिए।’’
अन्यान्य ग्रंन्थों की रचना करते हुए उन्होंने इतिहास पर भी लेखनी चलानी आरम्भ की और मनु आरम्भ कर राम जन्म तक का ही वे यह प्रामाणिक इतिहास लिख पाए थे कि काल के कराल हाथों ने उन्हें हमसे छीन लिया।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Black Warrant (PB)
-15%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Black Warrant (PB)
रेलवे के साथ काम कर चुके उच्च विचारों वाले जिज्ञासु सुनील गुप्ता ने जब तिहाड़ में नई जिम्मेदारी सँभाली तब एक परिचित व्यक्ति उनकी मदद कर रहा था। वहाँ से जाते समय उन्हें यह एहसास हुआ कि वह बेहद शातिर अपराधी और विकृत मानसिकता वाला चार्ल्स शोभराज था, जो उस जेल का स्टार था, जहाँ धोखेबाजों की तूती बोलती थी। गुप्ता भी एक तरह से उम्र कैदी थे, जिन्होंने एक ऐसी जगह में तीन दशक से ज्यादा समय बिताया। जहाँ पिटाई करना ही रोजी-रोटी थी और अधिकार माँगनेवाले पीड़ितों की हड़ताल नाश्ते की तरह थी। यह पुस्तक कई खुलासे करती है, बताती है कि एशिया की सबसे बड़ी जेल के भीतर जीवन कैसा है ? क्या होता है जब किसी को फाँसी दे दी जाती है, मगर दो घंटे बाद भी उसकी नब्ज थमती नहीं ? क्या निर्भया के बलात्कारी राम सिंह ने खुदकुशी की थी, या उसकी हत्या की गई थी ? पहली बार हम जेल के भीतर के व्यक्ति से सनसनीखेज बातों को जानते हैं, जिसने वहाँ जो कुछ देखा उस पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। बेहद खराब फैसलों का शिकार होनेवालों से लेकर भारतीय इतिहास के कुख्यात लोगों तक, गुमनाम से लेकर सबसे अधिक सजा पानेवाले इस उपमहाद्वीप के अपराधियों तक, शोभराज से लेकर अफजल गुरु तक, दोषी और फँसाए गए लोग कैसे जिए और मरे। पुरस्कृत पत्रकार सुनेत्रा चौधरी ने सबसे गुप्त संस्थानों में से एक में बिताए गए एक असाधारण जीवन को कलमबंद किया है। भारत की न्याय और आपराधिक न्याय प्रणाली के अनजाने, सबसे दिलचस्प और सहज-सरल वर्णन के लिए “ब्लैक बॉरंट’ को पढ़ें, जो रहस्यों और आश्चर्यों से भरी पुस्तक है।
SKU: n/a -
Hindi Books, Prakashan Sansthan, Suggested Books, अन्य कथेतर साहित्य
Brahmrishi Vansh Vistar (PB)
-15%
Hindi Books, Prakashan Sansthan, Suggested Books, अन्य कथेतर साहित्यBrahmrishi Vansh Vistar (PB)
स्वामी सहजानंद सरस्वती बीसवीं सदी के एकमात्र ऐसे क्रांतिकारी राजनेता थे, जिन्होंने किसानों के संघर्ष को भारत के मुक्ति संघर्ष से जोड़ने का काम किया था। वे अखिल भारतीय किसान सभा के संस्थापक थे। उनकी किसान चेतना के निर्माण में यथार्थवादी विश्वदृष्टि और वैज्ञानिक इतिहास दृष्टि की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी, जिसे उन्होंने मार्क्सवाद के गहरे अध्ययन और किसानों के दुख-दर्द के साथ संवेदनात्मक जुड़ाव के माध्यम से अर्जित किया था। इसके साथ ही वे एक संत और भारतीय समाज, संस्कृति और परंपरा के गहरे अध्येता थे। उन्होंने किसान आंदोलन के प्रति पूर्णतः समर्पित हो जाने के पूर्व, भारत की जातिव्यवस्था और उसकी गतिशीलता का भी गहरा अध्ययन किया था। यह पुस्तक- ‘ब्रह्मर्षि वंश विस्तर’ उसी अध्ययन के क्रम में लिखी गयी कृति है। इसमें उन्होंने ब्राह्मण जाति के सभी ‘फिरकों’ (शाखाओं-उपशाखाओं) की तत्कालीन अवस्था की जानकारी देने के साथ ही अलगाव और जुड़ाव के कारणों पर भी प्रकाश डाला है। हालांकि उनका रुख आलोचनात्मक नहीं है लेकिन अध्ययन इतना विशद है कि यह पुस्तक जातिव्यवस्था का प्रतिपक्ष प्रस्तुत करने में भी सक्षम है। जातिव्यवस्था का लाभ प्रायः सामंत (और अब बदले हुए समय में नवधनाढ्य और पूंजीपति) ही उठाते रहे हैं, लेकिन यह स्वामीजी के अध्ययन और सजगता का ही परिणाम था कि अपने समय में वे किसानों को अपनी जाति के जमींदारों से अलग करने और किसान आंदोलन को नयी धार देने में सफल हुए। भारतीय समाज की आंतरिक गतिशीलता जो प्रायः जातियों के जुड़ाव और अलगाव के माध्यम से रेखांकित होती है, उसको समझने के लिए आज भी यह प्रासंगिक है। प्रकाशन संस्थान (नयी दिल्ली) से उनकी रचनावली आठ खंडों में प्रकाशित है। इनकी अप्रकाशित रचनाएं निम्न हैं।
SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, सही आख्यान (True narrative)
Chhaha Swarnim Pristha (PB)
-10%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, सही आख्यान (True narrative)Chhaha Swarnim Pristha (PB)
भारतीय वाड.मय में सावरकर साहित्य का महत्त्वपूर्ण स्थान है। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए प्राण हथेली पर रखकर जूझनेवाले महान् क्रांतिकारी; जातिभेद, अस्पृश्यता, अंधश्रद्धा जैसी सामाजिक बुराइयों को समूल नष्ट करने का आग्रह रखनेवाले स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने इस ग्रंथ में भारतीय इतिहास पर विहंगम दृष्टि डाली है। विद्वानों में सावरकर लिखित इतिहास जितना प्रामाणिक और निष्पक्ष माना गया है उतना अन्य लेखकों का नहीं। प्रस्तुत ग्रंथ ‘छह स्वर्णिम पृष्ठ’ में हिंदू राष्ट्र के इतिहास का प्रथम स्वर्णिम पृष्ठ है यवन-विजेता सम्राट् चंद्रगुप्त की राजमुद्रा से अंकित पृष्ठ, यवनांतक सम्राट् पुष्यमित्र की राजमुद्रा से अंकित पृष्ठ भारतीय इतिहास का द्वितीय स्वर्णिम पृष्ठ, सम्राट् विक्रमादित्य की राजमुद्रा से अंकित पृष्ठ इतिहास का तृतीय स्वर्णिम पृष्ठ है। हूणांतक राजा यशोधर्मा के पराक्रम से उद्दीप्त पृष्ठ इतिहास का चतुर्थ स्वर्णिम पृष्ठ, मुसलिम शासकों के साथ निरंतर चलते संघर्ष और उसमें मराठों द्वारा मुसलिम सत्ता के अंत को हिंदू इतिहास का प स्वर्णिम पृष्ठ कह सकते हैं और अंतिम स्वर्णिम पृष्ठ है अंग्रेजी सत्ता को उखाड़कर स्वातंत्र्य प्राप्त करना। विश्वास है, क्रांतिवीर सावरकर के पूर्व ग्रंथों की भाँति इस ग्रंथ का भी भरपूर स्वागत होगा। सुधी पाठक भारतीय इतिहास का सम्यक् रूप में अध्ययन कर इतिहास के अनेक अनछुए पहलुओं और घटनाओं से परिचित होंगे।.
SKU: n/a -
Akshaya Prakashan, English Books, Suggested Books, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)
Cultural Astronomy and Cosmic Order
-14%
Akshaya Prakashan, English Books, Suggested Books, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)Cultural Astronomy and Cosmic Order
This book presents an appraisal of cultural astronomy and cosmic order among sacred cities of India, illustrated with Khajuraho, Gaya, Vindhyachal, Varanasi, and Chitrakut. The book explains a fresh writ of integrity, harmony, cultural astronomical reflections, and is profusely illustrated with designs and figures of which Rana Singh is a master craftsman. – Prof. John McKim Malville, APSC, University of Colorado, Boulder, U.S.A. The book is helpful in our understanding of the visions of the cosmos underlying sacred cities of India. The book provides insights that will be useful in anthropology, archaeoastronomy, geography, and religious studies. -Padmashree’ Prof. Subhash Kak, Oklahoma State University, Stillwater, U.S.A. The author extends the study of sacred environments as embodied in geography, religious architecture, cityscapes, and ritual. This book opens valuable new areas of investigation and is destined to become a major work in the field.— Prof. Nicholas Campion, Director SCSCC, The University of Wales, Lampeter, U.K. From astronomy to mythology, Rana Singh explores the very essence of Indian worldview/ cosmology articulated in its material culture and provides further evidence defining the role of sky-watching within this ancient culture. – Prof. Stanislaw Iwaniszewski, National School of Anthropology & History, Mexico City. This ground-breaking work radically transforms our understanding of Indian ethnoastronomy and religious culture. Prof. Audrius Beinorius, Director, Centre of Oriental Studies, Vilnius University, Lithuania The book has expanded the horizon of geography interfaced with astronomy and landscape architecture, making a new path to cosmic understanding. Prof. R. B. Singh, Secretary-General IGU, University of Delhi, India. Prof. Rana P.B. Singh (b. 15-12-1950), MA, PhD, FJF & FIFSS (Japan), FAAI (Italy), FACLA (Korea), ‘Ganga- Ratna’, & ‘Koshal-Ratna’, has been Professor of Cultural Landscapes & Heritage Studies, and Head of the D
SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, सही आख्यान (True narrative)
Dadaji Ki Kahaniyon Ka Pitara
-11%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, सही आख्यान (True narrative)Dadaji Ki Kahaniyon Ka Pitara
“भारत के पसंदीदा कहानीकार की बेस्टसेलिंग श्रृंखला में नए रोमांच की शुरुआत करें।
अनुष्का, कृष्णा, मीनू और रघु, अज्जा-अज्जी के साथ उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ी इलाके मायावती की अपनी रोमांचक यात्रा में शामिल हैं। उन्हें क्या पता कि उनकी यात्रा अप्रत्याशित जादू से भर जाएगी, क्योंकि इस बार उनके प्यारे अज्जा उनके नए कहानीकार बन गए हैं। बर्फ से ढके पहाड़ों और ऊँचे देवदार के पेड़ों के बीच अज्जा राजाओं और राजकुमारियों, जलपरियों और करेले की कहानियाँ बुनते हैं और रास्ते में ज्ञान एवं करुणा का संचार करते हैं।
जैसे-जैसे बच्चे पहाड़ों का भ्रमण करते हैं, वे नए दोस्त बनाते हैं, पहाड़ी लोक-परंपराओं के बारे में सीखते हैं, लुभावने सूर्यास्तों को देखकर आश्चर्यचकित होते हैं और विभिन्न स्थलों की यात्रा करते हैं।
बेस्टसेलिंग लेखिका सुधा मूर्ति की ओर से, एक रोमांचक नए मोड़ के साथ, इमर्सिव, मनोरम और संवेदी कहानियों का एक और संग्रह प्रस्तुत है।”
SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)
Devalaya Darshan
-15%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)Devalaya Darshan
“भारत के हृदय में परंपरा और आध्यात्मिकता एक-दूसरे से सहज रूप से जुड़ी हुई हैं। कुछ सबसे आकर्षक और पूजनीय मंदिर हैं, जो हमारी आस्था व श्रद्धा का केंद्र हैं। देश के विशाल विस्तार में फैले ये मंदिर भक्ति, वास्तुशिल्प चमत्कार और भारत की गहरी जड़ें जमा चुकी सांस्कृतिक विरासत की कहानियाँ बताते हैं। प्रत्येक मंदिर के पास बताने के लिए एक कहानी है, सुलझाने के लिए एक किंवदंती है और एक आध्यात्मिक परिवेश है, जो आत्मा को मंत्रमुग्ध कर देता है। इस पुस्तक, ‘देवालय दर्शन’ में हम इन मंदिरों के पवित्र गलियारों के माध्यम से एक आकर्षक यात्रा शुरू करते हैं; उन रहस्यों, किंवदंतियों और ऐतिहासिक महत्त्व को उजागर करते हैं, जिनसे भारत की आस्था और संस्कृति की समृद्ध छवि के प्रतीक रेखांकित होते हैं।
प्राचीन परंपराओं के रहस्यों, मंदिरों की स्थापत्य कला, लाखों भक्तों को श्रद्धा एवं भक्ति के सूत्र में बाँधनेवाली अटूट आस्था से मंत्रमुग्ध होने के लिए तैयार हो जाइए। इस आध्यात्मिक यात्रा में सहयात्री बनकर इन रोचक कहानियों का आनंद लें, जो इन मंदिरों को सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत का भंडार बनाती हैं।”
SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)
DEVYANI: Ek Pauranik Katha
-10%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)DEVYANI: Ek Pauranik Katha
“शुक्राचार्य का ध्यान भंग हुआ एवं अपने समीप एक अपरिचित तरुण को देखकर प्रश्नसूचक दृष्टि से उसे देखने लगे। तत्पश्चात् कच ने कुछ कहा, जिसे देवयानी नहीं सुन सकी, परंतु वह यह देखकर चकित रह गई कि शुक्राचार्य ने कच को आलिंगनबद्ध कर लिया तथा उसका मस्तक सूँघने लगे।
‘आज से तुम इस आश्रम के सदस्य हो। मैं तुम्हें विद्या-दान अवश्य दूँगा, पुत्र कच।’ शुक्राचार्य का यह कथन देवयानी ने स्पष्टरूपेण सुना।
‘गुरुदेव, मैं यह व्रत लेकर आया हूँ कि जब तक मेरी दीक्षा पूर्ण होगी, तब तक मैं पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करूँगा।’
यह सुनकर देवयानी क्षुब्ध हो उठी। उसके हृदय में नाना प्रकार के विचार-तरंग उठने लगे। ‘स्वयं के प्रति कितना श्रेष्ठ भाव है इस युवक में!’ ‘यहाँ कौन इसका ब्रह्मचर्य खंडित करने हेतु प्रतिबद्ध होकर बैठा है?’ “”पिताश्री क्यों इस प्रकार अनुग्रह प्रदर्शित कर रहे हैं?’ ‘इस अभिमानी युवक से किसी प्रकार का संवाद रखना उचित नहीं।’
यह संकल्प लेकर देवयानी अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो गई परंतु बारंबार उसके मानस- पटल पर कच का प्रभावशाली व्यक्तित्व प्रकाशित हो जाता। अब तो कच स्वप्नों में भी दस्तक देने लगा था।
देवयानी को केंद्र में रखकर लिखा पौराणिक आख्यान, जो तत्कालीन समाज व्यवस्था, संघर्ष, साहस और संबंधों को रेखांकित करता है।”
SKU: n/a -
Hindi Books, Literature & Fiction, Rajkamal Prakashan, Suggested Books, इतिहास, उपन्यास, सही आख्यान (True narrative)
Dharmantaran Ambedkar Ki Dhamma Yatra
-16%
Hindi Books, Literature & Fiction, Rajkamal Prakashan, Suggested Books, इतिहास, उपन्यास, सही आख्यान (True narrative)Dharmantaran Ambedkar Ki Dhamma Yatra
‘धर्मान्तरण’ जाति व्यवस्था, बौद्ध धर्म के मूल्यों और लिंग के प्रश्न से सम्बन्धित मुद्दों पर एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। रतन लाल द्वारा शानदार ढंग से सम्पादित यह पुस्तक समानता और सामाजिक न्याय की दिशा में सामाजिक परिवर्तन के मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध सभी लोगों के लिए आवश्यक है। -प्रो. राम पुनियानी भारत में सदियों से धर्मान्तरण होता रहा है। सर्वाधिक धर्मान्तरण द्विजों ने किया है। लेकिन विवाद का विषय बीसवीं सदी में दलितों का धर्मान्तरण बना, क्योंकि डॉ. आंबेडकर ने अस्पृश्यता से ग्रस्त दलित जातियों को अपनी मुक्ति के लिए हिन्दू धर्म छोड़ने का आह्वान किया था। डॉ. रतन लाल ने इस सम्पूर्ण बहस को इस पुस्तक में एक साथ रखकर साहित्य और इतिहास के विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। -कँवल भारती बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों और रणनीति में धर्मान्तरण का अहम स्थान है। आज जब हम हिन्दू राष्ट्र बनने की दहलीज पर खड़े है, तो इन विचारों और रणनीतियों को इस सन्दर्भ में देखा जा सकता है। रतन लाल ने बाबा साहेब के विशाल लेखों और भाषणों के 15000 पन्नों में बिखरे उनके धर्मान्तरण सम्बन्धित विचारों को, बड़ी मेहनत से किताब में संकलित किया है। मुझे यकीन है कि हिन्दी पाठक इसे कृतज्ञतापूर्वक स्वीकार करेंगे। -आनन्द तेलतुम्बड़े धर्मान्तरण पर बाबासाहेब आंबेडकर के लेखन और भाषणों का यह विस्तृत चयन इस विषय पर उनके विचारों की स्पष्ट तस्वीर देता है। रतन लाल ने विस्तृत भूमिका लिखी है, जो धर्मान्तरण के सम्बन्ध में बाबासाहेब के दृष्टिकोण को समझने के लिए ऐतिहासिक रूपरेखा प्रदान करती है। -अशोक गोपाल रतन लाल द्वारा सम्पादित इस किताब से हमें मालूम होता है कि आधुनिक चिन्तक डॉ. भीमराव आंबेडकर का धर्म जैसे पारम्परिक विचार और व्यवहार के साथ किस प्रकार का रिश्ता रहा। क्यों उन्हें धर्म अनिवार्य जान पड़ा और वे क्यों बौद्ध मत की तरफ़ ही मुड़े? इस किताब की भूमिका को अनिवार्य रूप से पढ़ा जाना चाहिए क्योंकि वह बौद्धिक तटस्थता के साथ धर्म के प्रसंग में डॉक्टर आंबेडकर के भीतर के द्वन्द्वों की पड़ताल करती है। -प्रो. अपूर्वानंद
SKU: n/a -
Abrahamic religions (अब्राहमिक मजहब), Akshaya Prakashan, Hindi Books, Suggested Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Dorahe Par Musalman aur Hindu Chinta Samasya aur Samadhan (PB)
-17%
Abrahamic religions (अब्राहमिक मजहब), Akshaya Prakashan, Hindi Books, Suggested Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Dorahe Par Musalman aur Hindu Chinta Samasya aur Samadhan (PB)
क्या किसी सभ्यता के अवसान का यह अर्थ नहीं होता कि अब हम इस की शिक्षाओं के आधार पर अपने विचार तथा कर्म नहीं गढ़ सकते? क्या यह नियम हमारे इतिहास पर लागू नहीं होता ? क्या इस्लामी सभ्यता के उदय और अस्त का मतलब यह नहीं था कि इस्लामी सभ्यता का आधार बनने वाले धर्म का युग जा चुका ?
यदि इस्लामी सभ्यता का सूरज डूब गया और ऐसा बड़ी-बड़ी उपलब्धियों के बावजूद हुआ तो भी इतना कहा जा सकता है कि धर्म-विश्वास के प्रति एक काल-विशेष के अनुकूल दृष्टिकोण का अंत हुआ, स्वयं धर्म का नहीं। भले ही धर्म की कोई विशेष व्याख्या जी अतीत में इस्लामी सभ्यता की भावभूमि रही अब अनुपयुक्त हो चली हो।इस पुस्तक में हिंदू नजरिए से राजनीतिक इस्लाम की कुछ समस्याओं का आकलन है। साथ ही उस के समाधान का भी संकेत किया गया है। इस की सभी बातें मुसलमानों के साथ-साथ हिंदूओं के लिए भी विचारणीय हैं।
शंकर शरण
प्रोफेसर, राजनीति शास्त्र, एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली।
पूर्व-प्रोफेसर, राजनीति शास्त्र, महाराजा सागाजीराव विश्वविद्यालय बड़ौदा।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के सिद्धांत-व्यवहार पर पीएच. डी.। इन्स्टीच्यूट ऑफ सोशल साइन्सेज, मास्को से सोवियत राज्यतंत्र पर डिप्लोमा।
अब तक 22 पुस्तकें प्रकाशित। उल्लखखेनीयः ‘भारत पर कार्ल मार्क्स और मांसवादी इतिहास लेखन’: ‘मुसलमानों की घर वापसी क्यों और कैसे’; ‘गाँधी अहिंसा और राजनीति’: ‘इस्लाम और कम्युनिज्म तीन चेतावनियाँ’; ‘साम्यवाद के सौ अपराध’; ‘आध्यात्मिक आक्रमण और घर वापसी ‘भारत में प्रचलित सेक्यूलरवाद’; आदि।
तीन दशकों से राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में राजनीतिक शैक्षिक विषयों पर लेखन। ‘दैनिक जागरण’ तथा ‘नया इंडिया’ में प्रायः स्तंभ-लेखन।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास
Dr. Babasaheb Ambedkar Bharatiya Gantantra Ko Sakar Karnewala Mahamanav
-15%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहासDr. Babasaheb Ambedkar Bharatiya Gantantra Ko Sakar Karnewala Mahamanav
“यह पुस्तक भारत के एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बनने की यात्रा का वर्णन करती है, जिसमें लगभग दो सौ वर्षों के औपनिवेशिक शासन से बाहर निकलने की कहानी है।
यह संविधान निर्माण की पूरी प्रक्रिया का विश्लेषण करती है, जिसमें 1919 का मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1927 की साइमन कमीशन, 1928 की नेहरू रिपोर्ट, 1930 का गोलमेज सम्मेलन, भारत सरकार अधिनियम 1935, क्रिप्स मिशन, कैबिनेट मिशन, संविधान सभा के गठन और आखिर में संविधान का निर्माण जैसे महत्त्वपूर्ण पड़ाव शामिल हैं।
सामान्य धारणा के विपरीत, वे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू या सरदार पटेल नहीं थे, जिन्होंने इस जटिल प्रक्रिया में व्यापक और निर्णायक भूमिका निभाई, बल्कि एकमात्र डॉ. भीमराव आंबेडकर ही थे, जिन्होंने इसका नेतृत्व किया।
पुस्तक के भाग। और ।। में एक विद्वान् और सुधारक के रूप में, डॉ. आंबेडकर की भूमिका, उनकी ओर से उदार गणतंत्रवाद के सिद्धांतों के पालन और संविधान के विकसित होने की चर्चा की गई है।
भाग III में भारत में संविधान से संबंधित सुधारों की दो समानांतर प्रक्रियाओं की विवेचना की गई है-एक ब्रिटिश सरकार द्वारा शुरू की गई और दूसरी भारतीय नेताओं द्वारा, जिनमें डॉ. आंबेडकर प्रमुख थे। इन दोनों प्रक्रियाओं में कभी-कभी मतभेद और टकराव भी हुए, पर अंत में तालमेल हो गया, जैसा कि भाग IV में दिखाया गया है; और परिणाम भारत के मजबूत संविधान की रचना और उदय लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में इसके उदय के रूप में सामने आया।
इसलिए भारत के गणराज्य को स्वरूप देने का विशिष्ट सम्मान सही मायने में डॉ आंबेडकर को ही दिया जाना चाहिए।”
SKU: n/a -
Gita Press, Hindi Books, Suggested Books, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन
Durga Saptashati Code 1281
Gita Press, Hindi Books, Suggested Books, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, सनातन हिंदू जीवन और दर्शनDurga Saptashati Code 1281
सप्तशती के पाठमें विधिका ध्यान रखना तो उत्तम है ही, उसमें भी सबसे उत्तम बात है भगवती दुर्गामाताके चरणोंमें प्रेमपूर्ण भक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ जगदम्बाके स्मरणपूर्वक सप्तशतीका पाठ करनेवालेको उनकी कृपाका शीघ्र अनुभव हो सकता है।
SKU: n/a -
Abrahamic religions (अब्राहमिक मजहब), Hindi Books, Suggested Books, Vani Prakashan, सही आख्यान (True narrative)
FATWE ULEMA AUR UNKI DUNIYA
-10%
Abrahamic religions (अब्राहमिक मजहब), Hindi Books, Suggested Books, Vani Prakashan, सही आख्यान (True narrative)FATWE ULEMA AUR UNKI DUNIYA
एक मुसलमान का किसी भारत जैसे गैर-मुस्लिम देश के प्रति क्या रुख होना चाहिए? काफिरों के प्रति उसका व्यवहार कैसा होना चाहिए? क्या उसे, जो कुछ गैर-मुस्लिम करते हैं उससे उलट करना चाहिए? क्या उसे वही करना चाहिए जिससे वे हतोत्साहित हों? क्या जिहाद को काफिरों के खिलाफ कयानत तक चलने वाला सिलसिला बताया गया है? क्या मुसलमान को विज्ञान की उन नयी खोजों को स्वीकार कर लेना चाहिए जो कुरान और हदीस की मान्यताओं के विरुद्ध जाती हैं और पुरानी खोजों का खण्डन करती हैं-जैसे कि पृथ्वी गोल है, यह पृथ्वी के इर्द-गिर्द चक्कर काटती है। कहा जाता है कि इस्लाम की संहिता मुकम्मिल है, और इसे बताने और लागू करने का काम फतवों के माध्यम से होता है। इस तरह से फतवों की पुस्तकें कानून की रिपोर्टों के समकक्ष होती हैं और ये शरियत का सक्रिय रूप होती हैं। ये मुसलमान समुदाय के उन उच्चतम और सर्वाधिक प्रभावशाली उलेमा द्वारा रचित कृतियाँ हैं, जो उसे रूप एवं दिशा प्रदान करते हैं।
SKU: n/a -
Aryan Books International, English Books, Suggested Books, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास
Flight of Deities and Rebirth of Temples – Episodes from Indian History
-10%
Aryan Books International, English Books, Suggested Books, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहासFlight of Deities and Rebirth of Temples – Episodes from Indian History
This work examines the medieval response to temple destruction and image desecration. While temples were destroyed on a considerable scale, also noteworthy were the repeated endeavours to reconstruct them. In each instance of rebirth, the temple retained its original name, even though there was a visible downsizing in its scale and grandeur. The Keshava temple at Mathura, the Vishwanath temple at Kashi, the Somnath temple in Saurashtra, the Rama mandir at Ayodhya were among the shrines continually restored, well after Hindus had lost all semblance of political power. The Bindu Madhava, the most important Vishnu temple in Varanasi, was demolished in 1669 and a mosque constructed in its place. The temple now bearing the name Bindu Madhava is a modest structure in the shadow of the mosque, but continues the traditions associated with the site. Intriguingly, mosques built on temple sites often retained the sacred names – Bijamandal mosque, Lat masjid, Atala masjid, Gyanvapi mosque, and not to forget, masjid-i- janamsthan.
Equally worthy of study was the fate of images enshrined in temples. Many were swiftly removed by anxious devotees, many more were hurriedly buried; some remained on the move for decades, till such time they could be escorted back to their abodes. In several cases, images were damaged in flight. Countless images were lost, as their places of burial were forgotten over time. That necessitated the consecration of new images in more peaceable circumstances. So there were temples of the tenth-eleventh centuries, which housed images instated in the sixteenth. In situations where neither temple nor image could be safeguarded, the memory endured, and a shrine was recreated after an interval of several centuries.
SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास
Galib @ Chanakya
“सोशल मीडिया के दौर में जो दो भारतीय विद्वान् सर्वाधिक ‘कोट’ किए जाते हैं, वे हैं चाणक्य और गालिब। विडंबना यह है कि ये दोनों सर्वाधिक मिसकोट भी किए जाते हैं। जहाँ सोशल मीडिया गालिब के पैरोडी शेरों से लबालब भरा रहता है तो वहीं चाणक्य नीति के नाम पर ऐसी बातें कही जाती हैं, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं।
सोशल मीडिया पर इनकी दिन-रात हो रही इस दुर्गति से क्षुब्ध होकर उनके दो डाई हार्ड प्रशंसक इसको ठीक करने का बीड़ा उठाते हैं। संयोगवश उसी समय शहर में हत्याएँ हो रही हैं, हत्याओं में एक रोचक पैटर्न यह है कि मृतक के हाथ में जो पर्ची मिलती है, उसमें कभी तो चाणक्य का श्लोक होता है तो कभी गालिब का शेर।
डिटेक्टिव ध्रुव त्यागी सूत्रों को जोड़ता हुआ कातिल को ढूँढ़ रहा है। वहीं गालिब-चाणक्य के दो प्रशंसक आम जनता, मीडिया और राजनीतिज्ञों से अनुरोध करते हैं, पर बदले में खुद ही उनसे अपमानित होते हैं; अंत में वे अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं। इसके लिए वे शहर में हो रही सीरियल हत्याओं का दोष भी अपने सिर ले लेते हैं। अदालत में उनके साथ क्या होता है और ध्रुव त्यागी कैसे यह केस हल करता है, वह इस उपन्यास का पटाक्षेप है।”
SKU: n/a








