Amritlal Nagar Books
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Rajpal and Sons, उपन्यास
Agnigarbha
प्रेमचन्द के बाद विश्व प्रसिद्ध श्रेष्ठ उपन्यासकारों में श्री अमृतलाल नागर का एक विशिष्ट स्थान है। उनके अन्य उपन्यास ‘मानस का हंस’, ‘खंजन नयन’, ‘नाच्यौ बहुत गोपाल’, ‘बूंद और समुद्र’, ‘बिखरे तिनके’, ‘सेठ बांकेमल’, ‘भूख’, ‘सात घूंघट वाला मुखड़ा’ तथा ‘अमृत और विष’ हिन्दी-साहित्य की अमूल्य निधि हैं, जिनमें मानव-जीवन की सजीव अभिव्यक्ति अत्यन्त रोचक शैली में हुई है।
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Rajpal and Sons, उपन्यास
Bhookh
‘‘हिन्दुस्तान पर महायुद्ध की परछाईं पड़ने लगी। हर शख्स के दिल से ब्रिटिश सरकार का विश्वास उठ गया। यथाशक्ति लोगों ने चावल जमा करना शुरू किया। रईसों ने बरसों के लिए खाने का इन्तज़ाम कर लिया। मध्यवर्गीय नौकरीपेशा गृहस्थों ने अपनी शक्ति के अनुसार दो-तीन महीने से लेकर छः महीने तक की खुराक जमा कर ली। खेतिहर मज़दूर भीख माँगने पर मजबूर हुआ। भूख ने मेहनत-मज़दूरी करनेवाले ईमानदार इन्सानों को खूँखार लुटेरा बना दिया। भूख ने सतियों को वेश्या बनने पर मजबूर किया। मौत का डर बढ़ने लगा। और एक दिन चिर आशंकित, चिर प्रत्याशित मृत्यु, भूख को दूर करने के समस्त साधनों के रहते हुए भी, भूखे मानव को अपना आहार बनाने लगी…’’-इस पुस्तक में से। अमृतलाल नागर उन्नीसवीं सदी के हिन्दी साहित्य के महत्त्वपूर्ण लेखक थे, जिन्हें अक्सर प्रेमचंद का साहित्यिक वारिस माना जाता है। उनके लेखन की विशेषता थी यादगार चरित्रों का सृजन, जो पुस्तक पढ़ने के बाद भी देर तक पाठक के दिलो-दिमाग पर अपना प्रभाव छोड़ते थे। बहुआयामी प्रतिभा वाले नागर जी ने 74 वर्ष के जीवन काल में सभी विधाओं पर लिखा जिसमें कहानी, उपन्यास, नाटक, निबन्ध, संस्मरण और बच्चों के लिए कई रोचक पुस्तकें हैं। 1967 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1981 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। उनके उपन्यास मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल और खंजन नयन हिन्दी साहित्य में मील के पत्थर साबित हुए।
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Hindi Books, Rajpal and Sons, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Chakallas
अमृतलाल नागर की लेखनी से हास्य-व्यंग्य मिश्रित जिन विभिन्न रचनाओं का सृजन हुआ वे अपने आप में विलक्षण हैं. ये समय-समय पर विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई थीं. उनके कई संग्रह निकले जिन्हें बेहद पसंद किया गया. चकल्लस के नाम से उन्होंने एक पत्र भी निकाला जिसका साहित्य जगत में अपना एक विशेष स्थान बन गया.चकल्लस में नागर जी की सभी श्रेष्ठ हास्य-व्यंग्य रचनाएँ एक साथ प्रकाशित हैं. इससे इनकी विविधता तथा लेखक के सहज विनोदी स्वभाव का ज्ञान होता है.अमृतलाल नागर का जन्म 17 अगस्त 1916 में आगरा में हुआ था. वे उन्नीसवीं सदी के हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण लेखक थे जिन्हें अक्सर प्रेमचंद का साहित्यिक वारिस माना जाता है. उनके लेखन की विशेषता थी यादगार चरित्रों का सृजन, जो पुस्तक पढ़ने के बाद भी देर तक पाठक के दिलो-दिमाग पर अपना प्रभाव छोड़ते थे. बहुआयामी प्रतिभा वाले नागर जी ने 74 वर्ष के जीवन काल में सभी विधाओं पर लिखा जिसमें कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, संस्मरण और बच्चों के लिये कई रोचक पुस्तकें हैं. 1967 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1981 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया. उनके उपन्यास मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल और खंजन नयन हिंदी साहित्य में मील के पत्थर साबित हुए.
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Rajpal and Sons, उपन्यास
Karwat
प्रेमचन्द के बाद विश्व प्रसिद्ध श्रेष्ठ उपन्यासकारों में श्री अमृतलाल नागर का एक विशिष्ट स्थान है। उनके अन्य उपन्यास ‘मानस का हंस’, ‘खंजन नयन’, ‘नाच्यौ बहुत गोपाल’, ‘बूंद और समुद्र’, ‘बिखरे तिनके’, ‘सेठ बांकेमल’, ‘भूख’, ‘सात घूंघट वाला मुखड़ा’ तथा ‘अमृत और विष’ हिन्दी-साहित्य की अमूल्य निधि हैं, जिनमें मानव-जीवन की सजीव अभिव्यक्ति अत्यन्त रोचक शैली में हुई है।
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Hindi Books, Rajpal and Sons, कहानियां, सही आख्यान (True narrative)
Mahabharat Katha
यशपाल की गणना हिन्दी साहित्य के निर्माताओं में की जाती है। एक विचारधारा से जुड़े होने पर भी उनकी कहानियाँ और उपन्यास-जिनकी संख्या काफी है-बहुत लोकप्रिय हुए और उन्होंने अपने ढंग से साहित्य को गहराई से प्रभावित किया। प्रस्तुत संकलन में उन्होंने स्वयं अपने अनेक कहानी संग्रहों में से चुनकर श्रेष्ठ कहानियाँ दी हैं तथा भूमिका में अपने लेखन तथा विचारों पर प्रकाश डाला है।
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Hindi Books, Rajpal and Sons, कहानियां, सही आख्यान (True narrative)
Meri Priya Kahaniyaan
यशपाल की गणना हिन्दी साहित्य के निर्माताओं में की जाती है। एक विचारधारा से जुड़े होने पर भी उनकी कहानियाँ और उपन्यास-जिनकी संख्या काफी है-बहुत लोकप्रिय हुए और उन्होंने अपने ढंग से साहित्य को गहराई से प्रभावित किया। प्रस्तुत संकलन में उन्होंने स्वयं अपने अनेक कहानी संग्रहों में से चुनकर श्रेष्ठ कहानियाँ दी हैं तथा भूमिका में अपने लेखन तथा विचारों पर प्रकाश डाला है।
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