Book on Ganga
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Hindi Books, Luminous Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)
Bharatiya Kala : Lok Parampra evm Sangeet me Ganga ka Pravah
Hindi Books, Luminous Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)Bharatiya Kala : Lok Parampra evm Sangeet me Ganga ka Pravah
भारतीय जन मानस के लिए गंगा भारत की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता की प्रतीक है। अपने स्वरूप एवं प्रवाह में निरंतर बदलाव लाने पर भी अपने मूल रुप में तो वही गंगा ने युगों-युगों तक एक समूची सभ्यता को न केवल सिंचित किया है, बल्कि उसका भरण-पोषण भी किया है। गंगा शाश्वता का प्रतीक है तथा कला, पौराणिक कथाएँ एवं साहित्य सभी उसका गुणगान करते हैं। आज भी हिंदुओं के सभी धार्मिक कार्य और संस्कारों में अनिवार्य तत्व के रूप में गंगाजल की प्रधानता है। भारतीय कला में गंगा नदी को देवी के रूप में अनेक प्रतीकों के साथ अपने संरक्षक की भूमिका में प्रेषित की गई है। मकर कुंभ तथा अनेक अलंकारों से सुसज्जित किया गया है। यह सभी विशेषताएं गंगा के अर्थ को विस्तार देती है । धर्म के अनेक पक्षों, मिथकों तथा कलाओं में शताब्दियों से स्वरूपों तथा कथ्यो के द्वारा उन्हें प्रदर्शित किया जाता रहा है। प्रस्तुत पुस्तक धर्माचार्यों, जिज्ञासुओं, शोधकर्ताओं, आचार्यों, राजनेताओं इतिहासकारों एवं आमजन के लिए नितांत उपयोगी साबित होगा।
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Bhishm Krit Ganga Stuti
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भीष्म राजा शान्तनु के पुत्र थे। भागीरथी गंगाजी से उनका जन्म हुआ था। वे द्यो नामक नवम वसु के अवतार माने जाते हैं। उनका पूर्व नाम देवव्रत था। उन्होंने अपने पिता की इच्छा पूर्ण करने के लिए आजीवन अविवाहित रहने की दृढ़ प्रतिज्ञा ली थी जिससे उनका नाम भीष्म पड़ा। महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म द्वारा गंगा की स्तुति और महात्म का वर्णन है। भीष्म कहते हैं वे ही देश, जनपद, आश्रम और पर्वत पुण्य की दृष्टि से पवित्र हैं, जिनके बीच से होकर सरिताओं में उत्तम भारतीय धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में निरुपित किया गया है। गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र माना जाता है। बहुत से पवित्र तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सारे पापों का नाश हो जाता हैं।
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GANGA AVTARAN : RAHASYA EVAM PRAYOJAN
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सनातन धर्म में नदियों को देवी का स्वरूप माना जाता है। धरती पर गंगा का अवतरण भागीरथ जी के प्रयास के द्वारा ही संभव हो सका। मां गंगा पापविमोचनी है, मंदाकिनी है, जाह्नवी है, कई नामों से इस धरती पर पुकारा जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को स्वर्ग में बहने वाली गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। गंगा के पृथ्वी पर अवतरित होने की कथा कई महाकाव्यों, पुराणों और अन्य हिंदू धर्म ग्रंथों में मिलती है। सबसे पहले गंगा के अवतरण की कथा वाल्मीकि रचित रामायण के बालकांड के सर्ग ३४ से सर्ग ४४ में मिलती है। आकाश से हिमालय पर उतरती हैं। सत्रह सौ मील धरती सींचती हुई सागर में विश्राम करने चली जाती हैं। वह कभी थकती नहीं, अटकती नहीं। वह तारती हैं, उबारती हैं और भलाई करती हैं। यही उनका काम है। वह इसमें सदा लगी रहती हैं।
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Ganga Teerth
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भारत में गंगा नदी को बहुत पवित्र के साथ उनको माता का दर्जा प्राप्त है। गंगा केवल जीवनदायिनी नहीं है, बल्कि वह सभी पापों को नष्ट करती है और मोक्ष की प्राप्ति करवाती है। जन्म से लेकर मृत्यु तक गंगा के जल का हर कार्य में प्रयोग किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से गंगा कामनाओं को पूर्ण करने वाली, पापों को हरने वाली, मंगलकरणी, सुख, समृद्धि, शांति देने वाली मानी गई है। भारतीय ऋषि-महर्षियों को गंगा के वैज्ञानिक महत्व एवं अद्भुत प्राकृतिक संरचना का ज्ञान था, इसी कारण गगीता व अन्य शास्त्र-पुराणों में गंगा भारतीय संस्कृति का प्राण बताया है। भारतीय जन मानस में गंगा को परब्रह्म, निर्विकार, निराकार, पापहारिणी और सत्-चित् आनंद का प्रतीक माना जाता है। वे जीवन पोषण की पूर्णता हैं तो पूर्णमुक्ति की संदेश वाहक तथा कारक भी।
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Valmiki Aur Tulasi Ke Kavy Mein Maa Ganga
Hindi Books, Luminous Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)Valmiki Aur Tulasi Ke Kavy Mein Maa Ganga
विश्वविख्यात और विश्ववंद्य महर्षि वाल्मीकि जी संस्कृत साहित्य के पहले कवि थे जिन्होंने महाकाव्य की विराट चेतना और भावना को आत्मसात् करने वाली एक ऐसी सुश्लोक अभिव्यंजना का आविष्कार किया था जो कि जीव मात्र के प्रति कारुण्य और हितैषिता से ओतप्रोत प्रबुद्धचेता की भावुक भाव-लहरी को स्वर दे सके। तुलसी एक ऐसी महत्वपूर्ण प्रतिभा थे, जो युगों के बाद एक बार आया करती है तथा ज्ञान-विज्ञान, भाव-विभाव अनेक तत्त्वों का समाहार होती है।’
रामभक्ति शाखा के कवियों में गोस्वामी तुलसीदास सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। इनका प्रमुख ग्रन्थ ‘श्रीरामचरितमानस’ भारत में ही नहीं वरन् सम्पर्ण विश्व में विख्यात है।
गंगा नदी के महत्व को वैष्णव शैव, साहित्यकार वैज्ञानिक सभी स्वीकार करते हैं; क्योंकि गंगा इनमें कोई भेद नहीं करती है। सभी को एक सूत्र में पिरोती है और एक सूत्र में बाँधे रखने का संकल्प प्रदान करती है गंगा।
भारत की राष्ट्र-नदी गंगा जीवन ही नहीं, अपितु मानवीय चेतना को भी प्रवाहित करती है। बाल्मीकि ने रामायण और तुलसी ने रामचरितमानस सहित अपने अन्य रचनाओं में माँ गंगा के महत्व को भक्तिभाव से रेखांकित किया है।SKU: n/a




