Dr. Pramod Kumar Agrawal
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Bharat Mein Saman Nagrik Sanhita
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Bharat Mein Saman Nagrik Sanhita
“समान नागरिक संहिता राष्ट्र की पहचान है।
भारत में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति निदेशक तत्त्व के रूप में व्यक्त की गई है।
भारत के संविधान के सन् 1950 में लागू होने के पश्चात् इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, जबकि उच्चतम न्यायालय बार-बार सरकार को सजग करता रहा। सन् 1995 में उच्चतम न्यायालय ने सरला मुद्गल बनाम भारत संघ मामले में तो समान नागरिक संहिता पर त्वरित कार्यवाही करने की सलाह दी।
प्रायः भारत की अस्सी प्रतिशत हिन्दू आबादी के स्वीय विधि अधिनियम बन चुके हैं। गोवा राज्य में समान नागरिक संहिता लागू है और संप्रति उत्तराखंड राज्य ने भी सन् 2024 में समान नागरिक संहिता अपने क्षेत्र में साहस के साथ लागू कर दी है।
इस पुस्तक में समान नागरिक संहिता को लागू करने के पीछे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को प्रस्तुत किया गया है विशेषतः भारतीय संविधान परिषद् में तत्संबंधी चर्चा जो आज भी प्रासंगिक है।
विश्व के अनेक इस्लामिक देशों में भी बहु-विवाह प्रथा पर रोक लग गई है पर भारत में बहु-विवाह तथा अन्य विषय अभी भी विवादित बने हुए हैं। उच्चतम न्यायालय के समान नागरिक संहिता से संबंधित महत्त्वपूर्ण निर्णयों से तथ्यों को निकालकर सभी आयामों पर प्रकाश डाला गया है। पुस्तक के अंत में व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ भी दी गई हैं ताकि विषय एवं पुस्तक सहज ग्रहण हो।
आशा है कि इस पुस्तक का, भारत में समान नागरिक संहिता जैसे ज्वलंत विषय पर सभी वर्गों, धर्मों, जातियों, विधि-विशेषज्ञों, विधायिका तथा पाठकों द्वारा समान रूप से स्वागत किया जाएगा।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, रामायण/रामकथा
Chitrakoot Mein Ram-Bharat Milap
चित्रकूट में राम-भरत मिलाप’ रामकथा के महत्त्वपूर्ण प्रसंग का नाट्यरूप में प्रणयन है।
यह घटना जहाँ भ्रातृप्रेम और त्याग का अद्वितीय आदर्श है, वहीं उससे राजधर्म के महान् सिद्धांत प्रस्फुटित हुए हैं।
वर्तमान परिवेश में लेखक ने रामायण की इस घटना को सामान्य जन तक पहुँचाने का प्रयास किया है।
एक ओर इस कृति का स्वागत जहाँ भारतीय जनमानस द्वारा किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर राजशासकों द्वारा भी।
आशा है कि इस कृति का व्यापक रूप से पठन-पाठन तथा मंचन होगा।SKU: n/a

