Hanuman Chalisa
Showing all 10 results
-
English Books, Rajpal and Sons, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, सही आख्यान (True narrative)
Hanuman Chalisa
English Books, Rajpal and Sons, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, सही आख्यान (True narrative)Hanuman Chalisa
For all the global devotees of Lord Hanuman who recite the Hanuman Chalisa but always wished to understand it better, this lyrical translation into English is the answer. Written in the Awadhi dialect by Goswami Tulsidas in the mid 16th century, this translation now makes it easy to truly understand and appreciate its beauty and depth.
Hanuman Chalisa is a devotional hymn written in praise of Lord Hanuman which millions of Hindus know by heart and recite every day. It comprises of 40 chaupais ( quatrains) and three Dohas and sings praises of Hanuman’s qualities of courage, strength, dedication, loyalty and bhakti towards Lord Ram.
The poetic rendering into English of this universally loved Chalisa has been done by Prof. Kuldip Salil, a well renowned poet and translator who has authored more than twenty books. He was a professor of English in Delhi University and has translated the shayari of Ghalib, Faiz, Iqbal, Sahir and several other renowned Urdu poets into English. His notable books are’ Diwan e Ghalib’, ‘A treasury of Urdu Poetr’y,’ Best of Sahi’r, ‘Best of Meer’, ‘Best of Faiz’,’ Best of Faraz’, ‘Best of Iqbal’, ‘Best of Majaz’ and ‘Chirag Phir Bhi Chirag Hai ‘
SKU: n/a -
-
Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें
Hanumanji Ke Jeevan Ki Kahaniyan
हनुमानजी के जीवन की महागाथाओं को वैसे तो शब्दों में पिरोना लगभग असंभव ही है, क्योंकि उनकी वीरता की गाथाएँ पृथ्वी से लेकर आकाश और पाताल तक—तीनों लोकों में फैली हैं। उन्होंने ‘सब संभव है’ को अपने जीवन में चरितार्थ किया। भूख लगी तो सूर्य देवता को ही फल समझ उनकी ओर छलाँग लगा दी, तब देवराज इंद्र को अपना वज्र चलाकर उन्हें रोकना पड़ा। रावण की स्वर्ण लंका को उन्होंने जलाकर राख कर दिया और तीनों लोकों को दहलानेवाला रावण भी असहाय बना बैठा रहा। पाताल लोक में जाकर उन्होंने न केवल भगवान् श्रीराम और लक्ष्मण को बचाया, वरन् वहाँ के दुष्ट राजा अहिरावण का वध भी किया। हनुमानजी भगवान् श्रीराम के परम भक्त हैं। उनकी भक्ति की शक्ति से ही वे स्वयं को शक्तिसंपन्न मानते हैं। उन्होंने यह सिद्ध करके दिखाया है कि अनन्य और समर्पित भक्ति से सबकुछ हासिल किया जा सकता है। राम-रावण युद्ध के दौरान वे एक केंद्रीय पात्र रहे और हर अवसर पर भगवान् राम के अटूट सहयोगी के रूप में सामने आए—चाहे वह लक्ष्मणजी को लगी शक्ति का विपरीत काल हो, चाहे नागपाश वाली घटना। हनुमानजी को सीता माता द्वारा अजर-अमर होने का वरदान प्राप्त है—अजर-अमर गुणनिधि सुत होऊ—वे त्रेता से लेकर द्वापर में भगवान् राम के श्रीकृष्ण अवतार में भी उनके सहयोगी बने और महाभारत संग्राम के दौरान अनेक बार उभरे। आज कलियुग में भी वे अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनकी मदद को दौडे़ चले आते हैं।
अपूर्व भक्ति, निष्ठा, समर्पण, साहस, पराक्रम और त्याग की कथाओं का ज्ञानपुंज है हनुमानजी का प्रेरक जीवन।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, रामायण/रामकथा
Hanumat-Katha
“वाल्मीकि रामायण के अनुशीलन से श्रीराम तथा हनुमान की आध्यात्मिक शक्तियों के दिग्दर्शन होते हैं ।सामान्यतया इतिहास लेखन में आध्यात्मिक शक्तियों पर विचार नहीं किया जाता है, परंतु प्राचीनकाल से ही विश्व के बहुत से समुदायों में कुछ विशिष्ट मानवों में आध्यात्मिक शक्तियों की उपस्थिति के उल्लेख मिलते रहे हैं। अत: आध्यात्मिक तथा अतींद्रिय शक्तियों की अवहेलना उचित नहीं है।
इस कृति में श्रीराम तथा हनुमान आदि को ऐतिहासिक समझते हुए उनकी इन शक्तियों का भी कुछ अंश तक परिज्ञान लिया गया है प्रस्तुत उपन्यास मुख्य रूप से वाल्मीकि रामायण तथा सद्गुरुओं के विचारों के आधार पर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से लिखा गया है| अस्तु, यदि प्रस्तुत कृति में कुछ अच्छा है, तो वह महान् कवि वाल्मीकि का प्रसाद है और निर्विवाद प्रतीति यह है कि बिना केसरीनंदन हनुमान की कृपा के तो रामकथा अथवा उसका कोई अंश लिखा ही नहीं जासकता।
श्री हनुमान के समर्पण, भक्ति, पराक्रम, पौरुष और त्याग का दिग्दर्शन करवाता अत्यंत पठनीय उपन्यास ।”
SKU: n/a -
-
Gita Press, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, रामायण/रामकथा
Shriramcharitmanas Sundarkand, 1919
श्रीरामचरितमानस सुंदरकाण्ड, मूल, श्रीहनुमानचालीसा सहित |
श्रीगोस्वामी तुलसीदासजी महाराज के द्वारा प्रणीत श्रीरामचरितमानस हिन्दी साहित्य की सर्वोत्कृष्ट रचना है। आदर्श राजधर्म, आदर्श गृहस्थ-जीवन, आदर्श पारिवारिक जीवन आदि मानव-धर्म के सर्वोत्कृष्ट आदर्शों का यह अनुपम आगार है। इस पुस्तक में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का हिन्दी टीका के साथ प्रकाशन किया गया है।
SKU: n/a -
Gita Press, Hindi Books, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें
Shriramcharitmanas, Sundarkand, Pocket Size 0858
श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के द्वारा प्रणीत श्रीरामचरितमानस हिन्दी साहित्य की सर्वोत्कृष्ट रचना है। आदर्श राजधर्म, आदर्श गृहस्थ-जीवन, आदर्श पारिवारिक जीवन आदि मानव-धर्म के सर्वोत्कृष्ट आदर्शों का यह अनुपम आगार है। सर्वोच्य भक्ति, ज्ञान, त्याग, वैराग्य तथा भगवान की आदर्श मानव-लीला तथा गुण, प्रभाव को व्यक्त करनेवाला ऐसा ग्रंथरत्न संसार की किसी भाषा में मिलना असम्भव है। आशिर्वादात्माक ग्रन्थ होने के कारण सभी लोग मंत्रवत् आदर करते हैं। इसका श्रद्धापूर्वक पाठ करने से एवं इसके उपदेशों के अनुरूप आचरण करने से मानवमात्र के कल्याण के साथ भगवत्प्रेम की सहज ही प्राप्ति सम्भव है। श्रीरामचरितमानस के सभी संस्करणों में पाठ-विधि के साथ नवान्ह और मासपरायण के विश्रामस्थान, गोस्वामी जी की संक्षिप्त जीवनी, श्रीरामशलाका प्रश्नावली तथा अंत में रामायण जी की आरती दी गयी है।
SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास
Tattvadarshan Sunderkand-Ratnamani
-13%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहासTattvadarshan Sunderkand-Ratnamani
सनातम धर्म का आधार वेद, उपनिषद्, पुराण, शास्त्र हैं। ‘रामचरितमानस’ श्रीराम का अयन है। इसमें चार विषय हैं—कर्म क्या है ? ज्ञान क्या है ? भक्ति क्या है ? शरणागति क्या है ? सुंदरकाण्ड पंचम सोपान है, इसमें इन चारों प्रश्नों का उत्तर सुंदर भावों में प्रकट होता है।
हनुमानजी ने रावण को चार चीजों का उपदेश दिया— भक्ति, वैराग्य, विवेक और नीति। भगवान् की प्रेमपूर्वक सेवा का नाम भक्ति है जो हनुमानजी ने सुंदर भावरूप में प्रकट किया है। भक्तिरूपी वृक्ष भावरूपी बीज से ही पैदा होता है। भगवत् चरणों का आश्रय मानव जीवन को कुशल बना देता है; भक्त भगवान् में जीता है, यही शरणागति है।
‘सुंदरकाण्ड’ वर्तमान युग में एक औषधि है, जो मानव जीवन के तापों को शांत करता है, शक्ति प्रदान करता है और सबको विषम परिस्थितियों में भी जीना सिखाता है। जो इसका पाठ नित्य करते हैं, वे अनुभव करते हैं कि श्रीहनुमानजी के चरित्र में कितना विश्वास, प्रताप, तेज और भक्ति है। जब पाठ में इतना बल है तो उसके एक-एक शब्द के अर्थ को जब जानेंगे, पहचानेंगे तो कितना आनंद होगा, इसकी गहराई को अनुभव करने के लिए यह ग्रंथ पाठकों के लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होगा।
इसी अटूट विश्वास के साथ यह ग्रंथ आपके अध्ययन हेतु प्रस्तुत है; आप सभी इसका लाभ प्राप्त करें और अपने जीवन को सुंदर बना सकें, यही इसके लेखन-प्रकाशन की सार्थकता है।
जय श्रीराम ! जय हनुमान !”
SKU: n/a








