Hindi Literary
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Garuda Prakashan, Hindi Books, Kapot Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)
Bharat Mein Islaam: (1947 Tak) Political Islamic vichaardhaara kee sameeksha 4
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Garuda Prakashan, Hindi Books, Kapot Prakashan, इतिहास, राजनीति, पत्रकारिता और समाजशास्त्र, सही आख्यान (True narrative)Bharat Mein Islaam: (1947 Tak) Political Islamic vichaardhaara kee sameeksha 4
इस्लामी विचारधारा में धर्म से अधिक राजनीति के गुण हैं और इसका उद्देश्य अन्य धर्मों को नष्ट करके उन पर अपना प्रभाव और प्रभुत्व स्थापित करना है। यह पुस्तक पिछले 1400 वर्षों में इस्लाम और दुनिया के कई धर्मों के बीच संबंधों पर चर्चा करती है और व्यवस्थित रूप से समीक्षा करती है, और कैसे इस्लाम अन्य धर्मों को प्रभावित कर रहा है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
KASHMIR : Bharat-Pakistan Sambandhon ke Aaine Mein HB
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)KASHMIR : Bharat-Pakistan Sambandhon ke Aaine Mein HB
“अगस्त-सितंबर 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध की मुख्य सीख यह थी कि प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देनेवाली अराजकता की पृष्ठभूमि में आज एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक व्यवस्था कार्यरत है, जो मँझली एवं छोटी शक्तियों को बल प्रयोग द्वारा मुद्दों के समाधान की अनुमति प्रदान नहीं करती है। आज की दुनिया में ऐसी अवस्था को दृष्टिगत करना कठिन है, जहाँ शत्रु को सफलतापूर्वक परास्त करने के उपरांत भारत अथवा पाकिस्तान में से किसी के भी द्वारा शांति की शर्तों का निर्धारण किया जाए।
प्रस्तुत पुस्तक में भारत के विभाजन-काल की परिस्थितियों, जम्मू-कश्मीर राज्य के भारत में विलय मामले पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा, द्विपक्षीय वार्त्ताओं और इस मुद्दे पर महाशक्तियों के रुख तथा जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटने के बाद की बदली परिस्थिति, विकास कार्य एवं जम्मू- कश्मीर पुनरुत्थान आदि का विस्तृत और निष्पक्ष विवरण है। संबंधित पक्षों पर नेताओं, विशेषज्ञों की टिप्पणियाँ और प्रेस के उद्धरण पुस्तक को और भी पठनीय बनाते हैं।
कश्मीर में रुचि रखने वाले शोधकर्ताओं, प्राध्यापकों के साथ-साथ अन्य पाठकों के लिए भी यह पुस्तक रोचक और ज्ञानवर्धक है।”
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Hindi Books, Rajkamal Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Kashmir Aur Kashmiri Pandit : Basne Aur Bikharne Ke 1500 Saal
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Hindi Books, Rajkamal Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Kashmir Aur Kashmiri Pandit : Basne Aur Bikharne Ke 1500 Saal
यह किताब कश्मीर के उथल-पुथल भरे इतिहास में कश्मीरी पंडितों के लोकेशन की तलाश करते हुए उन सामाजिक-राजनैतिक प्रक्रियाओं की विवेचना करती है जो कश्मीर में इस्लाम के उदय, धर्मान्तरण और कश्मीरी पंडितों की मानसिक-सामाजिक निर्मिति तथा वहाँ के मुसलमानों और पंडितों के बीच के जटिल रिश्तों में परिणत हुईं। साथ ही, यह किताब आज़ादी की लड़ाई के दौरान विकसित हुए उन अन्तर्विरोधों की भी पहचान करती है जिनसे आज़ाद भारत में कश्मीर, जम्मू और शेष भारत के बीच बने तनावपूर्ण सम्बन्धों और इस रूप से कश्मीर घाटी के भीतर पंडित-मुस्लिम सम्बन्धों ने आकार लिया।
नब्बे के दशक में पंडितों के विस्थापन के लिए ज़िम्मेदार परिस्थितियों की विस्तार से विवेचना करते हुए यह किताब विस्थापित पंडितों के साथ ही उन कश्मीरी पंडितों से संवाद स्थापित करती है जिन्होंने कभी कश्मीर नहीं छोड़ा, और उनके वर्तमान और भविष्य के आईने में कश्मीर को समझने की कोशिश करती है।
धारा 370 हटाए जाने से पहले और बाद में, दोनों स्थितियों में, घाटी में रह रहे पंडितों के आख्यान को शामिल करनेवाली यह पहली किताब है जिसके लिए लेखक ने कश्मीर के विभिन्न इलाक़ों में यात्राएँ की हैं और पंडित परिवारों से विस्तार से बातचीत की है।
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Hindi Books, MyMirror Publishing House Pvt. Ltd, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Man Ki Shakti Ka Upayog Kaise Kare
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Hindi Books, MyMirror Publishing House Pvt. Ltd, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Man Ki Shakti Ka Upayog Kaise Kare
आपको वो कभी नहीं मिलता जिसके लिए आप योग्य हो, बल्कि आपको वही मिलता है जो मिलने का आपका विश्वास है।” जब मैंने पहली बार इस वाक्य को समझा तो मैं चौंक गया। मतलब संसार की हर चीज़ मुझे मिलनी चाहिए जिसके लिए मैं पात्र (योग्य) हूँ। लेकिन वह वस्तुएँ मुझे मिल सकती हैं, ऐसा विश्वास नहीं होने के कारण वंचित रह जाते हैं। इस तरह से दुनिया में हर कोई व्यक्ति दुनिया की सबसे अच्छी चीज़ों को प्राप्त करने का हकदार है। हर किसी को अच्छा स्वास्थ्य, अच्छा शरीर, भौतिक सुख सुविधाएं मिलना ही चाहिए जिसके लिए वे योग्य हैं। परंतु मेरी चाहत के अनुसार मुझे सभी चीजें प्राप्त होंगीं यह विश्वास उनके पास नहीं है इसलिए वे चीजें उन्हें प्राप्त नही होती। फिर खुद पर कोइ आशंका न लाते हुए ये चीजें मुझे मिलेगी ही यह विश्वास कैसे तैयार करें?
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Nathpanth Ka Itihas (History & Tradition of Natha Sampradaya in Hindi)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Nathpanth Ka Itihas (History & Tradition of Natha Sampradaya in Hindi)
महात्मा बुद्ध के बाद भारत में सामाजिक पुनर्जागरण का शंखनाद महायोगी गोरखनाथ ने किया। गोरखनाथ भारतीय इतिहास में ऐसे तपस्वी हैं, जिन्होंने विशुद्ध योगी एवं तपस्वी होते हुए भी सामाजिक-राष्ट्रीय चेतना का नेतृत्व किया। उन्होंने नाथपन्थ का पुनर्गठन सामाजिक पुनर्जागरण के लिए किया। पारलौकिक जीवन के साथ-साथ भौतिक जीवन का सामंजस्य बिठाने वाले इस महायोगी ने भारतीय समाज में सदाचार, नैतिकता, समानता एवं स्वतंत्रता की वह लौ प्रज्ज्वलित की, जिसकी लपटें जाति-पाँति, ऊँच-नीच, छुआछूत, भेदभाव, अमीरी-गरीबी, पुरुष-स्त्री, विषमताओं और क्षेत्रीयतावाद जैसी प्रवृत्तियों को निरंतर जलाती रहीं। नाथपन्थ के विचार-दर्शन ने एक ऐसी योगी-परंपरा को जन्म दिया, जिसने भारतीय संस्कृति के एकाकार सामाजिक चिंतन को ही अपना उद्देश्य बना दिया। नाथपन्थ की इस योगी-परंपरा ने हर प्रकार की सामाजिक बुराइयों का खुलकर प्रतिकार किया। महायोगी गोरखनाथ ने वर्ण-व्यवस्था और जाति-व्यवस्था के श्रेष्ठतावादी सिद्धांत को चुनौती दी एवं सभी वर्णों तथा जातियों को एक समान बताया।
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Hindi Books, Rajasthani Granthagar, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति
Rajasthan ke Prachin Abhilekh
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Hindi Books, Rajasthani Granthagar, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृतिRajasthan ke Prachin Abhilekh
राजस्थान के प्राचीन अभिलेख डा श्रीकृृष्ण जुगनु मेवाड़ प्रदेश अपने अंक में प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति के बीज को अक्षुण्ण रखे हुए हैं । यहां आदिम समुदायों सहित लोकजन और अभिजात्य तीनों ही स्तर के समाजों के दर्शन होते हैं । पारियात्र अथवा अरावली की पहाडि़यों ने इसे कुदरतन रक्षित और पोषित किया है तो आगंूचा, दरीबा और जावर जैसी खदानों ने इसे आर्थिक रूप से समृद्धि प्रदान की है । इस दृष्टि से यह देश में प्राचीनतम समृऋि प्रदाता क्षेत्र रहा है । इस पर्वतमाला से निकली नदियांे ने यहां कृषि कार्य को सबल किया । यहां गणों से लेकर अनेक राजवंशों ने अपने शासक का सूत्र संचालित किया । अश्वमेध, एकषष्टिरात्र जैसे वैदिक सत्र-यज्ञ यहां हुए और शासकों ने जलाशयों के निर्माण के साथ जल-संसाधन के सुदीर्घ संरक्षण की परम्परा का प्रवर्तन किया ।
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास
Raktranjit Bharat: Chaar Aakranta,Hazar Ghaav
भारत और आस-पास के देशों पिछले कुछ वर्षों में हुई छः घटनाओं की गहरी पड़ताल, तथा इन संगठनों को भारत के बाहर से मिलने वाली आर्थिक सहायता और इन सभी शक्तियों के आपस में जुड़े होने के प्रमाण के साथ, लेखक ने स्पष्ट किया है कि भारत को अपनी ही सीमाओं के अंदर किनसे खतरा है; और हमें किनसे सचेत रहना चाहिए। ये घटनाएँ—चाहे वो पीएफआई (PFI) की गतिविधियाँ हो, झारखंड में ‘पथलगड़ी’ हो, या फिर श्री लंका में हुए बम धमाके—एक दूसरे से अलग दिखते भी अलग-अलग नहीं है।
ये पुस्तक बिनय जी लोकप्रिय अंग्रेजी पुस्तक Bleeding India: Four Aggressors, Thousand Cutsकाहिंदी संस्करण है।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Ramrathi: Describing About The Ram Lalla and Ayodhya Book in Hindi
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Ramrathi: Describing About The Ram Lalla and Ayodhya Book in Hindi
“रामलला और अयोध्या को जानें : रामरथी से
रामलला को, और हमारा उनसे तथा अयोध्या से संबंध जानना आवश्यक है।
महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण इतिहास है और संपूर्ण मानव जाति को अपना इतिहास जानना आवश्यक है। इतिहास का अर्थ है- ‘ऐसा निश्चित ही हुआ था’।
24,000 संस्कृत श्लोकों में आबद्ध वाल्मीकि रामायण को आधुनिक पाठकों के अनुकूल प्रस्तुत करना आवश्यक है।
वाल्मीकि रामायण के वैज्ञानिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक पक्षों का विश्लेषण तथा वर्तमान युग में उनका अनुप्रयोग (Applicability) समझना आवश्यक है।
24,000 श्लोकों में 24 अक्षर का गायत्री मंत्र कैसे विस्तारित है, यह जानना आवश्यक है।
वेद, रामायण और आधुनिक शिक्षा का संबंध जानना आवश्यक है।
रामायण बच्चों और युवाओं को क्यों पढ़नी चाहिए, यह जानना आवश्यक है।
उपर्युक्त के साथ ऐसे बहुत से अन्य पक्षों का जवाब देने के लिए श्रीराम की प्रेरणा से ‘रामरथी’ प्रस्तुत की गई है।”SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
Shrimadbhagwadgita Prashnottari
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीताShrimadbhagwadgita Prashnottari
“प्रस्तुत पुस्तक ‘श्रीमद्भगवद्गीता प्रश्नोत्तरी’ में लेखक द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के अठारह अध्यायों से 300 महत्त्वपूर्ण व वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का चयन किया गया है। प्रश्नों की प्रकृति अत्यंत सरल है। एक सामान्य जन के साथ-साथ एक छोटी कक्षा का बालक भी इन प्रश्नों को आसानी से समझकर कंठस्थ कर सकता है। इसके साथ-साथ विद्यार्थीगण श्रीमद्भगवद्गीता से संबंधित आध्यात्मिक प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए इस पुस्तक का अध्ययन कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। पाठक की सुविधा के लिए हर अध्याय के सभी प्रश्नों से संबंधित उत्तर इस पुस्तक के अंत में दिए गए हैं।
इसके साथ-साथ लेखक द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता पर अनेक विद्वानों द्वारा लिखी महत्त्वपूर्ण टीकाओं की सूची भी पुस्तक में दी गई है। यदि कोई जिज्ञासु विद्यार्थी या सामान्यजन गीता के मर्म को अत्यंत सूक्ष्मता से जानने का इच्छुक है तो वह इन टीकाओं का अध्ययन कर अपने भौतिक व आध्यात्मिक जीवन को सफल बना सकता है। हमें विश्वास है कि यह पुस्तक निश्चित रूप से अध्यात्म के क्षेत्र में रुचि रखने वाले जिज्ञासुओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
‘श्रीमद्भगवद्गीता प्रश्नोत्तरी’ के लेखन का एकमात्र लक्ष्य देश व प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा प्रथम से लेकर बारहवीं तक के विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान से परिचित करवाना है।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Veetraag: A Novel Based On The Philosophy Of Life
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Veetraag: A Novel Based On The Philosophy Of Life
“वस्तुतः गीता एक महान् आध्यात्मिक ग्रंथ है। कृष्ण जैसा आध्यात्मिक विज्ञानी (Psychologist) न पूर्व में में कभी था, न अभी तक हुआ है। गीता अर्जुन के विषाद अर्थात् मन से प्रारंभ होती है और अध्यात्म की पराकाष्ठा पर जाकर पूर्ण होती है।
प्रस्तुत उपन्यास में एक ऐसे सांसारिक मनुष्य की कथा है, जिसका मन कामनाओं से अत्यंत ग्रसित है। इतना ही नहीं, उसकी कामना-प्रवृत्ति वासना में परिवर्तित हो चुकी है। अति कामनाओं से ग्रस्त व्यक्ति जीवन में शांति प्राप्त करने में असमर्थ रहता है। उपन्यास का पात्र शिवानंद ऐसे ही सांसारिक जीव का प्रतिनिधित्व करता है। शिवानंद शांति की खोज में आश्रम-आश्रम भटकता है, किंतु उसे कहीं शांति प्राप्त नहीं होती है।
शिवानंद के अतिरिक्त इस उपन्यास में दो और प्रमुख पात्र हैं। एक है- कृष्णभक्त विदुषी प्रियंवदा । प्रियंवदा भक्तियोग की प्रवक्ता है। तीसरा प्रमुख पात्र कर्मयोगी विराज उर्फ विरागी एक नाविक है, जो कर्मयोग का जीवंत हस्ताक्षर है। तीनों पात्रों की कहानी एक-दूसरे के साथ संयुक्त होकर साथ-साथ चलती है। कथा रूप में सांसारिक और आध्यात्मिक अभिवृत्तियों का तुलनात्मक वृत्तांत उपन्यास को रोचक बनाता है।”
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Hindi Books, Kapot Prakashan, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Vo Chhappan Ghante Stories Book
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Hindi Books, Kapot Prakashan, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Vo Chhappan Ghante Stories Book
“कहानी अपने रचयिता के जीवन का रस होती है। वह रस कभी मीठा तो कभी कसैला होता है। उस रस में वह अपनी कल्पनाओं, मूल्यों, आदर्शों और अपेक्षाओं को बूंद-बूँद टपकाकर बड़े एहतियात से कभी हजार तो कभी तीन-चार हजार शब्द लिखने के लिए स्याही तैयार करता है। पढ़ने की तीव्र लालसा थी तो पाँच बरस के होते-होते अक्षर पढ़ने सीख लिये। घर में पढ़ने-लिखने का माहौल था।
सबसे छोटी होने के नाते जो पुस्तकें हाथ लगतीं, पढ़ जाती; कुछ पल्ले पड़तीं, कुछ पल्ले से झड़ जातीं, पर इस प्रक्रिया में भाषा से प्रेम हो गया। आगे जाकर जीवन के विविध अनुभवों के चलते लिखना शुरू किया। कभी गद्य तो कभी पद्य, कभी रिएक्शन तो कभी रिस्पॉन्स ! मेरे लिए कहानी लिखने की प्रक्रिया वैसी ही है, जैसे एक संगीतकार के लिए वाद्ययंत्र पर नई धुन निकालना।
इसलिए कुछ कहानियाँ, जैसे ‘वह जिंदा है’ या ‘सपेरा’ कुछ घंटों में लिख गईं तो कुछ रचनाओं, जैसे ‘राधेश्याम’ ने कुछ हफ्ते लिये। ‘सलेटी’ और ‘मरीचिका’ की गर्भावधि महीनों या बरसों की रही। आशा है, मेरी कहानियों में मौजूद पृष्ठभूमि की भिन्नता, चरित्रों की विशिष्टता और बदलती कथन-शैली आपको पृष्ठ के बाद पृष्ठ पलटने को प्रेरित करेगी। “
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Wo Hindi Medium Wala: Mool Bhartiyon Ka Vidroh Aur Ubharta Raashtravaad
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Garuda Prakashan, Hindi Books, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Wo Hindi Medium Wala: Mool Bhartiyon Ka Vidroh Aur Ubharta Raashtravaad
मूल बात पहले। ये पुस्तक इस धारणा को तोड़ती है कि भारत स्वतन्त्र है, और दिखाती है कि हमलोगों ने विदेशी सांस्कृतिक दासता को अपने मानस में आत्मसात् कर लिया है और अब तो उसकी अनुभूति भी हमें नहीं होती।
अमिताभ सत्यम् इस मानसिकता और मूल भारतीय संस्कृति के प्रति हेय दृष्टि रखने वाले व्यवहार का विस्तृत विश्लेषण करते हैं। उनकी बात करते हैं जो भारतीय भाषा बोलते हैं, भारतीय भोजन करते हैं, भारतीय परम्पराओं का पालन करते हैं, और इस कारण “वो हिन्दी मीडियम वाला” जैसे अपमानजनक सम्बोधन को सहते हैं।
अँगरेज़ी को उच्च स्तरीय नौकरियों की आवश्यकता के रूप में स्थापित करके हम सौ करोड़ भारतीयों की प्रतिभा को नकार देते हैं। अँगरेज़ी नहीं बोलने के कारण करोड़ों प्रतिभावान लोग ड्राइवर, सिक्युरिटी गार्ड और नौकर बन कर रह जाते हैं।
मूल भारतीय आज अँगरेज़ी-मीडियमों द्वारा थोपी गई श्रेष्ठता के विरुद्ध विद्रोह कर रहे हैं। ये पुस्तक इन्ही भावनाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करती है।
पुस्तक पैने व्यंगात्मक परिहास और व्यक्तिगत अनुभवों से परिपूर्ण है। ये मात्र गुदगुदाती ही नहीं, हमारी इस मानसिकता पर गहन विचार करने को प्रेरित भी करती है।
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