Kalidas Books
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Hindi Books, Rajpal and Sons, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Kumarsambhav
संस्कृत के सर्वश्रेष्ठ कवि कालिदास ने ‘कुमारसंभव’ महाकाव्य में श्रृंगार-सौंदर्य का जैसा वर्णन किया है वैसा अन्यत्र दुर्लभ है। ‘उपमा कालिदासस्य’ तो प्रसिद्ध ही है कि आज तक कोई कवि कालिदास जैसी उपमा नहीं दे सका। ‘कुमारसंभव’ में कालिदास ने शिव-पार्वती के अंतरंग क्षणों का ऐसा जीवंत सौंदर्य-चित्रण किया जो संस्कृत साहित्य में अनुपम है।’कुमारसंभव’ संस्कृत साहित्य की गौरवपूर्ण कृतियों में एक उल्लेखनीय महाकाव्य है जिसको पढ़ते समय पाठक उसी में रम जाता है।
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Vishwavidyalaya Prakashan, अन्य कथा साहित्य, संतों का जीवन चरित व वाणियां
Meghadoot : Kalidas
कवि कालिदास की काव्य-कृतियों में मेघदूत काव्य को विशेष महत्त्व प्राप्त है। इसमें करुण-रस का अनुपम सौन्दर्य है। मन्दाक्रान्ता छन्द में लिखे गये इस काव्य को दो खण्डों में विभाजित किया गया है—पूर्वमेघ और उत्तरमेघ। पूर्वमेघ में काव्य-सौन्दर्य के साथ ही भारत का भौगोलिक-सौन्दर्य भी प्रकाशित है। प्रकृति का मनोरम चित्र, कवि की सूक्ष्म दृष्टि, भावुकता और कल्पना का संयोग पूर्वमेघ की विशेषता है। उत्तरमेघ का कथ्य अत्यत मर्मस्र्पशी है।
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Hindi Books, Vishwavidyalaya Prakashan, अन्य कथेतर साहित्य, इतिहास
Meghadootam
मेघदूत महाकवि कालिदास की चमकती लेखनी का अमृत-निष्यन्द है। विश्ववन्द्य इस काव्यरत्न को पढ़ने से प्रतीत होता है कि महाकवि की लेखनी कल्पतरु की सुकुमार शाखा की बनी थी। वे कामधेनु के नवनीत को जला कर मसी बनाते थे । उसमें अमृत की धार उड़ेल कर उसे तरल करते थे। फिर भूर्ज-पत्र के अतिपावन खण्डों पर, शारदी कौमुदी के पुनीत वितान के नीचे बैठ कर, अपने काव्य का श्रीगणेशाय नमः करते थे। यदि यह बात न होती तो उनके काव्य में द्राक्षा की माधुरी, ज्योत्स्ना की स्निग्धता तथा कुन्द की मादक सुरभि की उमड़ती त्रिवेणी का पावन सङ्गम कैसे होता ? मेघदूत महाकवि की प्रतिभा का अनुपम अखण्ड फल है। यह काव्य अकेली वह सीढ़ी है, जिस पर चढ़कर कालिदास विश्व-महाकवि-परिषद् के सर्वोच्च सिंहासन पर विराजमान हुए थे । किन्तु ऐसा विश्ववन्द्य कवि कब और कहाँ हुआ ? इसे सही-सही सिद्ध कर पाना इतिहासकारों के लिए आज भी जटिल समस्या है ।
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