Kalyan Books
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
(Abridged Varah Puran (Code1361)
इस पुराण में भगवान् श्रीहरि के वराह अवतार की मुख्य कथा के साथ अनेक तीर्थ, व्रत, यज्ञ, दान आदि का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस में भगवान् नारायण का पूजन-विधान, शिव-पार्वती की कथाएँ, वराहक्षेत्रवर्ती आदित्यतीर्थों की महिमा, मोक्षदायिनी नदियों की उत्पत्ति और माहात्म्य एवं त्रिदेवों की महिमा आदिपर भी विशेष प्रकाश डाला गया है। कल्याण में प्रकाशित इस पुराण को बड़े टाइप में विभिन्न चित्रों और आकर्षक लेमिनेटेड आवरण-पृष्ठ के साथ प्रकाशित किया गया है।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Abridged Shrimad Devibhagvat (Code1133)
यह पुराण परम पवित्र वेद की प्रसिद्ध श्रुतियों के अर्थ से अनुमोदित, अखिल शास्त्रों के रहस्य का स्रोत तथा आगमों में अपना प्रसिद्ध स्थान रखता है। यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पाँचों लक्षणों से पूर्ण हैं। पराम्बा भगवती के पवित्र आख्यानों से युक्त यह पुराण त्रितापों का शमन करने वाला तथा सिद्धियों का प्रदाता है।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Agni Puran (Code1362)
विषय की विविधता एवं लोकोपयोगिता की दृष्टि से इस पुराण का विशेष महत्त्व है। इस में परा-अपरा विद्याओं का वर्णन, महाभारत के सभी पर्वों की संक्षिप्त कथा, रामायण की संक्षिप्त कथा, मत्स्य, कूर्म आदि अवतारों की कथाएँ, सृष्टि-वर्णन, दीक्षा-विधि, वास्तु-पूजा, विभिन्न देवताओं के मन्त्र आदि अनेक उपयोगी विषयों का अत्यन्त सुन्दर प्रतिपादन किया गया है।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Bhagvannam Mahima Aur Prarthna Ank(Code1135)
यह विशेषांक भगवन्नाम-महिमा एवं प्रार्थना के अमोघ प्रभाव का सुन्दर विश्लेषक है। इसमें विभिन्न सन्त-महात्माओं, विद्वान् विचारकों के भगवन्नाम-महिमा एवं प्रार्थना के चमत्कारों के सन्दर्भ में शास्त्रीय लेखों का सुन्दर संग्रह है। इसके अतिरिक्त इसमें कुछ भक्त-सन्तों के नाम-जप से होनेवाले सुन्दर अनुभवों का भी संकलन किया गया है।
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Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)
Garga Samhita (Set of 2 Volumes)
Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)Garga Samhita (Set of 2 Volumes)
आज से अड़तालीस वर्ष पहले जब में गुरुदेव स्वर्गीय श्रीदामोदरलाल गोस्वामीजीके पास काव्य प्रकाश पढ़ता था तो एक दिन एक गुर्जरविद्वान् और परम वैष्णव श्रीलाड़िलीलालजी पधारे। सभी वेदों, पुराणों और छहों शास्त्रोंपर उनका अनोखा अधिकार था। गुरुदेव और उनमें जब धारावाहिक संस्कृतमें वार्तालाप होनेका क्रम चला तो मैं मंत्रमुग्ध होकर सुनने लगा । प्रसंग था श्रीमद्भागवतकी रासपंचाध्यायीका । धीरे-धीरे वे दोनों श्रीमद्भागन्दले श्रीगर्गसंहितापर उतर गये और उसके सरस प्रसंगोंपर ऊहापोह होने लगा। दोके दोनों जैसे अपने ज्ञानका खजाना खोलकर बैठ गये थे। जब कभी कोई संशयका प्रसंग आता तो गुरुदेव गोस्वामीजीके संकेतपर मैं सम्बद्ध ग्रन्थ उनकी इलमारीसे निकालकर दे देता था। विशेषता यह थी कि इतने जटिल प्रसंगपर दोनोंके परिसंवादमें तल्खी नाममात्रको भी नहीं दिख रही थी। कभी-कभी कोई रुचिकर बात आनेपर दोनों ठठाकर हँसते, परस्पर एक दूसरेको वाहवाही देते और पानकी गिलौरी जमाकर फिर अपने-अपने विषयकी व्युत्पत्तिपर डट जाते थे। यह क्रम लगभग तीन घंटे चला। उन ऋषितुल्य महानुभावोंका वह सरस और मृदुल संवाद मेरे जीवनका सम्बल बन गया
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Shrimad Devibhagvat Mahapuranam
यह पुराण परम पवित्र वेद की प्रसिद्ध श्रुतियों के अर्थ से अनुमोदित, अखिल शास्त्रों के रहस्य का स्रोत तथा आगमों में अपना प्रसिद्ध स्थान रखता है। यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पाँचों लक्षणों से पूर्ण हैं। पराम्बा भगवती के पवित्र आख्यानों से युक्त यह पुराण त्रितापों का शमन करने वाला तथा सिद्धियों का प्रदाता है।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Shrivishnu Puran 48
श्री पराशर ऋषि-प्रणीत यह पुराण अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इसके प्रतिपाद्य भगवान् विष्णु हैं, जो सृष्टि के आदिकारण, नित्य, अक्षय, अव्यय तथा एकरस हैं। इसमें आकाश आदि भूतों का परिमाण, समुद्र, सूर्य आदि का परिमाण, पर्वत, देवतादि की उत्पत्ति, मन्वन्तर, कल्प-विभाग, सम्पूर्ण धर्म एवं देवर्षि तथा राजर्षियों के चरित्र का विशद वर्णन है। भगवान् विष्णु प्रधान होने के बाद भी यह पुराण विष्णु और शिव के अभिन्नता का प्रतिपादक है।
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Gita Press, Hindi Books, रामायण/रामकथा
Visheshank – AnandRamayan Ank
इस विशेषांक के साथ साल के शेष 11 मासिक अङ्क भी रजिस्टर्ड डाक से भेजे जायेंगे। मासिक अंकों का कोई अतिरिक्त मूल्य देय नहीं है। इस विशेषांक में 480 पृष्ठों में पाठ्य-सामग्री, 8 पृष्ठों में विषय सूची एवम् अंत में गीता प्रेस से प्रकाशित पुस्तकों की सूची है। कई बहुरंगे एवम् रेखाचित्र भी दिए गये हैं। यह पुस्तक मोटे जिल्द में है।
आनन्द रामायण राम कथा का एक प्राचीन एवं विलक्षण ग्रंथ है। अन्य रामायाणों में जहाँ भगवान श्रीराम के आविर्भाव से लेकर उनके राज्यारोहण तक की लीलाओं का ही प्रायः गुण गान हुआ है, वहीं नौ काण्डों में विभक्त आनन्द रामायण में राजाधिराज प्रभु श्री राम जी के ग्यारह हजार वर्षों के राज्यकाल की अनुपम लीलाओं का चित्रण है। इसमें भगवान श्री राम की ऐसी-ऐसी रोमांचक कथाएँ हैं, जिनका अन्यत्र कहीं विवरण नहीं मिलता। इसकी कथाएँ अत्यंत नवीन, मन को आह्लादित करने वाली तथा भक्ति को बढ़ाने वाली हैं।
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