श्री गुरुदत् की सशक्त लेखनी से लिखी 200 के लगभग अनुपम उपन्यासों में से चुनकर दस खण्डों में प्रकाशित रचनाएं।
Mahabharat Books
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
1000 Mahabharat Prashnottari
-10%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता1000 Mahabharat Prashnottari
1000 Mahabharat Prashnottari
क्या आप जानते हैं-‘ वह कौन पांडव वंशज था, जिसने एक बार अनजाने में ही भीम को मल्ल-युद्ध में पराजित कर दिया था ‘, ‘ धृतराष्ट्र का वह कौन पुत्र था, जो महाभारत युद्ध में जीवित बच गया था ‘, ‘ किस वीर से युद्ध करते हुए अर्जुन की मृत्यु हो गई थी ‘, ‘ द्रौपदी को ‘ याज्ञसेनी ‘ क्यों कहते थे ‘, ‘ हस्तिनापुर का नाम ‘ हस्तिनापुर ‘ कैसे पड़ा ‘, ‘ महाभारत युद्ध में कुल कितने योद्धा मारे गए थे ‘, ‘ उस अस्त्र को क्या कहते हैं, जिसके प्रयोग करने पर पत्थरों की वर्षा होने लगती थी ‘ तथा ‘ एक ब्रह्मास्त्र को दूसरे ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दबा देने से कितने वर्षों तक वर्षा नहीं होती थी?’ यदि नहीं, तो ‘ महाभारत प्रश्नोत्तरी ‘ पढ़ें । आपको इसमें इन सभी और ऐसे ही रोचक, रोमांचक, जिज्ञासापूर्ण व खोजपरक 1000 प्रश्नों के उत्तर जानने को मिलेंगे ।
इस पुस्तक में भीष्म, द्रोण, कर्ण, अर्जुन, भीम एवं अभिमन्यु जैसे पराक्रमियों के अद्भुत शौर्य का वर्णन तो है ही, विभिन्न शस्त्रास्त्रों, दिव्यास्त्रों एवं उनके प्रयोगों और प्रयोग के पश्चत् परिणामों की जानकारी भी दी गई है । इसके अतिरिक्त महाभारतकालीन नदियों, पर्वतों, राज्यों, नगरों तथा राज्याधिपतियो का सुस्पष्ट संदर्भ भी जानने को मिलता है । साथ ही लगभग दो सौ विभिन्न पात्रों के माता, पिता, पत्नी, पुत्र- पुत्री, पितामह, पौत्र, नाना, मामा आदि संबंधों का खोजपरक विवरण भी ।
यह पुस्तक आम पाठकों के लिए तो महत्त्वपूर्ण है ही, लेखकों संपादकों पत्रकारों वक्ताओं, शोधार्थियों, शिक्षकों व विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है । वस्तुत: यह महाभारत का संदर्भ कोश है ।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
Mahabharat : Ek Darshan
-15%
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीताMahabharat : Ek Darshan
महाभारत केवल रत्नों की ही खान नहीं है, असंख्य प्रश्नों की भी खान है। इस महाग्रंथ की कई घटनाएँ और कई कथानक सामान्य पाठक को ही नहीं, अध्ययनशील सुधीजनों को भी ‘यह ऐसा क्यों’ जैसे प्रश्न के साथ उलझा देते हैं। ऐसे अनेक प्रश्न/जिज्ञासाएँ चुनकर इस पुस्तक में संकलित की गई हैं और यथासंभव शुद्ध मन-भावना के साथ उनके निदान/ समाधान का प्रयास किया गया है। इस चर्चा का प्रधान केंद्र वर्तमान संदर्भ रहा है, यह इस ग्रंथ की विशेषता है।
वैसे तो महाभारत की अन्य वैश्विक धर्मग्रंथों के साथ तुलना नहीं कर सकते, क्योंकि महाभारत किसी विशेष धर्म का ग्रंथ नहीं है। महाभारत मानव व्यवहार का शाश्वत ग्रंथ है और सच कहा जाए तो विश्व के सभी धर्मों का निचोड़ है। धर्मसंकट का व्यावहारिक हल सुझाते हुए श्रीकृष्ण कहते हैं, ‘‘हे अर्जुन, धर्म और सत्य का पालन उत्तम है, किंतु इस तत्त्व के आचरण का यथार्थ स्वरूप जानना अत्यंत कठिन है।’’
सत्य-असत्य, धर्म-अधर्म, जीवन-मृत्यु, पाप-पुण्य, इत्यादि द्वंद्वों को कथानकों और घटनाओं के माध्यम से इस ग्रंथ में निर्दिष्ट किया गया है।
महाभारत के वैशिष्ट्य और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उसकी प्रासंगिकता तथा व्यावहारिकता पर प्रकाश डालती पठनीय पुस्तक।SKU: n/a -
Hindi Books, Rajpal and Sons, कहानियां, सही आख्यान (True narrative)
Mahabharat Katha
यशपाल की गणना हिन्दी साहित्य के निर्माताओं में की जाती है। एक विचारधारा से जुड़े होने पर भी उनकी कहानियाँ और उपन्यास-जिनकी संख्या काफी है-बहुत लोकप्रिय हुए और उन्होंने अपने ढंग से साहित्य को गहराई से प्रभावित किया। प्रस्तुत संकलन में उन्होंने स्वयं अपने अनेक कहानी संग्रहों में से चुनकर श्रेष्ठ कहानियाँ दी हैं तथा भूमिका में अपने लेखन तथा विचारों पर प्रकाश डाला है।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Mahabharat Khilbhag – Shri Harivansh Puran (Code 38)
श्रीहरिवंशपुराण वेदार्थ-प्रकाशक महाभारत ग्रन्थ का अन्तिम पर्व है। पुत्र प्राप्ति की कामना से श्रीहरिवंशपुराण के श्रवण की परम्परा भारतवर्ष में चिरकाल से प्रचलित है। अनन्त भावुक धर्मपराण लोग इसके श्रवण से पुत्र-प्राप्ति का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भगवद्भक्ति तथा प्रेरणादायी कथानकों की दृष्टि से भी इसका बड़ा महत्व है। भगवान् श्रीकृष्ण से सम्बन्धित अगणित कथाएँ इसमें ऐसी हैं, जो अत्यन्त दुर्लभ हैं। धार्मिक जन-सामान्य के कल्याणार्थ इसके अन्त में सन्तानगोपाल-मन्त्र, अनुष्ठान-विधि, सन्तान-गोपाल-यन्त्र, सन्तान-गोपालस्तोत्र भी संगृहीत हैं। सचित्र, सजिल्द।
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Garuda Prakashan, Hindi Books, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
Mahabharat ki Kahani, Vigyan Ki Jubani (HB)
-15%
Garuda Prakashan, Hindi Books, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीताMahabharat ki Kahani, Vigyan Ki Jubani (HB)
यह पुस्तक प्राचीन भारत के इतिहास के विषय में सैंकड़ो वर्षों से बनी गलत धारणओं को दूर कर पाठकों को महाकाव्यों के युग को भारतवर्ष का वास्तविक व स्वर्णिम इतिहास मानने के लिए विवश कर देगी। इस पुस्तक में सटीक तिथियों के साथ महाभारत युद्ध की महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन है। बावन वर्षों की अवधि में देखे गए अनुक्रमिक खगोलीय संदर्भों के आकाशीय दृश्यों के माध्यम से सिद्ध किया गया है कि महाभारत का युद्ध 3139 वर्ष ईसा पूर्व में लड़ा गया था। देखें जब श्री कृष्ण अर्जुन को मार्गशीर्ष मास में गीता का उपदेश दे रहे थे तो आकाश कैसा दिखाई दे रहा था। युद्ध से पहले कार्तिक पूर्णिमा को प्लैनेटेरियम सॉफ्टवेयर ने दिखाया चंद्रग्रहण तथा उसी कार्तिक मास की अमावस्या को दिखाई दिया सूर्यग्रहण। इस ग्रहण से केवल छः घंटे पहले सातों ग्रहों की स्थितियां सोलह नक्षत्रों के सम्बन्ध में बिल्कुल वैसी थीं जैसी महाभारत के भीष्मपर्व के अध्याय तीन में वर्णित की गई हैं। देखें कैसे पुरातात्त्विक प्रमाण खगोलीय तिथियों का समर्थन करते हैं। इस पुस्तक की सबसे बड़ी उपलब्धि वो मानचित्र है, जिसमें महाभारत युद्ध में भाग लेने वाले सभी राज्यों की भौगोलिक स्थितियां, उन में स्थित लगभग 3000 वर्ष ईसा पूर्व की कार्बन तिथियों वाले पुरातात्त्विक स्थलों की जीपीएस प्लोटिंग के साथ दी गई है। यह मानचित्र निस्संदेह हमें यह निष्कर्ष निकालने के लिए विवश करता है कि हड़प्पा स्थलों के रूप में वर्णित किए जाने वाले स्थान वास्तव में महाभारत काल के वैदिक स्थल थे। भारतीय सभ्यता के विकास की प्रक्रिया 5100 वर्ष से भी पहले से निरंतर चली आ रही है। पुरावनस्पतिक अध्ययन बतातें हैं कि महाभारत में वर्णित पौधे 5000 वर्ष पहले भारत में विद्यमान थे।
19 फरवरी 3102 वर्ष ईसा पूर्व की सुबह कलियुग के प्रारंभ को दर्शाता हुआ आकाश देख कर पाठक गर्व का अनुभव कर सकते हैं कि कैसे उनके हजारों वर्ष पुराने विश्वास आज विज्ञान के माध्यम से सत्य सिद्ध हो रहे हैं।
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Govindram Hasanand Prakashan, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
Mahabharatam (HB)
महाभारत धर्म का विष्वकोष है। व्यास जी महाराज की घोषणा है कि ‘जो कुछ यहां है, वही अन्यत्र है, जो यहां नहीं है वह कहीं नहीं है।‘ इसकी महत्ता और गुरुता के कारण इसे पन्चम वेद भी कहा जाता है।
लगभग 16000 श्लोकों में सम्पूर्ण महाभारत पूर्ण हुआ है। श्लोकों का तारतम्य इस प्रकार मिलाया गया है कि कथा का सम्बन्ध निरन्तर बना रहता है। इस पुस्तक में आप अपने प्राचीन गौरवमय इतिहास की, संस्कृति और सभ्यता की, ज्ञान-विज्ञान की, आचार-व्यवहार की झांकी देख सकते हैं।
यदि आप भ्रातृप्रेम, नारी का आदर्ष, सदाचार, धर्म का स्वरुप, गृहस्थ का आदर्ष, मोक्ष का स्वरुप, वर्ण और आश्रमों के धर्म, प्राचीन राज्य का स्वरुप आदि के सम्बन्ध में जानना चाहते हैं तो एक बार इस ग्रन्थ को अवश्य पढ़ें।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, कहानियां, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
Panch Pandav
प्रस्तुत पुस्तक पाँच पांडवों के व्यक्तित्व तथा उनके जीवन पर आधारित है। महाभारत के अनुसार पाँचों पांडव राजा पांडु के पुत्र थे। सबसे बड़े पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर, भीमसेन तथा अर्जुन पांडु की पहली पत्नी रानी वुंक्तती से उत्पन्न हुए तथा नकुल और सहदेव राजा पांडु की दूसरी रानी माद्री के पुत्र थे। पाँचों पांडवों का लालन-पान रानी वुंक्तती ने ही किया था। बचपन से ही पाँचों पांडव शूरवीर, बलशाली, नीतिवान, बुद्धिमान तथा विवेकी थे। महाभारत में पाँचों पांडवों के जीवन से जुड़ी अनेक कथाएँ प्रचलित हैं, जिनके माध्यम से इनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया है।
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Gita Press, Hindi Books, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
SANKSHIPT MAHABHARAT (Vol-1 & 2)
Mahabharat is considered as Fifth Ved. It has been hailed by critics in literary world as encyclopedia of Indian knowledge. It contains knowledge, reclusion, Bhakti-Yog, values, ethics, ancient history, politics, diplomacy etc. This synopsis of Mahabharat has been published so that everyone gets acquainted with unfathomable knowledge contained in it. Hard bound with illustration (in two volumes).
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English Books, Parimal Publications, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
The Complete Mahabharata Set Of 9
-10%
English Books, Parimal Publications, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीताThe Complete Mahabharata Set Of 9
The Mahabharata is a curious mixture of history and mythology, though the former aspect is the subject of grave doubts in the minds of the professional historians. This is called the fifth Veda and it is universally acknowledged to be of pre-eminent importance. It extols its greatness itself in the following words: yad ihasti tad anyatra yan nehasti na tat kvacit (whatever is here is also elsewhere; whatever is not here is extant nowhere). It contains not only the celebrated Gita but also a large number of other texts, which are themselves independent treatises. It is a valuable product of the ancient Indian literature of the post-Vedic age and seems to go back to the prehistoric stage of the human society.
This is first time that English translation with Sanskrit text is being published. The translation is based on M.N. Dutta, which is very lucid and accurate according to the Sanskrit text. It was translated according to that time available text of Kolkata edition. However, this text is not available now and we have arranged it through the text of Chitrashala Press, Pune, which is an authentic and complete text of the Mahabharata. And according to this, sometimes, we do not find the translation of many slokas, that translation has been completed by the editors.
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Gita Press, Suggested Books, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
The Complete Mahabharata – (Six Volumes) | महाभारत सटीक (छ: खण्डो में)
Gita Press, Suggested Books, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीताThe Complete Mahabharata – (Six Volumes) | महाभारत सटीक (छ: खण्डो में)
विश्व के उत्कृष्ट विचारकों, तत्त्वान्वेषकों, समालोचकों द्वारा भारतीय ज्ञान के विश्वकोश के रूप में समादृत महाभारत की महिमा का कोई पार नहीं है। इसमें ज्ञान, वैराग्य, भक्तियोग, नीति, सदाचार, प्राचीन इतिहास, राजनीति, कूटनीति आदि-मानव जीवनोपयोगी विविध विषयों का समावेश है। यह शास्त्रों में पंचम वेद की मान्यता से अलंकृत है।
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English Books, Penguin, इतिहास, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
The Mahabharata (Box Set)
The greatest Indian story ever told of a war between two factions of a family, The Mahabharata has continued to sway the imagination of its readers over the past centuries.
While the dispute over land and kingdom between the warring cousins-the Pandavas and the Kauravas-forms the chief narrative, the primary concern of The Mahabharata is about the conflict of dharma. These conflicts are immense and various, singular and commonplace. Throughout the epic, characters face them with no clear indications of what is right and what is wrong; there are no absolute answers. Thus every possible human emotion features in The Mahabharata, the reason the epic continues to hold sway over our imagination.
The complete and unabridged Sanskrit classic, now masterfully and accessibly rendered for contemporary readers by Bibek Debroy.
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