Mamta Mehrotra
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)
Devalaya Darshan
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, Suggested Books, इतिहास, ऐतिहासिक नगर, सभ्यता और संस्कृति, सही आख्यान (True narrative)Devalaya Darshan
“भारत के हृदय में परंपरा और आध्यात्मिकता एक-दूसरे से सहज रूप से जुड़ी हुई हैं। कुछ सबसे आकर्षक और पूजनीय मंदिर हैं, जो हमारी आस्था व श्रद्धा का केंद्र हैं। देश के विशाल विस्तार में फैले ये मंदिर भक्ति, वास्तुशिल्प चमत्कार और भारत की गहरी जड़ें जमा चुकी सांस्कृतिक विरासत की कहानियाँ बताते हैं। प्रत्येक मंदिर के पास बताने के लिए एक कहानी है, सुलझाने के लिए एक किंवदंती है और एक आध्यात्मिक परिवेश है, जो आत्मा को मंत्रमुग्ध कर देता है। इस पुस्तक, ‘देवालय दर्शन’ में हम इन मंदिरों के पवित्र गलियारों के माध्यम से एक आकर्षक यात्रा शुरू करते हैं; उन रहस्यों, किंवदंतियों और ऐतिहासिक महत्त्व को उजागर करते हैं, जिनसे भारत की आस्था और संस्कृति की समृद्ध छवि के प्रतीक रेखांकित होते हैं।
प्राचीन परंपराओं के रहस्यों, मंदिरों की स्थापत्य कला, लाखों भक्तों को श्रद्धा एवं भक्ति के सूत्र में बाँधनेवाली अटूट आस्था से मंत्रमुग्ध होने के लिए तैयार हो जाइए। इस आध्यात्मिक यात्रा में सहयात्री बनकर इन रोचक कहानियों का आनंद लें, जो इन मंदिरों को सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत का भंडार बनाती हैं।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीता
Gita Prashnottari
Hindi Books, Prabhat Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, महाभारत/कृष्णलीला/श्रीमद्भगवद्गीताGita Prashnottari
“गीता’ वह ईश्वरीय वाणी है, जिसमें धर्म संवाद के माध्यम से—मैं कौन हूँ? यह देह क्या है? इस देह के साथ क्या मेरा आदि और अंत है? देह त्याग के पश्चात् क्या मेरा अस्तित्व रहेगा? यह अस्तित्व कहाँ और किस रूप में होगा? मेरे संसार में आने का क्या कारण है? मेरे देह त्यागने के बाद क्या होगा, कहाँ जाना होगा, इन सभी के प्रश्नों के उत्तर भगवान् श्रीकृष्ण ने बड़े सहज ढंग से दिए हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने स्वभावगत कर्म में लगे रहने को ‘श्रेष्ठ योग’ कहा है। उनके अनुसार, कर्म अवश्यंभावी है। बिना कर्म के मुक्ति पाना तो दूर, मनुष्य बनना भी कठिन है। स्वाभाविक कर्म करते हुए बुद्धि का अनासक्त होना सरल है।
इस प्रकार, ‘गीता’ ज्ञान का भंडार है। इसमें सात सौ श्लोक और अठारह अध्याय हैं। इसके उपदेश को सरलता और सहजता से समझाने के लिए मैंने इसे अध्याय-दर- अध्याय प्रश्नोत्तरी फॉरमेट में प्रस्तुत किया है, ताकि बड़ों के साथ-साथ स्कूल- कॉलेज के विद्यार्थी भी क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से इसके संदेश को खेल-खेल में ही ग्रहण कर लें।”
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