Premchand Books
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Vani Prakashan, उपन्यास
Ghaban
ग़बन का कथानक मुख्यतः मध्य वर्ग में दिखावे की आदत के दुष्परिणामों पर आधारित है। सामाजिक रूढ़ियों की गर्द तथा स्त्रियों में गहनों की चाहत को एक दिलचस्प कथासूत्र में बाँधा गया है। साथ ही, यह लोकप्रिय उपन्यास स्वतंत्रता संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर भी रोशनी डालता है।
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Hindi Books, अन्य कथा साहित्य, इतिहास, कहानियां
Kafan aur anye Kahaniyaan
प्रेमचंद निस्संदेह हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार थे जिनकी गणना विश्वस्तरीय साहित्यकारों में होती है। अपने जीवनकाल में उन्होंने 250 से अधिक कहानियाँ लिखीं जो मुख्यतः उस समय के समाज के यथार्थ को दर्शाती हैं। इनमें बालविवाह, गरीबी, भुखमरी, ज़मींदारों के अत्याचार के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है। यथार्थ की इन सच्चाईयों से रू-ब-रू कराती कहानियों को पढ़ते हुए पाठक पूरी तरह से उनमें खो जाता है। ये कहानियाँ आज भी उतनी ही सामयिक हैं जितनी सौ साल पहले थीं। कहानियों के अतिरिक्त प्रेमचंद ने चौदह उपन्यास और अनगिनत निबंध लिखे। उन्होंने अन्य भाषाओं की कुछ पुस्तकों को भी हिन्दी में अनूदित किया।
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Prabhat Prakashan, उपन्यास
Karmbhoomi
कर्मभूमि प्रेमचंद का राजनीतिक उपन्यास है। इस उपन्यास में विभिन्न राजनीतिक समस्याओं को कुछ परिवारों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। ये परिवार अपनी पारिवारिक समस्याओं से जूझते हुए भी राजनीतिक आन्दोलन में भाग ले रहे हैं। लेखक ने उपन्यास के सभी चरित्रों द्वारा राष्ट्रीय चेतना, आदर्श पारिवारिक व्यवस्था आदि में गाँधी दर्शन स्पष्ट किया है।
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Vani Prakashan, उपन्यास
Kayakalp
कायाकल्प प्रेमचंद का एकमात्र उपन्यास है जिसमें चमत्कार की महिमा दिखाई गई है और पूर्वजन्म को कथा का आधार बनाया गया है। लेकिन इस उपन्यास के ज़ोरदार हिस्से वे हैं जहाँ प्रेमचंद ने हाड़-मांस के आदमियों के जीवन पर दृष्टि केंद्रित कर उनके चरित्रों की अच्छाइयों और बुराइयों का चित्रण किया है। कथाकारों ने जनता के दमन की कथा पहले भी लिखी थी। इस उपन्यास की खूबी यह है कि जनता दमन से आतंकित न हो कर उसका मुकाबला करने के लिए आगे बढ़ती है। धर्म की आड़ में होने वाले सांप्रदायिक दंगों का भी असरदार चित्रण है।
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Vani Prakashan, उपन्यास
NIBANDHON KI DUNIYA
प्रेमचन्द का रचना-कर्म साहित्य और जीवन की दूरी पाटने की मुहिम है। उनका समस्त लेखन अपने परिवेश के प्रति जागरूक, उस रचनाकार की अभिव्यक्ति है जिसके विचारों में सत्य की ऊर्जा है और दृष्टि में परिवर्तन की चाह। वे आजीवन मानते रहे कि साहित्य वह मशाल है जिसकी रोशनी सामाजिक जीवन की राहों में उजाला करती है। वह समाज का अनुसरण ही नहीं करती बल्कि उसका दिशा निर्देश करती है। प्रेमचन्द का साहित्य जीवन के उच्चादर्शों, सामाजिक सचाइयों, राष्ट्रीय-सांस्कृतिक एकता के गौरवपूर्ण बिन्दुओं से झलमलाता है। सुलझी हुई सामाजिक समझ और मानवीय गरिमा के उन्नयन की बेचैनी, उन्हें हम सबका अपना लेखक बनाती है जिन पर न केवल हिन्दी साहित्य को बल्कि समूची भारतीय परम्परा को नाज़ है।
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Rajpal and Sons
Premashram PB
“‘‘प्रेमाश्रम किसान-जीवन का महाकाव्य है। उसमें उस जीवन का एक पहलू नहीं दिखाया गया, वह विशाल नदी की तरह है जिसमें मूल धारा के साथ आसपास के नालों का पानी, जड़ से उखड़े हुए पुराने खोखले पेड़ और खेतों का घासपात भी बहता हुआ दिखाई देता है। इसे उपन्यास-रचना के साधारण नियम तोड़कर रचा गया है। कौन है इसका नायक, कौन है इसकी नायिका? प्रेमचंद ने बेगार करनेवाले, हल जोतनेवाले, प्लेग और सरकार का मुकाबला करनेवाले किसानों को नायक बना दिया। प्रेमचंद हमें ठेठ किसानों के बीच ले जाते हैं। उनके अलावा, उनके खेत और ताल, उनके अखाड़े और लावनी-ख्याल, उनके अंधविश्वास और नए जीवन के कसमसाते हुए भावांकुर-प्रेमाश्रम में यह सब कुछ सजीव है, उसके पृष्ठों में इतिहास जी रहा है। प्रेमचंद किसानों की प्राचीन परंपरा दिखाते हैं तो यह भी कि कहाँ उनकी कड़ियाँ टूट रही हैं। प्रेमचंद की कला इस बात में है कि वे हिन्दुस्तान के बदले हुए किसान का चित्र खींच सके हैं। घटनाएँ साधारण हैं लेकिन उनसे वह अपने पात्रों का पुरानापन और नयापन, उनको पीछे ठेलनेवाली और आगे बढ़ाने वाली विशेषताएँ प्रकट करते हैं। पहाड़ की तस्वीर खींचना आसान है, नदी के बहाव को चित्रित करना मुश्किल। प्रेमचंद ने यथार्थ के बहाव को पकड़ लिया है। उसे उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए प्रेमाश्रम में सुरक्षित कर दिया है।’’ – रामविलास शर्मा ‘प्रेमचंद और उनका युग’ पुस्तक से”
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Hindi Books, Rajpal and Sons, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Premchand Ki Dalit Kathayen
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Hindi Books, Rajpal and Sons, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Premchand Ki Dalit Kathayen
“इस पुस्तक में प्रेमचंद की 15 ऐसी कहानियाँ हैं जिनके केन्द्र में जाति का सवाल और उससे उत्पन्न होते भेदभाव की समस्याएँ हैं। लगभग एक सौ साल पहले लिखी ये कहानियाँ, आज भी प्रासंगिक बनी हुई हैं, क्योंकि जाति के कारण उत्पीड़न की घटनाएँ अब भी आए दिन हो रही हैं। इस संकलन का उद्देश्य है कि प्रेमचंद की ऐसी कहानियाँ सामने आएँ जो इस दौर में भी दलित प्रश्नों पर समुचित विचार करती हों। प्रेमचंद ने मनुष्य के मूल स्वभाव को समझते हुए अनेक मूल्यवान चरित्र इन कहानियों में रचे हैं जो दलित समस्या के प्रति हमें जागरूक और अधिक संवेदनशील बनाते हैं। हिन्दी साहित्य के सुपरिचित अध्येता, आलोचक और संपादक डॉ. पल्लव ने प्रेमचंद की कहानियों का यह संकलन तैयार किया है और एक लम्बी भूमिका भी लिखी है। उनकी अनेक मौलिक संपादित किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें ‘प्रेमचंद की व्यंग्य कथाएँ’, ‘प्रेमचंद की स्वतंत्रता संग्राम कथाएँ’ तथा ‘एक दो तीन’ उल्लेखनीय हैं। साहित्य संस्कृति के संचयन ‘बनास जन’ का संपादन कर रहे डॉ. पल्लव को 2008 का भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का ‘युवा पुरस्कार’, 2012 का ‘आचार्य निरंजननाथ प्रथम कृति सम्मान’ तथा 2018 का ‘राजस्थान पत्रिका सृजन पुरस्कार’ सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। 2010 से डॉ. पल्लव दिल्ली के प्रतिष्ठित हिन्दू कॉलेज में कार्यरत हैं।”
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Hindi Books, Rajpal and Sons, सही आख्यान (True narrative)
Premchand Ki Vyangya Kathayen
‘‘कहानी फ़ुरसत की चीज़ है। काम-धाम से छुट्टी पाकर सुनने की चीज़। जल्दबाज़ी से काम बिगड़ जाता है। प्रेमचंद के कहानी कहने में यह फ़ुरसत का भाव मिलता है। वह कहानी सुनाते हैं। अक्सर लच्छेदार ज़बान में, वाक्यों को स्वाभाविक गति से फैलने की आज़ादी देकर, अंग्रेज़ी बाग के माली की तरह उनकी डालियाँ और पत्ते कतरकर नहीं, फूलों और पत्तों को हवा में बढ़ने और लहराने की आज़ादी देकर। ज़िन्दगी के अनुभवों पर टीका-टिप्पणी भी साथ में चला करती है, व्यंग्य, अनूठी उपमाएँ और हास्य बीच-बीच में पाठक को गुदगुदाते हैं।’’ – डॉ. रामविलास शर्मा, सुप्रसिद्ध आलोचक गुदगुदाती पन्द्रह कहानियों का संकलन है इस पुस्तक में। प्रेमचंद हिन्दी के सबसे लोकप्रिय लेखक हैं जिनकी पुस्तकें आज भी हर वर्ग और उम्र के पाठक बहुत शौक से पढ़ते हैं। इन कथाओं में जहाँ गुदगुदाने वाला हास्य है वहीं सामाजिक विडम्बनाओं पर तीखा व्यंग्य भी। प्रेमचंद के विशाल कथा साहित्य से चुनकर इन कहानियों को डॉ. पल्लव ने प्रस्तुत किया है। समर्थ गद्य आलोचक पल्लव की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। वे दिल्ली के प्रसिद्ध हिन्दू कॉलेज में पढ़ाते हैं।
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Prabhat Prakashan, उपन्यास
Rangbhoomi
रंगभूमि प्रेमचंद के प्रमुख उपन्यासों में है। इसकी रचना महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर की गई थी। ‘रंगभूमि’ का नायक सूरदास न्याय के लिए आजीवन संघर्ष करता है, फिर भी उसके मन में किसी के प्रति कटुता नहीं है। यह उपन्यास भारत में औद्योगिक संस्कृति की शुरुआत के दौरान साधारण जन की कठिनाइयों का बेबाक चित्रण करता है।
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