Puran
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Abridged Shrimad Devibhagvat (Code1133)
यह पुराण परम पवित्र वेद की प्रसिद्ध श्रुतियों के अर्थ से अनुमोदित, अखिल शास्त्रों के रहस्य का स्रोत तथा आगमों में अपना प्रसिद्ध स्थान रखता है। यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पाँचों लक्षणों से पूर्ण हैं। पराम्बा भगवती के पवित्र आख्यानों से युक्त यह पुराण त्रितापों का शमन करने वाला तथा सिद्धियों का प्रदाता है।
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Hindi Books, Kalpana Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)
Bhagavan Parshuram Puran
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Hindi Books, Kalpana Prakashan, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)Bhagavan Parshuram Puran
भारतीय दर्शन-परम्परा में ब्रह्म और जीव का सम्बन्ध नित्य माना गया है। एक आस्था के अनुसार, जीव ब्रह्म का ही सूक्ष्म रूप है, उसी ब्रह्म से उसका जन्म होता है और मृत्यु के पश्चात् उसी ब्रह्म में विलीन होकर उसकी मुक्ति होती है। दूसरी आस्था के अनुसार, वह करुणामयी जब अपने ही प्रतिरूप जीव को मायावी जगत में किसी विपत्ति में देखता है तो उसे त्राण दिलाने के लिए वह स्वयं अवतारी रूप में प्रकट होता है और अपने भक्तों का उद्धार करता है। अब जगत, क्योंकि मूलतः माया के प्रसार का आधार है और जीव अपनी अबोधता, अज्ञानता व चंचलता के कारण बार-बार उसमें डूब जाता है, इसलिए हर-बार ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती है कि ईश्वर को इस धरती पर आना पड़ता है। इसीलिए भारतीय सांस्कृतिक परम्परा में अवतारवाद की संकल्पना की गई। ब्रह्मा, विष्णु, महेश में से क्योंकि विष्णु ही इस जगत के पालक देव है, इसीलिए उन्हें ही अपने कर्त्तव्य निर्वाह के लिए हर बार अवतार लेना पड़ता है। मूलतः इन अवतारों की संख्या दस मानी गई थी, किन्तु बाद में विष्णु के 24 अवतारों को मान्यता दे दी गई। इसके अनेक कारण रहे।
विष्णु के दस अथवा चौबीस अवतारों में मात्र एक अवतार परशुराम का ऐसा है जिसे चिरंजीवी होने का भी वरदान प्राप्त है, अन्यथा शेष सभी अवतार इस पृथ्वी पर अपना कार्य सम्पन्न करने के पश्चात् वापिस देव लोक को लौट गये। इस दृष्टि से परशुराम जी का अस्तित्व शेष सभी अवतारों से कहीं अधिक गुरू है। विभिन्न युगों (सत्य, त्रेता, द्वापर, कलि युग) की भारतीय पौराणिक धारणा में यद्यपि यह पहले से ही अन्तर्च्यूत है कि धर्म इन युगों में क्रमशः क्षीण होता जा रहा है, तथापि प्रत्येक युग में विष्णु के इस अवतार पर यह दायित्व बना रहा कि उसने इस पृथ्वी पर से अनाचार, अत्याचार, व्यभिचार के रूप में अधर्म और अमर्यादा का मर्दन करना है। इसीलिए परशुराम पर आज जितना भी साहित्य उपलब्ध है, उसमें भिन्नता है-उनके जन्म को लेकर, उनके जन्म स्थान को लेकर, उनके कर्म-स्थान को लेकर। परन्तु इन भिन्न आस्थाओं का एक सकारात्मक रूप भी है कि सम्पूर्ण भारतीय चित्त ने इस अवतारी पुरुष के प्रति अपनी आस्था का प्रमाण देते हुए इसे अपने क्षेत्र-विशेष से किसी न किसी रूप में जोड़ने में गर्व अनुभव किया। यदि सुदूर पूर्वोत्तर प्रदेश अरुणाचल में ‘परशु कुण्ड’ की उपस्थिति को यह कहकर मान्यता दी गई कि यहीं परशुराम ने अपने रक्त रंजित परशु को ‘ब्रह्मपुत्र’ में शुद्ध किया था और तभी से उनके परशु पर लगे लहु से लाल होने पर उसका एक नाम ‘लोहित’ भी पड़ा, तो दूसरी ओर, सुदूर दक्षिण-पश्चिम की लोक आस्था परशुराम को केरल की स्थापना का आधार मानती है। इसी प्रकार उत्तर भारत में रेणुका झील, मध्य भारत में नर्मदा तट पर जमदग्नि आश्रम आदि ऐसे अनेक प्रसंग है जो सम्पूर्ण भारतीय आत्मा की परशुराम के प्रति श्रद्धा का प्रमाण देते हैं। ऐसे विराट अवतारी पुरुष पर उपलब्ध अनन्त लोक-कथाओं, आस्थाओं और साहित्य का अवगाहन तब तक असम्भव था जब तक कोई व्यक्ति पूर्ण आस्था, श्रद्धा व समर्पण के साथ भगवान् परशुराम के चरित में आकण्ठ डूबकर उसका मन्थन न करता। इस समर्पण की एक और महत्वपूर्ण शर्त यह भी थी कि कहीं कोई शंका या द्वन्द्व इस मार्ग में अवरोध उत्पन्न नहीं करेगा क्योंकि अनेक स्थलों पर अनेक प्रसंगों, घटनाओं, व्याख्याओं में लोक ने अपनी श्रद्धा के अतिरेक में बहुत कुछ ऐसा भी जोड़ दिया है कि सामान्य व्यक्ति उसे स्वीकार करने को कदाचित् तैयार न होता।
किन्तु मुझे अत्यन्त प्रसन्नता व संतोष है कि डॉ. विक्रम शर्मा जी ने अपनी अगाध आस्था व श्रद्धा का परिचय देते हुए उन्हें बहुत ही परिश्रम से ऐसा क्रमबद्ध कर दिया है कि यह ग्रन्थ सामान्य ग्रन्थ भक्ति एवं शक्ति के प्रतीक भगवान् परशुराम न रह कर’ भगवान् परशुराम पुराण’ में परिवर्तित हो गया है। उन्होंने न जाने कहाँ-कहाँ से परशुराम जी के जीवन से जुड़े प्रसंगों को खोज – खोज कर पूरा एक सन्दर्भ कोश बना दिया है। मुझे लगता है कि शायद ही कोई ऐसा स्रोत बचा होगा जिस पर डॉ. शर्मा की दृष्टि न पड़ी हो। फिर उन स्रोतों से एकत्रित किये गये तथ्यों को क्रम देना-यह उससे बड़ा भागीरथ कार्य था जो इन्होंने सहज ही सम्पन्न किया। मैं समझता हूँ कि यह साक्षात भगवान् परशुराम जी की कृपा रही कि उन्होंने जैसे अपनी ही उपस्थिति में यह वृहत् कार्य सम्पन्न करवाया। लेखक ने भगवान् परशुराम चरित को इस प्रकार सूत्रबद्ध किया है कि वह रोचकता के साथ-साथ पाठकों की अनेक जिज्ञासाओं का भी शमन करेगा। इतनी ही नहीं, यह ग्रन्थ मेरे विभाग में स्थापित ‘भगवान् परशुराम पीठ’ को भी परोक्षतः अनेक प्रकार से दिशा-निर्देश देने में सहयोगी बनेगा-ऐसी मेरी धारणा है। उसी विश्वास के साथ डॉ. विक्रम शर्मा जी के लिए बहुत-बहुत शुभ कामनाएं।SKU: n/a -
Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Bhagvannam Mahima Aur Prarthna Ank(Code1135)
यह विशेषांक भगवन्नाम-महिमा एवं प्रार्थना के अमोघ प्रभाव का सुन्दर विश्लेषक है। इसमें विभिन्न सन्त-महात्माओं, विद्वान् विचारकों के भगवन्नाम-महिमा एवं प्रार्थना के चमत्कारों के सन्दर्भ में शास्त्रीय लेखों का सुन्दर संग्रह है। इसके अतिरिक्त इसमें कुछ भक्त-सन्तों के नाम-जप से होनेवाले सुन्दर अनुभवों का भी संकलन किया गया है।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Bhagvat Navneet(Code2009)
श्रीमदभागवत एक जीवन-दर्शन है। यह मानव जीवन का एक अनुपम, उत्कृष्ट एवं आदर्श मार्गदर्शक है। इसमें जीवन के प्रश्नों के उत्तर हैं, जीवन एवं जगत की समस्याओं के समाधान हैं और सफल, सार्थक, समृद्ध एवं शान्तिपूर्ण जीवन जीने के व्यावहारिक सूत्र हैं। इस पुस्तक में श्रीमदभागवत पर सन्त श्रीरामचन्द्र केशव डोंगरे जी महाराज का सरस प्रवचन दिया गया है।
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Hindi Books, Kalpana Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Bharat Mein Jaati Evam Prajaati
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Hindi Books, Kalpana Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Bharat Mein Jaati Evam Prajaati
Caste is perhaps the most dominant aspect of Indian society and its study is incomplete without getting into the ramifications of the Hindu caste system. Caste and Race in India, since its first publication in the History of Civilization series, edited by C. K. Ogden in 1932, has remained a basic work for students of Indian sociology and anthropology. Over the years, this book has been highly acclaimed by teachers and reviewers alike, as a sociological classic. The present edition, an expanded version with five new chapters, elaborates on the evolution of sub-castes, and examines caste, sub-caste and kinship. It also presents a provocative and thorough analysis of the relationship between caste and politics by drawing examples from Tamil Nadu as experienced over the years. The concluding chapter is an incisive analysis of Indian society – the author apprehends that India will develop into a plural society and not a casteless one, which was the dream of the architects of her Constitution.
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Gita Press, Hindi Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Brahmavaivart Puran, Kewal Hindi
इस पुराण में चार खण्ड हैं। ब्रह्मखण्ड, प्रकृतिखण्ड, श्रीकृष्णजन्मखण्ड और गणेशखण्ड। इसमें भगवान् श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तृत वर्णन, श्रीराधा की गोलोक-लीला तथा अवतार-लीला का सुन्दर विवेचन, विभिन्न देवताओं की महिमा एवं एकरूपता और उनकी साधना-उपासना का सुन्दर निरूपण किया गया है। अनेक भक्तिपरक आख्यानों एवं स्तोत्रों का भी इसमें अद्भुत संग्रह है। यह पुस्तक रंगीन चित्रों के साथ मोटे टाइप में प्रकाशित की गयी है।
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Gita Press, Hindi Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Chitramay Shiv Puran 2318
इस पुराण में परात्पर ब्रह्म शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। इसमें इन्हें पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। यह पुस्तक मोटे टाइप में रंगीन चित्रों के साथ प्रकाशित की गयी है। { इस पुस्तक में 1088 पृष्ठ हैं जिनमें पढ़ने के लिए कथाएँ हैं। यह हार्ड बाउंड और एक खंड में है।. }
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Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)
Complete 18 Puran
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Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)Complete 18 Puran
1.Brahma Purana (ब्रह्मपुराणम्) (set of 2 Volumes)
2.Sri Padma Maha Puranam(Set Of 7 Vols)
3.Shri Vishnu Maha Puranam + Sri Vishnu Dharmottar Purana (Set Of 3)
4.Sri Vayu Maha Purana (HB)
5.Srimad Bhagwat Maha Puran श्रीमद्भागवतमहापुराण Set of 9 vols
6.Brihan Naradiya Puran (HB)
7.Markandeya Puran
8.Agni Purana Set Of 2
9.Sri Bhavishya Mahapuranam (Set Of 3 Vols)
10.Brahmavaivarta Puranब्रह्मवैवर्त पुराण (set of 2 Vols)
11.Linga Mahapuran
12.Sri Varahapuranam
13.Skanda Maha Puranam of Vedvyasa (Set of 7 Vols in 10 books)
14.Shri Vamana Purana
18.Kurmapuran
16.Matsyapuranam- Original and Translation
17.Garun Puranam (HB)
18.Brahmanda PuranamSKU: n/a -
Chaukhamba Prakashan, Gita Press, Hindi Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Complete Puran Set of 18
Chaukhamba Prakashan, Gita Press, Hindi Books, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृतिComplete Puran Set of 18
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- Sankshipt Bramha Puran
- Sankshipt Padma Puran
- Shrivishnu Puran
- Sri Vayu Maha Purana (Mul Puran)
- Shrimad Bhagwat Mahapuran (set of 2 Volumes)
- Sankshipt Narad Puran
- Sankshipt Markandeya Puran
- Abridged Agni Puran(Code1362)
- Sri Bhavishya Mahapuranam (Set Of 3 Vols)
- Brahmavaivart Puran, Kewal Hindi
- Abridged Ling Mahapuran (Code1985)
- Abridged Varah Puran (Code1361
- Sankshipt Skand Puran
- Sri Vaman Puran
- Koorm Puran
- Matsya Puran
- Sankshipt Garud Puran
- Brahmanda Puranam (Set Of 2 Volumes)
+ 1 more Puran - ShriShiv Mahapuran (Set Of 2 Volume)
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Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)
Garga Samhita (Set of 2 Volumes)
Chaukhamba Prakashan, Hindi Books, अध्यात्म की अन्य पुस्तकें, इतिहास, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति, सही आख्यान (True narrative)Garga Samhita (Set of 2 Volumes)
आज से अड़तालीस वर्ष पहले जब में गुरुदेव स्वर्गीय श्रीदामोदरलाल गोस्वामीजीके पास काव्य प्रकाश पढ़ता था तो एक दिन एक गुर्जरविद्वान् और परम वैष्णव श्रीलाड़िलीलालजी पधारे। सभी वेदों, पुराणों और छहों शास्त्रोंपर उनका अनोखा अधिकार था। गुरुदेव और उनमें जब धारावाहिक संस्कृतमें वार्तालाप होनेका क्रम चला तो मैं मंत्रमुग्ध होकर सुनने लगा । प्रसंग था श्रीमद्भागवतकी रासपंचाध्यायीका । धीरे-धीरे वे दोनों श्रीमद्भागन्दले श्रीगर्गसंहितापर उतर गये और उसके सरस प्रसंगोंपर ऊहापोह होने लगा। दोके दोनों जैसे अपने ज्ञानका खजाना खोलकर बैठ गये थे। जब कभी कोई संशयका प्रसंग आता तो गुरुदेव गोस्वामीजीके संकेतपर मैं सम्बद्ध ग्रन्थ उनकी इलमारीसे निकालकर दे देता था। विशेषता यह थी कि इतने जटिल प्रसंगपर दोनोंके परिसंवादमें तल्खी नाममात्रको भी नहीं दिख रही थी। कभी-कभी कोई रुचिकर बात आनेपर दोनों ठठाकर हँसते, परस्पर एक दूसरेको वाहवाही देते और पानकी गिलौरी जमाकर फिर अपने-अपने विषयकी व्युत्पत्तिपर डट जाते थे। यह क्रम लगभग तीन घंटे चला। उन ऋषितुल्य महानुभावोंका वह सरस और मृदुल संवाद मेरे जीवनका सम्बल बन गया
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Hindi Books, Kalpana Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Gumanam Veeranganaon Ka Itihaas
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Hindi Books, Kalpana Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Gumanam Veeranganaon Ka Itihaas
संसार में परमात्मा ने स्त्री-शक्ति का मुकाबला करने वाली कोई दूसरी शक्ति उत्पन्न नहीं की। वास्तव में भारतीय इतिहास में गौरवपूर्ण अध्याय के निर्माण कार्य में जितना सहयोग स्त्री शक्ति ने दिया है उतना अभी तक किसी ने नहीं दिया। आदिकाल में भी जब-जब देवासुर-संग्राम छिड़ा राक्षसी शक्ति को नष्ट करने के लिए दैवी शक्ति का आश्रय लिया गया। भारत के स्वाधीनता संग्राम में आक्रमणकारियों के विरुद्ध सदैव स्त्री शक्ति अग्रणी रही। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अनेक दौरों से गुजरा। 1857 के विद्रोह में विश्व के सबसे महान् व शक्तिशाली साम्राज्य को चुनौती दी गई। 1857 के इस विद्रोह में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हजरत महल जैसी वीरांगनाओं का योगदान विशेष उल्लेखनीय रहा। गांधी युग में राष्ट्रीय आन्दोलन जन आंदोलन में परिवर्तित हो गया। इस युग में सभी धर्मों व सम्प्रदायों के अनुयायियों तथा जनता के प्रत्येक वर्ग ने बढ़-चढ कर भाग लिया। इस कार्य में महिलाएँ भी पीछे नहीं रही। आरंभ से लेकर अंत तक उन्होंने न केवल शंतिपूर्ण आन्दोलनों में सक्रिय भाग लिया अपितु वे क्रांतिकारी गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं। गांधी जी भी राष्ट्रीय आन्दोलन में महिलाओं की भागीदारी के पूर्ण पक्षधर थे। राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेकर महिलाओं ने न केवल ब्रिटिश शासन के विरुद्ध तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की बल्कि गिरफ्तार भी हुई। कुल मिलाकर महिलाओं के अंदर इस समय जो राष्ट्रचेतना पैदा हुई थी उसने यह सिद्ध कर दिया कि वे एक ऐसी राष्ट्रीय शक्ति है जो राष्ट्र की स्वाधीनता और अधिकारों के लिए सभी बंधनों से उन्मुक्त होकर लड़ सकती है। इस समय जिन स्त्रियों ने इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया था उनमें एक पंक्ति उनकी भी थी जो गांधी जी के अहिंसावादी नीति का अनुसरण कर रही थीं और दूसरी पंक्ति उनकी थी जिन्होंने क्रांति का मार्ग चुना था। राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास में अपने आप को महिलाओं ने विविध आयामों के साथ प्रस्तुत किया है।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Mahabharat Khilbhag – Shri Harivansh Puran (Code 38)
श्रीहरिवंशपुराण वेदार्थ-प्रकाशक महाभारत ग्रन्थ का अन्तिम पर्व है। पुत्र प्राप्ति की कामना से श्रीहरिवंशपुराण के श्रवण की परम्परा भारतवर्ष में चिरकाल से प्रचलित है। अनन्त भावुक धर्मपराण लोग इसके श्रवण से पुत्र-प्राप्ति का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भगवद्भक्ति तथा प्रेरणादायी कथानकों की दृष्टि से भी इसका बड़ा महत्व है। भगवान् श्रीकृष्ण से सम्बन्धित अगणित कथाएँ इसमें ऐसी हैं, जो अत्यन्त दुर्लभ हैं। धार्मिक जन-सामान्य के कल्याणार्थ इसके अन्त में सन्तानगोपाल-मन्त्र, अनुष्ठान-विधि, सन्तान-गोपाल-यन्त्र, सन्तान-गोपालस्तोत्र भी संगृहीत हैं। सचित्र, सजिल्द।
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Gita Press, वेद/उपनिषद/ब्राह्मण/पुराण/स्मृति
Narsingh Puran
इस पुराण में दशावतार की कथाएँ एवं सात काण्डों में भगवान् श्रीराम के पावन चरित्र के साथ सदाचार, राजनीति, वर्णधर्म, आश्रम-धर्म, योग-साधन आदि का सुन्दर विवेचन किया गया है। इसके अतिरिक्त इस में भगवान् नरसिंह की विस्तृत महिमा, अनेक कल्याणप्रद उपाख्यानों का वर्णन, भौगोलिक वर्णन, सूर्य-चन्द्रादि से उत्पन्न राजवंशों का वर्णन तथा अनेक स्तुतियों का सुन्दर उल्लेख है।
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