बौद्ध दर्शन के प्रमुख सिद्धान्त : बौद्ध दर्शन मानव-व्यक्तित्व के विकास का महत्त्वपूर्ण दर्शन है। प्रस्तुत पुस्तक में बौद्ध दर्शन के प्रमुख सिद्धान्तों का सुगमरीति से सारगर्भित प्रतिपादन हुआ है। इसके 18 अध्यायों में बौद्ध दर्शन के चार सम्प्रदायों (वैभाषिक, सौत्रान्तिक, विज्ञानवाद एवं शून्यवाद) हीनयान, महायान, त्रिपिटक-साहित्य, त्रिशरणगमन, चार आर्यसत्य, प्रतीत्यसमुत्पाद, आष्टांगिक मार्ग, क्षणिकवाद, निर्वाण, सत्यद्वय, प्रज्ञा-उपाय, बोधि-चित्तोत्पाद, चित्तचैतसिक, अनात्मवाद, प्रमाण आदि विषयों का प्रामाणिक विवेचन हुआ है। पुस्तक का लेखन विषय-विशेषज्ञ विद्वानों द्वारा किया गया है। बौद्ध धर्म-दर्शन के प्रमुख सिद्धान्तों के विवेचन से सम्बद्ध यह पुस्तक हिन्दी भाषा में प्रथम पुस्तक है, जिसमें संक्षेप में बौद्ध धर्म-दर्शन के जिज्ञासुओं के लिए बोधप्रदायक पठनीय सामग्री उपलब्ध है।
Swami Vivekananda
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, अन्य कथा साहित्य, ऐतिहासिक उपन्यास
1000 Swami Vivekananda Prashnottari
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, अन्य कथा साहित्य, ऐतिहासिक उपन्यास1000 Swami Vivekananda Prashnottari
स्वामी विवेकानंद : एक ऐसा नाम, जो अपने जन्म के 150 वर्ष बाद भी लोगों को स्फूर्ति से भर देता है और देश, धर्म एवं संस्कृति के लिए अपना बलिदान करने की प्रेरणा देता है। ऐसे योद्धा संन्यासी का जन्म 12 जनवरी, 1863 को माँ भुवनेश्वरी देवी की कोख से हुआ था।
अवसान के समय स्वामीजी की आयु मात्र 39 वर्ष 5 महीने और 24 दिन थी। हिंदू धर्म के पुनर्जागरण के पुरोधा के रूप में भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व इतिहास में वे हमेशा याद किए जाएँगे। अपनी 39 वर्ष की छोटी सी आयु में संपूर्ण विश्व को उन्होंने वेदांत को वह वैश्विक स्वरूप प्रदान किया, जिसकी आज के युग में सबसे अधिक आवश्यकता है। ऐसे युगपुरुष के जीवन और अद्भुत कार्यों को प्रश्नोत्तर रूप में प्रस्तुत किया गया है। विशाल कलेवर को 1000 प्रश्नों में समेटना भी दुष्कर कार्य है, अतः महत्त्वपूर्ण प्रसंगों को ही पुस्तक का विषय बनाया गया है।
भारतीय अस्मिता, गौरव, शक्ति, सामर्थ्य, मेधा और ज्ञान के प्रतीक स्वामी विवेकानंद के सार्थक जीवन का ज्ञान कोश है यह पुस्तक।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, उपन्यास
Aatmanubhooti Ke Khule Rahasya
“गुरदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था, “यदि आप भारत को जानना चाहते हैं, तो विवेकानंद को पढ़िए। उनमें आप सबकुछ सकारात्मक ही पाएँगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं ।”’
जिस प्रकार कछुआ अपने सिर एवं पैरों को खोल के अंदर समेट लेता है और तब उसे हम मार ही क्यों न डालें, उसके टुकड़े-टुकड़े ही क्यों न कर डालें, पर वह बाहर नहीं निकलता, इसी प्रकार जिस मनुष्य ने अपने मन एवं इंद्रियों को वश में कर लिया है, उसका चरित्र भी सदैव स्थिर रहता है। वह अपनी आभ्यंतरिक शक्तियों को वश में रखता है और उसकी इच्छा के विरुद्ध संसार की कोई भी वस्तु उसे बहिर्मुख होने के लिए विवश नहीं कर सकती।
प्रस्तुत पुस्तक ‘आत्मानुभूति के खुले रहस्य’ में स्वामीजी ने सरल शब्दों में ‘अपने आत्म यानी स्व’ को पहचानने की कला सिखाई है। जो व्यक्ति स्वयं को भलीभाँति पहचान लेता है, उसके जीवन में फिर कभी कोई अभाव नहीं रहता। अपने आपको गहराई से जानने-समझने वाले चिंतनशील व्यक्ति के लिए एक प्रेरक, जीवनोपयोगी और संग्रहणीय पुस्तक ।”
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Prabhat Prakashan, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Bhookh aur Bhoj ke Beech Vivekananda
कभी राजभवन में सोने की थाली में राजसी भोजन, कभी झोंपड़ी में गरीबों का भोजन, कभी भूखे पेट, कभी सुनसान जंगल में आधे पेट खाकर भ्रमण करना स्वामी विवेकानंद के जीवन के अंतिम दो दशकों की आश्चर्यजनक जीवनगाथा। पिछले लगभग डेढ़ सौ वर्षों से कई देशों में स्वामीजी के पाककला प्रेम की चर्चा के साथ महासागर के उस पार अमेरिका में वेद, वेदांत के साथ-साथ बिरयानी-पुलाव-खिचड़ी से संबंधित कई अनजानी कहानियाँ प्रचलित हैं।
भारतीय पाककला के प्रचार में सर्वत्यागी संन्यासी के असीम उत्साह वर्तमान के समाजतत्त्वविद् के लिए आश्चर्य की बात है, फिर भी पाकशास्त्री महाराज विवेकानंद को लेकर कोई संपूर्ण पुस्तक किसी भी भाषा में क्यों नहीं लिखी गई है, यह समझ से परे है।
इस पुस्तक में स्वामी विवेकानंद के आहार के विषय में हजारों लोगों के मुँह से कही गई अनमोल बातों पर खोजी लेखक शंकर की अद्भुत प्रस्तुति है।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Chintan Karo, Chinta Nahin
“भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण की वैश्विक आध्यात्मिक विभूति स्वामी विवेकानंद शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में मंत्रमुग्ध करनेवाले अपने भाषणों के बाद बहुत प्रसिद्ध हो गए थे। उनके शक्तिशाली शब्दों ने दुनिया भर के लोगों को प्रेरित किया है। उन्होंने मानव कल्याण और समाजहित के लिए जो सूत्र बताए, वे आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी प्रभावी और ओजस्वी वाणी, प्रखर चिंतन व संवेदनशीलता ने मानवता को समता और समभाव का संदेश दिया। उनके शब्दों में अद्भुत और अप्रतिम सकारात्मकता थी, जो श्रोताओं को प्रेरित करती थी और साथ ही आत्मावलोकन के लिए प्रेरित भी ।
प्रस्तुत पुस्तक में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए सबसे उत्कृष्ट और प्रभावी भाषणों में से केवल पच्चीस संगृहीत हैं, जो कालजयी और सार्वकालिक हैं। स्वामी विवेकानंद के श्रीमुख से निःसृत ये शब्दरल हमारे जीवन को दिशा देने और सार्थकता प्राप्त करने की कुंजी हैं।
स्वतंत्र होने का साहस करें, जहाँ तक आपके विचार जाते हैं, जाने का साहस करें और उसे अपने जीवन में उतारने का साहस करें। –स्वामी विवेकानंद”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन
Dharma Ki Sadhana
“स्वामी विवेकानंद ने भारत में उस समय अवतार लिया, जब यहाँ हिंदू धर्म के अस्तित्व पर संकट के बादल मँडरा रहे थे। पंडित-पुरोहितों ने हिंदू धर्म को घोर आडंबरवादी और अंधविश्वासपूर्ण बना दिया था। ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म को एक अलग पहचान दिलाई।
स्वामीजी का विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहीं बड़े-बड़े महात्माओं तथा ऋषियों का जन्म हुआ; यह संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिए जीवन के सर्वोच्च आदर्श एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है।
प्रस्तुत पुस्तक ‘ धर्म की साधना’ में स्वामीजी ने भारत के प्राचीन गौरव का उल्लेख करते हुए देश के युवकों का आह्वान किया है कि यही उचित समय है, जब वे हिंदू धर्म की पुनर्स्थापना में जुट जाएँ और भारतीय पुनर्जागरण में सहभागी बनें। सही अर्थों में धर्म की साधना करना, उस पर चलना सिखाने वाली प्रेरणादायी पुस्तक!”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)
Hindu Dharma: Hamara Janmaprapt Dharma
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, प्रेरणादायी पुस्तकें (Motivational books)Hindu Dharma: Hamara Janmaprapt Dharma
“तुम लोग आर्य, ऋषियों के वशंधर हो ऋषियों के, जिनकी महत्ता की तुलना नहीं हो सकती। मुझे इसका गर्व है कि मैं तुम्हारे देश का एक नगण्य नागरिक हूँ। अतएवं भाइयो, आत्मविश्वासी बनो। पूर्वजों के नाम से अपने को लज्जित नहीं, गौरवान्वित समझो। याद रहे, किसी का अनुकरण कदापि न करना, कदापि नहीं। जब कभी तुम औरों के विचारों का अनुकरण करते हो, तुम अपनी स्वाधीनता गँवा बैठते हो। —इसी पुस्तक से
प्रस्तुत पुस्तक ‘हिंदू धर्म : हमारा जन्मप्राप्त धर्म’ में स्वामीजी ने सरल शब्दों में वेदप्रणीत हिंदू धर्म, उसकी सार्वभौमिकता, उसकी उदारता, व्यापकता और सर्वधर्म समभाव की उसकी मौलिकता की अनिर्वचनीय व्याख्या की है और मानव-मन में हिंदू धर्म को लेकर सदा से पनपते कतिपय अनुत्तरित प्रश्नों के सटीक व तार्किक उत्तर दिए हैं। एक अत्यंत प्रेरक, रोचक और ओजपूर्ण पुस्तक, जो जीवन में दैविक आशा का संचार करती है।”
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English Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Karma Yoga
Karma Yoga (The Yoga of action) is a book of lectures by Swami Vivekananda, as transcribed by Joseph Josiah Goodwin. It was published in February 1896 in New York City. Swami Vivekananda delivered a number of lectures in his rented rooms at 228 W 39th Street in New York City from December 1895 to January 1896. In 1895 friends and supporters of Swami Vivekananda hired Goodwin, a professional stenographer, who transcribed some of the lectures which were later published as this book. Goodwin later became a follower of Vivekananda. The main topic of the book was Karma (work) and Karma Yoga. Swami Vivekananda discussed the concept of Karma in the Bhagavada Gita. Swami Vivekananda described Karma Yoga as a mental discipline that allows a person to carry out his/her duties as a service to the entire world, as a path to enlightenment.
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Rajasthani Granthagar, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Khetri Naresh aur Vivekanand
खेतड़ी नरेश और विवेकानन्द : पुनीत बालुकामयी राजपूताने की मरूभूमि में कुछ ऐसी ज्योतिर्मयी शक्ति है कि समय-समय पर उस रक्त-रंजित स्थल में वह शक्ति लोगों के हितार्थ मानव रूप धारण किया करती है। स्वर्गीय राजा अजीतसिंह भी उस शक्ति के एक प्रतिबिंब थेे। स्वामी विवेकानंद और राजा अजीत सिंह उस सृजनहार शक्ति के दो निकटतम रूप थे, जो इस संसार में उस शक्ति की प्रेरणा से आए थे और अपना कर्तव्य-पालन कर उसी में लीन हो गए। स्वामी जी ने अपने आध्यात्मिक बल से अमेरिका में वेदांत-पताका फहराकर भारतवर्ष और हिंदू जाति का गौरव बढ़ाया था। वस्तुतः स्वामी तरूण भारत के स्फर्ति-स्त्रोत थे। अमेरिका में जाकर उन्होंने भारत के लिए जितने आंदोलन किए इतने कदाचित् किसी ने आज तक नहीं किए। इस आंदोलन में खेतड़ी-नरेश राजा अजीत सिंह जी का बड़ा योगदान था। स्वयं स्वामी जी की उक्ति है- “भारतवर्ष की उन्नति के लिए थोड़ा-बहुत मैनें किया है, वह खेतड़ी-नरेश के न मिलने से सम्भव न हो पाता”। प्रस्तुत पुस्तक में स्वामी विवेकानंद जी द्वारा किए गए देश-हित के कार्यों में खेतड़ी-नरेश भी किस रूप में सहायक बनें, उसका विस्तृत वर्णन है। समाज-कार्यों के लिए प्रोत्साहन करने वाली एक अद्भूत कृति। राजस्थान-शेखावाटी के लिए यह परम सौभाग्य की बात है कि वहां राजा अजीत सिंह जी के समान धर्मात्मा पुरूष हुए। उनके समय में न केवल खेतड़ी में ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना हुई बल्कि स्वामी जी ने विविदिषानंद से विवेकानंद नाम राजा अजीत सिंह जी के प्रेमानुरोध से धारण किया था।
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास
Mahapurushon Ke Upadesh
रोम्या रोलाँ ने स्वामी विवेकानंद के बारे में कहा था, ”उनके द्वितीय होने की कल्पना करना भी असंभव है। वे जहाँ भी गए, सर्वप्रथम हुए। हर कोई उनमें अपने नेता का दिग्दर्शन करता था। वे ईश्वर के प्रतिनिधि थे तथा सब उनसे प्रभावित हो जाते थे–यह उनकी विशिष्टता थी। हिमालय प्रदेश में एक बार एक अनजान यात्री उन्हें देख, ठिठककर रुक गया और आश्चर्यपूर्वक चिल्ला उठा–‘ शिव !’ यह ऐसा हुआ, मानो उस व्यक्ति के आराध्य देव ने अपना नाम उनके माथे पर लिख दिया हो।’
प्रस्तुत पुस्तक में स्वामी विवेकानंदजी ने समय-समय पर रामायण, महाभारत, विश्व के महान् आचार्यों की कथाओं से प्रेरक उपदेश अपने अभिभाषणों में दिए, जो मानव-समाज के लिए बेहद उपयोगी हैं। इसलिए यह पुस्तक हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए ज्ञानवर्द्धछ के साथ-साथ जीवन में मार्गदर्शन करनेवाली है।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सनातन हिंदू जीवन और दर्शन
Parivrajak: Meri Bhraman Kahani
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सनातन हिंदू जीवन और दर्शनParivrajak: Meri Bhraman Kahani
“स्वामी विवेकानंद ने भारत में उस समय अवतार लिया, जब हिंदू धर्म के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। हिंदू धर्म में घोर आडंबर और अंधविश्वासों का बोलबाला हो गया था। ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म को एक पूर्ण पहचान प्रदान की। इसके पहले हिंदू धर्म विभिन्न छोटे-छोटे संप्रदायों में बँटा हुआ था। तीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म संसद् में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और इसे सार्वभौमिक पहचान दिलाई।
प्रस्तुत पुस्तक ‘परिव्राजक: मेरी भ्रमण कहानी’ में स्वामीजी ने अपनी यूरोप यात्रा के माध्यम से सरल शब्दों में तत्कालीन इतिहास, कला, समाज, जीवन-दर्शन इत्यादि का अत्यंत रोचक वर्णन प्रस्तुत किया है। इनके माध्यम से व्यक्ति अपने तत्कालीन ज्ञान-दर्शन को सहज ही प्रशस्त कर सकता है। स्वामी विवेकानंद की यात्रा-वृत्तांत की यह पुस्तक हमें सांस्कृतिक-सामाजिक यात्रा का आनंद देगी।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Ruko Mat, Aage Badho
“स्वामी विवेकानंद के जीवन का तो हर प्रसंग ही प्रेरक है। जहाँ अपने ओजस्वी उद्बोधन से उन्होंने देश- विदेश में ख्याति अर्जित की और भारत का नाम रोशन किया, वहीं अपनी ओजस्वी वाणी से अपने देशवासियों में एक नई ऊर्जा का संचार किया, जन-जन को जागरूक किया और उनमें मानवता का संचार किया।
इस पुस्तक में स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी घटनाओं का संकलन प्रस्तुत है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को रोचक भी लगेंगी और प्रेरणादायी भी। वे इन घटनाओं को अपने जीवन से जुड़ा हुआ भी महसूस करेंगे। देशभक्ति से लेकर मानवता, शिक्षा, लक्ष्य-प्राप्ति, धर्म- अध्यात्म, चरित्र-निर्माण, गुरु-शिष्य परंपरा, महिला सशक्तीकरण आदि कई सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। ये प्रेरक कथाएँ आपमें आत्मविश्वास उत्पन्न करेंगी और संघर्षों से निपटने का साहस भी प्रदान करेंगी,
क्योंकि स्वामी विवेकानंद का जीवन केवल गेरुए वस्त्र में सिमटे एक सन्यासी तक ही सीमित नहीं था, वरन् मानवता के कल्याण के लिए समर्पित था। तभी तो उनके जीवन की हर घटना हमें हार न मानने की शक्ति देती है। इसीलिए इतने वर्षों बाद भी वे युवाओं के लिए प्रेरणास्नोत हैं। स्वामी विवेकानंद के प्रेरक, अनुकरणीय और श्लाघनीय जीवन के ऐसे प्रसंग जो हर पाठक के जीवन को प्रकाशमान कर देंगे।SKU: n/a -
Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Srikrishna, Buddha, Yeshu Aur Muhammed
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)Srikrishna, Buddha, Yeshu Aur Muhammed
“स्वामी विवेकानंद ने भारत में उस समय अवतार लिया, जब यहाँ हिंदू धर्म के अस्तित्व पर संकट के बादल मँडरा रहे थे। पंडित-पुरोहितों ने हिंदू धर्म को घोर आडंबरवादी और अंधविश्वासपूर्ण बना दिया था। ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म को एक पूर्ण पहचान प्रदान की | इसके पहले हिंदू धर्म विभिन छोटे-छोटे संप्रदायों में बँटा हुआ था। तीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो, अमेरिका में विश्व धर्म संसद् में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और इसे सार्वभौमिक पहचान दिलवाई।
स्वामीजी का विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहाँ बड़े-बड़े महात्माओं तथा ऋषियों का जन्म हुआ; यह संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं, केवल यहीं आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिए जीवन के सर्वोच्च आदर्श एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है।
प्रस्तुत पुस्तक ‘कृष्ण, बुद्ध, ईसा और मुहम्मद ‘ में स्वामीजी ने सरल शब्दों में देवत्व प्राप्त इन स्तुत्य महापुरुषों के व्यक्तितत और उनकी शिक्षाओं की अनिर्वचनीय व्याख्या की है। एक अत्यंत प्रेरक्त और ओजपूर्ण पुस्तक, जो जीवन में दैविक आशा का संचार करती है।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण
Vedant: Bhavishya Ka Dharma
“उनतालीस वर्ष की अल्पायु में स्वामी विवेकानंद जो काम कर गए, वे आनेवाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।वे केवल संत ही नहीं थे, एक महान् देशभक्त, ओजस्वी वक्ता, प्रखर विचारक, रचनाधर्मी लेखक और करुणा से ओतप्रोत मानवताप्रेमी भी थे।
अमेरिका से लौटकर उन्होंने देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा था, “नया भारत निकल पड़े मोची की दुकान से, भड़भूजे के भाड़ से, कारखाने से, हाट से, बाजार से; निकल पड़े झाड़ियों, जंगलों, पहाड़ों, पर्वतों से ।”
और जनता ने स्वामीजी की पुकार का उत्तर दिया। वह गर्व के साथ निकल पड़ी। गांधीजी को आजादी की लड़ाई में जो जन-समर्थन मिला, वह विवेकानंद के आह्वान का ही फल था। इस प्रकार वे भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम के भी प्रमुख प्रेरणास्नोत बने ।
प्रस्तुत पुस्तक ‘वेदांत भविष्य का धर्म’ में स्वामीजी ने भारतीय अध्यात्म के दो आधारभूत ग्रंथों ‘रामायण’ और “महाभारत’ के माध्यम से भारत के समाज का आध्यात्मिक, सामाजिक और मानसिक दृश्य खींचा है, जो भारतीय जनमानस के भावों का दिग्दर्शन कराता है।”
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Rajasthani Granthagar, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, संतों का जीवन चरित व वाणियां
Vivekanand Granthawali
विवेकानन्द ग्रन्थावली : यह शक्ति क्या है जो हमारे शरीर में व्यक्त होती है ? यह हम सब लोगों को प्रकट है कि वह चाहे जो शक्ति हो, वह परमाणुओं को जोड़ बटोर कर हमारे और तुम्हारे शरीर की रचना करने नहीं आता। मैंने यह नहीं देखा कि खाए कोई और तृप्ति हो मुझे। मैं ही अन्न खाकर उसे पचाता हूँ और उसके रस को लेकर रक्त, माँस, मज्जा और अस्थि रूप में उसे परिणत करता हूँ। यह कौन अदभुत शक्ति है ? भूत और भविष्य का भाव ही कितनों के कलेजे को हिला देता है। कितनों का तो केवल कल्पना मात्र जान पड़ते है। वर्तमान काल ही को ले लीजिए। वह कौन सी शक्ति है, जो हमारे भीतर काम कर रही है। हमें यह भी ज्ञात है कि सारे प्राचीन साहित्य में यह शक्ति, शक्ति की यह अभिव्यक्ति जो एक अत्यन्त उज्जवल व प्रकाशमय पदार्थ मानी गई थी, इसी शरीर के आकार प्रकार की थी और इस शरीर के पंचतत्व प्राप्त होने पर रह जाती थी। इसके पीछे धीरे-धीरे यह उच्च गति बदला करती थी। ऐसे लोग जो अपने साथ संसार में बहुत सी आकर्षण शक्ति लेकर आते है, जिनकी आत्मा सैकड़ों और सहस्त्रों में काम करती है, जिनके जीवन दूसरों में आध्यात्मिक अग्नि प्रज्वलित कर देते है, ऐसे लोगो का आश्रय हम सदा से देखते आ रहे है, वही धर्म था। उनमें संचालन शक्ति धर्म के लिए सबसे बड़ा संचालक बल है और उसका प्राप्त करना ही प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्व स्वत्व और स्वभाव है।
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RAMAKRISHNA MATH, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, संतों का जीवन चरित व वाणियां
Vivekananda: Ek Jivani
In the list of biographies of Swami Vivekananda published by us, we have one which extensively narrates his life, and also one which presents him very briefly. The present book stands midway between these extremes. Herein the readers will find his life described in a short compass, without sacrificing the essential details. This is a masterly presentation of his life from the pen of a scholar of repute. A worthy book for all those who want to study Vivekananda in brief without loosing the crucial aspects of his life.
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RAMAKRISHNA MATH, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, संतों का जीवन चरित व वाणियां
Vivekananda: Ek Sachitra Jivani
RAMAKRISHNA MATH, जीवनी/आत्मकथा/संस्मरण, संतों का जीवन चरित व वाणियांVivekananda: Ek Sachitra Jivani
A wonderful biographical album printed in hight-quality art paper. Contains 233 photographs, arranged chronologically with a life-sketch of Swami Vivekananda, chronological table, write-ups and quotations from Swamiji for each photograph, etc. It includes almost all the available pictures of Swamiji, separate and in group, and many pictures of places and persons connected with him.
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