, , ,

Adbhuta Ramayana -Maharishi Valmik


नमोऽस्तु रामाय भवोद्भवाय कालाय सर्वेकहाय तुभ्यम् । नमोऽस्तु रामाय कर्पादने ते नमोऽग्नये दर्शय रूपमग्र्यम् ॥ (१५-२२)
‘रामायण’ ‘सीता के महान चरित्र की अवतारणा” के रूप में भारतीय संस्कृति के लिए दिव्य आकाशदीप के समान एक ज्वलन्त सत्य है। परन्तु इसके साथ राम का परब्रह्म परमात्मा के रूप में निरूपण और मर्यादापुरुषोत्तम के रूप में चरित्न-वर्णन अर्थात् ‘रामायण’ – इस ख्याति
को अधिक दृढ़ करने का श्रेय भी सीताजी के चरित्र को मिलता है । ‘अद्भुत रामायण’ वास्तव में राम-सीता में अभेद बताने के लिए निर्मित हुआ है । इस विश्वसृष्टि में सब कुछ राम ही राम है, सब परब्रह्म परमात्मा है, ऐसा ज्ञानीजनों का अनुभव सामान्य मनुष्य के मन का समाधान नहीं कर सकता । उनका समाधान तो भगवान की लीला-कथा से ही संभव है । जीव-मात्र पर कृपा करने के लिए उनका लीलावतार होता है। राम और सीता ऐसे दो रूप धारण करके परमात्मा ने राक्षसों का संहार किया ।
इस कथा में सीताजी ‘सहस्रमुख रावण’ का वध करती हैं, राम इस कार्य में असमर्थ बताये गये हैं। ‘श्रीसीता-माहात्म्य’ शीर्षक लेख में इस विषय की चर्चा की गई है। परन्तु राम की महिमा इससे कम नहीं होती । पुरुष और प्रकृति, निर्गुण-निराकार, अकर्ता-अभोक्ता ब्रह्म और सृष्टि-स्थिति-संहार की शक्ति अभिन्न हैं। जब दो भिन्न रूपों में इनका अवतार होता है, तब दोनों अपना विशिष्ट स्वरूप-परिचय देते हैं।

Rs.300.00

Publisher: Bhuvan Vani Trust, Lucknow
Author: महर्षि वाल्मीकि (Maharishi Valmiki)
Language: Sanskrit Text with Hindi Translation
Cover: Hardcover

Weight 0.450 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 6.7 in

Based on 0 reviews

0.0 overall
0
0
0
0
0

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.

There are no reviews yet.