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Ambedkar Aur Sansadiya Loktantra


“आधुनिक भारत के इतिहास में डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे विचारक बिरले ही हुए हैं। आम तौर पर विचारक बौद्धिक सृजन तो करते हैं लेकिन आंदोलनों से अमूमन दूरी बनाए रखते हैं। डॉ. आंबेडकर एक महान विचारक और बेमिसाल संगठनकर्ता के तौर पर इस विभाजन को साफ़ ध्वस्त कर देते हैं। उनका आह्वान ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, और संघर्ष करो”, एक विचारक के साथ-साथ एक ऐक्टिविस्ट का भी आह्वान है।
बाबासाहेब के आधुनिक भारत के बारे में जो विचार थे, उसको लेकर ग़ैर-बहुजन बुद्धिजीवियों ने लगातार यह भ्रम फैलाया है कि उनका सरोकार केवल दलितों का हित था और इसी अधकचरी समझ के तहत उन्हें दलितों का मसीहा बताकर उनके योगदान को एक सीमा में बाँध दिया जाता है। डॉ. रतन लाल के गंभीर शोध का परिणाम यह किताब ‘आंबेडकर और संसदीय लोकतंत्र’ इस रूढ़िबद्ध धारणा को ध्वस्त ही नहीं करती बल्कि इस सच को भी रेखांकित करती है कि बाबासाहेब ने पूरे देश में प्रजातान्त्रिक शासन को लागू करने और ज़िंदा रखने के लिए अद्भुत मौलिक विचार रखे थे
। डॉ. रतनलाल बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने बाबासाहेब के हज़ारों पन्नों में फैले संसदीय लोकतंत्र पर उनके विचारों को हिन्दी में एकत्रित किया है। इससे पहले डॉ. आंबेडकर के धर्मांतरण पर विचारों को एकत्रित किया था, जो ‘धर्मांतरण: आंबेडकर की धम्म यात्रा’ (2025) के नाम से प्रकाशित हुई थी। यह पुस्तक भी काफी चर्चा में बनी हुई है।”
शम्सुल इस्लाम

Rs.719.00 Rs.799.00

  • Publisher ‏ : ‎ Rajpal and Sons
  • Publication date ‏ : ‎ 12 June 2026
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 9789349162280
  • Author : Ratan Lal
Weight 0.750 kg
Dimensions 8.7 × 5.5 × 1.5 in

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