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Athato Bhakti Jigyasa (Set of 2 Volumes)


मनुष्य का अस्तित्व तीन तलों में विभाजित है- शरीर, बुद्धि, हृदय। या दूसरी तरह से कहें तो कर्म, विचार और भाव। इन तीनों तलों से स्वयं की यात्रा हो सकती है। स्थूलतम यात्रा होगी कर्मवाद की। इसलिए धर्म के जगत में कर्मकांड स्थूलतम प्रक्रिया है। दूसरा द्वार होगा ज्ञान का, विचार का, चिंतन-मनन। दूसरा द्वार पहले से ज्यादा सूक्ष्म है। दूसरे द्वार का नाम है- ज्ञानयोग। तीसरा द्वार सूक्ष्मातिसूक्ष्म है- भाव का, प्रीति का, प्रार्थना का। उस तीसरे द्वार का नाम भक्तियोग है।
कर्म से भी लोग पहुंचते हैं। लेकिन बड़ी लंबी यात्रा है। ज्ञान से भी लोग पहुंचते हैं। पर यात्रा संक्षिप्त नहीं है। बहुत सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं। पहले से कम, लेकिन तीसरे की दृष्टि में बहुत ज्यादा। भक्ति छलांग है। सीढ़ियां भी नहीं हैं, दूरी भी नहीं है। भक्ति एक क्षण में घट सकती है! भक्ति तत्क्षण घट सकती है। भक्ति केवल भाव की बात है। इधर भाव, उधर रूपांतरण। कर्म में तो कुछ करना होगा, विचार में कुछ सोचना होगा, भक्ति में न सोचना है, न करना है, होना है। इसलिए भक्ति को सर्वश्रेष्ठ कहा है।…
ज्ञान का मार्ग संकीर्ण है, भक्ति का मार्ग विराट है। अगर भक्तों से तुम्हारा जोड़ मिल जाए, तो फिर तुम किसी और की चिंता मत करना। न मिले दुर्भाग्यवश, तो फिर तुम कोई और मार्ग खोजना। प्रार्थना बन सकती हो, प्रेम बन सकता हो, तो चूकना मत, क्योंकि वह सुगमतम है, स्वाभाविक है।

Rs.1,080.00 Rs.1,200.00

Publisher: Fusion Books
Author Osho Rajneesh
Language: Hindi
Cover: HARDCOVER

Weight 2.100 kg
Dimensions 8.7 × 5.5 × 1.5 in

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