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Bharatiya Hathiyaron Ka Itihas


“भारतीय हथियारों का एक जटिल दीर्घ इतिहास है, जो वैदिककालीन समय से आधुनिककाल तक अत्यंत व्यापक है। हथियार मात्र एक उपकरण या युद्ध में प्रयोग होने वाले साधन के रूप में ही नहीं रहा है, बल्कि इसने इतिहास को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय सहभागिता भी निभाई है। हथियारों का प्रयोग सर्वप्रथम आत्मरक्षा, समूह की सुरक्षा, शिकार, संघर्ष, शौर्य, शक्ति, सामर्थ्य व वर्चस्व के रूप में किया गया, किंतु अब भी शांति एवं सुरक्षा के नाम पर ये हथियार सामर्थ्य, वर्चस्व, शक्ति व स्पर्धा का आधार बने हुए हैं।

किसी भी देश का समाज व संस्कृति उस राजव्यवस्था की सभ्यता, संस्कृति, संकल्प एवं क्रियाकलाप के वास्तविक सूचक होते हैं। संभवतया साम्राज्यों की सुरक्षा, समृद्धि, सामर्थ्य, शक्ति व वर्चस्व बनाए रखने की सोच ने ही सामरिक साधनों को समृद्धि, सक्षम, सशक्त, संहारक, विध्वंसक एवं विनाशक हथियारों की होड़ की दौड़ शुरू की, जो अनवरत रूप से अभी भी जारी है। अतः हथियारों का अध्ययन सुरक्षा एवं रक्षा हेतु भी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इससे हमें हथियारों की क्षमता, कार्यशैली, प्रभाव व उपयोग के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।

हथियारों का अध्ययन नीति-निर्माण के लिए भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। अतः हथियारों का अध्ययन देश की सैन्य रणनीति, आत्मरक्षा, नीति-निर्माण, वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय संबंध के साथ ही राष्ट्र की रक्षा व सुरक्षा हेतु भी सहायक सिद्ध होगा।”

Rs.315.00 Rs.350.00

Author Dr. Surendra Kumar Mishra
ISBN 9789386870940
Language Hindi
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2025
Number of pages 168
Binding Style Soft Cover

Weight 0.450 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 1.5 in

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