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Bhishm Krit Ganga Stuti


भीष्म राजा शान्तनु के पुत्र थे। भागीरथी गंगाजी से उनका जन्म हुआ था। वे द्यो नामक नवम वसु के अवतार माने जाते हैं। उनका पूर्व नाम देवव्रत था। उन्होंने अपने पिता की इच्छा पूर्ण करने के लिए आजीवन अविवाहित रहने की दृढ़ प्रतिज्ञा ली थी जिससे उनका नाम भीष्म पड़ा। महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म द्वारा गंगा की स्तुति और महात्म का वर्णन है। भीष्म कहते हैं वे ही देश, जनपद, आश्रम और पर्वत पुण्य की दृष्टि से पवित्र हैं, जिनके बीच से होकर सरिताओं में उत्तम भारतीय धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में निरुपित किया गया है। गंगा नदी को भारत की पवित्र नदियों में सबसे पवित्र माना जाता है। बहुत से पवित्र तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सारे पापों का नाश हो जाता हैं।

Rs.750.00

प्रोफेसर विवेकानंद तिवारी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों के विद्वान हैं। तिवारी टोला, भभुआ, कैमूर (बिहार) में जन्मे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षित प्रो० तिवारी की १५० से ज्यादा पुस्तकें और २५०से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक संस्थाओं से प्रो. तिवारी को प्राप्त सम्मानो में ‘भारत-भारती सम्मान’, ‘मालवीय शिक्षा सम्मान’, ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’, ‘यू०पी० गौरव सम्मान’, ‘शारदा शताब्दी सम्मान’ एवं ‘महाशक्ति सम्मान’ विशेष उल्लेखनीय हैं। सम्प्रति आप अम्बेडकर पीठ (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) के अध्यक्ष है।

Weight 0.850 kg
Dimensions 8.7 × 5.5 × 1.5 in

Author Vivekanand Tiwari
ISBN 9788196189976
Language Hindi
Publisher Luminous Books

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