Author Dinanath Mishra
ISBN 9789386054708
Language Hindi
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2024
Number of pages 156
Binding Style Soft Cover
Chaploosi Rekha
बुरके से बिकनी तक का फासला उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक के फासले से भी ज्यादा है। एक तरफ बुरके में औरतों की आजादी को कैद करने की कोशिश है, दूसरी तरफ बिकनी युग के शुभागमन की तैयारी है। बिकनी युग में सबकुछ आजाद होगा। सबसे ज्यादा आजाद होगी बेहयाई। अखबारवाले भी सवाल पूछने को स्वतंत्र होंगे; बल्कि कह सकते हैं कि वे तो आज भी स्वतंत्र हैं। आप फिल्मी अभिनेत्रियों के साथ उनकी भेंटवार्त्ताएँ पढ़ लीजिए। पहला सवाल होता है कि आप अंग प्रदर्शन के बारे में क्या सोचती हैं? वे जो सोचती हैं वह बताती हैं। ज्यादातर तो कहती हैं कि उन्हें परहेज नहीं है। मुबारक हो। आज की सभ्यताएँ एक अतिवाद से दूसरे अतिवाद तक झूलती रहती हैं। समझिए, बुरके से बिकनी तक। तालिबानीकरण से लेकर औरतों के बिकनीकरण तक।
—इसी पुस्तक से
प्रस्तुत काव्य संग्रह के व्यंग्य-विषयों का चयन व्यापक घटनाचक्र से जुड़कर किया गया है। इसलिए ये व्यंग्य अपने पाठक को विषय की विविधता का सुख देते हैं और अद्यतन समय से परिचय कराते हुए उसकी विद्रूपताओं का समाहार करना भी नहीं भूलते।
Rs.360.00 Rs.400.00
| Weight | 0.450 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.5 × 5.7 × 1.5 in |
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