प्रोफेसर विवेकानंद तिवारी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों के विद्वान है। तिवारी टोला, भभुआ, कैमूर (बिहार) में जन्मे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षित प्रो० तिवारी की १५० से ज्यादा पुस्तकें और २५० से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक संस्थाओं से प्रो. तिवारी को प्राप्त सम्मानो में ‘भारत-भारती सम्मान’, ‘मालवीय शिक्षा सम्मान’, ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’, ‘यू०पी० गौरव सम्मान’, ‘शारदा शताब्दी सम्मान’ एवं ‘महाशक्ति सम्मान’ विशेष उल्लेखनीय हैं। सम्प्रति आप अम्बेडकर पीठ (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) के अध्यक्ष हैं।
विशेषः प्रो० तिवारी का २०२३ में एक साथ ६१ पुस्तकों का प्रकाशन जो कि एक विश्व कीर्तिमान है।
Varna and caste system and Ambedkar (Holistic view)
चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः । तस्य कर्तारमप मां विद्धयकर्तारमव्ययम् ।। 4/13 ।। भारत का सामाजिक जीवन अत्यंत वैविध्यपूर्ण तथा उसकी सामाजिक संस्थाएँ सतत् प्रवाह शील है। भारतीय राजनीतिक मंच पर अस्पृश्यता के बढ़ते हुए खतरे को उजागर करने वाले प्रमुख व्यक्ति थे अंबेडकर। डॉक्टर अंबेडकर ने दलित मुक्ति पर अपनी सारी शक्ति केंद्रित करने के उद्देश्य से 1924 में “बहिष्कृत हितकारी” सभा की स्थापना की और मराठी पाक्षिक “बहिष्कृत भारत” का प्रकाशन प्रारंभ किया। वस्तुतः दलितों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में अनेक प्रयास बहुत पहले से चल रहे थे। डॉक्टर अंबेडकर को इन प्रयासों की निरंतरता में देखा जाना उचित है। प्रो.विवेकानंद तिवारी ने अपनी पुस्तक “वर्ण एवं जाति व्यवस्था तथा अम्बेडकर” (समग्र दृष्टि) पर प्रशंसनीय परिश्रम किया है तथा महत्वपूर्ण संदर्भ जुटाए हैं। पाठकों के लिए ये पठनीय विवेचनीय है।
Rs.950.00
| Weight | 0.750 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.7 × 5.5 × 1.5 in |
Author Vivekanand Tiwari
ISBN 9789392178061
Language Hindi
Publisher Luminous Books
Based on 0 reviews
Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.





There are no reviews yet.