प्रोफेसर विवेकानंद तिवारी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों के विद्वान है। तिवारी टोला, भभुआ, कैमूर (बिहार) में जन्मे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षित प्रो० तिवारी की १५० से ज्यादा पुस्तकें और २५० से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक संस्थाओं से प्रो. तिवारी को प्राप्त सम्मानो में ‘भारत-भारती सम्मान’, ‘मालवीय शिक्षा सम्मान’, ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’, ‘यू०पी० गौरव सम्मान’, ‘शारदा शताब्दी सम्मान’ एवं ‘महाशक्ति सम्मान’ विशेष उल्लेखनीय हैं। सम्प्रति आप अम्बेडकर पीठ (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) के अध्यक्ष हैं।
विशेषः प्रो० तिवारी का २०२३ में एक साथ ६१ पुस्तकों का प्रकाशन जो कि एक विश्व कीर्तिमान है।
Dalit Utthaan Ke Agradoot Pandit Madan Mohan Malviy
कितना प्राचीन अपना देश है। कालखंड से देश की प्राचीनता तिथि से तय नहीं किया जा सकता। यहां का सामाजिक जीवन भी भारत की ही तरह प्राचीन है। भारत का सामाजिक जीवन अत्यंत विविधतापूर्ण है तथा उसकी सामाजिक संस्थाएं सतत प्रवाहमान है। महाभारत में ऐसे समाज का चित्रण है जो अधिक मुक्त और स्पंदनशील है। मालवीय जी ने कहा ‘‘जन्म-जाति की उच्चता या नीचता के स्थान पर गुण एवं कर्म पर इसके आगे जाति-पाँति नहीं मानता।’’ २३ जनवरी, १९२७ से २६ जनवरी के बीच प्रयाग में त्रिवेणी तट पर अर्धकुम्भ के अवसर पर ‘अखिल भारतवर्षीय सनातन धर्म महासभा’ का अधिवेशन हुआ। चार दिन के इस कार्यक्रम के तीन दिनों की अध्यक्षता मालवीय जी की रही, परन्तु २५ जनवरी को महाराजा दरभंगा कामेश्वर सिंह बहादुर के सभापतित्व में विद्वतमंडली और प्रतिनिधियों द्वारा बड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किये गये ‘महासभा’ के इसी अधिवेशन के माध्यम से अछूतों को ‘मंत्र-दीक्षा’ देने का प्रस्ताव भी उन्होंने स्वीकृत कराया। तत्पश्चात सन १९२७ में महाशिवरात्रि के दिन काशी में दशाश्वमेध घाट पर उन्होंने सभी वर्णों के लोगों को मंत्र दीक्षा दी। ये मंत्र इस प्रकार थे- ‘ॐ नम: शिवाय’, ‘ॐ नमो नारायणाय’, ‘ॐ रामाय नम:’, ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ आदि।
Rs.450.00
| Weight | 0.450 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.7 × 5.5 × 1.5 in |
Author Vivekanand Tiwari
ISBN 9789392178146
Language Hindi
Publisher Luminous Books
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