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Dalmandi


“दालमंडी कहानी है सन्‌ 1940 से 1942 के आसपास के बनारस की ।

उस समय जब पूरे भारत में अंग्रेजों का प्रभाव चरम पर था, बनारस में भी अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी के दंश से मुक्ति की चाह प्रबल थी। बनारस में “”कोठी ‘ से लेकर ‘ कोठे ‘ तक सभी स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। पक्के महाल में रणभेरी का शंखनाद तो दालमंडी की गलियों में नगरवधुओं के पाँव के घुँघरुओं से क्रांति के स्वर गूँज उठे ।

जो कोठे बनारस घराने की सांस्कृतिक और सांगीतिक विरासत को संरक्षित कर रहे थे, वही क्रांतिकारी गतिविधियों को पनाहगाह बन गए। अपने वैभवशाली जीवन को दाँव पर लगाकर इन नगरवधुओं ने देश को आजादी में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनके इस अनछुए पक्ष को उकेरती है ‘ दालमंडी ‘।

बनारस के एक रईस, उनकी धर्मपत्नी और नगरवधू प्रेमिका के बीच प्रेम-त्रिकोण के इर्द-गिर्द बुनी इस कहानी में बनारस को उसकी भव्यता और गौरव के साथ दिखाने का प्रयास किया गया है। बनारस से जुड़ी कई किंवदंतियाँ इस कहानी का हिस्सा हैं। यह कहानी इतिहास के कुछ ऐसे पन्‍नों को पलटने के उद्देश्य से आपके समक्ष प्रस्तुत की जा रही है, जिन पर न ज्यादा कुछलिखा गया और न कहा गया।

आइए, ‘दालमंडी ‘ को आजादी के अमृत काल को समर्पित करते हुए हम उन सभी को नमन करें, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपना अमूल्य योगदान दिया।”

Rs.225.00 Rs.250.00

Author Ankita Khatri
ISBN 9789355621863
Language Hindi
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2024
Number of pages 136
Binding Style Soft Cover

Weight 0.450 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 1.54 in

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