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| Weight | 0.250 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.7 × 3.1 × 3.1 in |
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, सही आख्यान (True narrative)
Santon Mein Dhruv Tare
0 out of 5(0)अयोध्या-जहाँ चेतना, भक्ति और साधना का महासागर प्रवाहित होता है। यह मात्र एक नगर नहीं, बल्कि सनातन चेतना का एक ध्रुव केंद्र है। ऋषियों, मुनियों, योगियों और संतों के चरणों से पावन हुई इस भूमि की गुरुता अद्वितीय है। इसी पावन भूमि पर जनमे, तपे और विलीन हुए संतों की गाथाएँ कभी शब्दों से बँधी नहीं, फिर भी उनकी आभा अमिट रही।
‘संतों में ध्रुव तारे’ उन संतों की दिव्य उपस्थिति को रेखांकित करने का एक विनम्र प्रयास है, जिनकी साधना ने समय के प्रवाह में अयोध्या को आलोकित रखा। यह पुस्तक उन संतों के पदचिह्नों को खोजने का प्रयत्न है, जिन्होंने संसार में रहते हुए भी स्वयं को संसार से विलग रखा। वे पक्षियों की भाँति आए, अपने स्वर और साधना के मधुर झंकार बिखेरकर अंततः अंतरिक्ष में विलीन हो गए।
इस ग्रंथ में उन संतों की साधना, तपस्या और आध्यात्मिक आभा का समावेश है, जो न केवल अयोध्या, बल्कि समस्त भारतीय चेतना के शाश्वत दीपक बने। वे संत, जो युगों-युगों तक संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बनकर मानवता के मार्ग को प्रकाशित करते रहेंगे। यह पुस्तक मात्र जीवनियों का संकलन नहीं, बल्कि संत-तत्त्व का अनुभव है, जो पाठक को ध्यान, भक्ति और आत्मबोध की यात्रा पर ले जाता है।”
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, धार्मिक पात्र एवं उपन्यास
Rashtra Dharma Aur Sanskriti (PB)
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Hindi Books, Prabhat Prakashan, इतिहास, धार्मिक पात्र एवं उपन्यासRashtra Dharma Aur Sanskriti (PB)
0 out of 5(0)आचार्य वासुदेवशरण अग्रवालजी के समूचे चिंतन-लेखन की धुरी राष्ट्र का गौरव और मातृभूमि की महिमा है। वे राष्ट्रभक्त मनीषी थे।
वैष्णव स्वभाव और कर्मनिष्ठा के साथ अंतिम साँस तक वे अपनी अविचल राष्ट्र-भक्ति और अविरल ज्ञान-साधना में निमग्न रहे। वे भारत के मृण्मय स्वरूप पर अत्यंत मुग्ध थे; पर उसके चिन्मय स्वरूप को उद्घाटित करने का यत्न करने में ही उन्होंने अपने भौतिक जीवन को निःशेष कर दिया ।
चिन्मय भारत का विग्रह धर्मस्वरूप है। वैदिक ऋषियों ने जिस सनातन सृष्टि-तत्त्व को ऋत कहा था, वही धर्म है और धर्म ही संस्कृति है, जो नाना रूपों में अभिव्यक्त होती है और हमारे आचरण या कि चरित्र में परिलक्षित होती है। इस तरह भारत राष्ट्र का निर्माण धर्म और संस्कृति की भित्ति पर हुआ है।
इसीलिए इस संचयन का नाम ‘राष्ट्र, धर्म और संस्कृति’ रखा गया है। इसमें द्वीपांतर से लेकर ईरान और मध्य एशिया तक तथा आसेतुहिमाचल मृण्मय भारत और चिन्मय भारत से संबद्ध वासुदेवजी के निबंध संगृहीत हैं । चिन्मय भारत सहस्र – सहस्र वर्षों से प्रवाहित अजस्त्र धारा का सनातन प्रवाह है; यही इन निबंधों की टेक है; प्रतिपाद्य है ।
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Hindi Books, Rajkamal Prakashan, उपन्यास, सही आख्यान (True narrative)
Revolution Highway
0 out of 5(0)‘रिवोल्यूशन हाइवे’ बेचैन दशक के नाम से विख्यात, पिछली सदी के सातवें दशक की स्मृतियों के गम्भीर, विचारोत्तेजक और संवेदनशील मन्थन का आख्यान है। नक्सलबाड़ी का किसान-विद्रोह, उस विद्रोह में बुद्धिजीवियों, छात्रों की भागीदारी, बांग्लादेश का जन्म, वियतनाम युद्ध और विश्वव्यापी छात्र-असन्तोष इस आख्यान की पृष्ठभूमि में हैं।
नक्सलवादी आन्दोलन के उस दौर में लेखक की व्यक्तिगत संलग्नता जहाँ इस उपन्यास को सर्जनात्मक संस्मरण की विश्वसनीयता देती है, वहीं समूचे घटनाक्रम पर नैतिक पुनर्विचार का साहस ‘रिवोल्यूशन हाइवे’ को एक वैचारिक चुनौती के धरातल पर भी ले जाता है। यह कथा हिंसा-अहिंसा, इतिहास-राजनीति, सही-ग़लत, वर्तमान-भविष्य के यक्ष-प्रश्नों से जूझती बेचैन आत्माओं की कथा है।
‘रिवोल्यूशन हाइवे’ भीतर-बाहर के द्वन्द्वों में व्याप्त जीवनानुभव और मोहभंग पर विचार-पुनर्विचार के ज़रिए अर्जित होनेवाले विवेक की कथा है। प्रतिशोध से पगलाया, विवेक-मणि से वंचित अमरता का अभिशाप ढो रहा अश्वत्थामा इस आख्यान की मूल वेदना का रूपक है। उपन्यास एक तरह से अश्वत्थामा की आत्मा की शान्ति का अनुष्ठान भी है।
—पुरुषोत्तम अग्रवाल
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