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GANGA AVTARAN : RAHASYA EVAM PRAYOJAN


सनातन धर्म में नदियों को देवी का स्वरूप माना जाता है। धरती पर गंगा का अवतरण भागीरथ जी के प्रयास के द्वारा ही संभव हो सका। मां गंगा पापविमोचनी है, मंदाकिनी है, जाह्नवी है, कई नामों से इस धरती पर पुकारा जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को स्वर्ग में बहने वाली गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। गंगा के पृथ्वी पर अवतरित होने की कथा कई महाकाव्यों, पुराणों और अन्य हिंदू धर्म ग्रंथों में मिलती है। सबसे पहले गंगा के अवतरण की कथा वाल्मीकि रचित रामायण के बालकांड के सर्ग ३४ से सर्ग ४४ में मिलती है। आकाश से हिमालय पर उतरती हैं। सत्रह सौ मील धरती सींचती हुई सागर में विश्राम करने चली जाती हैं। वह कभी थकती नहीं, अटकती नहीं। वह तारती हैं, उबारती हैं और भलाई करती हैं। यही उनका काम है। वह इसमें सदा लगी रहती हैं।

Rs.750.00

प्रोफेसर विवेकानंद तिवारी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों के विद्वान हैं। तिवारी टोला, भभुआ, कैमूर (बिहार) में जन्मे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षित प्रो० तिवारी की १५० से ज्यादा पुस्तकें और २५०से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक संस्थाओं से प्रो. तिवारी को प्राप्त सम्मानो में ‘भारत-भारती सम्मान’, ‘मालवीय शिक्षा सम्मान’, ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’, ‘यू०पी० गौरव सम्मान’, ‘शारदा शताब्दी सम्मान’ एवं ‘महाशक्ति सम्मान’ विशेष उल्लेखनीय हैं। सम्प्रति आप अम्बेडकर पीठ (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) के अध्यक्ष है।

Weight 0.850 kg
Dimensions 8.7 × 5.5 × 1.5 in

Author Vivekanand Tiwari
ISBN 9788196189969
Language Hindi
Publisher Luminous Books

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