प्रोफेसर विवेकानंद तिवारी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों के विद्वान हैं। तिवारी टोला, भभुआ, कैमूर (बिहार) में जन्मे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षित प्रो० तिवारी की १५० से ज्यादा पुस्तकें और २५०से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक संस्थाओं से प्रो. तिवारी को प्राप्त सम्मानो में ‘भारत-भारती सम्मान’, ‘मालवीय शिक्षा सम्मान’, ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’, ‘यू०पी० गौरव सम्मान’, ‘शारदा शताब्दी सम्मान’ एवं ‘महाशक्ति सम्मान’ विशेष उल्लेखनीय हैं। सम्प्रति आप अम्बेडकर पीठ (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) के अध्यक्ष है।
Ganga Teerth
भारत में गंगा नदी को बहुत पवित्र के साथ उनको माता का दर्जा प्राप्त है। गंगा केवल जीवनदायिनी नहीं है, बल्कि वह सभी पापों को नष्ट करती है और मोक्ष की प्राप्ति करवाती है। जन्म से लेकर मृत्यु तक गंगा के जल का हर कार्य में प्रयोग किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से गंगा कामनाओं को पूर्ण करने वाली, पापों को हरने वाली, मंगलकरणी, सुख, समृद्धि, शांति देने वाली मानी गई है। भारतीय ऋषि-महर्षियों को गंगा के वैज्ञानिक महत्व एवं अद्भुत प्राकृतिक संरचना का ज्ञान था, इसी कारण गगीता व अन्य शास्त्र-पुराणों में गंगा भारतीय संस्कृति का प्राण बताया है। भारतीय जन मानस में गंगा को परब्रह्म, निर्विकार, निराकार, पापहारिणी और सत्-चित् आनंद का प्रतीक माना जाता है। वे जीवन पोषण की पूर्णता हैं तो पूर्णमुक्ति की संदेश वाहक तथा कारक भी।
Rs.750.00
| Weight | 0.850 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.7 × 5.5 × 1.5 in |
Author Vivekanand Tiwari
ISBN 9788196189969
Language Hindi
Publisher Luminous Books
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