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Garga Samhita (Set of 2 Volumes)


आज से अड़तालीस वर्ष पहले जब में गुरुदेव स्वर्गीय श्रीदामोदरलाल गोस्वामीजीके पास काव्य प्रकाश पढ़ता था तो एक दिन एक गुर्जरविद्वान् और परम वैष्णव श्रीलाड़िलीलालजी पधारे। सभी वेदों, पुराणों और छहों शास्त्रोंपर उनका अनोखा अधिकार था। गुरुदेव और उनमें जब धारावाहिक संस्कृतमें वार्तालाप होनेका क्रम चला तो मैं मंत्रमुग्ध होकर सुनने लगा । प्रसंग था श्रीमद्भागवतकी रासपंचाध्यायीका । धीरे-धीरे वे दोनों श्रीमद्भागन्दले श्रीगर्गसंहितापर उतर गये और उसके सरस प्रसंगोंपर ऊहापोह होने लगा। दोके दोनों जैसे अपने ज्ञानका खजाना खोलकर बैठ गये थे। जब कभी कोई संशयका प्रसंग आता तो गुरुदेव गोस्वामीजीके संकेतपर मैं सम्बद्ध ग्रन्थ उनकी इलमारीसे निकालकर दे देता था। विशेषता यह थी कि इतने जटिल प्रसंगपर दोनोंके परिसंवादमें तल्खी नाममात्रको भी नहीं दिख रही थी। कभी-कभी कोई रुचिकर बात आनेपर दोनों ठठाकर हँसते, परस्पर एक दूसरेको वाहवाही देते और पानकी गिलौरी जमाकर फिर अपने-अपने विषयकी व्युत्पत्तिपर डट जाते थे। यह क्रम लगभग तीन घंटे चला। उन ऋषितुल्य महानुभावोंका वह सरस और मृदुल संवाद मेरे जीवनका सम्बल बन गया

Rs.1,800.00

Publisher: Chaukhamba Sanskrit Pratishthan
Author: Maharishi Garga
Language: Sanskrit Text with Hindi Translation
Cover: HARDCOVER

Weight 2.700 kg
Dimensions 9.5 × 6.5 × 1.5 in

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