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Garv Se Kaho Hum Hindu Hain


:किताब के बारे में:

1000 वर्षों की ग़ुलामी के फलस्वरूप हिन्दू समाज में शक्ति विहीनता, लाचारी और विवशता का भाव आ जाना स्वाभाविक था। एक और भाव जो बहुत से हिन्दुओं के अंतर्मन में उत्पन्न हुआ वह था अपनी प्राचीन धर्म व संस्कृति के प्रति संदेह का भाव; यह भाव कि हम आततायियों का मुकाबला नहीं कर पाए कहीं इसका कारण हमारे अपने ही धर्म की हीनता तो नहीं? स्वतंत्रता के बाद धर्मनिरपेक्षता की आड़ में, हिन्दू धर्म या सनातन के वैभवशाली अतीत के विषय में बात करने को सांप्रदायिकता की संज्ञा दे दी गई। अपनी सभ्यता तथा संस्कृति की रक्षा करने के लिए सर्वप्रथम हमें इनके प्रति गर्व का भाव होना अनिवार्य है। यह पुस्तक एक आम हिन्दू को उसकी सनातन सभ्यता व संस्कृति की महान परंपरा के विषय में पुनःस्मरण कराने तथा सनातन सभ्यता/संस्कृति, हिन्दू धर्म, हिन्दुत्व, हिन्दू राष्ट्र इत्यादि विषयों पर व्याप्त भ्रमजाल तथा दुष्प्रचार को दूर करने का एक प्रयास है।

Rs.249.00

(Author) by Vijay Bhatnagar
ISBN 13 9798885752466
Book Language Hindi
Binding Paperback
Publishing Year 2025
Total Pages 124
Edition First

Weight 0.450 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 1.5 in

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