Author Vineet Agrawal
ISBN 9789355624512
Language Hindi
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2025
Number of pages 256
Binding Style Soft Cover
Hindu Sanatan Darshan
“धर्मनिर्पेक्षता की आधुनिक व्याख्या का अनुपालन करने के उत्साह में हमने अपने सभी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा संस्थानों में प्राचीन धर्मग्रंथों का अध्ययन वर्जित कर दिया।
स्वतंत्र भारत में अंग्रेजी के इतिहासकारों ने संस्कृत में लिखे प्राचीन धर्मग्रंथों को भारतीय सभ्यता के इतिहास के रूप में प्रस्तुत किया।
सभ्यता और धर्म के मध्य जो रिक्त स्थान रह गया, उसे भरने के लिए पुजारी समुदाय आगे आया और हिंदू कर्मकांडों को बल मिला।
वर्तमान में हिंदू धर्म तीर्थ करने, पूजा-पाठ करने, उत्सव मनाने तथा रामायण और महाभारत तक ही सीमित रह गया है; परंतु इस सबमें हिंदू धर्म का सार, जो मुख्यतः आध्यात्मिक ज्ञान पर आधारित था, कहीं लुप्त हो गया है।
यह पुस्तक उन सभी सिद्धांतों और अवधारणाओं को संकलित करने का प्रयास है, जो हिंदू धर्म को मूल रूप से परिभाषित करती है। इसमें मुख्य उपनिषदों पर चर्चा की गई है और विभिन्न हिंदू विचारधाराओं को संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए है, जो बौद्धिक और भावनात्मक रूप से परिपक्व हैं और पूर्वग्रहों से मुक्त हैं-फिर चाहे वे आस्तिक हों, नास्तिक हों या किसी अन्य धर्म से हों।”
Rs.425.00 Rs.500.00
| Weight | 0.450 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.7 × 5.7 × 1.5 in |
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