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Jadid Urdu Hindi Kosh (Lugat)


नव्वाबी काल में इन्शा अल्लाह खाँ ‘इन्शा’ ने अपनी पुस्तक ‘रानी केतकी की कहानी’ में यह प्रयास किया था कि कहानी की भाषा अति सरल हो, साथ ही अरबी-फ़ारसी शब्दों का प्रयोग भी न होने पाये। आज भी इस प्रकार की रचनाएँ दुष्कर नहीं, किन्तु वर्तमान सामाजिक परिवेश में, जहाँ अरबी, फ़ारसी, उर्दू, तुर्की आदि भाषाओं के अधिकाधिक शब्दों का आम जनजीवन पर अधिकाधिक प्रभाव है, इस शैली को आमतौर पर पसन्द नहीं किया जाता।
इस वर्ग में भाषाविज्ञानी, साहित्यकार अथवा विद्वत् समाज तो अल्पसंख्यक सा ही है जबकि बहुसंख्यक मध्यमवर्गीय पाठक है। उसे अति सरल एवं सुबोध भाषा की आवश्यकता है। आज की सरल एवं सुबोध हिन्दी वह है, जो घर चौबारे से लेकर होटल, रेस्टोरेंट, यात्रा, शैक्षिक कक्षाओं, कार्यालयों अथवा व्यक्ति के कुल दैनिक व्यवहार में प्रयुक्त हो रही है, और दिनोदिन इस प्रकार की भाषा का फैलाव ही होता जा रहा है, लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। हम इसे आज हिन्दी कह भले ही लें, वास्तव में है यह “हिन्दोस्तानी”। आजादी के बाद के ५० वर्षों में भाषाई आदान-प्रदान भी बहुत हुआ, विशेषकर दूरदर्शन ने इसमें अपना भरपूर योगदान दिया। इसप्रकार आज हम उस ‘हिन्दी’ को पूर्णतः अपना चुके हैं जिसमें अरबी-फ़ारसी, उर्दू, तुर्की आदि भाषाओं के अनगिनत कठिन एवं सरल शब्दों का समावेश हो चुका है। स्थिति तो यहाँ तक आ चुकी है कि किसी भी सार्वजनिक
विषय, विशेषकर इस्लामी सभ्यता, इतिहास तथा धर्म पर बिना अरबी-फ़ारसी शब्दों के कलम चलाना ही दुष्कर है। यही कारण है कि आज हिन्दी में अनगिनत पुस्तकों में इन अरबी-फ़ारसी, तुर्की अथवा उर्दू शब्दों की भरमार है।
संभवतः इस स्थिति का अनुमान कर विद्वानों ने “कोशों” के लेखन प्रकाशन पर बल दिया। सर्वप्रथम रामनगर (बनारस) के एक विद्वान् अबूमुम्मद इमामुद्दीन रामनगरी ने सन् १९४८ ई० में २४५ पृष्ठों का एक उर्दू-हिन्दी लुग़त तैयार किया। किन्तु यह बहुत संक्षिप्त रहा, दूसरे इस कोश में अरबी-फ़ारसी

Rs.800.00

Publisher: Bhuvan Vani Trust, Lucknow
Author: विनय कुमार अवस्थी (Vinay Kumar Awasthi)
Language: Sanskrit Text with Hindi Translation
Cover: Hardcover

Weight 1.350 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 6.7 in

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