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Kautiliya Arthashastra (PB)


कौटलीय अर्थशास्त्र, संस्कृत साहित्य में, अपने विषय का उच्चकोटि का ग्रन्थ है। सबसे प्रथम इस ग्रन्थ को सन् १९०९ ई० में, मैसूर राज्य की ग्रन्थशाला के अध्यक्ष श्रीयुत शामशास्त्री ने प्रकाशित कराया तथा अंग्रेज़ी पढ़े-लिखे लोगों के सुभीते के लिये उन्होंने इस ग्रन्थ को अंग्रेज़ी भाषा में अनुवाद भी कर दिया। उसी समय से इस दुरूह ग्रन्थ को समझने के लिये विद्वज्जन पर्याप्त परिश्रम कर रहे हैं । शामशास्त्री ने पहले-पहल इस ग्रन्थ का अंग्रेजी अनुवाद किया, इसलिये उनका प्रयत्न प्रशंसनीय है। परन्तु यह कहे बिना नहीं रहा जा सकता कि उस अनुवाद में अनेक स्थलों पर स्खलन हैं जिनका यहाँ उल्लेख करना अनावश्यक है। इस कार्य के अनन्तर इस विषय पर अनेक साप्ताहिक, मासिक पत्र-पत्रिकाओं में लम्बे-चौड़े विचारपूर्ण लेख समय-समय पर प्रकाशित होते रहे, परन्तु पुस्तक के रूप में कोई महत्त्वपूर्ण लेख प्रकाशित नहीं हुआ।

Rs.1,195.00

पुस्तक का नाम – कौटिल्य अर्थशास्त्र
लेखक – उदयवीर शास्त्री जी

आचार्य कौटिल्य के बारे में मुद्राराक्षस में आता हैं कि एक बार सिंकन्दर का दूत कौटिल्य के घर गया जो कि कच्चा, टूटा-फूटा सा था वहाँ पास में कुछ ब्रह्मचारी अध्ययन कर रहें थे तथा उसकी घास फूस की कुटियाँ पर कुछ यज्ञ की समिधाऐं सूख रही थी। जिनकें वजन से कुटियाँ की छत नीचें को झुकी थी। चाणक्य की इस स्थिति को देख दूत ने पूछा कि आप इतने बड़े देश के प्रधानमंत्री हो कर इस तरह कंगाल रहते हों? इस पर चाणक्य ने कहा कि जिस देश का प्रधानमंत्री कंगाल हो वो देश समृद्ध होता हैं और जिस देश का प्रधानमंत्री समृद्ध हो वो देश कंगाल होता हैं। आचार्य चाणक्य के इस वचन से स्पष्ट हैं कि वे देश और समाज हित में काफी विचार करते थे। उनके लिखे ग्रन्थ भी देश और समाज हित में ही हैं।

प्रस्तुत ग्रन्थ आचार्य कौटिल्य के “अर्थशास्त्र” का हिंदी अनुवाद हैं। इसमें पद्यानुक्रमणिका और चाणक्य प्रणीत सूत्र, पारिभाषिक शब्दावली सलग्न हैं।

इस अनुवाद की निम्न विशेषताए है –
–अन्य सभी संस्करणों से शुद्धतम हैं।
–भाषानुवाद की दृष्टि से अन्य कौटिल्य के अनुवाद से उत्तम हैं।
–अनुवाद और ग्रन्थ के कई शब्दों के अर्थ को खोलने में प्राचीन टीकाओं के आधार पर लिखी गयी “नयचन्द्रिका” की पर्याप्त सहायता ली गयी हैं।
–महत्वपूर्ण बातों को सटिप्पणी उद्धृत किया हैं।

यह ग्रन्थ सभी के लिए उपयोगी एवं लाभदायक हैं किन्तु अनुसन्धानकर्त्ताओं के लिए विशेष उपयोगी एवं लाभदायक सिद्ध होगा

Weight 0.900 kg
Dimensions 9.5 × 7.5 × 1.57 in

Author: Acharya Udayveer Shastri
ISBN: 9788193275627
Bound: Paper Back
Publisher: Meharchand Lachhmandas Publications
Language: Sanskrit text and Hindi translation
Pages: 795

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