Publisher: Bhuvan Vani Trust, Lucknow
Author: सन्त कृत्तिवास (Saint Krittivasa)
Language: Sanskrit Text with Hindi Translation
Cover: Hardcover
Krittivasa Ramayana
राम-कथा के संदर्भ में विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनेक रामायणों की रचना हुई है, जिनके सानुवाद देवनागरी लिप्यंतरण समय-समय पर भुवन वाणी ट्रस्ट, लखनऊ से प्रकाशित होते रहे हैं। भाषाई सेतुकरण के इस क्रम में विभिन्न भाषाओं के सद्ग्रंथों के साथ-साथ ट्रस्ट द्वारा वाल्मीकि रामायण, अद्भुत रामायण, मानस-भारती (संस्कृत), रंगनाथ रामायण (तेलुगु), कम्ब रामायण (तमिळ), कौशिक रामायण, तोरवे रामायण तथा अध्यात्म रामायण-उत्तर रामायण (कन्नड़), गिरधर रामायण (गुजराती), बैदेहीश बिलास, बिलंका रामायण, विचित्र रामायण तथा जगमोहन रामायण (ओड़िया), भानुभक्त रामायण (नेपाली), चन्द्रा रामायण (मैथिली) तथा श्रीराम विजय (मराठी) आदि के मूल एवं अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं।
इसी दिशा में बंगला भाषा की कृत्तिवास रामायण का हिन्दी रूपान्तरण प्रकाशित करने की भी योजना बनायी गई। ट्रस्ट के प्रतिष्ठाता पद्मश्री पं. नन्द कुमार अवस्थी ने स्वयं ही इसके अनुवाद एवं लिप्यंतरण का दायित्व संभाला। उनके अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप बंग-भाषा के इस महाकाव्य के पाँच काण्डों (आदि काण्ड, अयोध्या काण्ड, अरण्य काण्ड, किष्किन्धा काण्ड और सुंदर काण्ड) के सानुवाद लिप्यंतरण का प्रकाशन संभव हुआ, जिसे देश के कोने-कोने से अपेक्षित सराहना मिली। बाद में लंका काण्ड का भी नागरी लिप्यंतरण प्रकाशित किया गया।
उल्लेखनीय है कि गोस्वामी तुलसीदास के रामचरित मानस के रचनाकाल से लगभग सौ वर्ष पूर्व कृत्तिवास रामायण का आविर्भाव हुआ था। इसके रचयिता संत कृत्तिवास बंग-भाषा के आदिकवि माने जाते हैं। वह छंद, व्याकरण, ज्योतिष, धर्म और नीतिशास्त्र के प्रकाण्ड पण्डित थे और राम-नाम में उनकी परम आस्था थी।
सुधी पाठकों के आग्रह पर हम बंग-भाषा के इस महाकाव्य कृत्तिवास रामायण के सभी सात काण्डों का हिन्दी अनुवाद (एक साथ) इस ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। लंका काण्ड का अनुवाद श्री प्रबोध कुमार मजुमदार ने किया है जबकि उत्तर काण्ड के अनुवादक हैं श्री नवारुण वर्मा ।
Rs.800.00
| Weight | 1.20 kg |
|---|---|
| Dimensions | 9 × 5.7 × 1.5 in |
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