प्रोफेसर विवेकानंद तिवारी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों के विद्वान है। तिवारी टोला, भभुआ, कैमूर (बिहार) में जन्मे, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शिक्षित प्रो० तिवारी की १५० से ज्यादा पुस्तकें और २५० से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक संस्थाओं से प्रो. तिवारी को प्राप्त सम्मानो में ‘भारत-भारती सम्मान’, ‘मालवीय शिक्षा सम्मान’, ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’, ‘यू०पी० गौरव सम्मान’, ‘शारदा शताब्दी सम्मान’ एवं ‘महाशक्ति सम्मान’ विशेष उल्लेखनीय हैं। सम्प्रति आप अम्बेडकर पीठ (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला) के अध्यक्ष हैं।
विशेषः प्रो० तिवारी का २०२३ में एक साथ ६१ पुस्तकों का प्रकाशन जो कि एक विश्व कीर्तिमान है।
Kumbh Snaan Se Bimari Phailane Ka Dushprachaar
किसी खास जगह पर और किसी खास समय पर ही कुंभ लगने के पीछे एक पूरा विज्ञान है। आज आधुनिक विज्ञान ने बहुत से प्रयोग किए हैं जिससे पता चला है कि पानी की अपनी स्मृति यानी याद्दाश्त होती है। भारत में कुंभ मेला, यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त अमूर्त सांस्कृतिक विरासत है, जो पृथ्वी पर सबसे बड़े मानव समागमों में से एक है। चक्रीय रूप से होने वाला यह आध्यात्मिक संगम अपनी धार्मिक जड़ों एवं मान्यताओं से आगे बढ़कर विज्ञान और औषधीय स्वरुप है।
जैसे-जैसे हम इस कालातीत संगम की गहराई में उतरते हैं, तो पाते हैं कि इसकी प्रासंगिकता अनुष्ठानिक सीमाओं से कहीं आगे तक फैली हुई है, जो समकालीन दुनिया के लिए एक गहन चिंतन, मनन, मंथन और शोध आधारित अध्ययन का विषयवस्तु है। इस संगम की खगोलीय प्राचीनता और उसके धार्मिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर एक अद्वितीय वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करना आज समय की आवश्यकता है ताकि इस संगम की पीछे छुपे रहस्यों और खगोलीय वैज्ञानिता के पहलुओं को उजागर किया जा सके। पौराणिक मान्यताओं और यह संगम यह दर्शाता है कि किस प्रकार सौरमंडल के खगोलीय पिंड एक विशेष अवस्था में पहुंचकर जल और जीवन को प्रकृति एवं परमात्मा से जोड़कर सनातन संस्कृति में महा पर्व का रूप धारण कर लेते हैं।
Rs.495.00
| Weight | 0.450 kg |
|---|---|
| Dimensions | 8.7 × 5.5 × 1.5 in |
Author Vivekanand Tiwari
ISBN 9788119202249
Language Hindi
Publisher Luminous Books
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