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Lokmata Ahilyabai Holkar


लोकमाता अहिल्याबाई होलकर मालवा राज्य की होलकर रानी थीं। उन्हें भारत की सबसे दूरदर्शी महिला शासकों में से एक माना जाता है। 18वीं शताब्दी में, मालवा की महारानी के रूप में, उन्होंने धर्म के संदेश को फैलाने और औद्योगीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह 18वीं शताब्दी में हिन्दू आस्था के पुनरुद्वार और सुरक्षा के पीछे की महत्वपूर्ण शक्ति थी।
वह एक क्लासिक राजनीतिज्ञ थीं। उन्होंने अधिकांश मामलों को शांतिपूर्वक और सहजता से हल किया। उनमें प्रतिभा, गुण और ऊर्जा का संयोजन था। उनके प्रशासन का चरित्र 30 से अधिक वर्षों तक होलकर राजवंश की समृद्धि का आधार था। उनका मुख्य उद्देश्य न्यायपूर्ण और उदार शासन द्वारा देश की स्थिति में सुधार करना था, जबकि उन्होंने अपने विषयों की खुशी को बढ़ावा दिया।
उन्होंने महेश्वर में धार्मिक इमारतों पर काफी रकम खर्च की और होलकर साम्राज्य में कई मंदिर, धर्मशालाएँ और कुएँ बनवाए। यह उनके अपने क्षेत्र तक ही सीमित नहीं था, बल्कि पूर्व, पश्चिम, दक्षिण और उत्तर में हिंदू तीर्थस्थलों के सभी स्थानों तक फैला हुआ था, यानी पुरी, द्वारका, केदारनाथ और रामेश्वरम उसने पवित्र इमारतें बनवाई, गरीबों को भोजन देने के लिए प्रतिष्ठान बनाए और दान में वितरित करने के लिए सालाना रकम भेजी। वह मुख्य रूप से शैव तीर्थ स्थलों के पुनरुद्धार में लगी हुई थीं। उनकी दो सबसे प्रसिद्ध परियोजनाएँ सोमनाथ मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर थी।
वास्तव में, हिंदू तीर्थस्थलों के सभी प्रमुख स्थान अहिल्याबाई के ऋणी हैं: पुरी में जगन्नाथ मंदिर से लेकर गुजरात में द्वारका तक, उत्तर में केदारनाथ से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम तक, अहिल्याबाई ने इमारतें बनवाई और उनके रखरखाव में योगदान दिया।
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के महान योगदानों को देखते हुए उनकी 300वीं जन्म शताब्दी के उत्सव पर स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन केंद्र द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। प्रस्तुत पुस्तक उसी राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध पत्र का संकलन है।

अजय कुमार सिंह एम.ए., पीएचडी, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग। आप अकादमिक क्षेत्र में भारतीय सामाजिक विज्ञान
अनुसंधान परिषद, नयी दिल्ली से पोस्ट डॉक्टोरल फेलो एवं भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नयी दिल्ली से वरिष्ठ अध्येयता रहे है। डॉ. सिंह ने 55 से अधिक अनेकों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अकादमी सम्मेलनों में भागीदारी की है और इनके द्वारा 50 से अधिक शोधपत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित है।
आप इतिहास दर्पण, इंडियन जर्नल ऑफ हिस्टॉरिकल स्टडीज, राइटर्स व्यू और शोध सीमांकन जैसे शोध पत्रिकाओं के संपादक है। आप विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्य पुस्तक एवं संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा से संबंधित 17 पुस्तकों के लेखक है।
संप्रत्ति में आप दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज में इतिहास विभाग में सहायक प्राध्यापक एवं दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन केंद्र, स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज में समन्वयक हैं।

Rs.900.00 Rs.1,000.00

लोकमाता अहिल्याबाई होलकर
ISBN 13: 9789347555848
Author: Ajay Kumar Singh

Weight 0.480 kg
Dimensions 8.7 × 5.5 × 1.5 in

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