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Maharaja Ranjit Singh


“मुगल बादशाहों के पतन के पश्चात् सबसे अधिक शक्तिशाली शासक के रूप में प्रसिद्ध व चित्रात्मक आकृति महाराजा रणजीत सिंह के अलावा किसी अन्य की नहीं, जो कम समय के लिए लाहौर के अल्पकालिक सिख-राज्य के संस्थापक रहे। सदी के आरंभ के तूफानी दिनों में जातियों और पंथों के भयंकर तनावों के मध्य उन्होंने अपने बल, पराक्रम और साहस से अपना साम्राज्य बनाया। उन्होंने जाँबाज और साहसी लोगों को साथ लेकर एक उत्तम शासन व्यवस्था दी, परंतु महाराजा रणजीत सिंह दीर्घकाल तक शासन नहीं कर पाए।

सिख साम्राज्य के आकस्मिक उदय, इसकी सफलता की दीप्ति और पराभव की परिपूर्णता नेपोलियन के साम्राज्य के समान तीव्र रही। अपने समकालीन नेपोलियन बोनापार्ट की तरह लाहौर के महाराजा रणजीत सिंह क्षुद्र राज्यों, राजपूतों, मुसलमानों एवं सिखों के आक्रमण और बरबादी के कारण स्थायी राजवंश बनाने में असफल रहे।

यह पुस्तक एक दुर्जेय और पराक्रमी योद्धा, कूटनीतिज्ञ, प्रजावत्सल और दूरदर्शी शासक महाराजा रणजीत सिंह की प्रखरता ओजस्विता की यशोगाथा कहती है; साथ ही उनके साथ के सैन्य बलों की निरंकुशता, शासन की विफलता की करुणगाथा भी बताती है, जिसने इन तेजस्वी शासन की कीर्ति को मलिन कर दिया।”

Rs.270.00 Rs.300.00

Author Sir Lepel Griffin
ISBN 9789394871816
Language Hindi
Publisher Prabhat Prakashan
Edition 1st
Publication Year 2025
Number of pages 152
Binding Style Soft Cover

Weight 0.450 kg
Dimensions 8.7 × 5.7 × 1.5 in

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